आज़मगढ़: छात्रा की मौत के बाद क्यों बंद रहे यूपी के कई निजी स्कूल

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- Author, अनंत झणाणें
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश में मंगलवार को लखनऊ, प्रयागराज और गोरखपुर समेत कई ज़िलों में चल रहे निजी स्कूलों की ओर से एक दिन के बंद का आह्वान किया गया.
इन ज़िलों में हाथरस, मेरठ, हापुड़, रायबरेली, बिजनौर, हरदोई, फ़िरोज़ाबाद, और गोंडा समेत कई ज़िलों के निजी स्कूल शामिल हैं.
इसके साथ ही प्रदेश के कई ज़िलों में शिक्षकों ने मौन प्रदर्शन भी निकाले.
लेकिन उत्तर प्रदेश के निजी स्कूल आख़िर किस बात पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं?
स्कूल टीचर क्यों कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन?

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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के स्थित एक निजी स्कूल में 17 वर्षीय लड़की की आत्महत्या के बाद स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर को गिरफ़्तार किया गया है.
इसके बाद निजी स्कूलों के संगठन ने पूरे राज्य में आठ अगस्त के दिन स्कूल बंद रखने का एलान किया था.
उत्तर प्रदेश के ‘गैर-वित्तपोषित निजी स्कूल संघ’ के लैटर हेड पर लिखा गया चार पन्नों का एक पत्र सोशल मीडिया पर नज़र आया है. इसमें स्कूलों की ओर से कुछ मुद्दे उठाए गए हैं.
इस संगठन के एक पदाधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि ये पत्र जारी किया गया था लेकिन अब इसे वापस ले लिया गया है.
इस पत्र में उठाई गई मांगें, कुछ इस प्रकार थीं -
- पुलिस विभाग को निर्देशित किया जाए कि किसी भी अप्रिय घटना के बाद सीधे गिरफ़्तारी नहीं की जाए. आजमगढ़ में छात्रा की आत्महत्या की घटना 31 जुलाई की थी और प्रिंसिपल और टीचर को 2 अगस्त को गिरफ़्तार किया गया.
- संगठन ने सरकार से सवाल पूछा था कि बोर्ड की परीक्षा में अगर किसी बच्चे को नकल करने की वजह से पांच साल के लिए किसी परीक्षा में बैठने से वंचित कर दिया जाए. और इसके बाद वह बच्चा अपनी जान दे दे तो किस टीचर, प्रिंसिपल, विभाग के अधिकारी या मंत्री को जेल भेजा जाता है?
- पत्र में सवाल उठाया गया है कि मूल्य आधारित शिक्षा व्यवस्था में अगर हम बच्चों से कोई बात कहेंगे जिसके बाद बच्चा आत्महत्या कर ले तो हम जेल चले जाएंगे.
- संगठन ने यह ही पूछा कि जब स्कूल में बच्चों से कोई ग़लत चीज़ बरामद की जाए तो उससे कैसे पेश आया जाए?
- संगठन ने स्कूलों में बच्चों के मोबाइल लाने और उसके इस्तेमाल पर बैन लगाने की मांग की.
- निजी स्कूलों के इस संघ की ओर से बताया गया है कि फिलहाल इस पत्र को वापस ले लिया गया है लेकिन इसके बाद संघठन के रुख को मीडिया के साथ साझा नहीं किया गया है.
इस मामले पर स्कूल संगठन की ओर से जारी किए गए ताज़ा बयान में बताया गया है -
- बंद के दिन सभी स्कूलों ने मृत छात्रा की आत्मा की शान्ति के लिए दो मिनट का मौन रखा और शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में स्कूलों में ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए.
- निजी स्कूल एसोसिएशन ने सरकार से गुहार लगाई है कि ऐसी घटनाओं की जांच के लिए एक समिति गठित की जानी चाहिए.
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कहने पर प्रदेश के डीजी स्कूल एजुकेशन ने अपनी जांच शुरू कर दी है और जांच समिति के सदस्यों के लिए एसोसिएशन से सुझाव मांगे हैं.
- बुधवार 9 अगस्त से उत्तर प्रदेश के सभी स्कूल फिर शुरू हो जाएंगे.
पिता ने स्कूल पर लगाए गंभीर आरोप

