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कुंभ: अखिलेश के योगी सरकार पर गंभीर आरोप, राजनीतिक रूप से किसको कितना नफ़ा-नुक़सान
- Author, सैयद मोज़िज़ इमाम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पिछले महीने से प्रयागराज में चल रहे कुंभ को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़े-बड़े दावे किए हैं.
लेकिन शिवरात्रि के दिन 26 फ़रवरी को आख़िरी स्नान से पहले विपक्षी समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
विपक्ष ने कुंभ में अव्यवस्था और सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि इस आयोजन में कई तरह के भ्रष्टाचार हुए हैं.
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उनका आरोप है कि शौचालय से लेकर बल्ली गाड़ने तक में घपला हुआ है. उन्होंने इस मामले में जाँच की मांग की है.
कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ने भी योगी सरकार पर आरोप लगाए हैं.
उनका कहना है कि सरकार ने कुंभ का बजट बढ़ाया है, लेकिन अव्यवस्था चरम पर है.
हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने इसको मनगढ़ंत बताया है. बीजेपी ने कहा कि विपक्ष को ये बात हज़म नहीं हो रही कि सनातन का इतना बड़ा आयोजन सफलतापूर्वक हो रहा है.
बीजेपी ने समाजवादी पार्टी का जवाब देते हुए कहा कि अखिलेश यादव को तथ्य देने चाहिए. प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू हुए कुंभ के समापन में अब सिर्फ दो दिन बचे हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को जारी आँकड़ों में बताया है कि अब तक 62 करोड़ लोगों ने प्रयागराज के कुंभ में स्नान किया है.
क्या है अखिलेश का दावा
अखिलेश यादव ने कहा कि महाकुंभ के आयोजन में झूठ बोला गया.
उन्होंने कहा, "ये कुंभ हर 12 साल पर होता है. ये कोई नई बात नहीं है. बीजेपी ने इतना पैसा लगाया, इतना प्रचार किया, लोगों को निमंत्रण दिया और उसके बाद उनके हाल पर छोड़ दिया."
अखिलेश ने कहा, "व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए, क्योंकि मुख्यमंत्री जी ये कहते रहे कि हमने 100 करोड़ लोगों के लिए व्यवस्था की है."
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, "जो ट्रैफ़िक जाम हुआ, जो लोग वॉशरूम नहीं जा पाए, खाना नहीं खा पाए और भगदड़ में लोगों की जान गई. इसका आँकड़ा सरकार नहीं बता पा रही है."
"बड़े पैमाने पर लोग खो गए और आज भी एक्सीडेंट हो रहे हैं. ये डबल इंजन नहीं बल्कि डबल ब्लंडर सरकार है."
समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि ना सरकार ने पर्याप्त बसों की व्यवस्था की और ना ही पर्याप्त ट्रेनों की.
अखिलेश यादव ने कहा कि कुंभ की तैयारी को लेकर सरकार ने दावा किया है कि लगभग 15 हजार करोड़ रुपए ख़र्च किए गए हैं, लेकिन श्रद्धालु अव्यवस्था की वजह से परेशान हैं.
अखिलेश यादव ने दावा किया है कि शौचालय में भ्रष्टाचार हुआ है और कई सौ करोड़ की बल्ली लगा दी गई है.
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने भी कुंभ को लेकर योगी सरकार को घेरा है.
उन्होंने कहा कि इस बार कुंभ का बजट पिछले कुंभ के मुक़ाबले कई गुना बढ़ाया गया था, लेकिन सुविधाएँ नहीं बढ़ी हैं.
उदयवीर सिंह ने कहा, "ऐसी सड़कों का निर्माण होना चाहिए था कि श्रद्धालु एक तरफ़ से आएँ और दूसरी तरफ़ से निकल जाएँ. अब अव्यवस्था इतनी है तो सवाल उठना वाजिब है."
बीजेपी का जवाब
हालांकि बीजेपी ने अखिलेश यादव के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है.
सरकार की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक़ सोमवार को चार बजे शाम तक एक करोड़ लोगों ने संगम में स्नान किया.
बीजेपी का दावा है कि अब तक का ये सफलतम कुंभ है.
