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पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में क्यों हो रहे हैं विरोध प्रदर्शन, भारत ने भी दी प्रतिक्रिया
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर (पीएके) में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर भारत का कहना है कि यह पाकिस्तान के दमनकारी रवैये का नतीजा है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू और कश्मीर के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टें देखी हैं, जिनमें निर्दोष नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना की बर्बरता भी शामिल है."
उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि यह पाकिस्तान के दमनकारी रवैये का नतीजा है. पाकिस्तान को उसके भयावह मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए."
शुक्रवार को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हड़ताल का पांचवां दिन था. इस दौरान सभी बाज़ार, सड़कें और सार्वजनिक परिवहन बंद रहे, जबकि कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने गुरुवार को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर 'गहरी चिंता' व्यक्त की. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण रहने का आग्रह किया और पुलिस को संयम बरतने का निर्देश दिया.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की ओर से बातचीत के लिए बनाई गई कमेटी ने जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी के साथ शुक्रवार को दूसरे दौर की वार्ता की.
गृह राज्य मंत्री का बयान
बीबीसी संवाददाता फरहत जावेद ने इस मामले पर पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी से बातचीत की.
तलाल चौधरी का कहना है, "बातचीत हो रही है. अगर 80 फ़ीसदी आपकी मांगें मान ली जाएं तो हिंसा या विरोध का कोई रास्ता बचता है क्या. हाल ही में केंद्र सरकार ने वहां के लिए कितने बड़े पैकेज दिए हैं और पहले भी जो बातचीत हुई है उस पर अमल किया गया है. अब भी केंद्र सरकार का रवैया बहुत उदार है.
"कश्मीर के प्रति तो शहबाज़ साहब का बहुत नरम रवैया रहा है. यह बहुत अफ़सोसजनक घटना है कि लोगों की जान गई है. गेंद अब उनके (प्रदर्शनकारियों) के पाले में है कि वे जनता की बात मनवाना चाहते हैं या एजेंडा कुछ और है."
क्यों हो रहे हैं विरोध प्रदर्शन?
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में जनता और व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) के आह्वान पर इलाक़े में 29 सितंबर से हड़ताल शुरू की गई.
एक्शन कमेटी के 38 सूत्री 'मांग पत्र' में सरकारी ख़र्च में कटौती से लेकर विधानसभा सीटों पर आपत्ति, मुफ़्त शिक्षा, चिकित्सा सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की स्थापना सहित कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत जैसी मांगें शामिल हैं.
हड़ताल का आह्वान करने वालों का कहना था कि दो साल पहले क्षेत्र में आटा और बिजली की निरंतर और कम दरों पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शुरू हुए आंदोलन में अब अतिरिक्त मांगें भी जुड़ गई हैं. जैसे कि कश्मीरी अभिजात वर्ग को मिलने वाले विशेषाधिकारों में कटौती, शरणार्थियों के लिए 12 आरक्षित विधानसभा सीटों को समाप्त करना और मुफ़्त शिक्षा के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं.
एक्शन कमेटी का आरोप है कि इस बार विरोध प्रदर्शन इसलिए किया जा रहा है क्योंकि सरकार दो साल पहले हुए समझौते को पूरी तरह लागू करने में विफल रही है.
विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए प्रशासन ने अलग-अलग हिस्सों में लैंडलाइन, मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया को आंशिक रूप से बंद कर दिया.
हड़ताल से पहले न केवल पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की सरकार की ओर से एक वार्ता दल का गठन किया गया था, बल्कि संघीय सरकार की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के प्रतिनिधियों ने भी एक्शन कमेटी के सदस्यों से बात की थी.
हालांकि, यह वार्ता विफल रही, जिसके बाद दोनों पक्षों ने बातचीत में प्रगति न होने के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहराया.
हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों के कारण दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
जब हिंसक हुआ विरोध प्रदर्शन
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के राजनीतिक दल मुस्लिम कॉन्फ़्रेंस ने आवामी एक्शन कमेटी के विरोध प्रदर्शन वाले दिन ही शांति मार्च निकालने की घोषणा की थी.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़, पहले दिन आवामी एक्शन कमेटी और मुस्लिम कॉन्फ़्रेंस के बीच झड़प हो गई और विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया.
