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इटली के इस शहर में बांग्लादेशी मुसलमानों को लेकर बढ़ रहा है विवाद
- Author, सोफिया बेट्टिज़ा
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
ये इटली के शहर मोनफाल्कोन का बाहरी इलाक़ा है. तेज़ धूप में बांग्लादेश के कुछ लड़के छोटी सी पिच पर क्रिकेट प्रैक्टिस कर रहे हैं.
ये जगह शहर से दूर है और ट्रिएस्ट एयरपोर्ट के पास है.
ये लोग शहर से दूर क्रिकेट प्रैक्टिस क्यों कर रहे हैं? जवाब है- शहर के मेयर ने क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया है.
अगर किसी ने प्रतिबंध तोड़ने की कोशिश की तो 100 यूरो यानी साढ़े नौ हज़ार रुपये जुर्माना लगेगा.
इस क्रिकेट टीम के कप्तान मियाह बप्पी ने कहा, ''अगर हम शहर के अंदर खेल रहे होते तो अब तक हमें रोकने के लिए पुलिस आ चुकी होती.''
शहर की आबादी में बांग्लादेशी मुसलमानों की बड़ी संख्या
मियाह बप्पी बताते हैं कि बांग्लादेश के कुछ युवाओं को स्थानीय पार्क में क्रिकेट खेलने पर पकड़ लिया गया था.
इन लोगों को नहीं मालूम था कि कुछ कैमरों से इन्हें रिकॉर्ड किया जा रहा था. इस खेल में खलल बनी पुलिस ने जुर्माना भी लगाया.
बप्पी ने कहा, ''ये लोग कहते हैं कि क्रिकेट इटली का खेल नहीं है. लेकिन मैं आपको सच बताता हूं, ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि हम विदेशी हैं.''
क्रिकेट पर लगे प्रतिबंध ने मोनफाल्केन शहर की जड़ों में घुस चुके तनाव को सामने ला दिया है. ये तनाव बढ़ता जा रहा है.
इस शहर की आबादी क़रीब 30 हज़ार है. एक तिहाई से ज़्यादा लोग विदेशी हैं. इनमें से ज़्यादातर बांग्लादेशी मुसलमान हैं.
ये बांग्लादेशी मुसलमान 1990 के दौर से यहां आना शुरू हुए थे.
शहर की धुर दक्षिणपंथी मेयर एन्ना मारिया कहती हैं- बाहर से आए लोगों के कारण यहां की सांस्कृतिक पहचान ख़तरे में आ गई है.
मारिया ने चुनावों में जीत दर्ज की थी. चुनाव प्रचार के दौरान वो एंटी-इमिग्रेशन रुख़ अपनाए हुए थीं. इसे वो अपने शहर और ईसाई मूल्यों की रक्षा का 'मिशन' बता रही थीं.
मारिया कहती हैं, ''हमारा इतिहास मिटाया जा रहा है. ऐसा लगता है कि जैसे कोई फ़र्क़ ही नहीं पड़ता. सब बदलकर बदतर होता जा रहा है.''
मोनफाल्कोन में बांग्लादेशियों का असर कितना
इस शहर में इतालवी नागरिक पश्चिमी लिबास में दिखते हैं. बांग्लादेशी सलवार कमीज़ और हिजाब में दिखते हैं.
शहर में बांग्लादेशियों के रेस्त्रां, हलाल शॉप हैं. साइकिल चलाने के रास्ते हैं, जिसे ज़्यादातर दक्षिण एशियाई समुदाय के लोग इस्तेमाल करते हैं.
मेयर मारिया ने शहर के उस हिस्से से बैठने वाली बेंच हटवा दीं, जहां ज़्यादातर बांग्लादेशी बैठा करते थे.
समंदर किनारे मुस्लिम महिलाएं जो लिबास पहनकर जातीं, मारिया ने उसके ख़िलाफ़ भी आवाज़ उठाई.
उन्होंने कहा, ''यहां इस्लामिक कट्टरवाद की बहुत मज़बूत प्रक्रिया है. एक ऐसी संस्कृति, जिसमें मर्द औरतों से बुरी तरह से पेश आते हैं.''
मुसलमानों पर अपने रुख़ के कारण मेयर को जान से मारने की धमकियां भी मिली हैं. इस वजह से अब वो 24 घंटे पुलिस की सुरक्षा में रहती हैं.
मियाह बप्पी और उनके साथी क्रिकेटर नौकरी के लिए इटली आए थे. ये लोग जहाज़ बनाने की कंपनी फिनकेंटिएरी में काम करने आए थे.
ये कंपनी यूरोप की सबसे बड़ी और दुनिया की बड़ी जहाज़ कंपनियों में से एक है.
मेयर मारिया के निशाने पर ये कंपनी भी है. वो कहती हैं- कंपनी इतनी कम सैलरी देती है कि कोई इतालवी काम नहीं करेगा.
कंपनी के डायरेक्टर क्रिस्टियानो बाज़्ज़ारा कहते हैं कि जो पैसे दिए जाते हैं तो इटली के नियमों के अनुसार ही हैं.
उन्होंने कहा, ''हमें प्रशिक्षित कामगार नहीं मिल पा रहे हैं. यूरोप में ऐसे नौजवानों को खोजना मुश्किल है जो शिपयार्ड में काम करना चाहें.''
इटली का हाल
दुनिया के जिन देशों में जन्म दर सबसे कम है, इटली उनमें शामिल है. 2023 में सिर्फ़ तीन लाख 79 हज़ार बच्चे पैदा हुए.
देश में कामगारों की संख्या भी कम है.
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2050 तक इटली को हर साल दो लाख 80 हज़ार कामगारों की ज़रूरत होगी.
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी धुर दक्षिणपंथी ब्रदर्स ऑफ इटली की नेता हैं.
मेलोनी पहले ये कहती रही थीं कि वो इमिग्रेशन को कम करना चाहती हैं. इसके बावजूद ग़ैर-यूरोपीय कामगारों को परमिट देने के मामलों में इजाफा हुआ है.
मेयर मारिया कहती हैं, ''बांग्लादेश के मुसलमानों के जीने का तरीक़ा और इटली में पैदा हुए लोगों का तरीक़ा एकदम अलग है.''
इस शहर में तनाव तब काफ़ी बढ़ गया था, जब मेयर ने शहर के दो इस्लामिक केंद्रों में साथ में नमाज़ पढ़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था.
मारिया कहती हैं, ''शहर के लोग मुझे हैरान करने वाली तस्वीरें, वीडियो भेजते हैं. इनमें दिखता है कि दो इस्लामिक केंद्रों पर बड़ी संख्या में लोग नमाज़ पढ़ रहे हैं. एक बिल्डिंग में 1900 लोग...''
मेयर मारिया कहती हैं, ''फुटपाथ पर कितनी ही बाइक छोड़कर चले जाते हैं. दिन में पांच बार ज़ोर से नमाज़ पढ़ते हैं, रात में भी नमाज़ पढ़ते हैं.''
इटली और इस्लाम
मारिया कहती हैं कि स्थानीय लोगों के साथ ये नाइंसाफ़ी है.
अपने लगाए प्रतिबंधों का बचाव करते हुए वो कहती हैं- सब नियमों के तहत हुआ. ये इस्लामिक केंद्र धार्मिक उपासना के लिए नहीं बने हैं. ये मेरा काम नहीं है कि प्रार्थना के लिए जगह मुहैया करवाऊं.
इटली के क़ानून के तहत इस्लाम को आधिकारिक दर्जा हासिल नहीं है. इस कारण उपासना के लिए जगहें बनाने में मुश्किलें आती हैं.
इटली में कुल आठ मस्जिदें हैं. देश में क़रीब 20 लाख मुसलमान रहते हैं.
इटली से तुलना करें तो फ़्रांस में दो हज़ार से ज़्यादा मस्जिदें हैं.
मोनफाल्कोन में रह रहे बांग्लादेशियों का कहना है कि मेयर के फ़ैसले से मुस्लिम समुदाय पर काफ़ी असर पड़ा है.
19 साल की मेहेली कहती हैं, ''मेयर को लगता है कि बंगाली इटली का इस्लामीकरण कर रहे हैं. लेकिन हम बस अपने काम से मतलब रख रहे हैं.''
मेहेली ढाका से हैं और वो पश्चिमी कपड़े पहनती हैं. मेहेली धाराप्रवाह इतालवी बोलती हैं.
वो बताती हैं कि कई बार सिर्फ़ अपनी बंगाली पहचान की वजह से उनको बीच राह प्रताड़ित किया गया.
मेहेली बोलीं- जितनी जल्दी हो सके, मैं ये शहर छोड़ दूंगी.
बांग्लादेशी चले गए तो क्या होगा
मियाह बप्पी को उम्मीद है कि इस साल उन्हें इटली का पासपोर्ट मिल जाएगा. लेकिन वो नहीं जानते कि क्या वो इसी शहर में रहना जारी रखेंगे या नहीं?
उन्होंने कहा, ''हम कोई परेशानी नहीं बनते. हम टैक्स चुकाते हैं. लेकिन ये लोग हमें यहां नहीं चाहते.''
मेयर भले ही बांग्लादेशियों को इटली के लोगों से अलग बताती हों लेकिन बप्पी दूसरी तरफ़ इशारा करते हैं.
वो कहते हैं- अगर हम सब अपने मुल्क लौट गए तो जहाज़ बनाने वाली कंपनी को एक जहाज़ बनाने में पांच साल लगेंगे.
बीते महीनों में एक स्थानीय अदालत ने दो इस्लामिक केंद्रों के हक़ में फ़ैसला सुनाया और एक साथ नमाज़ पढ़ने पर लगी रोक को हटाया.
लेकिन मेयर मारिया का अभियान जारी है. इसे वो ''यूरोप के इस्लामीकरण'' के ख़िलाफ़ अभियान कहती हैं.
मारिया अब यूरोपीय संसद के लिए चुनी गई हैं. जल्द वो अपनी आवाज़ संसद में उठाएंगी.
-बॉब हॉवर्ड की रिपोर्टिंग के साथ
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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