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लेकिन निजी स्कूलों की ओर से इस तरह का पत्र जारी करने और स्कूल बंद रखने की नौबत क्यों आई?
इसकी वजह बीती 31 जुलाई को आजमगढ़ के एक निजी स्कूल में 11वीं की एक छात्रा की मौत होना है.
इस मामले में स्कूल प्रिंसिपल और टीचर के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है. इसके साथ ही स्कूल प्रबंधन के ख़िलाफ़ भी आरोप लगाए गए.
बच्ची के पिता ने मीडिया के साथ शुरुआती बातचीत में स्कूल पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनकी बेटी की हत्या की गयी है.
घरवाले कहते हैं कि उन्होंने बच्ची को एक साधारण की-पैड वाला मोबाइल फ़ोन इसलिए दिया था ताकि वो स्कूल से ऑटो या कोई साधन न मिलने पर माँ बाप से संपर्क कर सके.
छात्रा के पिता का कहना है कि "अगर यह गुनाह है, तो हम गुनाह मान लेते हैं."
पिता सवाल करते हैं कि ‘जब शुक्रवार को स्कूल वालों को बच्ची के बैग से मोबाइल मिला तो उन्होंने घरवालों से संपर्क क्यों नहीं किया?’
वो कहते हैं, "अगर स्कूल वाले हमारी बेटी से कहते कि ले जाइए, तो हम अपनी बच्ची को निकाल लेते."
लड़की के पिता स्कूल प्रबंधन पर उन्हें गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहते हैं, "मुझे 11 बजे के आसपास फ़ोन आया और बच्ची के बारे में जानकारी लेने लगे. जब मैंने पूछा कि इतने सवाल क्यों पूछ रहे हैं तो उन्होंने कहा कि स्कूली सॉफ़्टवेयर के लिए जानकारी जुटा कर रहे हैं."
वो बताते हैं, "फिर 10 मिनट बाद क्लास टीचर का फ़ोन आया कि बच्चों का कोई मैटर है तो मैंने कहा कि मैं तुरंत आ रहा हूँ. उन्होंने कहा, मत आइए, बच्ची की माँ को भेजिए. फिर आधे घंटे बाद मुझे तुरंत आने को कहा गया.
तो पहले ही मुझे आने को कह देते तो मैं स्कूल में पहुँच गया होता. जब हम दोनों वहां पहुंचे तो बच्ची का शव स्कूल में नहीं एम्बुलेंस में था. मैंने गार्ड से पूछा कि कहीं यह मेरी (बेटी) तो नहीं है तो उसने कहा नहीं है, आप प्रिंसिपल के दफ़्तर जाओ."
पिता कहते हैं, "जब मैं प्रिंसिपल के दफ़्तर पहुंचा तो उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या आपकी बेटी को कोई घर पर प्रॉब्लम थी? मैंने कहा आप मुझे बताइए कि मेरी बेटी कहां है, ज़िंदा है कि नहीं? हमने देखा कि उसे चोटें भी आईं हैं, और दुपट्टा उसके गले में लपेटा गया था."
अंत में पिता रोते-रोते बताते हैं, "हमें शक है कि हमारी बच्ची की आबरू पर भी कुछ हुआ है. अगर ऐसा है तो हमारी बच्ची बहुत शर्मिंदा हुई होगी. और वो किसी से बताए ना तो उसे धक्का दे दिया गया."
पिता कहते हैं, "हम कहते हैं इन लोगों को आजीवन कारावास हो और स्कूल सील करें. बच्ची जहाँ गिरी थी वहां का खून धो दिया है. उसका स्कूल बैग नहीं मिला है."
वहीं, मीडिया से बात करते हुए लड़की की माँ ने आरोप लगाया था कि, "उसे रोज़ परेशान करते थे. मेरी बेटी को 90 मिनट के लिए बिठाया गया."
रोते हुए माँ कहती हैं, "मेरी बेटी कोई अपराधी थी कि उससे लोग पूछ रहे थे. क्या पूछ रहे थे? मुझे नहीं बुलाया गया. मेरे पास 12:41 पर फ़ोन आया और मेरे पास रिकॉर्ड है. मेरे भैया खुद वहां पढ़ाते हैं, उनको नहीं बुलाया, मुझे सिर्फ उसका शव ले जाने के लिए बुलाया."
रोते-रोते उसकी मां कहती है, "17 साल की मेरी बच्ची को मार दिए हैं यह लोग. मेरी बच्ची बहुत दर्द में मरी है."
पुलिस ने क्यों किया प्रिंसिपल और टीचर को गिरफ़्तार?

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बीती 31 जुलाई को आजमगढ़ के चिल्ड्रेन गर्ल्स स्कूल में जो घटना हुई थी उसमे सबसे पहले हत्या का मुक़दमा दर्ज किया गया और प्रिंसिपल सुमन मिश्रा और क्लास टीचर अभिषेक राय को नामज़द किया था.
इसके बाद दोनों को गिरफ़्तार कर लिया गया. पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम गठित की थी और स्कूल में लगे सीसीटीवी फुटेज़ का एनालिसिस किया गया.
आजमगढ़ के एसपी अनुराग आर्य ने इस मामले पर जानकारी देते हुए मीडिया को बताया कि फुटेज में छात्रा लगभग 12 बजे प्रिंसिपल के कमरे में गई थी और कमरे के बाहर काफ़ी देर तक खड़ी दिखाई दी.
पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज़ से लगभग सवा एक बजे के आसपास लड़की तेज़ी से सीढ़ी के रास्ते ऊपर जाती हुई दिखी है.
एक अन्य फुटेज में छात्रा के गिरने का फुटेज भी प्राप्त मिला है जिसे पुलिस ने जांच में शामिल किया है.
पुलिस ने यह भी बताया कि स्कूल वालों की ओर से खून साफ़ कराने के सबूत भी मिले हैं जो साक्ष्य मिटाने का अपराध है.
पुलिस ने बताया कि लड़की के पिता से उन्हें कुछ ऑडियो सबूत भी मिले हैं जिन्हें वो जांच में शामिल कर रही हैं और लड़की के मोबाइल को प्रिंसिपल के पास से बरामद किया गया है.
क्या आत्महत्या के लिए उकसाई गई छात्रा

