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ईरान में पाकिस्तान के नौ नागरिकों की हत्या, दोनों देशों ने क्या कहा
ईरान के दक्षिण पूर्वी हिस्से के सीमावर्ती इलाके में अज्ञात हमलावरों ने पाकिस्तान के नौ नागरिकों की हत्या कर दी. हमले में तीन लोग घायल हो गए हैं. ईरान के इस इलाके की सीमा पाकिस्तान से लगती है.
यह घटना ऐसे समय हुई है, जब ईरान और पाकिस्तान पिछले दिनों एक-दूसरे के यहां हमले करने के बाद पैदा हुए तनाव को कम करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं.
ईरान की समाचार एजेंसी मेहर ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से जानकारी दी है कि शनिवार सुबह अज्ञात बंदूकधारी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के सरावान शहर के एक घर में दाख़िल हुए और नौ लोगों की हत्या कर दी.
अभी तक किसी भी समूह ने इन हत्याओं की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
पाकिस्तान ने इस घटना पर दुख जताते हुए ईरान से कहा है कि घटना की जांच की जाए और हमला करने वालों पर कार्रवाई की जाए.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, बलूच अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन हलवाश ने कहा है कि मरने वाले लोग पाकिस्तानी मज़दूर थे जो यहां गाड़ियों की मरम्मत करने वाली दुकान में काम करते थे.
पाकिस्तान ने क्या कहा
ईरानी समाचार एजेंसी इरना ने बताया है कि इस प्रांत के गवर्नर अलीरज़ा मरहमती के मुताबिक़, "तीन हथियारबंद लोगों ने विदेशी लोगों के घर में घुसकर उन्हें गोलियां मारी और घटनास्थल से भाग गए."
मरहमती ने कहा कि नौ लोगों की मौत हुई है और तीन अन्य ज़ख्मी हुए हैं.
तेहरान में पाकिस्तान के राजदूत मुद्दसिर टीपू ने सोशल प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट करके कहा कि उन्होंने घायल हुए तीन पाकिस्तानियों में से दो से बात की है. उन्होंने कहा कि घायलों की स्थिति स्थिर है और उनका इलाज किया जा रहा है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके इस घटना की निंदा की है.
मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज़ ज़ाहरा बलोच ने कहा, “ये एक डरावनी और जघन्य घटना है और हम इसकी स्पष्ट तौर पर निंदा करते हैं. हम ईरानी अधिकारियों के संपर्क में हैं और हमने इस घटना की तुरंत जांच करने और इस अपराध में शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराने की ज़रूरत बताई है.”
मुमताज़ ने कहा कि ज़ाहेदान में पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के अधिकारी उस जगह जा रहे हैं, जहां घायलों का इलाज किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, "हम इस मामले की गंभीरता को समझते हैं और इसे लेकर हर संभव क़दम उठा रहे हैं. हमारा दूतावास मारे गए लोगों के शव जल्द से जल्द लाने की कोशिश करेगा. इस तरह के हमलों से पाकिस्तान के आतंकवाद से लड़ने के इरादे पर कोई असर नहीं पड़ेगा."
रिश्तों में फिर खिंचाव की आशंका
पाकिस्तान के अंतरिम विदेश मंत्री जलील अब्बास जिलानी ने कहा कि यह ईरान और पाकिस्तान के दुश्मनों की साज़िश है.
उन्होंने सोशल प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा है, "ईरान में आतंकवादी हमले में पाकिस्तानियों की मौत से दुखी हूं. ये जघन्य अपराध पाकिस्तान और ईरान के साझा दुश्मनों की ओर से दोनों देशों के रिश्तों को बिगाड़ने की एक कोशिश है. मैं पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ईरान सरकार से कार्रवाई की मांग करता हूं."
यह घटना ऐसे समय हुई, जब एक दिन पहले ही पाकिस्तान के राजदूत मुद्दसिर तेहरान पहुंचे थे.
दरअसल, इसी महीने ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाक़े में हमले किए थे. उसका कहना था कि उससे निशाने पर ईरान में 'आतंकवादी गतिविधियां' चला रहा जैश अल-अदल नाम का संगठन था.
इसके बाद पाकिस्तान ने घटना का विरोध करते हुए ईरान से अपने राजदूत को वापस बुला लिया था.
ईरान के हमलों के दो दिन बाद पाकिस्तान ने भी ईरान के सिस्तान बलूचिस्तान इलाक़े में हमले किए थे.
पाकिस्तान का कहना था कि वह ईरान के इस हिस्से में रहकर पाकिस्तान में ख़ून खराबा करने वाले बलोच लिबरेशन आर्मी के चरमपंथियों को निशाना बना रहा है.
इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव चरम पर पहुंच गया था. हालांकि, बाद में दोनों देशों ने तनाव को दूर करने की कोशिश की थी और अपने राजदूतों को फिर से एक-दूसरे के यहां भेज दिया था.
ईरान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव की वजह
ईरान और पाकिस्तान के बीच 900 किलोमीटर लंबी सीमा है. सीमाई इलाक़ों में सरकार की ज़्यादा मौजूदगी नहीं है. यहां तस्कर और चरमपंथी खुलेआम घूमते हैं.
दोनों देश एक दूसरे पर विद्रोही गुटों को मदद करने का शक करते हैं या ऐसा मानते है कि वे उनके प्रति उदार रवैया रखते हैं.
जिस जैश अल-अदल समूह को ईरान ने निशाना बनाने का दावा किया था, वह सुन्नी अलगाववादी समूह है. ऐसा माना जाता है कि यह संगठन पाकिस्तान से संचालित होता है और ईरानी सुरक्षा बलों पर हमला करता है.
वहीं, पाकिस्तान ने जिस बलोच लिबरेशन आर्मी पर हमलों की बात कही थी, उसका गठन साल 2000 में हुआ था.
यह पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ बलूचिस्तान प्रांत में चीन की परियोजनाओं पर हमला करता है. ऐसा माना जाता है कि बलोच लिबरेशन आर्मी के संदिग्ध ईरान में छिपे हैं.
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