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जी20 को लेकर कांग्रेस के बंटे हुए रुख़ के क्या मायने हैं?
- Author, अभिनव गोयल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
जिस वक्त दुनिया के ज्यादातर बड़े नेता भारत में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंच रहे थे, उस वक्त कांग्रेस नेता राहुल गांधी यूरोप में बैठकर सवाल उठा रहे हैं, कि भारतीय लोकतंत्र कमजोर हो रहा है.
विदेशी धरती पर यह पहली बार नहीं है कि जब राहुल गांधी कह रहे हैं कि भारत में लोकतंत्र, अल्पसंख्यकों और संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं और अभिव्यक्ति की आजादी को कुचला जा रहा है.
उन्होंने इस सबके लिए केंद्र में बीजेपी की सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार बताया और कहा कि बीजेपी का हिंदू धर्म से कोई लेना देना नहीं है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जी20 शिखर सम्मेलन को चुनावी ईवेंट बताते हुए कहा, “जी20 और वैश्विक स्तर पर होने वाले अन्य शिखर सम्मेलनों में प्रधानमंत्री के बयान उनकी हिप्पोक्रेसी को दर्शाते हैं.
उन्होंने कहा, "जी20 का नारा 'एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य' है, लेकिन प्रधानमंत्री वास्तव में 'एक व्यक्ति, एक सरकार, एक पूंजीपति' में विश्वास करते हैं.
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डॉ. अंशुल त्रिवेदी के पोस्ट को रिपोस्ट किया है, जिसमें कहा गया है, "जी20 के आयोजन में 4,100 करोड़ खर्च किए गए. सिर्फ़ भारत मण्डपम में 2,700 करोड़ खर्च हुए. वहीं जापान ने 2,660 करोड़, जर्मनी ने 642 करोड़, अर्जेंटीना ने 931 करोड़ और रूस ने 170 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. मोदी जी का हर मौके को चुनावी ईवेंट बनाना देश को बहुत महंगा पड़ रहा है.”
वहीं दूसरी तरफ जी20 के दौरान राष्ट्रपति की मेजबानी में आयोजित रात्रिभोज पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को न बुलाए जाने को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए.
ये सवाल यहीं नहीं रुके. रात्रिभोज में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का शामिल होना भी लोकसभा में कांग्रेस दल के नेता अधीर रंजन चौधरी को पसंद नहीं आया.
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि वो क्या बात है जिसने उन्हें रात्रिभोज में शामिल होने के लिए प्रेरित किया और क्या इसके पीछे और कोई कारण भी है?
बावजूद इसके रात्रिभोज में नीतीश कुमार, हेमंत सोरेन और हिमाचल से खुद कांग्रेस के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के अलावा कई मुख्यमंत्री शामिल हुए थे.
स्थिति यह है कि कांग्रेस के कुछ नेता जी20 पर लगातार हमले करते हुए दिखाई दे रहे थे, तो वहीं शशि थरूर जैसे नेता इस सम्मेलन को भारत की कूटनीतिक जीत बता रहे हैं.
सवाल है कि जी20 शिखर सम्मेलन को लेकर कांग्रेस पार्टी इतनी बंटी हुई क्यों है? ऐसे समय में मोदी सरकार पर हमले कर राहुल गांधी क्या हासिल करना चाहते हैं? क्या यह कांग्रेस की कोई रणनीति है, जिसकी मदद से वह बीजेपी को 2024 के आम चुनावों में काउंटर करना चाहती है?
इन्हीं सब सवालों का जवाब जानने के लिए बीबीसी ने लोकमत के संपादक शरद गुप्ता और चौथी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय से बात की है.
कांग्रेस इतनी बंटी हुई क्यों है?
9-10 सितंबर के बीच दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान कांग्रेस के नेताओं ने हर उस मौके का इस्तेमाल किया, जहां वे केंद्र की मोदी सरकार को घेर सकते थे.
सम्मेलन के दौरान हुई बारिश के चलते पानी भराव को भी मुद्दा बनाने की कोशिश की गई और जी20 पर हुए खर्च पर सवाल उठाए गए, लेकिन ये बयान बंटे हुए नजर आए.
लोकमत के संपादक शरद गुप्ता इसके पीछे पार्टी अनुशासन को एक बड़ी वजह मानते हैं. वे कहते हैं, “बीजेपी में बहुत सख्त अनुशासन है. अगर वहां कोई भी पार्टी लाइन से इतर बात करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है, लेकिन कांग्रेस में अगर आप कुछ बोलते हैं, कुछ करते हैं. उसके बावजूद कार्रवाई कम होती है. चाहे वो पंजाब का मामला हो, या राजस्थान का.”
गुप्ता कहते हैं, “आप पार्टी के अंदर कुछ भी बात करें, दस विचार रखें, लेकिन जब आप बाहर मीडिया से बात करते हैं तो आप पार्टी को रिप्रेजेंट कर रहे होते हैं. ऐसे में अगर पार्टी अलग-अलग भाषाओं में बात करे तो समझ आता है कि उसमें एक मत नहीं है."
साल 2024 में देश में आम चुनाव होना है, जिसकी तैयारियां अभी से शुरू भी हो चुकी हैं. ऐसे समय पर पार्टी में अनुशासन की कमी से बड़ा नुकसान हो सकता है, जिसकी बात चौधी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय करते हैं.
वे कहते हैं, “कांग्रेस को लगता है कि उनके यहां आंतरिक लोकतंत्र है, जो बीजेपी में नहीं है. लेकिन यह संगठन के लिए कमजोरी भी है. जो नेता जैसा सोच रहा है, वह वैसी बात कर रहा है. जब कांग्रेस के सामने 2024 का एक बड़ा युद्ध है तो इस तरह से नहीं होना चाहिए. पार्टी के इस नजरिए से उसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.”
