नीरज, अरशद की मां सरोज और रज़िया ने भारत-पाकिस्तान की 'सरहद' कैसे की कम

    • Author, विकास त्रिवेदी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान की 'मरियम हयात ख़ान' भारत के 'वीर प्रताप सिंह' से फ़िल्म 'वीर ज़ारा' में पूछती हैं- "तेरे मुल्क का हर बेटा तेरे जैसा है क्या?"

''ये तो नहीं पता. पर हां, मेरे देश की हर मां आप जैसी ज़रूर है.''

वो दृश्य कितने सुंदर होते हैं, जब फ़िल्मों के अकल्पनीय से लगने वाले ऐसे सीन हक़ीक़त बन जाते हैं.

जब महज़ 550 किलोमीटर के फ़ासले पर दो मांएं अपनी बातों से साबित कर देती हैं कि मुल्क भले ही अलग हों, मगर मांएं एक जैसी ही होती हैं. फिर चाहे वो पाकिस्तान का मियां चन्नू इलाक़ा हो या फिर भारत का पानीपत.

ये कहानी सिर्फ़ सरोज देवी के बेटे नीरज चोपड़ा और रज़िया परवीन के बेटे अरशद नदीम की नहीं है. कुछ दूरियां ऐसी होती हैं, जो क़रीबी कभी कम नहीं होने देतीं. ये कहानी उन दूरियों की भी है.

खेले बेटे, मगर मांओं का शानदार प्रदर्शन

आठ-नौ अगस्त 2024 की दरम्यानी रात.

पेरिस ओलंपिक में भाला फेंकने से पहले क़रीब 30 से 36 मीटर दौड़ना होता है.

इस दौड़ के दौरान यूं तो करोड़ों लोगों के दिल की धड़कन बढ़ी हुई थी. मगर दो घरों में बाशिंदों के दिल कुछ ज़्यादा ज़ोर से धड़क रहे थे.

ये धड़कनें तब सुस्ताने गईं, जब पाकिस्तान के जैवलिन थ्रोअर अरशद नदीम ने 92.97 मीटर और भारत के नीरज चोपड़ा ने 89.45 मीटर की दूरी पर भाला फेंका.

अरशद को गोल्ड मिला और नीरज को सिल्वर. मगर इसी बहाने भारत को मिलीं रज़िया परवीन और पाकिस्तान को मिलीं सरोज देवी.

काग़ज़ों में पक्का लिखा होगा- रज़िया परवीन के बेटे अरशद नदीम, सरोज देवी के बेटे नीरज चोपड़ा.

मगर इन दो मांओं से पूछो तो ये बिना किसी बनावट के बोलती हैं- जैसे ये मेरा बेटा, वैसे वो मेरा बेटा.

सरोज देवी बोलीं, ''हमारा तो सिल्वर ही गोल्ड के जैसा है और जिसका गोल्ड आया, वो भी हमारा ही लड़का है. मेहनत करता है.''

मुहब्बत ने सरहद के उस पार अंदरूने मुल्क में जाकर घुसपैठ की तो उधर से भी इधर घुसपैठ हो गई.

रज़िया कहती हैं, ''वो मेरे बेटे जैसा है. वो नदीम का दोस्त भी है और भाई भी है. हार और जीत तो किस्मत की होती है. वो भी मेरा बेटा है और अल्लाह उसे भी कामयाब करे. उसे भी मेडल जीतने की तौफ़ीक अता करें.”

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अब जिनकी मांएं इतना प्यारा बोलेंगी, उनके बेटे जब बोलेंगे या जब उन पर बात होगी तो वो कितनी मीठी होगी... ये समझिए.

अरशद नदीम ने गोल्ड जीतकर कहा, ''मैंने अपना पहला कॉम्पिटीशन 2016 में गुवाहाटी में नीरज भाई के साथ खेला. तब से पता चला कि नीरज चोपड़ा भाई जीतते आ रहे हैं. वहां मैंने पहली बार पाकिस्तान का रिकॉर्ड ब्रेक किया. वहां से मुझे शौक़ हुआ कि मेहनत करूं तो आगे जा सकता हूं.''

एक तरफ़ अरशद नीरज की तारीफ़ कर रहे थे. दूसरी तरफ़ नीरज अरशद की मेहनत का सम्मान कर रहे थे.

नीरज चोपड़ा ने कहा, ''किसी खिलाड़ी का दिन होता है. आज अरशद का दिन था. खिलाड़ी का शरीर उस दिन अलग ही होता है. हर चीज़ परफेक्ट होती है जैसे आज अरशद की थी. टोक्यो, बुडापेस्ट और एशियन गेम्स में अपना दिन था."

बेटा तारीफ़ करेगा तो पिता कहां पीछे रहेंगे.

