वर्ल्ड कप 2022: ईरान के फ़ुटबॉल प्रेमी जश्न मनाएंगे या मातम

    • Author, पूरिया जाफ़रेह
    • पदनाम, बीबीसी पर्शियन

यह सितम्बर का आखिरी समय था. ऑस्ट्रिया के वियना में ईरान और अफ़्रीकी चैंपियन सेनेगल की टीम के बीच एक दोस्ताना मैच हो रहा था.

जब 1-1 से ड्रॉ पर रेफ़री ने अंतिम सीटी बजाई, एक अच्छा परिमणाम होते हुए भी खुशी का कोई माहौल नहीं था.

खिलाड़ी ख़ुश नहीं दिख रहे थे और ना ही कोचिंग स्टाफ़. मैदान के बाहर मौजूद ईरानी प्रशंसक तो बिल्कुल भी नहीं.

स्टेडियम में ईरानी प्रशंसकों को रोकने के लिए ईरान की सरकार ने स्थानीय सुरक्षाकर्मियों को हायर किया था. लेकिन उनकी आवाज़ को वे फिर भी नहीं रोक पाए. बाहर मेगाफ़ोन और लाउडस्पीकरों से वे अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे थे.

असल में बाहर से आने वाली आवाज़ें इतनी ऊंची थीं कि ईरान के सरकारी टेलीविज़न ने मैच को म्यूट करके दिखाया. 

मध्य सितम्बर से ही ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के नाटकीय उभार ने ईरान के लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित किया है. इन प्रदर्शनों से देश के इस्लामिक गणतंत्र को दशकों बाद सबसे कड़ी चुनौती मिल रही है. 

ये प्रदर्शन 22 साल की महिला की मौत के बाद फूट पड़े, जिसे ईरान की मोरल पुलिस ने हिरासत में इसलिए ले लिया था क्योंकि उस पर कड़े हिजाब क़ानूनों को तोड़ने का आरोप लगा था.

खेल मैदान के बाहर वे नारे लगा रहे थे, ”उसका नाम क्या है- महसा अमीनी.”

ईरान की सरकार इसे लोगों को नहीं सुनाना चाहती, खासकर वर्ल्ड कप के दौरान.

ये साफ़ नहीं है कि क़तर में सोमवार को इंग्लैंड के ख़िलाफ़ होने वाले ओपनिंग मैच के दौरान प्रशंसक और खिलाड़ी कैसा व्यवहार करेंगे, लेकिन सभी का ध्यान इसी ओर होगा.

महसा अमीनी की मौत से भड़का गुस्सा

महसा अमीनी उत्तर पश्चिमी ईरानी शहर सक़ीज़ की एक युवा कुर्द महिला थी. 16 सितम्बर को तेहरान के एक अस्पताल में तीन दिन तक कोमा में रहने के बाद उनकी मौत हो गई थी.

जिस समय ईरान की मोरल पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार किया, वो अपने परिवार के साथ राजधानी आई थीं.

मोरल पुलिस ने आरोप लगाया कि अमीनी ने सिर के बाल को हिजाब से ढंकने और बाजुओं और पैरों में ढीले कपड़े पहनने के नियम का उल्लंघन किया था. 

ऐसी भी रिपोर्टें हैं कि पुलिस ने अमीनी के सिर पर डंडा मारा और उनके सिर को अपनी गाड़ी पर दे मारा.

अधिकारियों ने इस बात का खंडन किया है कि कोई दुर्व्यहार किया गया. उनका कहना है कि अमीनी को अचानक 'दिल का दौरा' पड़ गया. जबकि अमीनी के परिजनों का कहना है कि वो तंदुरुस्त और सेहतमंद थीं. 

अमीनी की मौत से गुस्सा भड़क गया. सक़ीज़ में जब उनका जनाज़ा निकला तो महिलाओं ने अपने हिजाब उतार फेंके और सरकार विरोधी नारे लगाए.

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया और पूरे देश में गुस्से की लहर दौड़ गई. इसे खेल ने एक मंच मुहैया कराया.

अक्टूबर में एक महिला क्लाइंबर एलनाज़ रेकाबी ने दक्षिण कोरिया में हुए एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हुए हिजाब नहीं पहना. जब वो वापस लौटीं तो उनके स्वागत के लिए हज़ारों लोग एयरपोर्ट पर हाज़िर थे.

घर जाने के लिए उड़ान भरने से पहले उन्होंने एक इंस्टाग्राम संदेश पोस्ट किया जिसमें कहा कि उन्होंने अनजाने में बिना हिजाब के प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था.

उनकी पोस्ट में कई भाषाओं का इस्तेमाल किया गया था, जिससे लगता है कि उन्होंने दबाव में ऐसा लिखा. 

लेकिन जो लोग प्रदर्शन का समर्थन करते हैं, उनके लिए फ़ुटबॉल सबसे बड़ा मंच मुहैया कराता है, क्योंकि यह देश का सबसे लोकप्रिय खेल है और बड़ी शख़्सियतें भी इसमें शामिल हैं.

समर्थन में उतरे फ़ुटबॉल खिलाड़ी

ईरान के एक पूर्व फ़ुटबॉल खिलाड़ी अली करीमी इस सरकार विरोधी आंदोलन का चेहरा बन चुके हैं. करीमी ने 2005-2007 के बीच बायर्न म्यूनिख में दो सीज़न बिताए हैं.

ईरान के रिकॉर्ड गोल स्कोरर और देश के प्रतिष्ठित चेहरे अली दाएई ने भी इस आंदोलन के प्रति अपना समर्थन ज़ाहिर किया है. 

