6174: एक रहस्यमयी संख्या, जो दशकों से गणितज्ञों के लिए बनी हुई है पहेली

मैजिक नंबर 6174
इमेज कैप्शन, मैजिक नंबर 6174
    • Author, डेलिया वेंचुरा
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ मुंडो

नंबर 6174 को ध्यान से देखिए.

पहली नज़र में ये कुछ ख़ास नहीं दिखता लेकिन साल 1949 से यह गणितज्ञों के लिए एक पहेली बना हुआ है.

इसकी वजह क्या है? इसे समझने के लिए इन कुछ दिलचस्प तथ्यों को देखिएः

कोई भी चार अंकों की संख्या अपने मन से चुनिए, लेकिन कोई भी अंक दोबारा नहीं आना चाहिए, उदाहरण के लिए 1234.

इन्हें घटते क्रम में लिखिए: 4321

अब इन्हें बढ़ते क्रम में लिखें: 1234

अब बड़ी संख्या से छोटी संख्या को घटा दीजिए: 4321 - 1234

अब नतीजे में मिली संख्या के साथ 2,3 और चार बिंदुओं को दोहराइए.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

आईए इसे करके देखते हैंः

4321 - 1234 = 3087

इन अंकों को घटते क्रम में रखें: 8730

अब इन्हें बढ़ते क्रम में रखें: 0378

अब बड़ी संख्या में से छोटी संख्या को घटा दीजिए: 8730 - 0378 = 8352

नतीजे में मिली संख्या के साथ ऊपर की तीनों प्रक्रियाओं को दोहराएं

अब संख्या 8352 के साथ यही करके देखते हैं-

अब संख्या 8352 के साथ यही करके देखते हैं

गणितज्ञों के लिए 1949 से ही 6174 एक पहेली बना हुआ है

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, गणितज्ञों के लिए 1949 से ही 6174 एक पहेली बना हुआ है
  • 8532 - 2358 = 6174

6174 के साथ इस प्रक्रिया को दोहराते हैं, यानी बढ़ते और घटते क्रम में रखने के बाद घटाते हैं.

7641 - 1467 = 6174

जैसा कि आप देख सकते हैं, इसके बाद फिर से ये प्रक्रिया दोहराने का कोई मतलब नहीं क्योंकि नतीजा वही मिलेगा: 6174

लेकिन हो सकता है कि आप सोचें कि ये महज़ संयोग है. तो चलिए किसी दूसरे नंबर के साथ ये प्रक्रिया दोहराते हैं. मान लीजिए 2005 को लेते हैं.

5200 - 0025 = 5175

7551 - 1557 = 5994

9954 - 4599 = 5355

5553 - 3555 = 1998

9981 - 1899 = 8082

8820 - 0288 = 8532

8532 - 2358 = 6174

7641 - 1467 = 6174

आप ख़ुद देख सकते हैं, चाहे कोई भी चार अंक आप चुनें अंतिम नतीजा 6174 मिलता है, और इसके बाद उसी प्रक्रिया के साथ यही नतीजा मिलना जारी रहता है.

भारतीय गणितज्ञ की खोज

साल 1949 में मद्रास में हुए एक गणित सम्मेलन में काप्रेकर ने दुनिया को इस संख्या से परिचित कराया

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, साल 1949 में मद्रास में हुए एक गणित सम्मेलन में काप्रेकर ने दुनिया को इस संख्या से परिचित कराया
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

भारतीय गणितज्ञ दत्तात्रेय रामचंद्र काप्रेकर (1905-1986) को संख्याओं के साथ प्रयोग करना बेहद पसंद था और इसी प्रक्रिया में उनका परिचय इस रहस्यमयी संख्या 6174 से हुआ.

साल 1949 में मद्रास में हुए एक गणित सम्मेलन में काप्रेकर ने दुनिया को इस संख्या से परिचित कराया.

