इसराइल हमास युद्धः ग़ज़ा पर हमले के ख़िलाफ़ सऊदी अरब में इस्लामी देशों की असाधारण बैठक, क्या बोले सलमान, अर्दोआन और रईसी

ग़ज़ा में जारी भीषण संघर्ष के बीच सऊदी अरब के रियाद में दुनिया भर के मुस्लिम देशों के नेताओं की बैठक में तुरंत संघर्ष विराम और फ़लस्तीनी मुद्दे के समाधान की मांग की गई है.

अरब और इस्लामी देशों के नेताओं ने इसराइल की आलोचना की और ग़ज़ा पर तुरंत हमले रोकने का आह्वान किया. वहीं ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने इसराइल के लिए तेल आपूर्ती रोकने की मांग की.

कुछ देशों ने इसराइल और उसके सहयोगी देशों के साथ आर्थिक और राजनयिक संबंध रोकने का प्रस्ताव दिया. हालांकि इस प्रस्ताव का विरोध भी हुआ.

इस बैठक में इस्लामिक सहयोग संगठन के अलावा अरब लीग देशों के नेता भी शामिल हैं.

ये असाधारण इस्लामिक-अरब बैठक इसराइल और अमेरिका पर ग़ज़ा में सघर्ष विराम करने का दबाव बनाने के लिए आयोजित की गई है.

बैठक में शामिल होने के लिए ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी भी पहुंचे हैं.

7 अक्तूबर को हमास ने इसराइल पर हमला किया था जिसमें कम से कम 1200 इसराइली मारे गए थे. इसके जवाब में इसराइल ग़ज़ा पर लगातार बमबारी कर रहा है और उसकी सेना ग़ज़ा में ज़मीनी अभियान चला रही है.

हमास के मुताबिक़ अब तक ग़ज़ा में 11000 से अधिक लोग मारे गए हैं जिनमें क़रीब साढ़े चार हज़ार बच्चे हैं.

इसी बीच सऊदी अरब में ये आपात और असाधारण बैठक हो रही है.

कौन-कौन पहुंचा

सऊदी अरब में हो रही इस बैठक में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी भी पहुंचे हैं. पिछले 11 सालों में पहली बार है जब कोई ईरानी राष्ट्रपति सऊदी अरब पहुंचे हैं. रईसी फ़लस्तीनी काफ़िया पहनकर बैठक में पहुंचे.

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयेप अर्दोआन, मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल सीसी, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद, जॉर्डन के किंग, फ़लस्तीनी प्राधिकरण के प्रमुख महमूद अब्बास और दुनिया भर के प्रमुख मुसलमान नेता शामिल हैं.

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो और किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सैडी जापारोव भी इस सम्मेलन में शामिल हैं.

इसके अलावा दुनिया के लगभग सभी इस्लामी देशों के नेता इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं.

क्या बोले मोहम्मद बिन सलमान

इस सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कहा है ग़ज़ा में जो हो रहा है उसके लिए इसराइल ज़िम्मेदार है.

मोहम्मद बिन सलमान ने कहा, "सऊदी अरब फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ हो रहे अपराधों के लिए इसराइल के क़ब्ज़ाधारियों को ज़िम्मेदार मानता हैं."

उन्होंने ग़ज़ा में तुरंत संघर्ष विराम लागू करने की मांग की. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ग़ज़ा में निरंतर इसराइली हमलों और फ़लस्तीनियों के जबरन विस्थापन को स्पष्ट रूप से खारिज करता है.

मोहम्मद बिन सलमान ने अंततराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों को लागू करने में 'दोहरे मानदंडों' का मुद्दा उठाते हुए पश्चिमी देशों की फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ हिंसा पर ख़ामोशी की आलोचना की.

प्रिंस सलमान ने कहा, "हम एक मानवीय त्रासदी का सामना कर रहे जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंततराष्ट्रीय समुदाय के इसराइल को रोकने में नाकाम रहने का सबूत है. ये दोहरे मानदंड दर्शाता है."

मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि ग़ज़ा में हिंसा तुरंत रुकनी चाहिए और बंधक बनाए गए लोगों को रिहा किया जाना चाहिए.

मोहम्मद बिन सलमान ने कहा कि इस संघर्ष का समाधान करने के लिए 1967 की सीमओं के आधार पर एक फ़लस्तीनी राष्ट्र का निर्माण होना चाहिए और पूर्वी यरूशलम उसकी राजधानी बननी चाहिए.

'ग़ज़ा मैं सैन्य समाधान स्वीकार नहीं'

इस सम्मेलन में बोलते हुए फ़लस्तीनी प्राधिकरण के प्रमुख महमूद अब्बास ने कहा कि फ़लस्तीनी लोग 'ऐसे नरंसहार का सामना कर रहे हैं जिसमें सभी लाल रेखाएं पार हो गई हैं.'

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ आक्रमण रोकने और ग़ज़ा में राहत सामग्री पहुंचाने की अपनी ज़िम्मेदारी को पूरा करना चाहिए.

उन्होंने कहा, "हम ग़ज़ा में किसी सैन्य या सुरक्षा समाधान को स्वीकार नहीं करेंगे."

