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धर्मस्थला मामला: एसआईटी ने शिकायतकर्ता के ख़िलाफ़ दाखिल की रिपोर्ट
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी के लिए, बेंगलुरु से
धर्मस्थला मामले में विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने पूर्व सफाईकर्मी सीएन चिन्नैया और उनके पाँच सहयोगियों के ख़िलाफ़ अदालत में 4,000 पन्नों की एक रिपोर्ट दाखिल की है.
इन सभी पर बलात्कार और हत्या के बाद महिलाओं के शवों को अवैध तरीक़े से दफ़नाने की झूठी कहानियां गढ़ने और झूठे गवाह बनाने की साज़िश का आरोप लगाया गया है.
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 215 के तहत 4,000 पन्नों की इस रिपोर्ट को तकनीकी रूप से अदालती प्रक्रिया को बेबुनियाद मामलों और क़ानून के दुरुपयोग से बचाने के लिए की गई शिकायत माना जाता है.
सीएन चिन्नैया के अलावा जिन लोगों के नाम इस रिपोर्ट में हैं वो हैं- गिरीश मट्टेन्नावर, महेश शेट्टी टिमारोडी, टी. जयंत, विठ्ठल गौड़ा और सुजाता भट्ट.
पिछले सप्ताह एसआईटी ने कर्नाटक हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर इन पर झूठे गवाह बनाने, जालसाज़ी करने और भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की थी.
कर्नाटक के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (जिनका इस मामले से कोई नाता नहीं है) ने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी न्यूज़ हिंदी से कहा, "अदालत में शपथ लेकर झूठ बोलना कोई छोटा अपराध नहीं है. इसे गंभीर अपराध माना जाता है."
क्या है मामला?
तीन जुलाई को चिन्नैया ने बेलथंगडी पुलिस में शिकायत दी कि उन्होंने एक रसूख़दार परिवार और उनके कर्मचारियों के कहने पर सैकड़ों शवों को दफ़नाया था.
उन्होंने आरोप लगाया कि 1995 से 2014 के बीच दफ़नाए गए इन शवों में कई महिलाएं थीं, जिन्हें यौन उत्पीड़न के बाद मार दिया गया था.
इस आरोप के बाद ये घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई.
पुलिस में शिकायत के बाद उन्होंने मैजिस्ट्रेट के सामने भी बयान दिया. अपने दावे को पुख़्ता बताने के लिए वह एक खोपड़ी लेकर अदालत में पहुँचे थे.
उन्होंने दावा किया कि वह 10 साल बाद कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ ज़िले में मौजूद धर्मस्थला पहुंचे ताकि वो अपनी आत्मा का बोझ हल्का कर सकें.
उनके लगाए आरोप इसलिए भी सुर्खियों में रहे क्योंकि उन्होंने धर्मस्थला को लेकर ये आरोप लगाए थे.
इस जगह पर मंजुनाथ स्वामी (शिव का एक रूप) का प्रसिद्ध मंदिर है, जहाँ हर दिन देशभर से हज़ारों श्रद्धालु आते हैं.
जांच में क्या हुआ?
एसआईटी की टीम चिन्नेया को लेकर उन जगहों पर गई, जहां उन्होंने महिलाओं के शव दफ़नाने का दावा किया था.
उन्होंने 14 से अधिक जगहों की पहचान की पुष्टि की जिसके बाद मैजिस्ट्रियल अधिकारियों की मौजूदगी में उन जगहों की खुदाई करवाई गई.
कुछ जगहों से जांच टीम को कंकाल के अवशेष मिले, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया.
इसके बाद 23 अगस्त को एसआईटी ने चिन्नैया को झूठी गवाही देने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया.
फोरेंसिक जांच से पता चला कि अदालत में मैजिस्ट्रेट के सामने जो खोपड़ी उन्होंने "एक महिला की" कहते हुए दिखाई थी वो असल में महिला की नहीं थी.
दो अस्पतालों (एक सरकारी अस्पताल और एक निजी अस्पताल) में किए गए फ़ोरेंसिक जांच में सामने आया कि ये एक पुरुष की खोपड़ी थी. बाद में उन्होंने दावा किया कि उनके एक सहयोगी ने ही उन्हें यह खोपड़ी दी थी.
एसआईटी की रिपोर्ट
गुरुवार को एसआईटी ने अतिरिक्त सिविल जज और प्रथम श्रेणी जुडिशिल मैजिस्ट्रेट सीएच विजेंद्र की अदालत में एक शिकायत दाखिल की है.
अब अदालत को झूठे सबूत पेश करने, सबूतों की जालसाज़ी और अन्य अपराधों से संबंधित इस रिपोर्ट पर संज्ञान लेना होगा.
एसआईटी की शिकायत ऐसे वक़्त दाखिल की गई है, जब चिन्नैया और उनके सहयोगी उसी एफ़आईआर को रद्द कराने की मांग लेकर हाई कोर्ट पहुँचे हैं जो चिन्नैया की शिकायत पर दर्ज हुई थी.
एसआईटी की तरफ़ से पूछताछ के लिए उन्हें दिए गए नोटिस को लेकर गिरीश मट्टेन्नावर और अन्य अभियुक्तों ने अदालत में चुनौती दी थी.
कर्नाटक हाई कोर्ट की एक सदस्यीय बेंच ने शुरुआत में एसआईटी की जांच पर रोक लगाई थी लेकिन 12 नवंबर को यह रोक हटा दी गई.
पिछले सप्ताह हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में एसआईटी ने कहा था कि शिकायतकर्ता (चिन्नैया) पूरी तरह अपने पाँच सहयोगियों के नियंत्रण में था.
नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर अभियोजन पक्ष की टीम के एक सदस्य ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी को बताया कि अदालत में दाखिल की गई रिपोर्ट, अभी पहली रिपोर्ट है, बाक़ी जगहों की जांच पूरी होने के बाद एक सप्लिमेंटरी रिपोर्ट भी दाखिल की जाएगी.
अगस्त और सितंबर में एसआईटी ने अपनी जांच में बंगालेगुड्डे के पहाड़ी इलाक़ों में खुदाई की थी. यहां से पांच खोपड़ियां और कुछ और मानव अवशेष बरामद किए गए थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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