वो कहा करते थे, "जिस तरह मदहोश बने रहने के लिए एक शराबी शराब पीता है. संख्याओं के मामले में मेरे साथ भी बिल्कुल ऐसा ही है."

वो मुंबई विश्विद्यालय से पढ़े थे और महाराष्ट्र के देवलाली क़स्बे में एक स्कूल में पढ़ाते हुए उन्होंने अपनी ज़िंदगी गुज़ारी थी.

हालांकि उनकी खोज का मज़ाक़ उड़ाया गया और भारतीय गणितज्ञों ने इसे ख़ारिज कर दिया. अक्सर उन्हें स्कूल और कॉलेजों में उनके विशेष तरीक़े पर बात रखने के लिए बुलाया जाता था.

धीरे-धीरे उनकी खोज को लेकर भारत और विदेशों में चर्चा होने लगी और 1970 के दशक तक अमेरिका के बेस्ट सेलिंग लेखक और गणित में रुचि रखने वाले मार्टिन गार्डर ने उनके बारे में एक लोकप्रिय साइंस मैग्ज़ीन 'साइंटिफ़िक अमेरिका' में लिखा.

आज काप्रेकर और उनकी खोज को मान्यता मिल रही है और इस पर दुनिया भर के गणितज्ञ काम कर रहे हैं.

ओसाका यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स के प्रोफ़ेसर युताका निशियामा का कहना है, "संख्या 6174 वाक़ई रहस्यों से भरी है."

एक ऑनलाइन मैग्ज़ीन +प्लस में निशियामा ने लिखा कि कैसे उन्होंने संख्या 6174 को पाने के लिए सभी चार अंकों के साथ प्रयोग करने के लिए कम्प्यूटर का इस्तेमाल किया था.

उनका नतीजा था कि हर चार अंकों की संख्या, जिसमें सभी अंक अलग अलग हों, काप्रेकर की प्रक्रिया के तहत सात चरण में संख्या 6174 तक पहुंचा जा सकता है.

निशियामा के अनुसार, "अगर आप काप्रेकर की प्रक्रिया को सात बार दोहराने के बाद भी 6174 तक नहीं पहुंच पाते हैं तो आपने ज़रूर कोई ग़लती की है और आपको फिर से कोशिश करनी चाहिए."

मैजिक नंबर्स

मैजिक नंबर

लेकिन इस तरह की कई विशेष संख्याएं होती हैं, जिनकी ठीक-ठीक संख्या पता नहीं है.

लेकिन इतना ज़रूर है कि काप्रेकर कॉन्स्टैंट की तरह ही तीन अंकों के लिए भी एक ऐसा ही तरीक़ा है.

मान लीजिए हमने एक संख्या चुनी 574, आईए इसके साथ ही वही प्रक्रिया दोहराते हैं.

754 - 457 = 297

972 - 279 = 693

963 - 369 = 594

954 - 459 = 495

954 - 459 = 495

और इस तरह आपको हासिल होता है एक और मैजिक नंबर 495.

गणितज्ञों का कहना है कि ये कॉन्स्टैंट (अपरिवर्तित संख्याएं) केवल तीन और चार अंकों वाली संख्याओं के साथ ही मिलते हैं.

टेक्नीकलर में 6174

ये नंबर्स बच्चों में गणित के प्रति दिलचस्पी भी पैदा कर सकते हैं

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, ये संख्याएँ बच्चों में गणित के प्रति दिलचस्पी भी पैदा कर सकती हैं

मुंबई की सीग्राम टेक्नोलॉजीज़ फ़ाउंडेशन ने ग्रामीण और आदिवासी स्कूलों के लिए आईटी लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म विकसित किया है.

इसने 6174 संख्या को अपने विषय में शामिल किया और तय किया कि इसके अंकों को रंगों के साथ प्रदर्शित किया जाए.

