बीएमसी में दो साल से नहीं हुए चुनाव लेकिन फंड सिर्फ़ बीजेपी और शिंदे गुट के विधायकों को मिला- प्रेस रिव्यू

एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस

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बृहन्मुंबई महानगर पालिका यानी बीएमसी के दो साल से चुनाव नहीं हुए हैं.

मगर बीते दो सालों में नगर पालिका की ओर से फंड सिर्फ़ सत्ता में बैठी बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिव सेना विधायकों को जारी किए गए हैं.

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने आज इसी पर विशेष रिपोर्ट की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में लिखा है कि बीएमसी ने मुंबई के विकास के लिए 500 करोड़ का फंड सिर्फ़ सत्ता से जुड़े विधायकों को जारी किया.

ये फंड बीते कुछ वक़्त में जब विधायकों की ओर से मांगा गया तो फंड सिर्फ़ उनको जारी किया गया जो बीजेपी या एकनाथ शिंदे की शिव सेना से हैं.

विपक्षी दलों के विधायकों को ये फंड जारी नहीं किया गया है.

मुंबई में कुल 36 विधायक हैं. एकनाथ शिंदे की शिव सेना के पांच और बीजेपी के 16 विधायक हैं. यानी कुल 21 विधायक.

कांग्रेस के चार, उद्धव ठाकरे की शिव सेना के पास नौ, एनसीपी और सपा के पास एक-एक विधायक हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में लिखा है कि बीजेपी विधायकों की ओर से 462 करोड़ रुपये मांगे गए और उन्हें क़रीब 374 करोड़ आवंटित किए गए.

एकनाथ शिंदे की शिव सेना के विधायकों की ओर से 191 करोड़ रुपये मांगे गए और उन्हें 126 करोड़ रुपये आवंटित किए गए.

उद्धव ठाकरे की शिव सेना के विधायकों ने 84 करोड़, कांग्रेस ने 26 करोड़ और सपा ने 25 करोड़ रुपये विकास कार्यों के लिए मांगे थे. मगर बृहन्मुंबई महानगर पालिका की ओर से इन विधायकों को कोई फंड मुहैया नहीं करवाया गया है.

एनसीपी के विधायक नवाब मलिक फ़रवरी 2022 से अगस्त 2023 तक जेल में थे, तो एनसीपी के मांगे गए या मुहैया कराए गए फंड की जानकारी नहीं है.

इन फंड के बारे में जानकारी आरटीआई के ज़रिए मिली है.

बीएमसी का मुख्यालय

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएमसी की नई नीति के तहत मुंबई के हर विधायक को 35 करोड़ तक का फंड दिया जा सकता है.

अखबार ने विपक्ष के उन सभी विधायकों से बात की है, जिन्हें बीएमसी की ओर से फंड नहीं दिया गया.

इत्तेफाक से इन सभी विधायकों ने फंड के लिए तभी अप्लाई किया था, जब सत्ता में बैठे राजनीतिक दलों के विधायकों ने अप्लाई किया था

अख़बार ने बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल से इस बारे में बात करने की कोशिश की मगर वो जवाब देने के लिए उपलब्ध नहीं रहे.

अगर ये फंड जारी किया गया होता तो ये धारावी के ड्रेन सिस्टम, पार्कों के सौंदर्यीकरण जैसे कामों में ख़र्च किया जाता.

ये काम बीएमसी के 227 चुने हुए कॉर्पोरेटर्स का होता है. मगर देश के सबसे अमीर नगर निगम में दो साल से चुनाव नहीं हुए हैं.

ऐसे में 16 फ़रवरी 2023 को बीएमसी में एक रेजोल्यूशन पास किया गया कि शहर को चलाने के लिए ये फंड अब मुंबई के 36 विधायकों के ज़रिए जारी किए जाएंगे.

इस मंजूरी पत्र में कहा गया था- विधायकों और सांसदों की ओर से कई तरह के विकास, निर्माण और सौंदर्यीकरण कामों के लिए फंड की मांग वाले ख़त मिलते रहते हैं. ऐसे में इस नए आदेश को जारी किया जा रहा है.

इस प्रावधान के तहत बीएमसी के 52 हज़ार करोड़ रुपये के बजट में से क़रीब ढाई फ़ीसदी बजट यानी 1260 करोड़ रुपये 38 विधायकों के लिए रखे जाएंगे. हर विधायक को अपने क्षेत्र में विकास के लिए 35 करोड़ रुपये तक दिए जा सकते हैं.

फ़रवरी 2023 से 31 दिसंबर 2023 के बीच 10 महीनों में कमिश्नर इकबाल सिंह चहल ने 500 करोड़ का फंड जारी किया. ये फंड बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के 21 विधायकों को ही जारी किया गया है.

बीएमसी का मुख्यालय

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फंड जारी करने की प्रक्रिया क्या है?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीएमसी की विशेष नीति के तहत गार्डियन मंत्रियों के पास विधायकों के प्रस्ताव को पास करने का अधिकार होता है. विधायकों का ये प्रस्ताव मंत्री बीएमसी को भेजते हैं.

इसके बाद बीएमसी फंड जारी करता है.

