अब पीएफ़ खाते से निकाल सकेंगे 'पूरा पैसा', ईपीएफ़ओ ने नियमों में ये बदलाव किए

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफ़ओ ने प्रॉविडेंट फंड (पीएफ़) खाते से पैसा निकालने के नियमों को लचीला बनाया है.

ईपीएफ़ओ के अभी 7 करोड़ से ज़्यादा सदस्य हैं. नियमों से इस बदलाव से ज़रूरत के समय ये पीएफ़ खाताधारक इस नियम का फ़ायदा उठा सकते हैं.

श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में ईपीएफ़ओ से जुड़े फ़ैसले लेने वाले सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टी

(सीबीटी) ने कई अहम निर्णय लिए.

इसके तहत अब ईपीएफ़ओ के सदस्य प्रॉविडेंट फंड से पूरी रकम निकाल सकते हैं, हालाँकि इसमें मिनिमम बैलेंस की शर्त बरकरार रखी गई है.

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़, सीबीटी ने पीएफ़ खाते से पैसे निकालने के 13 अलग-अलग प्रावधानों को मिलाकर, इसे तीन वर्गों में बांट दिया है.

इनमें आवश्यक ज़रूरतें (बीमारी, शिक्षा, विवाह), घर संबंधी ज़रूरतें और विशेष परिस्थितियां शामिल हैं.

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नए नियमों के मुताबिक़ ईपीएफ़ओ के सदस्य अब अपने भविष्य निधि खाते में जमा राशि का 100 फ़ीसदी तक निकाल सकेंगे, जिसमें कर्मचारी और एम्प्लॉयर दोनों का हिस्सा शामिल होगा.

हालांकि पैसे निकालने में 25 फ़ीसदी न्यूनतम बैलेंस रखना ज़रूरी होगा. यानी अगर आपके खाते में 4 लाख रुपये हैं तो आप अपने खाते में 1 लाख रुपये छोड़कर बाक़ी पूरी रकम निकाल सकते हैं.

इसके पीछे मक़सद यह है कि कर्मचारी अपनी जमा रकम पर 8.25 फ़ीसदी की दर से चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ ले सके. बची हुई इस रकम का इस्तेमाल भविष्य या रिटायरमेंट के बाद की ज़रूरतों के लिए हो सकता है.

ईपीएफ़ 3.0 के तहत अपने खाते से पैसे निकालने की सीमा को भी लचीला बना दिया गया है.

किसी भी वजह से पैसे निकालने की न्यूनतम सेवा सीमा को घटाकर 12 महीने कर दिया गया है.

यानी अब अब चाहे किसी भी वजह से अपने पीएफ़ खाते से पैसे निकालना चाह रहे हों, इसके लिए आपकी नौकरी या पीएफ खाते का एक साल पुराना होना ही ज़रूरी है.

जैसा कि इसके नाम से ज़ाहिर है 'कर्मचारी भविष्य निधि' कमर्चारियों के भविष्य की बड़ी जरूरतों के लिए मानी जाती है.

यानी एसे इवेंट को किसी की ज़िंदगी के लिए बहुत बड़े माने जाते हैं, उन ज़रूरतों के लिए ईपीएफ़ से पैसे निकाले जाते हैं.

इनमें शादी, बच्चों की पढ़ाई, घर ख़रीदना या किसी किसी बीमारी के इलाज के लिए पैसों की ज़रूरत शामिल है.

कर्मचारी अब पढ़ाई के लिए 10 बार तक और शादी के लिए पांच बार तक पैसे निकाल सकते हैं.

इससे पहले पढ़ाई और शादी के लिए कुल मिलाकर तीन बार पैसे निकालने की अनुमति थी. यानी अब ईपीएफ़ खाताधारक अपनी ज़रूरत के हिसाब से ज़्यादा मौक़ों पर अपनी जमा रकम निकाल सकते हैं.

अब इस निकासी को पूरी तरह डिजिटल भी कर दिया गया है, यानी आपको अपनी जमा रकम की आंशिक निकासी के लिए किसी भी तरह के दस्तावेज़ जमा करने की ज़रूरत नहीं होगी.

यह दावा किया गया है कि इस तरह के प्रावधान से दावों का निपटान आसान हो जाएगा और इससे अपने ही खाते से रकम निकालने की इच्छा रखने वालों को काफ़ी मदद मिलेगी.

पहले किसी आपदा, महामारी, विशेष परिस्थितियों (जैसे प्राकृतिक आपदा, बेरोजगारी, महामारी) में निकासी का विकल्प दिया जाता था, जिसके चलते कई बार क्लेम खारिज हो जाते थे.

अब इस झंझट से छुटकारा मिल गया है. सदस्यों को विशेष परिस्थितियों में बिना कोई कारण बताए निकासी की सुविधा मिलेगी.

कोई भी कर्मचारी चाहे वो सरकारी हो या प्राइवेट सेक्टर में काम करता हो, उसका एक पीएफ़ अकाउंट होता है.

इस खाते में कर्मचारी के साथ ही नौकरी देने वाला संस्थान भी अपने कर्मचारियों के खाते में रकम जमा करता है.

ईपीएफ़ओ केंद्र सरकार के अधीन आता है.

किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12 फ़ीसदी हिस्सा इस खाते में जमा होता है और उसकी कंपनी भी इतना ही यानी 12 फ़ीसदी का योगदान देती है.

लेकिन कंपनी या एम्प्लॉयर के अकाउंट में जमा होने वाले इस 12 फ़ीसदी राशि का 8.33% हिस्सा पेंशन फंड में और बाकी 3.67% हिस्सा पीएफ में जमा होता है.

सरकार ने पेंशन लायक सैलरी की अधिकतम सीमा पंद्रह हज़ार रुपये तय की है. यानी अगर आपकी बेसिक सैलरी 15 हज़ार रुपये या इससे कम है तभी आप कर्मचारी पेंशन स्कीम यानी ईपीएस के हक़दार होंगे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित