इंदौर में दूषित पानी: भारत का सबसे साफ़ शहर होने के दावे पर क्यों उठे सवाल

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- Author, समीर ख़ान
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत की ख़बर है.
इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया है कि ये मौतें किन वजहों से हुई है इनकी जांच के लिए एक समिति बनाई गई है.इंदौर को देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है. इंदौर भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान में लगातार आठ बार से नंबर वन पायदान पर आ रहा है.
लेकिन बीते हफ़्ते इंदौर में दूषित पानी से ऐसा संकट पैदा हुआ कि क़रीब 400 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा जबकि 150 से ज़्यादा लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं.
इसके बाद ये सवाल सबसे ज़्यादा खड़ा हुआ कि आख़िर देश के सबसे स्वच्छ शहर में पानी का ये संकट पैदा कैसे हुआ?
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शुरुआती जांच में मालूम चला कि भागीरथपुरा में जिस टंकी का पानी सप्लाई होता है, उसी के पास बनी पुलिस चौकी के टॉयलेट के आउट फ़ॉल्स का दूषित पानी, सप्लाई वाली पाइललाइन में मिक्स हो गया.
इंदौर शहर पूरे देश के लिए एक मिसाल बना हुआ था और इस शहर की सफ़ाई की चर्चा पूरी दुनिया में होती है.

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शहर की सड़कों की रात में सफ़ाई की जाती है. शहर में बेहतर तरीके़ से कचरे का प्रबंधन किया जाता है.
इंदौर के घरों में गीला कचरा और सूखा कचरा अलग-अलग रखा जाता है. यही वजह है कि इंदौर भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान में लगातार आठ बार से नंबर वन आया.
साल 2025 के सर्वे में इंदौर के साथ गुजरात के सूरत शहर को स्वच्छ भारत अभियान में नंबर वन चुना गया.
पीने के पानी में मिला शौचालय का दूषित जल

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इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "शुरुआती जांच में पाया गया है कि भागीरथपुरा की नर्मदा जल की पानी की टंकी जो पुलिस चौकी के पास ही है. वहां पुलिस चौकी की टॉयलेट के ड्रेन पाइप का दूषित पानी पीने के पानी की पाइपलाइन में मिल रहा था. इसे अब ठीक कर दिया गया है."
"आगे भी जांच चल रही है, कहीं कुछ और पाया जाता है तो उसे भी ठीक किया जाएगा."
शिवम वर्मा ने कहा, "यहां नगर निगम के जो ज़ोनल अधिकारी हैं, उन पर कार्रवाई की गई है. आगे ऐसा कुछ न हो इसकी पूरी कोशिश की जाएगी."
उन्होंने कहा, "हमारी टीम लगातार काम कर रही है. उल्टी-दस्त की बीमारी के जो भी मरीज़ आ रहे हैं, उनका इलाज कराया जा रहा है. साफ़ पानी की सप्लाई करना हमारी ज़िम्मेदारी है."
'अगर समय पर पानी का टेस्ट होता तो ये त्रासदी नहीं होती'

