You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
उत्तरकाशी: सांप्रदायिक तनाव के बीच धारा 144 लागू, क्या कह रहे हैं आम लोग
आसिफ़ अली
बीबीसी हिंदी के लिए, उत्तरकाशी से
उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले के पुरोला में 15 जून को प्रस्तावित महापंचायत को देखते हुए प्रशासन ने धारा 144 लागू करने का फ़ैसला किया है.
क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए और किसी भी टकराव की आशंका को टालने के लिए प्रदेश भर से पुलिस फ़ोर्स को पुरोला नाम के इस छोटे से कस्बे में जमा किया गया है.
पुरोला बाज़ार में बुधवार की शाम बिल्कुल अलग नज़ारा था. शाम को क़रीब पांच बजे जब सैकड़ों पुलिसकर्मियों का दस्ता बाज़ार में फ्लैग मार्च करते हुए निकला, तो दुकानदारों, ख़रीदारी करने आए लोगों के चेहरों पर सवाल साफ़ देखे जा सकते थे.
कई लोगों का कहना है कि पहली बार पुरोला में उन्होंने इस तरह पुलिस का जमावड़ा देखा. कई लोग पुलिस के इस फ्लैग मार्च को अपने मोबाइल फ़ोन में भी रिकॉर्ड कर रहे थे.
क्या है मामला?
पुरोला कस्बे में एक मुस्लिम युवक उबेद और एक अन्य युवक जितेंद्र सैनी को स्थानीय लोगों ने 26 मई को नौवीं कक्षा की एक नाबालिग़ स्थानीय हिंदू लड़की के साथ पकड़ा था. लोगों ने इन्हें पुलिस के हवाले कर दिया था.
आरोप है कि दोनों युवक लड़की को भगाकर ले जा रहे थे. दोनों युवकों के ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट में मुक़दमा दर्ज कर उबेद और जितेंद्र को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.
इस घटना के बाद से पुरोला में मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ विभिन्न संगठनों ने मोर्चा खोल दिया. हिंदू संगठनों ने दावा किया कि युवक लड़की को बहला फुसला रहे थे.
मामले को लेकर स्थानीय व्यापारियों और निवासियों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया और यहां के व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद करवा दिए.
हिंदू संगठनों ने मांग की है कि पहले बाहर से आए प्रत्येक व्यक्ति का वेरिफ़िकेशन किया जाए. इस मांग को लेकर इन संगठनों ने उत्तरकाशी ज़िले के पुरोला और बड़कोट में जुलूस निकाला.
इस दौरान मुस्लिम व्यापारियों के दुकानों और संगठनों के बोर्ड और बैनर फाड़े गए. बड़कोट में मुसलमान समुदाय के लोगों की दुकानों पर क्रॉस के चिह्न लगाए गए जबकि पुरोला में उनकी दुकानों के सामने पोस्टर चिपकाए गए.
इन पोस्टरों पर लिखा था, "लव जिहादियों को सूचित किया जाता है कि 15 जून 2023 को होने वाली महापंचायत से पहले अपनी दुकानें ख़ाली कर दें. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो आगे वो वक़्त पर निर्भर करेगा."
इसके बाद फैले दहशत के कारण अब तक यहां मुसलमानों ने अपनी दुकानें नहीं खोली हैं. जिन मुसलमान व्यापारियों के पास यहां से बाहर दुकान खोलने का विकल्प था, उन्होंने यहां आनन-फानन में दुकानें ख़ाली की और पलायन कर गए.
इसके बाद से ही पुरोला समेत पूरे उत्तरकाशी ज़िले में तनाव का माहौल है. .यहां विभिन्न संगठनों की ओर से राज्य सरकार से इस पर ज़रूरी क़दम उठाए जाने की मांग की जा रही है.
मुस्लिम सेवा संगठन ने भी बुलाई महापंचायत
देहरादून में मुस्लिम सेवा संगठन ने 18 जून को महापंचायत बुलाने की बात की है.
पुरोला मामले पर संगठन के अध्यक्ष नईम क़ुरैशी ने कहा, "यह महापंचायत सरकार के नीतियों के ख़िलाफ़ हल्ला बोल है. हमें सरकार की ख़राब नीतियों को जनता के सामने लाना है."
उन्होंने बताया, "देहरादून में मौजूद पुराने बस अड्डे के पास यह महापंचायत होगी. इसमें देहरादून शहर क़ाज़ी अध्यक्षता करेंगे. केवल पुरोला इसका मुद्दा नहीं है, बल्कि और भी कई मुद्दे हैं. इस महापंचायत का मक़सद बेरोज़गारी, यूकेएसएसएस में धांधली और अंकिता हत्याकांड में न्याय ना मिलना जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे."
प्रशासन का क्या कहना है?
पुरोला में महापंचायत आयोजित करने को लेकर प्रशासन ने किसी भी संगठन को अनुमति नहीं दी है. पुरोला में एडीएम तीरथपाल सिंह ने बीबीसी को बताया कि पुलिस बल शांति बहाल करने के लिए इलाक़े में फ्लैग मार्च निकाल रहे हैं.