फ़ाउंडेशन के संस्थापक गिरीश आराबाले ने बीबीसी को बताया कि बच्चों में वो गणित की रुचि पैदा करने की कोशिश करते हैं.

वो कहते हैं, "काप्रेकर कॉन्स्टैंट इतना आकर्षक है कि जब आप उसके बताए तरीक़े अपनाते हैं तो वो आपको अंत में एक ऐसे पल पर ले जाता है जहां आपकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता. ये ऐसा है कि परम्परागत गणित पाठ्यक्रम सीखते हुए नहीं मिल सकता."

आराबेल की टीम ने 6174 तक पहुंचने में जितने चरण लगते हैं उन्हें कलर कोड के रूप में प्रदर्शित करने का फैसला किया. वो इस बात को जानते थे कि मैजिक नंबर तक पहुंचने में सात गणना से अधिक नहीं लगता.

मैजिक नंबर तक पहुंचने में सात चरण होते हैं जैसे शून्य के लिए सफेद, एक के लिए पीला और इसी तरह लाल तक.
इमेज कैप्शन, मैजिक नंबर तक पहुंचने में सात चरण होते हैं, जैसे शून्य के लिए सफेद, एक के लिए पीला और इसी तरह लाल तक.

ये उस कोड का आधार बना, जिसे रैसपबेरी पाई पर रिक्रिएट किया जा सकता है. असल में ये सस्ता और क्रेडिट कार्ड के आकार का एक कम्प्यूटर होता है जो कि साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित की पढ़ाई में आम तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.

इसके बाद छात्र, वोल्फ्रेम लैंग्वेज (कंप्यूटर की गणितीय भाषा) का इस्तेमाल करते हुए इसकी व्याख्या और मौजूदा चार अंकों वाले 10,000 नंबर के लिए विश्लेषण कर सकते हैं.

संख्या 6174 तक पहुंचने के लिए ये कंप्यूटर लैंग्वेज एक पैटर्न बनाती है और इससे एक बहुरंगीय ग्रिड का निर्माण होता है.

क्या आप इसमें कोई पैटर्न देखते हैं

इमेज स्रोत, Scigram Technologies Foundation

इमेज कैप्शन, क्या आप इसमें कोई पैटर्न देखते हैं

एक बार जब आप कोडिंग शुरू करते हैं तो अगर आपको विषम संख्याएं नीले रंग में और सम संख्याएं हरे में दिखें तो इसका क्या मतलब होगा?

पैटर्न की तुलना करें: यहां विषम संख्याएं नीले रंग में जबकि हरे में सम संख्याए हैं.

इमेज स्रोत, Scigram Technologies Foundation

इमेज कैप्शन, पैटर्न की तुलना करें: यहां विषम संख्याएं नीले रंग में जबकि हरे में सम संख्याए हैं.

और अगर आप प्राइम नंबर्स को हरे में दिखाते हैं और बाक़ी की संख्याएं नीले में दिखाई दें. क्या पैटर्न पूरी तरह बदला गया?

प्राइम नंबर हरे में हैं जबकि बाकी नीले में हैं.

इमेज स्रोत, Scigram Technologies Foundation

इमेज कैप्शन, प्राइम नंबर हरे में हैं जबकि बाकी नीले में हैं

खेल-खेल में गणित सीखना

इससे खेल-खेल में गणित सीखने में मदद मिलती है

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, इससे खेल-खेल में गणित सीखने में मदद मिलती है

काप्रेकर का कॉन्स्टैंट केवल खेल-खेल में गणित सीखने के तरीक़े में ही योगदान नहीं है.

आपने काप्रेकर नंबर के बारे में भी ज़रूर सुना होगा. इसमें एक संख्या है जिसका वर्ग किया जाए तो इसके नतीजे को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है जिसका जोड़ मूल संख्या को दर्शाता है.

इसको कुछ इस तरह से समझ सकते हैंः

297² = 88,209

88 + 209 = 297

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)