रईसी ने की हमास की तारीफ़, इसराइल पर हमलावर

रईसी इस सम्मेलन में फ़लस्तीनी काफ़िया पहनकर पहुंचे. सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा, "ग़ज़ा पर इसराइल का हमला इतिहास का सबसे बड़ा अपराध है."

ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने इसराइल के ख़िलाफ़ सख़्त रवैया अपनाते हुए इस्लामी देशों से इसराइल के लिए तेल आपूर्ति रोकने का आह्वान किया.

रईसी ने कहा, "इसराइल का विरोध करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है, हम इसराइल के ख़िलाफ़ विरोध के लिए हमास के हाथों को चूमते हैं."

संघर्ष विराम का आह्वान करते हुए रईसी ने कहा, "ग़ज़ा के ख़िलाफ़ हो रही अंधाधुंध बमबारी रुकनी चाहिए और ग़ज़ा की घेराबंदी तुरंत समाप्त होनी चाहिए."

रईसी ने कहा कि "ग़ज़ा में हो रहे अपराधों के लिए अमेरिका ज़िम्मेदार है और वही इसका कमाडंर है, इसराइल अमेरिका की नाजायज़ औलाद है."

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने क्षेत्र में नौसैनिक बेड़े तैनात किए हैं और ऐसा करके वह ग़ज़ा के लोगों के ख़िलाफ़ हो रहे अपराधों में शामिल हो गया है.

रियाद के लिए निकलने से पहले ईरानी राष्ट्रपति रईसी ने कहा था, "अमेरिका ने ग़ज़ा में संघर्ष विराम नहीं होने दिया है और वह युद्ध क्षेत्र को फैला रहा है."

रईसी ने रियाद पहुंचने से पहले भी मीडिया से ग़ज़ा में जारी संघर्ष को लेकर टिप्पणी की.

रईसी ने कहा था कि अब इस संघर्ष को लेकर कुछ करने का वक़्त है, बोलने से कुछ नहीं होगा.

उन्होंने कहा, "ग़ज़ा शब्दों का मैदान नहीं है. यहां कुछ होना चाहिए. आज इस्लामी देशों का एकजुट होना बहुत ज़रूरी है."

रियाद के लिए उड़ान भरने से पहले रईसी ने कहा, "ये उम्मीद की जाती है कि इस्लामी दुनिया के नेता फ़लस्तीन के मुद्दे पर एक ठोस फ़ैसला लेंगे, ये अभी दुनिया का सबसे अहम मुद्दा है, इस निर्णय को पूरी तरह लागू किया जाएगा."

'यरूशलम हमारी लाल रेखा है'

सम्मेलन में बोलते हुए तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने कहा कि "ग़ज़ा में जो हो रहा है उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता, अस्पतालों, धर्मस्थलों, स्कूलों पर बर्बर हमले हो रहे हैं. हमने माताओं को गोद में बच्चों की लाशें लिए हुए देखा, पिताओं को मलबे में बच्चों को तलाशते देखा है."

अर्दोआन ने कहा कि "यरूशलम मुसलमानों के लिए एक लाल रेखा है. ये हमारी ख़्वाहिश है कि यरूशलम, जो शांति के शहर के रूप में जाना जाता है, और बाक़ी सभी फ़लस्तीनी क्षेत्र अपने पुराने वक़्त में लौटें."

अर्दोआन ने कहा कि हमास, जो अपनी ज़मीन की रक्षा कर रहा है उसकी तुलना क़ब्ज़ाधारियों से नहीं की जा सकती है.

अर्दोआन ने कहा, "ये शर्म की बात है कि पश्चिमी देश, जो हमेशा मानवाधिकरों और आज़ादी की बातें करते हैं, फ़लस्तीन में हो रहे नरसंहार पर ख़ामोश हैं."

अर्दोआन ने कहा कि ग़ज़ा में पूर्ण संघर्ष विराम की ज़रूरत है ना कि कुछ घंटों के विराम की.

उन्होंने कहा कि ओआईसी को ग़ज़ा के नव-निर्माण के लिए फंड निर्धारित करना चाहिए. ग़ज़ा में जो बर्बादी हुई है, उसके लिए इसराइल को हर्जाना देना चाहिए.

इसराइल के बहिष्कार का प्रस्ताव

समाचार एजेंसी एएफ़पी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अल्जीरिया और लेबनान समेत कुछ देशों ने ग़ज़ा में हो रही बर्बादी के जवाब में इसराइल और उसके सहयोगी देशों को तेल की आपूर्ति रोकने का प्रस्ताव दिया. इसके अलावा अरब लीग के कुछ देश जिनके इसराइल के साथ राजनयिक और आर्थिक संबंध हैं, उनसे इसराइल से संबंध तोड़ने के लिए भी कहा गया.

हालांकि संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन समेत कम से कम तीन देशों ने इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया. यूएई और बहरीन ने साल 2020 में इसराइल के साथ राजनयिक संबंध बहाल किए थे.

एएफ़पी ने ये जानकारी राजनयिक सूत्रों के हवाले से दी है.

इसराइल और उसके प्रमुख समर्थक अमेरिका ने अब तक संघर्ष विराम की सभी मांगों और संभावनाओं को खारिज किया है.

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