लॉस एंजेलिस में हिंसा और आगजनी, नेशनल गार्ड्स को उतारकर ट्रंप ने क्या संदेश दिया है?

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- Author, एंथनी ज़र्चर
- पदनाम, उत्तर अमेरिकी संवाददाता
पिछले साल अपने चुनाव प्रचार के डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वो अमेरिकी सड़कों पर वामपंथी कार्यकर्ताओं की अराजकता को बर्दाश्त नहीं करेंगे.
इसके ख़िलाफ़ वो राष्ट्रपति की शक्तियों का पूरा इस्तेमाल करेंगे.
शनिवार को जब कैलिफ़ोर्निया में इमिग्रेशन और सीमा शुल्क प्रवर्तन के क़दमों के ख़िलाफ़ लोग विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरे तो उन्हें अपनी इस चेतावनी पर अमल का मौक़ा मिला.
हालांकि लॉस एंजेलिस पुलिस ने कहा था कि विरोध प्रदर्शन काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे.
या फिर स्थानीय अधिकारियों ने कहा था कि वो हिंसक हो गई झड़पों को काबू करने में कामयाब रहे.
ट्रंप सरकार के अधिकारियों का कहना था कि इमिग्रेशन एजेंटों को निशाना बनाया जा रहा था. उन्हें घायल किया जा रहा था जबकि स्थानीय स्तर पर पर क़ानून-व्यवस्था संभालने वालों की प्रतिक्रिया बेहद धीमी थी.
आंतरिक सुरक्षा मंत्री क्रिस्टी नोएम ने रविवार की सुबह सीबीएस न्यूज़ को बताया, ''लॉस एंजेलिस पुलिस के लिए घंटोंं इंतज़ार करना पड़ रहा था. उनका कहना था कि वो तभी हमारी मदद के लिए आएंगे जब कोई अधिकारी ख़तरे में फंस गया हो. जब हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हों तो ऐसा रवैया कारगर नहीं होता.''
जबकि लॉस एजेंलिस पुलिस ने कहा, ''हालात के मुताबिक़, जितनी जल्दी संभव हुआ कार्रवाई की गई. पुलिस को सूचना मिलने के 55 मिनट के अंदर भीड़ को तितर-बितर करने का काम शुरू कर दिया गया.''
ट्रंप किस परंपरा को तोड़ रहे हैं?

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ट्रंप ने गवर्नर गेविन न्यूजॉम की आपत्तियों के बावजूद कैलिफ़ोर्निया नेशनल गार्ड्स के 200 सैनिकों को शांति बहाल करने में लगा दिया. वहीं रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि तैनाती के लिए यूएस मरीन को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है.
अमेरिका की धरती पर ड्यूटी पर तैनात नौसैनिकों का इस्तेमाल एक दुर्लभ उदाहरण होगा.
रविवार की सुबह तक ट्रंप ने अपनी जीत का एलान शुरू कर दिया था और शांति बहाल करने के लिए नेशनल गार्ड्स का शुक्रिया कह रहे थे. हालांकि नेशनल गार्ड्स के सुरक्षाकर्मी अभी पूरी तरह से आए भी नहीं थे.
इस विरोध प्रदर्शन को काबू करने के लिए ट्रंप ने जिस तेज़ी से कदम उठाए उससे ऐसा लगता है कि प्रशासन इसके लिए पूरी तरह तैयार था. उसने पहले ही सोच रखा था कि ऐसे हालात पैदा होते हैं तो वो पूरी तरह तैयार रहेगा.
व्हाइट हाउस का मानना है कि क़ानून-व्यवस्था और आक्रामक ढंग से प्रवर्तन नियमों को लागू करना उसकी जीत है.
'ऐसे मामलों से अलग तरह से निपटेंगे'

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ट्रंप ने जो कार्रवाई की है वो उनके समर्थकों को रोमांचित करेगी. साथ ही ये लोगों की सुरक्षा के प्रति चिंतित रहने वाले स्वतंत्र राजनीतिक सोच के लोगों को भी उनकी ओर आकर्षित कर सकती है.
नोएम ने अपने इंटरव्यू में कहा कि 2020 में मिनेसोटा 'ब्लैक लाइव्स मैटर्स' आंदोलन के दौरान जो विरोध प्रदर्शन हुआ था उसे बगैर किसी रोक-टोक के फैलने दिया गया, लेकिन नया ट्रंप प्रशासन ऐसे मामलों से अलग तरह से निपटने जा रहा है.
उन्होंने कहा, "हम 2020 को दोहराने की इज़ाजत नहीं देंगे.''

हालांकि, डेमोक्रेट्स ने कहा है कि प्रशासन का रेस्तरां और दुकानों में नकाबपोश और सैन्य वर्दी में सुरक्षाकर्मियों को भेजकर नागरिकों को गिरफ़्तार करना भड़काऊ कदम था. राष्ट्रपति प्रशिक्षित सैनिकों को तैनात करने के लिए जिस तरह से उत्साह दिखा रहे थे उसकी कोई ज़रूरत नहीं थी.
न्यू जर्सी के सीनेटर कोरी बुकर ने कहा, "जब इस तरह की तैनाती की मांग नहीं की गई थी तो ऐसा करना न सिर्फ़ पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को तोड़ना है बल्कि ये माहौल को और भड़काना और इसे बदतर बनाने वाला कदम है.''
उन्होंने कहा, ''इनमें से कई सारे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन तो इसलिए हो रहे हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति उन लोगों को गिरफ़्तार करके अराजकता और भ्रम पैदा कर रहे हैं जो अपनी आव्रजन की सुनवाई के लिए आ रहे हैं. ऐसा करके ये लोग कानून का पालन करने की ही कोशिश कर रहे हैं.''
अमेरिका में गर्मियों में विरोध प्रदर्शन की एक लंबी परंपरा है, और अभी जून की शुरुआत ही हुई है.
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पांच महीने बाद कैलिफ़ोर्निया में हुआ ये प्रदर्शन एक अलग-थलग मामला हो सकता या फिर आने वाले दिनों के संभावित बड़े नागरिक आंदोलनों की शुरुआत है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