बीजेपी के प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने कहा, "महांकुभ शुरू होने से दो महीने पहले से ही समाजवादी पार्टी ने महाकुंभ पर बयान देना शुरू कर दिया था. दरअसल अखिलेश यादव ने जो सनातन धर्म को जातियों के खांचे में बाँटने का प्रयास किया था, उसको कुंभ में उमड़े जन सैलाब ने जवाब दिया है."
"उससे अखिलेश यादव हताश हैं. उनके ख़िलाफ़ सीएजी की रिपोर्ट है. पहले उस पर जवाब दें."
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के पास तथ्य हैं, तो बताएँ. सिर्फ़ लांछन लगाने से कुछ नहीं होगा और जनता इसका जवाब देगी.
समाजवादी पार्टी के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि समाजवादी पार्टी को सनातन में श्रद्धा नहीं है.
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को प्रयागराज का दौरा किया था.
पिछले दिनों संगम के पानी की शुद्धता पर भी सवाल उठे थे. इस पर मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा था कि संगम का पानी पीने और नहाने दोनों के लायक है.
सीएम योगी के मुताबिक़ स्नान वाले दिनों में लिए गए सैंपल मानक के अनुरूप पाए गए थे.
योगी ने कहा था, "आयोजन सरकार का नहीं बल्कि समाज का है. मैं एक सेवक की तरह उत्तरदायित्व का निर्वहन करूँगा. हमारा सौभाग्य है कि आयोजन के प्रति तमाम दुष्प्रचार और अनर्गल आरोप के बाद भी लोगों ने सहभागी बनकर इसे नई ऊँचाई पर पहुँचाया है."
बीजेपी पर विपक्ष का हमला
प्रयागराज में अव्यवस्था का आरोप लगाते हुए समाजवादी पार्टी की तरह कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं.
विधानसभा में पार्टी की नेता आराधना मिश्रा ने कहा, "महाकुंभ का बजट इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि बजट बढ़ाया गया, लेकिन अव्यवस्था चरम पर थी जिसकी वजह से हज़ारों श्रद्धालुओं की जान चली गई. सच्चाई है कि हर काम की तरह बजट को भी बीजेपी ने इवेंट बना दिया है."
अखिलेश यादव के भ्रष्टाचार के दावे पर वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया कहते हैं, "अखिलेश यादव की राजनीति दो राह पर है, एक तरफ़ वो कुंभ में स्नान करते हैं, अखिलेश यादव सीधे-सीधे कुंभ के बारे में नहीं बोल रहे हैं."
"जैसे लालू यादव ने अपने विचार प्रकट किए हैं. लेकिन उन्होंने दूसरा रास्ता चुना और कुंभ में भ्रष्टाचार और मिस मैनेजमैंट की बात कर रहे हैं. इससे उनको कोई राजनीतिक नुक़सान तो नहीं होगा लेकिन कोई फ़ायदा भी नहीं होने वाला है."
बीजेपी को नज़दीक से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार विनोद शुक्ला का कहना है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव कुंभ मेले के आयोजन को लेकर विरोधाभासी स्थिति का सामना कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "कुंभ के विरोध को वो भाजपा का विरोध मानकर चल रहे हैं. दूसरी तरफ़ पिछड़ा और यादव मतदाता उन्हें छोड़कर भाग न जाए, इस विरोध के चलते वो कुंभ स्नान को भी पहुँच गए. इस मामले में वो दो नावों की सवारी करते दिख रहे हैं."
हालांकि लखनऊ स्थित वरिष्ठ पत्रकार विजय उपाध्याय का कहना है, "अखिलेश यादव कुंभ के आयोजन पर सवाल नहीं उठा रहे है. इसलिए वो खुद स्नान करने भी गए. बल्कि कुंभ कैसे बेहतर हो इसलिए अव्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं."
उन्होंने कहा, "अखिलेश यादव अपनी विपक्ष की ज़िम्मेदारी निभा रहे है, जबकि सत्ताधारी दल इसको लेकर असहज है इसलिए बयान को घुमा रहा है. अखिलेश यादव खुद चाहते है कि कुंभ में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मुहैया कराई जाए. उनका सवाल अधिकारियों पर है जिसका जवाब नहीं दिया जा रहा है."
