नए तारे क्यों नहीं बन रहे हैं, क्या ठंडा होता जा रहा है ब्रह्मांड?

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- Author, फ़र्नांडो दुराते
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
कुछ भी हमेशा नहीं रहता… हमारा ब्रह्मांड भी नहीं रहेगा.
पिछले बीस सालों में खगोलविदों को ऐसे संकेत मिले हैं कि ब्रह्मांड का सुनहरा दौर ख़त्म हो गया है. एक स्पष्ट संकेत यह है कि अब पहले की तुलना में बहुत कम नए तारे बन रहे हैं.
ध्यान रहे, ऐसा नहीं है कि ब्रह्मांड में तारे खत्म हो रहे हैं. अनुमान है कि इसमें एक सेप्टिलियन (संख्या में- 1 के बाद 24 शून्य) तक तारे हो सकते हैं.
लेकिन खगोलविदों का मानना है कि नए तारों का जन्म अब धीमा पड़ रहा है.
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तारे पैदा होते हैं… और मर जाते हैं
इस बात पर वैज्ञानिक एकमत हैं कि ब्रह्मांड की उम्र करीब 13.8 अरब साल है. पहले तारे बिग बैंग के तुरंत बाद बने थे.
पिछले साल जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने हमारी आकाशगंगा, मिल्की वे, में तीन ऐसे तारे खोजे थे जो करीब 13 अरब साल पुराने माने जाते हैं.
तारे असल में गर्म गैस के विशाल गोले होते हैं और उनकी शुरुआत लगभग एक जैसी होती है.
इन तारों का जन्म अंतरिक्ष में मौजूद धूल और गैस के बड़े बादलों, जिन्हें निहारिका (nebula) कहते हैं, में होता है. गुरुत्वाकर्षण गैस के गुच्छों को खींचता है, वे गर्म होते जाते हैं और इससे एक नवजात तारा या प्रोटोस्टार बनता है.

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जब तारे का केंद्र लाखों डिग्री तक गर्म हो जाता है, तो उसके अंदर मौजूद हाइड्रोजन परमाणु आपस में जुड़कर हीलियम बनाते हैं. इस प्रक्रिया को न्यूक्लियर फ्यूज़न कहते हैं. इसी प्रक्रिया से रोशनी और गर्मी निकलती है और तारा अपने स्थिर 'मुख्य क्रम' चरण में पहुंच जाता है.
खगोलविदों का अनुमान है कि मुख्य क्रम वाले तारे, जिनमें हमारा सूरज भी शामिल है, ब्रह्मांड के कुल तारों का लगभग 90% हिस्सा हैं. इनका आकार सूरज के द्रव्यमान के दसवें हिस्से से लेकर 200 गुना तक हो सकता है.
आखिरकार इन तारों का ईंधन खत्म हो जाता है और फिर अलग-अलग तरीकों से ये मौत का सामना करते हैं.
हमारे सूरज जैसे कम द्रव्यमान वाले तारे, अरबों सालों में धीरे-धीरे अपनी चमक खोते जाते हैं.
लेकिन हमारे सूरज से कम से कम आठ गुना ज़्यादा द्रव्यमान वाली बड़ी तारा 'बहनों' का अंत बहुत नाटकीय होता है... वे एक विशाल धमाके के साथ फट जाते हैं जिसे सुपरनोवा कहते हैं.

पुराने तारों का दबदबा
2013 में तारों के बनने के रुझान का अध्ययन कर रही अंतरराष्ट्रीय खगोलविदों की एक टीम ने दावा किया कि कुल जितने भी तारे बनने हैं, उनमें से 95% अब तक जन्म ले चुके हैं.
उस अध्ययन के प्रमुख लेखक डेविड सोब्राल ने उस समय सुबारू टेलीस्कोप की वेबसाइट पर एक आर्टिकल में लिखा था, "हम साफ़ तौर पर ऐसे ब्रह्मांड में जी रहे हैं जहां पुराने तारों का प्रभुत्व है."
ऐसा लगता है कि ब्रह्मांड की समयरेखा में तारों के बनने का चरम दौर करीब 10 अरब साल पहले था, जिसे कॉस्मिक नून कहा जाता है.
कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के कॉस्मोलॉजिस्ट प्रोफ़ेसर डगलस स्कॉट कहते हैं, "आकाशगंगाएं गैस को तारों में बदलती हैं, और अब उनके काम करने की दर घट गई है."
प्रोफ़ेसर स्कॉट एक अध्ययन के सह-लेखक हैं. यह अध्ययन छपने से पहले की समीक्षा के दौर में है और विश्लेषक उसे देख रहे हैं. इस अध्ययन में यूरोपियन स्पेस एजेंसी के यूक्लिड और हर्शेल टेलीस्कोप के डेटा का विश्लेषण किया गया.
उन्होंने और अंतर्राष्ट्रीय शोधकर्ताओं की उनकी टीम ने एक साथ 26 लाख से ज़्यादा आकाशगंगाओं का अध्ययन किया. यह संभव हो पाया यूक्लिड मिशन की वजह से, जिसका लक्ष्य ब्रह्मांड का विशाल 3डी नक्शा बनाना है.

