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जी 20 शिखर सम्मेलन पर रही दुनिया भर के मीडिया की नज़र, ये कहा
भारत में हुए जी-20 सम्मेलन पर दुनिया भर के मीडिया की नजर रही. अमेरिकी, यूरोपीय और एशियाई देशों के मीडिया ने इस पर अपने-अपने ढंग से टिप्पणी की है.
अमेरिकी और यूरोपीय मीडिया में जी-20 देशों के घोषणापत्र की चर्चा है. इसमें यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर रूस की निंदा से बचने का जिक्र किया गया है.
लेकिन ये भी कहा गया है कि भारत यूक्रेन जैसे विवादास्पद मुद्दे पर सहमति बनाने में कामयाब रहा. हालांकि इसकी उम्मीद कम ही थी.
अमेरिकी अख़बार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लिखा, "शनिवार शाम को नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन में काफी जटिल बातचीत के बाद जारी घोषणापत्र में यूक्रेन पर रूस के हमले या युद्ध के उसके बर्बर तरीके की निंदा नहीं की गई है. बल्कि यूक्रेनी लोगों की पीड़ा पर दुख जताया गया है. इसमें कहा गया है कि इस साल कम उम्मीदें थीं कि बंटे हुए जी-20 में यूक्रेन के सवाल पर सदस्य देश किसी सहमति पर पहुंच पाएंगे."
वहीं सीएनएन ने लिखा है,"शिखर सम्मेलन में घोषणापत्र पर जो सहमति थी उसकी कल्पना भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने नहीं की होगी. इसमें यूक्रेन के सवाल पर नरम रुख अपनाया गया. इसमें अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों की ओर से अपनाए गए रुख की तुलना में कहीं अधिक नरमी दिखाई गई."
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने भारत को मध्य पूर्व देशों और यूरोप से जोड़ने के लिए रेल और शिपिंग कॉरिडोर बनाने के एलान का भी जिक्र किया है.
अखबार लिखता है, "हालांकि परियोजना में समय सीमा या बजट समेत कई अहम ब्योरों का जिक्र नहीं किया गया है. अमूमन यूक्रेन के सवाल पर अमेरिका और पश्चिमी देशों की जो बयानबाजी होती है उसकी तुलना में नई दिल्ली के जी-20 सम्मेलन में उनका रुख काफी नरम था. इस दौरान बाइडन शिखर सम्मेलन में अपना ज्यादातर समय चुपचाप नरेंद्र मोदी के साथ अमेरिकी संबंधों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किए रहे."
अख़बार ने विदेश नीति के विशेषज्ञ और काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स के पूर्व अध्यक्ष रिचर्ड एन. हास के हवाले कहा कि बाइडन पिछले राष्ट्रपतियों की तरह भारत को करीब लाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें सीमित सफलता मिली है लेकिन दोनों के बीच रिश्ते की यही प्रकृति है.
मोदी ने दिखाया, वैश्विक विभाजन को पाट सकते हैं - द गार्डियन
ब्रिटिश अख़बार ‘द गार्डियन’ ने लिखा है कि घोषणापत्र भारत की बड़ी जीत का प्रतीक है.
अखबार लिखता है,"जी-20 के लिए ये चुनौतीपूर्ण साल रहा है. ये समूह दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करता है.दरअसल पिछले मंत्री स्तरीय सम्मेलनों में रूस और चीन यूक्रेन युद्ध, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा के सवाल पर अड़ियल साबित हुए थे. इससे ये बैठकें आम सहमति नहीं बना पाई थीं."
‘’मोदी यह दिखाना चाहते थे कि वो अपने देश में हुए जी-20 सम्मेलन में इस वैश्विक विभाजन को पाट सकते हैं. जबकि असलियत है कि जी20 के पहले दिन ही वो आम सहमति पर पहुंच गए. ये इस बात का सबूत है कि वह ऐसा कर सकते हैं.’’
‘स्काई न्यूज’ ने एक लेख में लिखा है,'' मोदी जी 20 में सदस्य देशों के बीच आम सहमति को अपनी जीत मानेंगे. लेकिन यह दिखाता है कि सफलता के लिए मानक कितना नीचे रखा गया था.''
'यूएसए टुडे' ने लिखा है,''घोषणा पत्र की नरम भाषा दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के बीच गहरी होती दरार को दिखा रही है.''
भारत की छवि चमकाने पर पूरा फोकस - सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड
'सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड' ने लिखा है,''ऑस्ट्रेलिया प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज जी20 शिखर सम्मेलन की सराहना की भले ही इसमें शामिल देशों के नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर अपनी टिप्पणियों को छोटा कर दिया है.''
अखबार ने लिखा है भारतीय प्रधान मंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन में भारत की वैश्विक छवि को चमकाने और जी20 का ध्यान यूक्रेन से हटाकर व्यापार, बुनियादी ढांचे में निवेश और जलवायु परिवर्तन की ओर लगाने की कोशिश की.
पाकिस्तानी अख़बार ‘डॉन’ ने अपने एक लेख, ''यूक्रेन पर घोषणा पत्र, वास्तविकता या प्रचार’ में लिखा है, "संयुक्त घोषणा में रूस की निंदा नहीं की गई और यह अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की यूक्रेन की हालिया यात्रा के दौरान दिखाए गए रुख की तरह है. इसमें ब्लिंकन ने रूस के ख़िलाफ़ कठोर शब्दों के इस्तेमाल के बजाय मानवीय आघात और मलबे से पुनर्निर्माण की बात की.''
दक्षिण अफ्रीकी मीडिया में मोदी की तारीफ
दक्षिण अफ़्रीकी मीडिया ने अपना फोकस अफ्रीकन यूनियन के G20 सदस्य बनने पर किया है.
दक्षिण अफ़्रीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जी20 की ओर से यूरोपीय संघ की तर्ज पर अफ्रीकन यूनियन को सदस्य बनाने पर सहमति वाली रिपोर्ट का स्वागत किया.
न्यूज़ 24 ने कहा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी एक प्रमुख ताकत के तौर पर भारत की साख बढ़ाने की कोशिश में लगे हैं. उन्होंने यूरोपियन यूनियन के तर्ज पर ही जी 20 में अफ्रीकी संघ की सदस्यता का ऐलान कर एक बड़ा कदम उठाया है.
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