हालांकि अखिलेश यादव के अलावा कई विपक्षी नेताओं ने भी बीजेपी पर निशाना साधा है.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले दिनों महाकुंभ के दौरान अव्यवस्था के गंभीर आरोप लगाए थे. बीजेपी ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.
विवाद बढ़ने के बाद ममता बनर्जी ने कहा था कि वो सभी धर्मों का सम्मान करती हैं.
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने नई दिल्ली स्टेशन पर हुई भगदड़ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि 'कुंभ का कोई मतलब नहीं है.' इस भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई थी.
लखनऊ स्थित वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलहंस कहते है, "कुंभ को लेकर सवाल तब उठने शुरू हुए तब मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ की घटना हुई. शाम तक सरकार ने घटना के बारे में कोई अधिकारिक बयान नहीं दिया."
उन्होंने कहा, "राज्य सरकार और केन्द्र सरकार के बीच सामंजस्य नहीं है. पानी की गुणवत्ता को लेकर दोनों सरकार के बीच तालमेल की कमी दिखाई दी है. विपक्ष ने जनता के फीडबैक के मुताबिक सरकार पर हमला शुरू किया है. ये हमले कुंभ के खत्म होने पर और दिखाई देंगे."
हालांकि इन राजनीतिक हमलों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस आयोजन को बड़ी कामयाबी बता रहे हैं.
उत्तर प्रदेश का पूरा प्रशासनिक अमला कुंभ को लेकर लगा हुआ है.
वरिष्ठ पत्रकार विनोद शुक्ला कहते हैं, "आंकड़ों पर न जाते हुए कि अब तक कितने लोग स्नान कर चुके हैं, जिस तरह की भीड़ प्रयागराज में अब तक पहुँच रही है उसे समझना शायद अखिलेश यादव के लिए मुश्किल हो रहा है, जबकि भाजपा इसे मेले की तैयारी के समय से जान रही थी कि मेला उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है."
कुंभ में भीड़ और क्या-क्या हुआ
सरकार का अनुमान था कि पूरे कुंभ में तकरीबन 45 करोड़ लोग आएँगे, लेकिन सरकार के मुताबिक़ इस बार अनुमानित संख्या कुंभ की समाप्ति से पहले ही पार कर गई है.
26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन कुंभ में अंतिम स्नान होगा. सरकार की पूरी तैयारी है कि आख़िरी स्नान बिना किसी हादसे के निपट जाए.
सरकार के सुरक्षित कुंभ के दावों के उलट 29 जनवरी को संगम में भगदड़ हुई थी.
मेला प्रशासन के मुताबिक़, मौनी अमावस्या के दिन करोड़ों लोगों ने यहाँ स्नान किया. इसी दिन यहां भगदड़ हुई थी. उत्तर प्रदेश सरकार ने इसमें 30 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की थी.
इसके अलावा फ़रवरी महीने में कुंभ जाने वालों को कई किलोमीटर के जाम की समस्या का सामना करना पड़ा.
राज्य सरकार ने सात हजार बसों के संचालन की बात कही थी, लेकिन स्नान वाले दिनों में ट्रेन और बसों में लोग काफ़ी मशक्कत के बाद यात्रा कर पाए थे.
13 जनवरी से अब तक 13 हजार 667 ट्रेन प्रयागराज के लिए चलाई जा चुकी हैं.
29 जनवरी के हादसे के बाद कुंभ के आयोजन में सरकार ने अफ़सरों की निगरानी बढ़ाई है.
आसपास के ज़िलाधिकारियों को प्रयागराज में कैंप कर रहे अफ़सरों के निर्देश पर काम करने की सलाह दी गई है.
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ रोज़ाना एक करोड़ लोग प्रयागराज पहुँच रहे हैं.
श्रद्धालुओं को संगम तक पहुँचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है.
कुंभ के डीआईजी वैभव कृष्ण ने मीडिया को बताया कि आख़िरी स्नान से पहले भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त फ़ोर्स को लगाया गया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित