पेरिस ओलंपिक: ईमान खलीफ़ के दो मुक्कों से कैसे रिंग से बाहर आ गई जेंडर 'फाइट'

    • Author, केटी फाकिंग्घम
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

पेरिस ओलंपिक में महिला बॉक्सिंग के एक मैच में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.

इटली की महिला बॉक्सर एजेंला करिनी ने खलीफ़ के ख़िलाफ़ रिंग में उतरने के 46 सेकेंड बाद ही मुक़ाबला छोड़ दिया.

मैच के बाद वो बोलीं, ''मुझे अपनी जान बचानी पड़ी.''

खलीफ़ पेरिस ओलंपिक की उन दो एथलीट्स में शामिल हैं जिन्हें पिछले साल निर्धारित मानदंडों पर खरा न उतरने के कारण वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं मिली थी.

लेकिन इस बार पेरिस ओलंपिक में इन दोनों खिलाड़ियों को अनुमति मिली है.

इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने कहा है कि वेल्टरवेट कैटेगरी में खेलने वालीं खलीफ़ को भारत में मुकाबले से इसलिए बाहर कर दिया गया था कि उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ा हुआ मिला.

इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी वर्ल्ड चैंपियनशिप की आयोजनकर्ता नहीं है.

ओलंपिक मुकाबले में पहले राउंड में बाई मिलने के बाद 25 वर्षीय खलीफ़ जब रिंग में उतरीं तो दर्शकों में मौजूद अल्जीरियाई फैन्स ने उनका तालियां बजाकर स्वागत किया.

उन 46 सेकेंड में क्या हुआ?

30 सेकेंड के भीतर ही खलीफ़ से चेहरे पर पंच खाने के बाद उनकी प्रतिद्वंद्वी करिनी अपना हेडगियर ठीक करने कोच के पास पहुंचीं.

दोबारा मुक़ाबला शुरू होने के चंद सेकेंड के भीतर ही वो अपने कॉर्नर में लौट गईं और लड़ने से इनकार कर दिया.

इसके बाद जैसे ही खलीफ़ को विजेता घोषित किया गया, करिनी ये कहते हुए सुनाई दीं- ''ये सही नहीं है.''

मुक़ाबले के बाद मीडिया की ओर रुख़ करते समय करिनी की आंखों में आंसू थे.

करिनी ने बीबीसी स्पोर्ट से कहा, '' मैं मैच पूरा नहीं कर पाई. मेरी नाक में तेज़ दर्द हुआ और मैंने अपने इस अनुभव के बाद ख़ुद से कहा कि मेरे पास जो अनुभव और महिला के रूप में जो परिपक्वता है, उसमें मेरा देश इसका बुरा नहीं मानेगा. मेरे पिता भी बुरा नहीं मानेंगे. लेकिन मैं रुक गई. मैंने ख़ुद से रुकने को कहा.''

उन्होंने कहा, ''ये मेरी पूरी ज़िंदगी के लिए यादगार मैच हो सकता था लेकिन उस वक़्त अपनी जान भी बचानी थी.''

करिनी बोलीं, ''मुझे डर नहीं लगा. रिंग में मैं बिल्कुल नहीं डरी. मुझे मुक्के खाने के दौरान भी डर नहीं लगा. लेकिन इस बार सब कुछ ख़त्म होना था. मैंने मैच ख़त्म कर दिया क्योंकि आगे लड़ नहीं पा रही थी.''

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इतालवी मीडिया से कहा, ''बराबरी के आधार पर मुक़ाबले का कोई मतलब होता है. मेरे हिसाब से इसमें बराबरी के आधार की कोई बात नहीं थी.''

केरिन ने पत्रकारों से कहा, ''अच्छा होता वो आख़िर तक लड़तीं और तब वो ख़ुश होतीं. मैं किसी को जज नहीं करती. मैं यहां जजमेंट देने नहीं आई हूं.''

अपने पूरे करियर में खलीफ़ ने 50 मुक़ाबले खेले हैं और वो सिर्फ़ नौ बार हारी हैं.

खलीफ़ ने बीबीसी स्पोर्ट से कहा, '' मैं यहां गोल्ड के लिए आई हूं. मैं हर किसी से लड़ती हूं.''

इस मुक़ाबले से एक दिन पहले अल्जीरिया की ओलंपिक कमेटी ने खलीफ़ के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद करार दिया था.

कौन हैं ईमान खलीफ़

25 साल की बॉक्सर ईमान खलीफ़ अल्जीरिया की तियारेत की रहने वाली हैं.

यूनिसेफ़ की ब्रांड अंबेसडर खलीफ़ अब तक 50 मुक़ाबले खेल चुकी हैं सिर्फ नौ हारी हैं.

खलीफ़ के पिता पहले उनकी मुक्केबाज़ी के ख़िलाफ़ थे, क्योंकि वो महिलाओं के बॉक्सिंग में उतरने के ख़िलाफ़ थे.

खलीफ़ ने 2018 में वर्ल्ड चैंपियनशिप से शुरुआत की थी, लेकिन वो यहाँ 17वें स्थान पर रही थीं. 2019 में वो नौवें नंबर पर रही थीं.