27 सितम्बर को सेनेगल के ख़िलाफ़ मैच से पहले, मना किए जाने के बावजूद कुछ ईरानी खिलड़ियों ने प्रदर्शनों के समर्थन में सोशल मीडिया पर संदेश पोस्ट किए.

स्टार खिलाड़ी 27 साल के स्ट्राइकर सरदार अज़मून ने इंस्टाग्राम पर अपना समर्थन देना जारी रखा. ईरान में इंस्टाग्राम उन कुछ सोशल मीडिया नेटवर्क में से एक है जिसकी अनुमति है. 

खिलाड़ियों ने ईरानी लीग में गोल किए जाने का जश्न मनाने से इनकार कर दिया.

जब भी गेंद रेखा के पार जाती, स्कोर करने वाला खिलाड़ी अपने हाथ नीचे कर लेता, ताकि मैच देख रहे लोगों को इस बात की याद दिलाई जा सके कि देश में क्या हो रहा है.

मानवाधिकार कार्यकर्ता न्यूज़ एजेंसी का अनुमान है कि इन प्रदर्शनों में अबतक 341 लोग मारे जा चुके हैं और 15,800 से अधिक लोग हिरासत में लिए गए. रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बल के 39 लोगों की मौत हुई है. 

सरकारी टेलीविज़न उन खिलाड़ियों की फुटेज काट देता था जिन्होंने स्कोर किया, इसकी जगह हार मानने वाले खिलाड़ियों का फुटेज दिखाया जाता था.

ईरान में सबसे लोकप्रिय फ़ुटबॉल क्लब इस्तेघलाल एफ़सी के खिलाड़ियों ने दो सप्ताह पहले फैसला किया कि अगर वे सुपर कप में जीतते हैं तो जश्न नहीं मनाएंगे.

उन्होंने आयोजकों से कहा कि वे मैच के बाद होने वाले कार्यक्रम में तभी हिस्सा लेंगे जब वहां संगीत और पटाखों का आयोजन नहीं किया जाएगा. 

सरकारी टेलीविज़न ने इन फ़ुटेज को भी काट दिया. 

जबसे प्रदर्शन शुरू हुए हैं, सभी ईरानी लीग के मैच कड़ी सुरक्षा में कराए गए. कई लोगों का मानना है कि इसके पीछे कारण ये है कि ईरान के अधिकारियों को लगता है कि प्रशंसक हंगामा खड़ा सकते हैं. 

फ़ुटबॉल प्रेमियों के लिए असमंजस के पल

नवंबर की शुरुआत में हुए बीच सॉकर इंटरकॉन्टिनेंटल कप के दौरान ईरान के सईद पिरामून ने एक गोल करने के बाद इशारों में बाल काटने की मिमिक्री की.

यह उस प्रतीकात्मक विरोध की ओर ध्यान दिलाने वाला एक्ट था, जो कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक रूप से महिलाओं द्वारा खुद के बाल काटे जाने के सांकेतिक विरोध की ओर इंगित करता है. 

फ़ाइनल में वो और उनकी टीम के साथी खिलाड़ियों ने ब्राज़ील को हरा दिया और एक बार फिर कोई जश्न नहीं मनाया गया.

ईरान की बास्केटबॉल, बीच सॉकर, वॉलीबॉल और वॉटर पोलो टीमें, सभी ने हालिया मैचों में राष्ट्र गान नहीं गाया.

लेकिन नेशनल पुरुष फ़ुटबॉल टीम पर सभी का ध्यान रहेगा. वर्ल्ड कप के पहले तेहरान में निकारागुआ के साथ खेले गए एक दोस्ताना मैच में कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया, सिवाय दो खिलाड़ियों के, जिन्होंने पहले भी सार्वजनिक रूप से सरकार के प्रति समर्थन ज़ाहिर किया था.

ये सब ईरान और इसके फ़ुटबॉल प्रेमियों के लिए वर्ल्ड कप से पहले अभूतपूर्व ढंग का माहौल बनाता है.

अगर ईरान के खिलाड़ी राष्ट्रगान गाने से फिर से इनकार करते हैं या क़तर में कैमरे के सामने प्रदर्शन के कोई और तरीके अख़्तियार करते हैं तो क्या होगा? अगर वे गोल करते हैं तो क्या करेंगे?

ड्रॉ अपने आप में बड़ी चीज़ है. 

इन सब हलचलों और देश के अंदर उथल पुथल के बीच, ईरान का सामना अमेरिका, इंग्लैंड और वेल्स से होगा. इन देशों को ईरान की सरकार अपना कट्टर दुश्मन मानती है. 

अमेरिका से जब सामना होगा तो एक बार फिर राष्ट्रीय गर्व की उन यादों को ताज़ा कर देगा जब फ़्रांस में हुए 1998 वर्ल्ड कप के दौरान ग्रुप स्टेज में अमेरिका पर ईरान को 2-1 से जीत मिली थी.

यह वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में ईरान की पहली जीत थी.

क़तर में ऐसा कुछ होता है तो ईरान के फ़ुटबॉल प्रेमियों की प्रतिक्रिया कैसी होगी? बहुत सारे असमंजस में होंगे.

वे फैसला नहीं कर पाएंगे कि टीम की जीत पर खुशी मनाना चाहिए या नहीं, क्योंकि यह उन प्रदर्शनकारियों को धोखा देने जैसा हो जाएगा जो अपनी जान का ख़तरा मोल ले रहे हैं.

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