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खगोलविदों की रुचि ख़ास तौर पर तारों की धूल से निकलने वाली गर्मी में थी. जिन आकाशगंगाओं में ज़्यादा तारे बनते हैं, उनमें धूल ज़्यादा गर्म होती है क्योंकि वहां बड़े और गर्म तारे होते हैं.
प्रोफ़ेसर स्कॉट कहते हैं,"हमने देखा कि पिछले करीब 8 अरब सालों में आकाशगंगाओं का तापमान धीरे-धीरे घट रहा है."
"हम तारों के बनने के चरम समय से बहुत आगे निकल चुके हैं, और हर नई पीढ़ी में कम से कम तारे पैदा होंगे."
ब्रह्मांड ठंडा पड़ रहा है?
यह सच है कि पुराने तारों की मौत के बाद उसी सामग्री का इस्तेमाल करके नए तारे बन सकते हैं, लेकिन यह आसान भी नहीं है.
मान लीजिए हमारे पास घर बनाने का सामान है और हम उससे एक घर बना लेते हैं. अगर हमें नया घर बनाना है, तो हम पुराने घर को तोड़कर कुछ सामान फिर इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन सब कुछ काम का नहीं होगा.
प्रोफ़ेसर स्कॉट समझाते हैं, "हर बार तोड़ने पर इस्तेमाल लायक सामान कम होता जाएगा और इसका मतलब है कि हम हर बार छोटा घर बनाने में ही कामयाब हो पाएंगे, जब तक कि ऐसी स्थिति न आ जाए कि नया घर बनाना मुमकिन ही न रह जाए."
तारों के साथ भी यही होता है.
कॉस्मोलॉजिस्ट कहते हैं, "हर नई पीढ़ी के तारों के पास जलने के लिए कम ईंधन होता है, और यह आखिरकार इतना कम हो जाएगा कि नया तारा बन ही नहीं पाएगा."
"यह बात तो हम जानते ही हैं कि ब्रह्मांड में छोटे द्रव्यमान वाले तारे, बड़े तारों से कहीं ज़्यादा आम हैं."

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वैज्ञानिक बहुत पहले ही यह अनुमान लगा चुके हैं कि एक दिन ब्रह्मांड का अंत होगा. बस इस बारे में वह निश्चित नहीं है कि यह कब होगा और कैसे.
जो थ्योरी सबसे ज़्यादा स्वीकार की गई वह है- गर्मी की मौत या हीट डेथ. इसे बिग फ्रीज़ या भारी जमाव भी कहते हैं.
इसमें कहा गया है कि ब्रह्मांड का विस्तार होते जाने के साथ ऊर्जा इतनी फैल जाएगी कि जीवन को बनाए रखने के लिहाज से गर्मी कम होती जाएगी और ब्रह्मांड बहुत ठंडा पड़ जाएगा. तारे एक-दूसरे से दूर होते जाएंगे, उनका ईंधन खत्म हो जाएगा और नए तारे नहीं बनेंगे.
प्रोफ़ेसर स्कॉट कहते हैं, "ब्रह्मांड में उपलब्ध ऊर्जा सीमित है."
समय अभी बचा है

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लेकिन आसमान को उदासी भरी नज़र से देखने से पहले जान लें कि तारों का अंत अभी बहुत दूर है.
प्रोफ़ेसर स्कॉट का अनुमान है कि नए तारे अगले 10 से 100 ट्रिलियन साल तक बनते रहेंगे- संभवतः हमारे सूरज के ख़त्म होने के बाद भी.
जहां तक बिग फ्रीज़ का सवाल है, यह और भी लंबा समय ले सकता है: इस साल नीदरलैंड्स की रैडबाउड यूनिवर्सिटी के खगोलविदों ने अनुमान लगाया कि ब्रह्मांड का अंतिम अंत करीब एक क्विनविजिंटिलियन साल बाद होगा - यानी 1 के बाद 78 शून्य!
राहत की सांस लें... इसका अर्थ यह है कि अभी बहुत समय है कि किसी दिन जब आसमान साफ़ हो तो चांदनी रात में तारे गिने जाएं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