2019 में वो 19वें स्थान पर रही थीं. 2021 में टोक्यो ओलंपिक में वो आयरलैंड की केली हेरिंगटन से क्वार्टर फ़ाइनल में हार गई थीं.

महिलाओं की वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में वो एमी ब्रॉडथ्रस्ट से हारकर दूसरे स्थान पर रही थीं.

2022 के अफ्रीकन चैंपियनशिप, मेडिटेरेनियन गेम्स और 2023 के अरब गेम्स में वो गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं.

नई दिल्ली में क्या हुआ था जब खलीफ़ को हटाया गया था

नई दिल्ली में आयोजित चैंपियनशिप में इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन के प्रेसिडेंट उमर क्रेमलेव ने कहा था,’ ''डीएनए टेस्ट के आधार पर हमने पाया कि चैंपियशिप में हिस्सा ले रही कई बॉक्सरों ने चालाकी से ख़ुद को महिला के तौर पर पेश करने की कोशिश की. लेकिन टेस्ट के बाद पाया कि उनमें एक्स और वाई क्रोमोजोम थे. ऐसे एथलीट प्रतियोगिता से बाहर किए जाते हैं.''

हालांकि अल्जीरियाई ओलंपिक कमेटी ने इस फ़ैसले पर कहा था कि खलीफ़ को ‘मेडिकल वजहों’ से हटाया गया.

हालांकि अल्जीरिया का मीडिया मान रहा था कि खलीफ़ को उनके हाई टेस्टोस्टेरोन की वजह से हटाया गय.

इस फ़ैसले से नाख़ुश खलीफ़ ने कहा था, ''कुछ देश नहीं चाहते कि अल्जीरिया गोल्ड मेडल जीते. ये साज़िश है और बड़ी साज़िश है. हम इस पर चुप नहीं रहेंगे.''

इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी का जवाब

2023 में भारत में हुई महिलाओं की वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में खलीफ़ के जेंडर का मामला सामने आया था.

ऐसे ही एक मामले में पिछले साल की वर्ल्ड चैंपियनशिप में ताइवान की लिन यु-थिंग से उनका कांस्य पदक ले लिया गया था.

वो जेंडर एलिजिबिलेटी टेस्ट में नाकाम में रही थीं. लेकिन शुक्रवार को वो पेरिस ओलंपिक के मुक़ाबले में उतरी थीं.

इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने कहा कि सभी बॉक्सर प्रतियोगिता में हिस्सा लेने और इसमें प्रवेश के लिए योग्यता पूरी करते हैं.

कमेटी के प्रवक्ता मार्क एडम्स ने कहा, ''ये एथलीट पहले कई बार कई प्रतियोगिताओं में खेल चुके हैं. वे अचानक से यहाँ नहीं आए हैं. वो टोक्यो में भी खुल चुके हैं.''

2023 में जिस वर्ल्ड चैंपियनशिप में खलीफ़ और लिन को बाहर कर दिया गया था, उसे इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन ने आयोजित किया था.

लेकिन इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने पिछले जून में रूस की अगुआई वाले इस संगठन की वर्ल्ड गवर्निंग बॉडी के तौर पर इसकी सदस्यता खत्म कर दी थी.

टोक्यो और पेरिस ओलंपिक में बॉक्सिंग का आयोजन इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ही करा रही है.

इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन की जांच में क्या हुआ था?

इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन ने बुधवार को कहा कि लिन और खलीफ़ को वर्ल्ड चैंपियनशिप से हटा दिया गया था ताकि प्रतियोगिता की पारदर्शिता का स्तर और विश्वसनीयता बनी रहे लेकिन टेस्टोस्टेरोन का टेस्ट नहीं लिया.

लेकिन उनके लिए अलग-अलग मान्यता प्राप्त परीक्षण कराए गए. इसमें ख़ास जानकारियां गुप्त रखी जाती हैं.

इस टेस्ट में ये बताया गया था कि लिन और खलीफ़ प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के निर्धारित मानदंड पूरा नहीं कर पाई थीं. वो दूसरी महिला प्रतिद्वंद्वियों के ख़िलाफ़ मज़बूत स्थिति में थीं.

हालांकि बीबीसी अब तक ये पता नहीं कर पाया है कि इस टेस्ट में किस चीज़ का परीक्षण होता है.

लिन और खलीफ़ का टेस्ट पहले 2022 में इंस्ताबुल में हुए वर्ल्ड चैंपियनशिप में हुआ था और फिर 2023 में ही हुआ था.

इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन ने कहा कि लिन ने इसके ख़िलाफ़ अपील की थी, लेकिन खलीफ़ ने पहले अपील की थी लेकिन बाद में वापस ले ले थी.

आईबीए के सीईओ क्रिस रॉबर्ट्स ने कहा, '' हमारी मेडिकल कमेटी ने जो चिंताएं जताई थीं उन्हीं के मद्देनज़र ये फ़ैसला किया गया था.''