अधीर रंजन के बयान पर उठते सवाल
जी20 सम्मेलन में राष्ट्रपति की मेजबानी में आयोजित रात्रिभोज में ममता बनर्जी के शामिल होने को मुद्दा बनाने वाले अधीर रंजन चौधरी के चलते भी कांग्रेस के रुख पर सवाल उठ रहे हैं.
दरअसल रात्रिभोज में सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को शामिल होने का न्योता दिया गया था. इस रात्रिभोज में इंडिया गठबंधन के कई मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा भी लिया, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी, लेकिन अधीर रंजन चौधरी ने निशाना सिर्फ ममता बनर्जी पर साधा.
इसके पीछे शरद गुप्ता, अधीर रंजन चौधरी की प्रादेशिक आकांक्षाओं को जिम्मेदार मानते हैं. वे कहते हैं, “उन्हें सिर्फ ममता बनर्जी पर एतराज है, क्योंकि वे अपने आप को पश्चिम बंगाल से बाहर निकलकर नहीं देख सकते हैं. उनका राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एक सीमित रूख रहता है, जो कि नहीं रहना चाहिए.”
इसकी एक वजह यह भी है कि अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल से आते हैं और वे कभी भी ममता बनर्जी पर हमला करने से पीछे नहीं हटते.
संतोष भारतीय कहते हैं, “कांग्रेस में अपनी आंख में उंगली करने वाले बहुत लोग हैं. अपना अपशुकन खुद करते हैं. अधीर रंजन चौधरी भी उन्हीं लोगों में से एक हैं. उन्हें बंगाल में सिर्फ ममता बनर्जी दिखती है. ममता बनर्जी का साथ इंडिया गठबंधन के लिए कितना जरूरी है वो नहीं देख पाते.. उन्हें लगता है कि बंगाल में अगर थोड़ा भी ममता का विरोध कम किया तो उस जगह को सीपीएम भर देगी.”
वे कहते हैं, “कांग्रेस की यह कमजोरी है कि यहां हर आदमी अपने राज्य को लेकर अपनी राष्ट्रीय नीति तय कर रहा है, जबकि राज्य को लेकर राष्ट्रीय नीति तय नहीं होती है.”
उनके बयान पर तृणमूल नेता सौगत रॉय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जी20 सम्मेलन में राष्ट्रपति की ओर से आयोजित डिनर में ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री होने के नाते आमंत्रित किया गया था. वे शिष्टाचार के नाते इसमें शामिल हुईं. इसका कोई राजनीतिक महत्व नहीं है और अधीर रंजन चौधरी को इस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी. यहां तक की कांग्रेस के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी डिनर में शामिल हुए थे.”
क्या चाहते हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी करीब एक हफ्ते के लिए यूरोप यात्रा पर हैं, जहां से वे लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं.
चौथी दुनिया के प्रधान संपादक संतोष भारतीय कहते हैं, “जी20 में कांग्रेस पार्टी को तवज्जो नहीं दी गई. कांग्रेस भी इससे दूर रही. ऐसे में राहुल गांधी को शायद लगा कि इस समय अगर वे भारत में न रहकर विदेश से कोई बात करेंगे तो विदेशी मीडिया उसे अपने यहां जगह देगा और वह बात लोगों के सामने आएगी.”
वे कहते हैं, “पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि बनाई है और अपने आप को हिंदुस्तान में विश्व गुरु के रूप में पेश किया है…राहुल गांधी चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनको भी मोदी की तरह लिया जाए.”
शरद गुप्ता कहते हैं, “अगर राहुल गांधी देश में भी रहते तो वे कुछ कर नहीं पाते, क्योंकि विपक्ष के नेताओं को किसी भी आयोजन में बुलाया नहीं गया, यहां तक कि राष्ट्रपति द्वारा आयोजित डिनर में भी किसी को आमंत्रित नहीं किया गया था. राहुल गांधी ऐसे पहले भी बोलते रहे हैं. उन्हें जो लगता है, वे उसी तरह से अपनी भावना को व्यक्त करते हैं.”
लेकिन राहुल गांधी के बयानों का जिक्र कर बीजेपी उन पर विदेशों में भारत की छवि खराब करने का आरोप लगाती है.
छवि के सवाल पर संतोष भारतीय करते हैं, “व्यक्ति की आलोचना, देश की आलोचना नहीं है. व्यक्ति अलग है और देश अलग है. न इंदिरा गांधी देश थी, न जवाहरलाल नेहरू देश थे और न ही नरेंद्र मोदी देश हैं. लोग आते हैं और अपना रोल अदा कर चले जाते हैं. इतिहास बड़ी निर्मम चीज होती है और बड़े सही फैसले करता है. व्यक्ति कभी देश से बड़ा नहीं हो सकता.”
वहीं इस नैरेटिव के पीछे की वजह को समझाते हुए शरद गुप्ता कहते हैं, “हमारे देश में पिछले कुछ समय में ऐसा माहौल बन गया है कि पीएम की आलोचना को देश की आलोचना माना जाता है. वे पहले अपने भाषणों में छह करोड़ गुजरातियों का अपमान बताते थे और अब 135 करोड़ भारतीयों की बात करते हैं.”
वे कहते हैं, “धारणा कैसे बनाई और उसे कैसे मैनेज किया जाता है, यह बात बहुत अच्छे से बीजेपी और पीएम मोदी को आती है. आप देखिए कि 100 रुपये पेट्रोल बिक रहा है, बावजूद इसके कहीं कोई प्रदर्शन नहीं हो रहा है. मुझे लगता है कि जनता से जुड़े मुद्दों से विपक्ष को कोई सरोकार नहीं रह गया है.”
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