नीरज के पिता सतीश चोपड़ा ने भी कहा, "इस बार गोल्ड मेडल पाकिस्तान के अरशद नदीम ने जीता. उसने काफी मेहनत की है जो इतना स्कोर तय किया कि कोई खिलाड़ी उसको पार नहीं कर पाया."

नीरज को जब पीएम नरेंद्र मोदी ने फोन किया तो इसी बार में पूछा.

पीएम मोदी ने नीरज से पूछा- ''आपकी मां खेल-कूद में थीं क्या? आपकी मां ने इंटरव्यू में जो कहा, खेल परिवार की जो भावना होती है, बहुत बढ़िया तरीके से उन्होंने कहा. मैं बधाई देता हूं.''

जब ये बात अरशद तक पहुंची तो वो बोले, ''मांएं जो होती हैं, सबकी एक ही होती हैं. बड़ी खुशी होती है कि हमें जैसी मांएं मिली हैं. हमारे लिए दुआएं करती हैं.''

शोएब अख़्तर अकसर भारत में तब याद किए जाते हैं, जब किसी आक्रामकता की नुमाइश से जुड़ा मसला हो. ख़ासकर क्रिकेट से जुड़ी. मगर इस बार इस नुकीले भाले ने ऐसा खेल किया कि शोएब भी बोले- ये बात सिर्फ़ एक मां ही बोल सकती है.

महसूस हुआ कि भारत, पाकिस्तान के बीच अकसर फैलती नफ़रती ऑक्सीजन को बंद करना इतना भी मुश्किल नहीं.

फिर सोशल मीडिया खंगाला तो दिखा कि उस पार के लिए लोग इधर प्यार भेज रहे हैं और इस पार के लोग उधर. जो एक्स अकसर भारत-पाकिस्तान के यूज़र्स को एंग्री इमोजी इस्तेमाल करते देखता था, वो अब दिल वाली इमोजी देख रहा था.

ये बातें एक भारत, पाकिस्तान की नागरिकता वाले कुछ इंसान एक-दूसरे के बारे में कर रहे थे.

मगर ये पहली बार नहीं हुआ है.

अरशद नदीम और नीरज चोपड़ा की दोस्ती

कई मौक़े रहे जब नीरज और अरशद प्रतिद्वंद्वी होने के बावजूद दोस्त भी नज़र आए.

पेरिस ओलंपिक मैच के बाद नीरज, अरशद हाथ मिलाते और गले लगते दिखे.

बीते साल 2023 में वर्ल्ड एथेलेटिक्स चैंपियनशिप में नीरज ने गोल्ड जीता था. तब अरशद ने सिल्वर मेडल जीता था.

इन दोनों खिलाड़ियों के करियर को देखें तो ज़्यादातर मौक़ों पर इनमें से कभी कोई पहले नंबर पर रहता है, कभी कोई दूसरे नंबर पर रहता है.

2022 में अरशद नदीम ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 90 मीटर पार भाला फेंककर गोल्ड मेडल जीता था. चोट के कारण नीरज इस टूर्नामेंट में नहीं खेल रहे थे.

पर दोस्त अरशद को बधाई देने से हिचके नहीं.

नीरज ने तब कहा था- ''अरशद भाई गोल्ड मेडल और नए गेम्स रिकॉर्ड के साथ 90 मीटर की दूरी पार करने के लिए मुबारकबाद. आगे के कॉम्पिटीशन के लिए शुभकामनाएं."

एक तरफ़ भारत पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मुकाबले और इससे निकलती चिंगारियों में झुलसते दोनों तरफ के फैंस.

दूसरी तरफ नुकीले भालों की नोंक पर प्यार का झोला टांगे अरशद और नीरज.

ये प्यार तब भी दिखा था जब टोक्यो ओलंपिक में नीरज ने गोल्ड जीता और अरशद पांचवें नंबर पर रहे.

नीरज ने जब अरशद की मदद के लिए दी सलाह

अरशद और नीरज अब तक 10 मुकाबलों में एक साथ भाला लेकर बतौर प्रतिद्वंद्वी मैदान में उतरे हैं.

नीरज सात बार पहले और तीन बार दूसरे नंबर पर रहे. अरशद चार बार तीसरे स्थान पर रहे और पहली बार पेरिस ओलंपिक में पहले नंबर पर आए. इसलिए ये जीत अरशद के लिए काफी बड़ी है और नीरज के लिए हार भी.

मगर इससे दोनों के रिश्तों या खेल की भावना में कोई फ़र्क़ नहीं दिखता है.

कुछ वक़्त पहले नीरज ने एक इंटरव्यू में कहा था- इस बात पर यकीन करना मुश्किल है कि पाकिस्तानी एथलीट को नए भाले के लिए दिक़्क़तों का सामना करना होता है.

अरशद कई इंटरव्यू में बता चुके हैं कि उन्हें एक पुराने भाले से प्रैक्टिस करनी पड़ती थी.