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आत्महत्या की वजह के बारे में बात करते हुए एसपी अनुराग आर्य ने बीबीसी को बताया-
- अभियुक्तों को छात्रा के पास मोबाइल मिलने के बाद प्रोफेशनल काउंसलिंग ना करते हुए, उसकी जगह बेहद संवेदनहीनता भरा अमानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए छात्रा को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया.
- घटना वाले दिन भी छात्रा को उसकी क्लास अटेंड करने के बजाए, प्रिंसिपल रूम में बुलाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया. सज़ा के रूप में उसको रूम के बाहर काफ़ी देर तक खड़ा रखा गया.
- इसी मानसिक प्रताड़ना और सार्वजानिक रूप से प्रिंसिपल के रूम के बाहर खड़े होने से छात्रा को महसूस हुआ होगा. ज़ाहिर है इस बात है उसे बेइज़त्ती महसूस हुई होगी. इन्ही सब मानसिक प्रताड़नाओं के कारण, वहां से निकलते हुए, ऊपरी मंज़िल पर जाकर वहां से आत्महत्या कर ली गई."
पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और साक्ष्य मिटाने के आरोप में पुलिस ने प्रिंसिपल और शिक्षक को रिमांड पर लिया है.
परिजनों के यौन हिंसा के आरोप की जांच के बारे में एसपी ने कहा, "पोस्ट मोर्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच में अब तक इस बात का कोई भी सबूत नहीं मिला है. परिजनों के बयान के आधार पर जांच होगी."
छात्र के पिता ने मीडिया को दिए गए शुरुआती बयानों में दुष्कर्म और हत्या की आशंका भी जताई थी.
बीबीसी से बात करते हुए छात्रा के पिता ने कहा कि ऐसा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि उस समय वो जो कुछ कह रहे थे वो अपनी आँखों देखी चीज़ों पर आधारित था.
वो कहते हैं, "बाकी समय तो मैं वहां था नहीं. लेकिन मैं जानना चाहता हूँ, कि मेरी बेटी के साथ क्या क्या किया गया कि मेरी बेटी ने ऐसा क़दम उठा लिया."
इन आरोपों के बारे में एसपी ने कहा था कि, "पोस्ट मोर्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच में अब तक इस बात का कोई भी सबूत नहीं मिला है. परिजनों के बयान के आधार पर जांच होगी."
घटना के ठीक बाद क्या बोलीं प्रिंसिपल?

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इस मामले में गिरफ़्तार हुई स्कूल प्रिंसिपल सोनम मिश्र ने घटना को दुखद बताते हुए कहा था, "बच्ची कब वहां पहुँच गई, कैसे वहां पहुँच गई, यह मैं कुछ नहीं बता सकती हूँ. जब घटना हो गई, मैं दौड़ कर गई, और मैंने गार्ड को बुलाया, उसको हॉस्पिटल पहुंचाया."
घटना के तुरंत बाद परिजनों के आरोप के बारे में प्रिंसिपल सोनम मिश्रा ने कहा था, "स्कूल से कोई क्यों टॉर्चर करेगा, हमारे यहाँ इतने बच्चे हैं, हम किसी बच्चे को क्यों टॉर्चर करेंगे? वजह ही तो नहीं पता है कि क्या है. परिजनों का अपना पक्ष है, मेरा अपना पक्ष है."
इस मामले में पुलिस का कहना है कि वो स्कूल के अन्य शिक्षकों और छात्रों से पूछताछ कर अपनी जांच आगे बढ़ाएगी.
महत्वपूर्ण जानकारी-
मानसिक समस्याओं का इलाज दवा और थेरेपी से संभव है. इसके लिए आपको मनोचिकित्सक से मदद लेनी चाहिए, आप इन हेल्पलाइन से भी संपर्क कर सकते हैं-
सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन- 1800-599-0019 (13 भाषाओं में उपलब्ध)
इंस्टीट्यूट ऑफ़ ह्यमून बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज-9868396824, 9868396841, 011-22574820
हितगुज हेल्पलाइन, मुंबई- 022- 24131212
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस-080 - 26995000
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