उन्होंने कहा, ''हमने वही फ़ैसला किया, जो हमारे बॉक्सिंग परिवार के लिए सही और उचित था. हमने पाया कि वो महिलाओं के तौर पर इसमें हिस्सा लेने के लिए योग्य नहीं थे.''

उनसे पूछा गया कि क्या ये 'सेक्स टेस्ट' के बराबर है? इस पर उन्होंने कहा, '' हां प्रभावी तौर पर ऐसा ही है.''

अगर निर्धारित योग्यता और परीक्षण के ख़िलाफ़ कोई एक बॉक्सर दूसरे की तुलना में ज़्यादा वजन और ताक़तवर है, तो माना जाएगा कि वो प्रतियोगिता में महिला कैटेगरी में लड़ने की योग्यता नहीं रखता.

मंगलवार को इंटरनेशल ओलंपिक कमेटी के प्रवक्ता मार्क एडम्स ने कहा, '' ये एथलीट कई साल पहले भी लड़ चुके हैं. ये अचानक यहाँ ओलंपिक नहीं आ गए.''

फैसले की आलोचना

आईओसी ने इंटरनेशल बॉक्सिंग एसोसिएशन के मनमाने फ़ैसले की आलोचना की है.

गुरुवार को जारी किए गए नए बयान में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ की बॉक्सिंग इकाई ने आईबीए की आलोचना की है और कहा है कि खलीफ़ और लिन आईबीए के जल्दबाज़ी में लिए गए और मनमाने फ़ैसले का शिकार हुई हैं.

आईओसी ने कहा है कि 2023 में वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान खलीफ़ और लिन को बिना किसी विशेष प्रक्रिया के बाहर कर दिया गया था.

इन दोनों खिलाड़ियों के लिए जो आक्रोश दिख रहा है वो अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग संघ के मनमाने फ़ैसले का नतीजा है. जो बिना किसी उचित प्रक्रिया के लिया गया था.

इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह खिलाड़ी कई सालों से बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं.

ये बॉक्सिंग में गुड गवर्नेंस के ख़िलाफ़ है.

'बॉक्सिंग के लिए बहुत ही ख़राब'

बीबीसी रेडियो फ़ाइव के बॉक्सिंग विश्लेषक स्टीव बन्स ने कहा कि यह बॉक्सिंग के लिए बहुत ही ख़राब है.

उन्होंने कहा, "यह तब हो रहा है, जब ओलंपिक में बॉक्सिंग के भविष्य को लेकर बातें हो रही हैं. मुझे लगता है इससे ओलंपिक में बॉक्सिंग को धक्का लगा है."

इस मैच में दिलचस्प बात यह है कि खलीफ़ के कुछ पुराने प्रतिद्वंदी, यूरोपीय चैंपियनों और विश्व चैंपियनों का कहना है कि खलीफ़ धोखेबाज़ नहीं हैं.

करिनी ने कहा, ''मुझे खलीफ़ के लिए बुरा लग रहा है और आपको भी उनके लिए बुरा लगना चाहिए. वह कुछ चीज़ों के बीच में फंस गई हैं. यह भयावह है और अभी यह ख़त्म नहीं हुआ है.''

खलीफ़ का अगला मुक़ाबला हंगरी की मुक्केबाज़ अन्ना लुका हमोरी से शनिवार को होगा. अगर खलीफ़ वह मैच जीत जाती हैं, तो उनका पेरिस ओलंपिक में पदक पक्का हो जाएगा.

हमोरी ने बीबीसी स्पोर्टस से कहा कि चाहे जो भी हो जाए पर उनकी मानसिकता हार मानने वाली नहीं है. करिनी के मैच बीच में छोड़ने पर उन्होंने कहा कि यह उनकी मर्ज़ी है.

उन्होंने कहा, ''मैं वादा कर सकती हूं कि मैं अंत तक लड़ूंगी, उसके बाद चाहे जो भी हो. मैं नहीं जानती हूं कि सच क्या है, सच कहूं तो मुझे फ़र्क नहीं पड़ता है. मैं बस जीतना चाहती हूं.''

इस मामले में लोग क्या कह रहे हैं

हैरी पॉटर सिरीज की लेखिका जेके रॉलिंग ने खलीफ़ मामले पर टिप्पणी की है.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''क्या कोई तस्वीर हमारे नए पुरुष आंदोलन को इतने बेहतर ढंग से पेश कर सकती है. एक पुरुष की बनावटी हंसी जो जानता है कि उसे एक मर्दवादी खेल प्रतिष्ठान का संरक्षण मिला हुआ है. वो उस महिला के सिर पर मुक्का मार कर इसका आनंद ले रहा है. उस महिला के दर्द का आनंद ले रहा है जिसकी आकांक्षा को उसने धूल में मिला दिया है.''

हालांकि कई हलकों में उनके इस बयान की आलोचना भी हो रही है.

भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने खलीफ़ विवाद पर लिखा, '' मेरे विचार से ये अनुचित है. ओलंपिक में इस घटना/मैच का रिव्यू होना चाहिए.''

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