नीरज चोपड़ा ने तब कहा था- सरकार को मदद करनी चाहिए, जैसे हमारी सरकार करती है. या मैं सलाह दे रहा हूं कि ब्रान्ड से बात करें कि नई जैवलिन दिलवाएं.

अरशद जब घिरे, तब नीरज आगे आए

2023 में वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जब नीरज, नदीम पहले और दूसरे नंबर पर आए थे, तब भी सरोज देवी की कही एक बात चर्चा में आ गई थी.

सरोज देवी ने कहा था, ''मैदान में सारे खेलने वाले हैं. सारे खिलाड़ी हैं. कोई न कोई जीतेगा ही. इसमें पाकिस्तान और हरियाणा जैसी कोई बात नहीं है. बहुत खुशी की बात है. पाकिस्तान वाला जीतता तो उसकी भी बड़ी खुशी थी. नीरज जीता इसकी भी बड़ी खुशी है.''

इसी जीत के बाद नीरज की जब फोटो खिंच रही थी तो वो अरशद को बुलाते हैं. अरशद बिना पाकिस्तान झंडे के वहां पहुंचते हैं और ये तस्वीर खूब वायरल हुई.

तब अरशद ने कहा था- मैं इस बात से ख़ुश हूं कि गोल्ड और सिल्वर मेडल भारत और पाकिस्तान के हिस्से आया.

सरोज बताती हैं कि उनका बेटा नीरज शांत स्वभाव का है, कभी-कभार बचपन में लड़ाई हो गई तो हो गई होगी, वैसे गुस्सा नहीं करता है.

सरोज देवी ने जो कभी-कभार की बात कही, नीरज का वो रुख़ साल 2021 में देखने को मिला था.

सोशल मीडिया और मीडिया में टोक्यो ओलंपिक के बाद ये दावा किया गया था कि अरशद नदीम के पास नीरज का जैवलिन था. कुछ ने ये गलत दावा भी किया कि अरशद जैवलिन से छेड़छाड़ कर रहे थे.

फिर बाद में नीरज ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा था, ''जो मुद्दा उठ रहा है कि जैवलिन मेरे फेंकने से पहले अरशद के पास थी. ये रूल है कि कोई किसी का भी जैवलिन इस्तेमाल कर सकता है.''

नीरज ने लिखा था, ''मेरी आप सभी से विनती है कि मेरे कमेंट्स को अपने गंदे एजेंडे को आगे बढ़ाने का माध्यम ना बनाएं. खेल हम सबको एकजुट होकर साथ रहना सिखाता है. हम सभी जैवलिन थ्रोअर आपस में प्यार से रहते हैं. ऐसी कोई बात ना कहें, जिससे हमको ठेस पहुंचे.''

कोमल मांओं के मज़बूत बेटे

पेरिस ओलंपिक के मेडल जीतने के बाद नीरज उदास दिखे. वीडियो इंटरव्यू के कुछ हिस्सों में वो अपनी उदासी छिपा नहीं पाए.

मेडल पहनने से पहले नीरज के चेहरे से मुस्कान गायब थी.

वहीं गोल्ड जीतने के बाद अरशद का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वो फफककर रोते दिखे.

सरोज और रज़िया इन दोनों मांओं ने अपने बेटों को इतना मज़बूत बनाया कि ये सबके सामने रो सकते हैं, उदासी छिपाने की कोशिश नहीं करते.

पेरिस ओलंपिक में अंकतालिका में भारत और पाकिस्तान भले ही शायद बहुत नीचे की तरफ हों.

मगर मन तालिका में ये दोनों दुश्मन कहलाने वाले दोस्त सरोज और रज़िया की कही बातों से काफी ऊपर आ गए हैं.

किसान के बेटे नीरज और राजमिस्त्री के बेटे अरशद ने दोस्ती की ऐसी नींव रखी है कि दोनों मुल्क के लोग भाला छोड़कर भलाई की इमारत खड़ी कर सकते हैं.

भलाई क्यों चाहिए, इसकी कई मिसालें हैं.

जहां एक देश में दूसरे देश का झंडा दिखाने पर जेल हो जाती है, इसी सच्चाई के बीच एक घर सरोज देवी का है. जहां कई तस्वीरों में एक तस्वीर अरशद नदीम की भी है, सीने पर अपने मुल्क के झंडे को दिखाती हुई. बगल में तिरंगा चिपकाए नीरज भी हैं.

भारत-पाकिस्तान के झंडे एक साथ आस-पास हँसते हुए चेहरों के साथ कम ही दिखते हैं. बँटवारे के बाद हुई कितनी ही द्विपक्षीय वार्ताओं की मेज़ों पर रखे झंडे इसके गवाह रहे हैं.

सरोज, रज़िया की परवरिश और ख़्याल ऐसी वार्ताओं के लिए मिसाल बन सकते हैं. शायद कोई रिकॉर्ड वहां भी बन जाए.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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