उन्होंने बताया, "गुरुवार को महापंचायत आयोजित करने की अनुमति मांगी गई थी लेकिन हमने किसी को इसकी अनुमति नहीं दी है. 19 जून तक शहर में धारा 144 लागू रहेगी."
15 जून को महापंचायत आयोजित करने का एलान करने के बाद महापंचायत की अगुवाई को लेकर ग्राम प्रधान संगठन, पुरोला अब बैकफुट पर आया गया है.
संगठन ने बीते सोमवार को पुरोला के एसडीएम देवानंद शर्मा को ज्ञापन सौंपकर महापंचायत आयोजित करने की जानकारी दी थी.
वहीं अब संगठन की तरफ़ से मंगलवार को एसडीएम को जो ज्ञापन दिया गया है, उसमें कहा गया है कि महापंचायत को लेकर संगठन किसी प्रकार की अगुआई नहीं करेगा.
देवानंद शर्मा ने बताया, “प्रधान संगठन ने पत्र देकर सूचित किया है कि संगठन महापंचायत में शामिल नहीं होगा. लेकिन वहीं अब बजरंग दल ने इस महापंचायत को शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित करने की सूचना दी है. मगर बजरंग दल को भी इसके लिए अनुमति नहीं दी गई है.”
संगठन के पीछे हटने के बाद वीएचपी ज़िद पर अड़ा
संगठन के महापंचायत में हिस्सा लेने के फ़ैसले से पीछे हटने के बाद बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद ने महापंचायत करने का ऐलान किया है.
पुरोला में महापंचायत करवाने को लेकर हिंदू संगठन पूरी तरह से अड़े हुए हैं.
विश्व हिंदू परिषद के पुरोला शाखा के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र रावत का कहना है, "15 जून को जिस महापंचायत के आयोजन का एलान किया गया था, उसे हम ज़रूर करेंगे. प्रशासन की तरफ़ से धारा 144 लगाई गई है लेकिन वो निरर्थक है. यहां 144 लगाने का कोई मतलब नहीं बैठता, यहां बड़ा शांतिपूर्ण माहौल है."
उन्होंने कहा, "प्रशासन का यह फ़ैसला निंदनीय है. यह प्रदेश सरकार और हिंदूवादी संगठनों को बदनाम करने की साज़िश है. यहां समुदाए विशेष के लोग आराम से रह रहे है और हिंदू लोगों के द्वारा उनके साथ कोई अभद्रता नहीं की गई है."
वीरेंद्र रावत ने यह भी दावा किया कि, "जो लोग अपने घर छोड़कर यहां से चले गए हैं वो लोग दरअसल यहां अवैध रूप से रह रहे थे. उनके पास अपनी पहचान साबित करने का कोई ज़रिया नहीं था और जब सत्यापन का काम शुरू हुआ तो वो घर छोड़कर चले गए. किसी हिंदू समाज या हिंदू संगठन के व्यक्ति ने उन्हें जाने के लिए नहीं कहा."
आम लोगों का क्या कहना है?
घटनाक्रम के क़रीब 20 दिन बीत जाने के बाद भी पुरोला के मुसलमान व्यापारियों की दुकानें बंद हैं.
मोहम्मद जावेद का कहना है, "पुरोला में मौजूदा हालात के चलते हम बेहद परेशान हैं. हमारे लिए खाने और ख़र्चे की दिक़्क़तें आ रही हैं. कुछ समझ में नहीं आता. अब क्या किया जाए, मैं परिवार में अकेला कमाने वाला हूँ."
वो कहते हैं, "दुकान बंद हुए अब क़रीब 20 रोज़ हो गए हैं. हम लोग इधर-उधर से उधार करके खा रहे हैं. गैस सिलिंडर ख़त्म हो गया है तो चूल्हे पर खाना पकाकर गुज़ारा कर रहे हैं. बच्चों को स्कूल कॉलेज जाने में दिक्क़त पेश आ रही है. दहशत होती है कि बच्चों को बाहर भेजें या ना भेजें."
"जो लोग सम्पन्न थे वो इस माहौल को देखकर यहां से चले गए. हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, हम कहां जाएं."
पुरोला में अपनी माँ के साथ रह रहे सैफ़ ने बताया कि उनकी दुकान बंद हो गई है, जिस कारण उनके परिवार का गुज़र-बसर बड़ी मुश्किल से हो पा रहा है.
सैफ़ ने बताया, "जब से पुरोला में महापंचायत की बात छेड़ी गई है, तभी से यहां माहौल दहशत-भरा हो गया है."
वो कहते हैं, "मेरी दुकान किराए की है. दुकान का किराया भी चढ़ रहा है और अभी यह भी नहीं मालूम कि अब दुकानें कब खुलेंगी. हम लंबे वक़्त से पुरोला में रह रहे हैं, हमारा कहीं ओर कोई ठिकाना भी नहीं है. आईडी कार्ड और राशन कार्ड सब कुछ यहीं का है, हम कहां जाएं?"
महापंचायत के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि कोई भी क़ानून को अपने हाथों में ना ले.
मुख्यमंत्री धामी ने कहा है, "अभी तक जितनी भी घटनाएं हुई हैं, प्रशासन ने उस पर सही तरह से काम किया है."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)