वियतनाम के साथ भारत का ये समझौता, चीन पर निशाना?

    • Author, शुभम किशोर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

शनिवार को भारत ने आईएनएस कृपाण युद्धपोत को नेवी से डिकमिशन कर वियतनाम की सेना को दे दिया.

इतिहास में ये पहली बार है कि भारत ने मिसाइलों से लैस युद्धपोत किसी दूसरे देश को दिया हो.

वियतनाम के कैम रान्ह में एक समारोह में हस्तान्तरण की प्रक्रिया को नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार की अगुआई में पूरा किया गया.

जानकार इसे दिल्ली और वियतनाम के बीच साझेदारी बेहतर होने का सबूत बता रहे हैं.

कार्यक्रम के दौरान भारत और वियतनाम के बीच सामरिक साझेदारी की अहमियत पर बात करते हुए, नेवी चीफ़ एडमिरल आर हरि कुमार ने कहा कि ये क्षण ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि पहली बार एक पूरी तरह ऑपरेशनल जंगी जहाज किसी मित्र देश को दिया गया है.

उन्होंने कहा, "भारतीय नौसेना के सबसे बेहतरीन और सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले युद्धपोतों में से एक कृपाण को सम्मानित वियतनाम पीपुल्स नेवी को सौंपने के समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है."

आईएनएस कृपाण की क्या है ख़ासियत?

आईएनएस कृपाण भारत में बना युद्धपोत है जिससे मिसाइलें दागी जा सकती हैं.

इसे 1991 में नौसेना में शामिल किया गया था और नौसेना की ईस्टर्न फ़्लीट का ये एक अहम हिस्सा रहा है.

32 साल की सेवा के बाद इसे डिकमिशन किया गया और वियतनामी सेना को हथियारों के साथ दिया गया है.

इसमें 12 अधिकारी समेत100 नौसैनिक काम करते थे. ये करीब 90 मीटर लंबा और 10.45 मीटर चौड़ा है. सभी चीज़ों से लैस होने पर इसका वज़न 1450 टन हो जाता है.

इस कदम को चीन से जोड़ना कितना सही

आईएनएस कृपाण को वियतनाम को दिए जाने को जानकार चीन से उसके संबंधों को जोड़कर देख रहे हैं.

जेएनयू में प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, "चीन और वियतनाम के बीच अपनी भूमि और समुद्री सीमा, दोनों को लेकर विवाद रह चुका है. समुद्री सीमा अभी भी विवादित है."

उनका कहना है कि वियतनाम को भारत के साथ रक्षा सहयोग से लगातार फ़ायदा होता रहा है.

वो कहते हैं, "यह भारत की एक्ट ईस्ट नीति के साथ-साथ क्वाड प्लस देशों के साथ संबंध बेहतर करने की भारत की कोशिश का भी हिस्सा है जिसमें न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया और वियतनाम शामिल हैं."

" भारत और वियतनाम दोनों के अपने पड़ोसी देश चीन के साथ जटिल समीकरण हैं और सैन्य साझेदारी को चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी संप्रभुता के दावों के ख़िलाफ उठाया कदम मानता है."

विदेश मामलों के जानकार रॉबिन्दर सचदेवा का भी मानना है, "युद्धपोत देना दोनों देशों के बीच रिश्तों में एक बड़ा कदम है क्योंकि चीन से दोनों देशों के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं है. दक्षिण चीन सागर में दोनों देशों का हित जुड़ा है, इसलिए इसे चीन से जोड़कर देखना गलत नहीं होगा."

हालांकि भारत ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि भारत-वियतनाम रक्षा सहयोग भारत की एक्ट ईस्ट नीति का हिस्सा है और इसका भारत की चीन नीति से कोई लेना-देना नहीं है.

पिछले कुछ सालों में बेहतर हुए हैं संबंध

वियतनाम आसियान (दक्षिणपूर्व एशियाई देशों का संघ) का एक महत्वपूर्ण सदस्य देश है और दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में चीन के साथ इसके विवाद रहे हैं.

भारत दक्षिण चीन सागर में वियतनामी जलक्षेत्र में तेल खोजने की परियोजनाएं चला रहा है.

भारत और वियतनाम पिछले कुछ वर्षों में साझा हितों की रक्षा के लिए अपने समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ा रहे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, जुलाई 2007 में वियतनाम के तत्कालीन प्रधानमंत्री गुयेन टैन डंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच संबंध 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ गए थे.

2016 में, प्रधानमंत्री मोदी की वियतनाम यात्रा के दौरान, द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' तक बढ़ाया गया था.

वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक विजन में एक महत्वपूर्ण भागीदार बन गया है.

और सिर्फ़ भारत ही नहीं दूसरे देश भी वियतनाम के साथ संबंध बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

विदेश मामलों के जानकार रॉबिन्दर सचदेव कहते हैं, "यहां तक कि अमेरिका जिसके साथ वियतनाम के रिश्ते ख़राब हो गए थे, वो भी इस देश के क़रीब आने की कोशिश कर रहा है."

भारत ने पहले भी की है सैन्य मदद

पिछले साल जून में वियतनाम की यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हनोई में अपने समकक्ष जनरल फान वान गियांग से मुलाकात की थी.

यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए जिनमें वियतनाम को दी गई 50 करोड़ डॉलर की रक्षा ऋण सुविधा को अंतिम रूप देना भी शामिल है.

दोनों देशों ने 2030 तक के लिए भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी पर एक संयुक्त लॉजिस्टिक सपोर्ट पर हस्ताक्षर किए थे और उनके बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए संयुक्त रक्षा सहयोग पर एक समझौता किया था.

भारत ने तब वियतनाम को 12 हाई-स्पीड गार्ड नौकाएं भी सौंपी थीं.

इसके अलावा रक्षा मंत्री ने ऑफ़िसर ट्रेनिंग स्कूल में भाषा और आईटी लैब की स्थापना के लिए दो सिमुलेटर और आर्थिक मदद भी की थी.

वहीं बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म के प्रभाव की बात करें तो वियतनाम प्राचीन काल से ही ऐतिहासिक और सभ्यता के तौर पर भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़ा रहा है.

स्वर्ण सिंह के मुताबिक दोनों देशों के स्वतंत्रता सेनानियों के बीच मजबूत तालमेल रहा है जो कि गांधीजी, नेहरू और हो ची मिन्ह के बीच पत्रों के आदान-प्रदान में देखा गया है.

दूसरे मोर्चों पर भी बेहतर हुए हैं रिश्ते

रॉबिंदर सचदेव कहते हैं कि वियतनाम भी दूसरे देशों के करीब आने की कोशिश कर रहा है ताकि चीन पर उसकी आर्थिक निर्भरता कम हो.

वो कहते हैं, "कई कंपनियां जो चीन के बाहर भी अपनी फ़ैक्ट्रियां लगाना चाहती हैं, वियतनाम उनके लिए एक बड़ा केंद्र साबित हो रहा है, और वियतनाम की अर्थव्यवस्था के लिए ये बहुत फ़ायदेमंद है."

वहीं व्यापार ख़ासतौर पर टूरिज़्म के लिहाज से भी वियतनाम और भारत के रिश्ते पिछले कुछ समय में काफ़ी बेहतर हुए हैं.

पिछले साल भारत में वियतनाम के राजदूत फाम सान्ह चाऊ ने एक कार्यक्रम में लोगों को बताया था कि वियतनाम द्वारा भारतीयों को जारी किए जाने वाले वीजा में 24 गुना वृद्धि हुई है.

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