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सुधींद्र मोहन शर्मा पूर्व नेशनल नोडल अधिकारी पेयजल सुरक्षा रहे हैं.
वो बताते हैं, "इंदौर की सफ़ाई बाहर से दिखती है. हम झाड़ू कितनी बार लगा रहे हैं, डस्ट कितनी साफ़ कर रहे है, टॉयलेट कितने बना रहे हैं? इसके आंकड़े कहां हैं. कचरे के ढेर को भी मिट्टी के ढेर से ढंका जा रहा है और सफ़ाई में नंबर वन बन गए हैं."
सुधींद्र मोहन शर्मा सवाल करते हैं कि साफ़ पानी हमारी प्राथमिकता क्यों नहीं है?
उन्होंने कहा, "पानी हमारी प्राथमिकता में नहीं है, क्योंकि क्लीनेस्ट सिटी की रैंकिंग में साफ़ पानी का हिस्सा 7 से 8 फ़ीसदी ही है. पीने का पानी कितना घातक है, इसे नापा ही नहीं गया है."
सुधींद्र मोहन शर्मा कहते हैं, "सफ़ाई में जितना काम किया गया वह हमारे लिए गर्व की बात है. लेकिन इंदौर में वॉटर क्वालिटी सर्विलांस और मॉनिटरिंग पर नगर निगम बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा है."
"वॉटर क्वालिटी सर्विलांस का मतलब यह होता है कि सिर्फ़ वॉटर क्वालिटी चेक नहीं करना है आपको उस वॉटर क्वालिटी को रिकॉर्ड भी करना है. इसका लगातार एनालिसिस करते रहना है. जो भारत सरकार के मैनुअल्स हैं, उसके हिसाब से इंदौर में कम से कम दस सैंपल हर दिन लिए जाने चाहिए."
उन्होंने कहा, "ऐसा करने पर अलग-अलग इलाक़ों में एक महीने में पूरा इंदौर कवर हो जाएगा. पूरे इंदौर शहर को कवर करने के लिए 300 से ज़्यादा सैंपल लिए जाने की ज़रूरत है. ऐसा करके ही दूषित पानी का पता लगाया जा सकता है."
पानी की समस्या का समाधान अभी भी नहीं

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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की समस्या का निदान अभी भी नहीं हुआ है. पूरे इलाके़ में टैंकर से पानी की सप्लाई की जा रही है.
बीते हफ्ते हुई त्रासदी में दूषित पानी से सबसे ज़्यादा समस्या बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को हुई. 19 साल की प्रियांशी बागोरिया छह महीने की गर्भवती हैं. उन्हें 25 दिसंबर को उल्टी दस्त की शिकायत हुई. दस्त नहीं रुकने पर उन्हें 27 दिसंबर को एमटीएच अस्पताल में भर्ती किया गया और दो जनवरी को अस्पताल से छुट्टी मिली.
प्रियांशी के पति अभिनव बागोरिया ने बताया, "तीन अलग-अलग अस्पताल वालों ने पहले इलाज नहीं किया. सबसे पहले हम निजी अस्पताल त्रिवेणी पहुंचे वहाँ बताया गया कि इलाज में 15 से 20 हज़ार रुपये का ख़र्च आएगा. हम ये ख़र्च नहीं उठा सकते थे."
"फिर सरकारी बीमा लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब भी इलाज नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि कर्मचारी कार्ड होगा तो ही इलाज होगा, फिर एक और सरकारी एमवाय अस्पताल गए. वहां भी इलाज नहीं हुआ. हमें कहा गया कि गर्भवती महिला का एमटीएच अस्पताल में इलाज होगा."
अभिनव ने कहा, "उस अस्पताल में भर्ती कर लिया गया. पिता का पहले से वहां इलाज चल रहा था. मेरे पिता ई-रिक्शा चलाते हैं. जांच में आए 8 से 10 हज़ार रुपये का ख़र्च चाचा की मदद से उठाया."
दूसरे इलाक़ों में भी पानी की समस्या

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इंदौर के भागीरथपुरा के अलावा दूसरे इलाक़ों से भी पानी ख़राब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं.
खंडवा नाका भावना नगर लिंबोदी के वॉर्ड 75 और 77 की ड्रेनेज पाइपलाइन का काम दो-तीन दिन से चल रहा है.
इस इलाके़ के लोगों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वहां बोरिंग से पानी आ रहा है और ड्रेनेज का पानी बोरिंग में मिल जाता है.
इलाके़ के हैंडपंप भी दूषित पानी की सच्चाई को बयां करते हैं.
वहां रहने वाले दीपक ने हमारे सामने हैंडपंप चलाकर दिखाया कि कितना ख़राब पानी आ रहा है. दीपक ने उस हैंडपंप से पानी की बाल्टी भरी तो उसमें मिट्टी के जैसा गंदा पानी था.
दीपक ने कहा, "कई बार इस बात की शिकायत दर्ज कराई गई है. लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