इस नीति के आने तक ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, जिसके तहत विधायक बीएमसी से पैसा निकाल सकें.

बीएमसी के प्रावधान को लाने के बाद सीएम एकनाथ शिंदे और मुंबई के दो गार्डियन मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और दीपक केसारकर ने विधायकों के फंड जारी करने वाली गुज़ारिशों को पास करना शुरू किया.

मुख्यमंत्री और गार्डियन मंत्रियों से पास किए जाने के बाद बीएमसी ने विधायकों को फंड जारी करना शुरू किया.

महाराष्ट्र में हर ज़िले में एक गार्डियन मंत्री होता है, जो वहां के विकास से जुड़े मामलों को देखता है.

इंडियन एक्सप्रेस ने जिन दस्तावेज़ों को देखा, उनमें विपक्ष के 11 विधायकों की फंड जारी करने की गुज़ारिशें अब भी गार्डियन मंत्रियों की ओर से पास किए जाने का इंतज़ार कर रही हैं. इनमें से कुछ आवेदन मार्च 2023 से पास किए जाने की राह देख रहे हैं.

वहीं अगर सत्ता पक्ष के विधायकों की गुज़ारिशों को पास करने की बात की जाए तो ये बीएमसी के पास एक हफ़्ते से कम वक्त में पहुंच जाती हैं.

गार्डियन मंत्री लोढ़ा अपने क्षेत्र में विकास के लिए फंड मांगने सीधा बीएमसी के पास गए और फंड मिल गया. लोढ़ा मालाबार हिल से बीजेपी विधायक हैं.

लोढ़ा ने 23 जून 2023 को फंड के लिए बीएमसी कमिश्नर को ख़त लिखा और छह दिन के भीतर ही 28 जून को लोढ़ा को 24 करोड़ फंड जारी हो गया. लोढ़ा ने 30 करोड़ फंड की मांग की थी.

विपक्षी दलों के विधायकों के मामले में ऐसा नहीं हुआ और फंड की गुज़ारिशें अब भी पास होने के इंतज़ार में हैं.

इंडियन एक्सप्रेस ने लोढ़ा से बात की तो वो बोले, ''बिना किसी पार्टी या पक्ष को देखे फंड जारी किया गया है. मौजूदा वक़्त में मेरे पास विपक्ष के किसी विधायक का कोई आवेदन नहीं है. फंड जारी करने में किसी तरह का पक्षपात नहीं हुआ है.''

सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी

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हिमाचल से प्रियंका या सोनिया गांधी राज्यसभा जाएंगी?

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, कांग्रेस हिमाचल प्रदेश से सोनिया गांधी या प्रियंका गांधी वाड्रा को राज्यसभा भेज सकती है. ऐसी चर्चाएं तेज़ हुई हैं.

इन सबके बीच हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा है कि अगर वो चाहती हैं तो सोनिया गांधी या प्रियंका को हिमाचल से राज्यसभा भेजा जा सकता है.

प्रतिभा सिंह बोलीं- ये संभव है, हम इस बारे में उनसे बात करेंगे. अगर उन लोगों को उचित लगेगा तो ये सीट उनको दी जा सकती है.

सोनिया गांधी पांच बार से रायबरेली की सांसद हैं. वो स्वास्थ्य कारणों से अब राजनीति से कुछ दूर नज़र आती हैं.

अखबार लिखता है कि अगर सोनिया गांधी को राज्यसभा भेजा जाएगा तो सवाल ये है कि क्या प्रियंका रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी.

एक दूसरी संभावना ये भी है कि प्रियंका गांधी राज्यसभा में आएं और सोनिया अपने परिवार की पुरानी सीट से ही मैदान में उतरें.

संसद

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बजट सत्र से पहले निरस्त हुआ सांसदों का निलंबन

द देलीग्राफ़ की रिपोर्ट के मुताबिक़, विपक्ष के जिन 14 सांसदों को निलंबित किया गया था, उनके निलंबन को बजट सत्र से पहले निरस्त कर दिया गया है.

संसदीय मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा स्पीकर से इस निलंबन को वापस लेने की अपील की है. दोनों इस पर सहमत हो गए हैं.

जोशी बोले- 14 निलंबित सांसदों को संसद में आने का मौक़ा दिया जाना चाहिए और इस पर उपराष्ट्रपति, लोकसभा स्पीकर तैयार हो गए हैं.

बुधवार को बजट पेश होना है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अंतरिम बजट पेश करेंगी.

ये बजट इसलिए भी ख़ास है क्योंकि इसके बाद लोकसभा चुनाव होने हैं.

बीते संसद सत्र में 146 विपक्षी दलों के सांसदों को निलंबित किया गया था. इनमें से 100 सांसद लोकसभा से निलंबित किए गए थे.

हालांकि ज़्यादातर सांसदों को सिर्फ़ शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित किया गया था, ऐसे में उनका निलंबन सत्र ख़त्म होने के साथ भी ख़त्म हो गया था.

विपक्षी दलों का आरोप रहा है कि मोदी सरकार लोकतंत्र और विरोध की आवाज़ों को कुचलना चाहती है.

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