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नूंह हिंसा, मोनू मानेसर, बिट्टू बजरंगी पर क्या बोले दुष्यंत चौटाला?
हरियाणा के नूंह में 31 जुलाई को हुई सांप्रदायिक हिंसा की आग अब भी पूरी तरह बुझी नहीं है.
इसके बाद कथित अवैध निर्माण को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई और मुसलमानों के बहिष्कार पर हो रही पंचायतें बताती हैं कि माहौल में अब भी तनाव है.
इस मामले पर हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बीबीसी संवाददाता सर्वप्रिया सांगवान से बात की.
उन्होंने कहा कि पुलिस लगातार गिरफ़्तारियां कर रही है, जिन भी लोगों ने आग में घी डालने का काम किया है, उनमें से किसी को नहीं छोड़ा जाएगा.
लेकिन खुद को गौ-रक्षक बताने वाले मोहित यादव उर्फ़ मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी का नाम भी इस मामले में बार-बार आ रहा है. तो हरियाणा पुलिस उन्हें अब तक क्यों नहीं गिरफ़्तार कर पाई है?
दुष्यंत चौटाला कहते हैं, “क्या दो ही लोगों ने इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे दिया? उन दोनों को भी गिरफ़्तार करने की जो कार्रवाई पुलिस को करनी है, वो करेगी. राजस्थान के सीएम का बयान आया था. हमने तो अगले ही दिन कहा था कि आप अपनी टीम भेजिए. आपको लोकेशन पता है तो आप अपनी टीम भेज दीजिए, हमारी पुलिस सहयोग करेगी. राजस्थान की पुलिस तीन बार उनके घर छापे मार चुकी है. अब हरियाणा पुलिस भी छापे मार रही है.”
'ख़ुद को गौरक्षक बोलने वालों के घर में गाय है?'
दुष्यंत चौटाला पहले भी एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में कह चुके हैं कि नूंह में माहौल भिवानी में हुई नासिर-जुनैद की हत्या के बाद से बिगड़ा है.
नासिर-जुनैद की हत्या के बाद हरियाणा सरकार ने गौ-तस्करी रोकने और खुद को गौ-रक्षक कह कर क़ानून हाथ में लेने वाले लोगों पर लगाम लगाने के लिए ज़िला स्तरीय कमेटियां बनाने की भी बात कही थी.
लेकिन उसके बाद भी हरियाणा में इस तरह की घटनाएं हुई जहां ये गौ-रक्षक क़ानून अपने हाथ में लेते हैं, फोटो वीडियो भी अपलोड करते हैं. तो सरकार इन्हें रोक क्यों नहीं पा रही है?
उप-मुख्यमंत्री कहते हैं, ''ये सिर्फ़ हरियाणा, मेवात या नूंह का मामला नहीं है. पूरे देश के अंदर ऐसी घटनाएं हो रही हैं. मॉब लिचिंग हो रही है. ये लोग अपने आप को गौ-रक्षक बोलते हैं, इनमें से किस के घर में गाय है? हमें समाज के तौर पर भी समझना पड़ेगा कि हम ऐसे लोगों को क्यों एंटरटेन कर रहे हैं!''
नूंह हिंसा के बाद हरियाणा के लगभग सभी बड़े नेताओं ने कहा कि पिछले कुछ वक़्त से माहौल बिगाड़ने की साज़िश हो रही है. तो जब ये बात सरकार के संज्ञान में थी ही तो फिर क्यों नहीं रोका जा रहा साज़िश करने वालों को?
वे जवाब देते हैं, “एक एलिमेंट नहीं है. पुलिस की जांच के बाद एक चीज़ उभर कर आई है कि इसमें राजस्थान के लोग भी शामिल हैं. वहां से यहां एक-एक आदमी रिश्तेदारी में आता है, आप एक-एक गाड़ी चेक नहीं कर सकते. वहां तलवारें निकली हैं, हथियार मिले हैं, गोलियां चली हैं, ये सब यहां तक कैसे पहुंचा, ये सब जांच का हिस्सा है. मुझे लगता है कि पुलिस को अपना काम करने दीजिए.”
सबसे ज़्यादा प्रभावित मुसलमान
इस हिंसा के बाद प्रशासन ने नूंह क्षेत्र में अवैध निर्माण कहते हुए कई लोगों की दुकानें और घर गिराए. इसमें प्रभावित होने वाले ज़्यादातर लोग मुसलमान थे.
दुष्यंत चौटाला कहते हैं कि जहां टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नोटिस थे, वहां पुलिस और अन्य बल लगाकर ऐसी कार्रवाई की जाती है. ये कोई पहली बार नहीं है. ये ज़रूर है कि इस तनाव के बीच में कार्रवाई हुई. अगर वहां नोटिस नहीं दिए गए और फिर कार्रवाई हुई है, तो वे अपना हलफ़नामा कोर्ट में देंगे.
प्रशासन की इस कार्रवाई पर हरियाणा एंड पंजाब हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है और उसके आदेशानुसार कार्रवाई रोक दी गई है.
इसके अलावा हरियाणा में कई पंचायतों ने मुसलमानों के बहिष्कार को लेकर भी फ़रमान जारी किए.
दुष्यंत कहते हैं कि डिप्टी कमिश्नरों ने इन पंचायतों को नोटिस जारी कर दिए हैं.
उन्होंने कहा, “जिसने भी सांप्रदायिक बात लिख कर दी है, उसके ख़िलाफ़ एक्शन लेंगे. डिप्टी कमीश्नरों को ये अधिकार है कि वे पंचायती राज एक्ट के अंतर्गत इनके ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई करें. कहीं अगर नहीं लिए जाते हैं तो बीबीसी मुझे आकर बताए, मैं एक्शन लूंगा.”
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