चश्मदीदों के अनुसार, जब मुस्लिम कॉन्फ़्रेस की शांति मार्च रैली और आवामी एक्शन कमेटी के प्रदर्शनकारी आमने-सामने आए तो एक-दूसरे के ख़िलाफ़ नारे लगाए गए, जिसके बाद तनाव बढ़ गया और गोलीबारी शुरू हो गई.
आवामी एक्शन कमेटी के सदस्य शौकत नवाज़ मीर ने कहा, "हम सुबह से ही शांतिपूर्ण तरीके़ से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन हम पर सुरक्षा बलों की ओर से गोलीबारी की गई. जब तक न्याय नहीं मिल जाता, विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं होगा."
मुज़फ़्फ़राबाद के एसएसपी के मुताबिक़, यह दो गुटों के बीच झड़प का मामला था. उन्होंने बताया कि क़ानूनी कार्रवाई जारी है और अभियुक्तों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है.
आवामी एक्शन कमेटी ने अब तक 9 नागरिकों की मौत का दावा किया है.
पीएके के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
पीएके के चम्याती इलाके़ में हुई झड़पों के दौरान तीन पुलिसकर्मी मारे गए और लगभग 150 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें से आठ की हालत गंभीर बताई जा रही है.
पीएके के प्रधानमंत्री चौधरी अनवारुल हक़ और संघीय मंत्री तारिक फज़ल चौधरी ने एक साझा प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इसकी पुष्टि की है.
अनवारुल हक़ ने कहा, "हिंसा के ज़रिए कोई लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता. संघर्षों का समाधान हमेशा बातचीत के ज़रिए होता है."
संघीय मंत्री तारिक फज़ल चौधरी ने बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उन्हें कमेटी के नेताओं से बातचीत कर समाधान निकालने की ज़िम्मेदारी दी है. उन्होंने कहा, "हमने कमेटी की 90 प्रतिशत मांगें मान ली हैं और आगे भी चर्चा के लिए तैयार हैं."
वहीं, शौकत नवाज़ मीर का कहना है, "बातचीत आरक्षित 12 विधानसभा सीटों और अभिजात वर्ग (शासकों) के विशेषाधिकारों को ख़त्म करने के बाद ही आगे बढ़ेगी."
यह मामला कहां से शुरू हुआ था?
क़रीब दो साल पहले पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के रावलाकोट में कथित आटे की तस्करी को लेकर प्रदर्शन हुए थे. इसके बाद हालात तब और बिगड़े जब बिजली उपभोक्ताओं को दोगुने बिल मिलने लगे.
इस स्थिति के ख़िलाफ़ मई 2023 में लोगों ने प्रदर्शन शुरू किए. 31 अगस्त 2023 को पूरे पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हड़ताल हुई, जगह-जगह प्रदर्शन और गिरफ़्तारियां हुईं. नतीजतन 17 सितंबर को राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए. इसी दौरान जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी बनी.
30 सितंबर 2023 को इस समिति के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों में दर्जनों लोग गिरफ़्तार हुए. इसके जवाब में 5 अक्तूबर को पूरे इलाक़े में चक्का जाम और रैलियां हुईं.
3 नवंबर 2023 को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की सरकार और आवामी एक्शन कमेटी के बीच बातचीत शुरू हुई, लेकिन कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला.
11 मई 2024 को प्रदर्शनकारियों ने अपनी 10 सूत्री मांगों के समर्थन में मुज़फ़्फ़राबाद की ओर लंबा मार्च शुरू किया.
13 मई 2024 को पाकिस्तान सरकार ने दखल दिया और 20 किलो आटे की बोरी की कीमत घटाकर 1,000 रुपये कर दी. घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दर 3 से 6 रुपये प्रति यूनिट और व्यावसायिक उपयोग के लिए 10 से 15 रुपये प्रति यूनिट तय की गई.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित