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बांग्लादेश: अमेरिका में मोहम्मद यूनुस ने जिन महफूज़ आलम की तारीफ़ की, उन्हें जानिए
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस का अमेरिका दौरा चर्चा में है. मोहम्मद यूनुस अमेरिका, पाकिस्तान समेत कई देशों के राष्ट्र प्रमुखों से भी मिले.
इस दौरान यूनुस ने 25 सितंबर को 'क्लिंटन ग्लोबल इनिशिएटिव' कार्यक्रम में शिरकत की.
इस कार्यक्रम में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भी थे. मोहम्मद यूनुस ने इस दौरान अपने स्पेशल असिस्टेंट महफूज़ आलम से लोगों को मिलवाया.
बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के बाद बीते महीने आवामी लीग की शेख़ हसीना सरकार सत्ता से बेदखल हो गई थी. यूनुस ने बांग्लादेश में हुए सियासी फेरबदल के पीछे महफूज़ आलम का हाथ बताया और उनकी तारीफ़ की.
महफूज़ आलम को मोहम्मद यूनुस ने जिस तरह से पेश किया, उसकी चर्चा सोशल मीडिया पर हो रही है.
मोहम्मद यूनुस ने क्या कहा?
'क्लिंटन ग्लोबल इनिशिएटिव' कार्यक्रम में बिल क्लिंटन की मौजूदगी में यूनुस ने मंच पर दो लोगों को बुलाया तो इनमें महफूज़ आलम भी शामिल रहे.
मोहम्मद यूनुस ने कहा, ''ये किसी दूसरे युवा व्यक्ति की तरह ही दिखते हैं. मगर जब आप इनको एक्शन में देखेंगे, जब इनके भाषण सुनेंगे, आप कांपने लगेंगे. अपनी लगन और भाषण से इन लोगों ने देश को हिलाकर रख दिया. इन लोगों ने कहा कि आपको हमें मारना है तो मार दीजिए, लेकिन हम हार नहीं मानेंगे.
मोहम्मद यूनुस ने कहा, ''पूरी क्रांति के पीछे यही (महफूज़ आलम) थे. वो बार-बार इससे इनकार करते हैं. मगर उस पूरी क्रांति के पीछे यही थे. ये अचानक हुई चीज़ नहीं थी.''
बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा भी भड़की थी. इस दौरान कई लोग मारे गए थे.
मोहम्मद यूनुस ने महफूज़ की ओर इशारा करते हुए कहा, ''आंदोलन को बहुत अच्छे से डिज़ाइन किया गया था. यहां तक कि लोगों को ये नहीं मालूम था कि नेता कौन है. ऐसे में आप किसी एक को पकड़कर ये नहीं कह सकते कि आंदोलन ख़त्म हो गया. जब ये बोलते हैं तो ये दुनिया के किसी भी युवा को प्रेरित कर सकते हैं. प्लीज़ इनका स्वागत कीजिए.''
मंच पर खड़े लोगों की ओर इशारा करते हुए मोहम्मद यूनुस कहते हैं- ये वो लोग हैं, जो नया बांग्लादेश बना रहे हैं.
अपने भाषण में मोहम्मद यूनुस ने शेख़ हसीना की सरकार के दौरान हुई हिंसा की भी आलोचना की.
महफूज़ आलम के बारे में क्या पता है?
महफूज़ आलम को मोहम्मद यूनुस का स्पेशल असिस्टेंट नियुक्त किया गया था.
महफूज़ आलम को सेक्रेटरी का दर्जा हासिल है. इस बारे में बांग्लादेश के पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग की ओर से 28 अगस्त को बयान जारी किया गया था.
इस बयान में कहा गया था कि जब तक मोहम्मद यूनुस सलाहकार के पद पर हैं, तब तक आलम भी पद पर बने रहेंगे.
द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक़, महफूज़ 2015-16 में ढाका यूनिवर्सिटी के क़ानून विभाग के छात्र रहे हैं. वो छात्रों के साथ भेदभाव के ख़िलाफ़ शुरू किए गए अभियान से भी जुड़े रहे थे.
जिस कार्यक्रम में मोहम्मद यूनुस ने आलम को मंच पर बुलाया, वहां एक शख़्स और दिखा था. इस शख़्स को लेकर बांग्लादेश में सवाल भी उठ रहे थे.
महफूज़ आलम ने फ़ेसबुक पोस्ट कर कहा, ''जब हमें मंच पर बुलाया गया, वो हमसे पहले पहुंच गया. मैं उसे मंच पर जाने से रोक नहीं पाया. ऐसा लगता है कि ये फासीवादी संगठनों की साज़िश थी. हम आने वाले दिनों में इसका ज़्यादा ख़्याल रखेंगे.''
मंच पर महफूज़ आलम के साथ एक लड़की भी दिखी थी, जो कोट पैंट के साथ हिजाब पहने हुई थी.
एक्स पर @PREMIUMERZA नाम के यूज़र ने इस कार्यक्रम का वीडियो शेयर कर लिखा, ''इस तरह मोहम्मद यूनुस ने स्टूडेंट नेताओं से मुलाक़ात की. अंतरराष्ट्रीय मंच पर यूनुस ने महफूज़ को शेख़ हसीना के सत्ता से बाहर होने की वजह बताया.''
इस पोस्ट में लिखा गया, ''इससे महफूज़ की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल जाएगी. उम्मीद है कि ये इंसान यह भार उठा पाए. बाकी स्टूडेंट्स का नहीं पता, मगर यूनुस अपने साथ पश्चिमी लिबास में हिजाब पहने एक लड़की को लेकर गए. न कि बांग्ला साड़ी पहने किसी (महिला) को लेकर गए.''
तसलीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर महफूज़ आलम को हिज्बुत तहरीर नाम के संगठन का सदस्य होने का दावा किया है. तसलीमा ने दावा किया, ''महफूज़ आलम प्रतिबंधित आतंकी संगठन से जुड़े हैं.''
हालांकि यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ बांग्लादेश की हालिया रिपोर्ट में महफूज़ आलम का एक बयान छपा है.
रिपोर्ट के मुताबिक़, महफूज़ आलम ने कहा कि वो इस्लामी छात्र शिबिर से जुड़े थे न कि हिज्बुत तहरीर से.
मोहम्मद यूनुस ने शहबाज़ शरीफ़ से की मुलाक़ात
अमेरिका में मोहम्मद यूनुस ने कई राष्ट्र प्रमुखों से मुलाक़ात की है.
इसमें जो बाइडन से लेकर पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ़ भी शामिल हैं.
हालांकि पीएम मोदी भी अमेरिका गए थे लेकिन जब वो वहां से भारत के लिए निकले, तब यूनुस वहां पहुंचे थे.
बाइडन और यूनुस की मुलाक़ात की तस्वीर भी चर्चा में रही. बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद दोनों देशों के प्रमुखों की ये पहली मुलाक़ात थी.
बाइडन यूनुस की तस्वीर पर थिंक टैंक रैंड कॉर्पोरेशन के सीनियर फेलो डेरेक जे ग्रॉसमैन ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''झूठ नहीं बोलूंगा पर मुझे ये कई मामलों में असहज करता है. यूनुस चुने हुए नेता नहीं हैं. हिंदुओं पर हमले और इस्लामिक कट्टरपंथियों के प्रति उदार रुख़ को लेक कई जायज़ चिंताएं हैं. भारत-अमेरिका के संबंधों पर इसका असर होगा.''
थिंक टैंक विल्सन सेंटर में साउथ एशिया के एनलिस्ट माइकल जे कुगलमैन ने लिखा था, ''अगर मैं ग़लत नहीं हूं तो बाइडन यूनुस की ये मुलाक़ात बीते 24 सालों में पहली द्विपक्षीय वार्ता होगी. इससे पहले साल 2000 में ढाका में शेख़ हसीना और बिल क्लिंटन की मुलाक़ात हुई थी.''
इस मुलाक़ात के बाद यूनुस और शहबाज़ शरीफ़ की मुलाक़ात हुई.
यूनुस की मुलाक़ातों के बांग्लादेश के लिए मायने
बीबीसी बांग्ला सेवा की रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से कहा गया है कि सुधार कार्यक्रम और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के मामले में वैश्विक नेताओं से बांग्लादेश को समर्थन मिला है.
इन मुलाक़ातों को मोहम्मद यूनुस की यात्रा का हासिल बताया गया. जानकारों का मानना है कि इन मुलाक़ातों से सभी अहम वैश्विक संगठनों से बांग्लादेश को मदद मिल सकेगी.
अमेरिका में बांग्लादेश के राजदूत रहे हुमायूं कबीर ने कहा, ''संदेश ये है कि बांग्लादेश में नई प्रक्रियाएं शुरू हो गई हैं और देश यूनुस के ज़रिए नई दिशा में जा रहा है.''
कबीर ने बीबीसी बांग्ला से कहा, ''अमेरिका में जो हुआ, उससे दुनिया को बांग्लादेश के बारे में सकारात्मक संदेश मिला. अब दुनिया ये समझने की कोशिश करेगी कि बांग्लादेश आगे बढ़ना चाहता है. बांग्लादेश भी ये बात जानता है कि उसे दुनिया की मदद चाहिए होगी.''
पांच अगस्त 2024 के बाद से बांग्लादेश और भारत के संबंधों में भी फ़र्क देखने को मिला है.
शेख़ हसीना की छवि भारत समर्थक की रही. वहीं अब बांग्लादेश में बीएनपी का उभार हो रहा है. बीएनपी की छवि भारत विरोधी की रही है.
हालांकि बीते दिनों बीएनपी नेताओं ने भारतीय राजनयिकों से मुलाक़ात की थी.
शेख़ हसीना पांच अगस्त को दिल्ली आई थीं. कहा जाता है कि भारत-बांग्लादेश के अब क़रीब आने में शेख़ हसीना से भारत के पुराने संबंध रोड़ा बन सकते हैं.
इस बीच पाकिस्तान के शीर्ष अधिकारियों ने भी बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के सदस्यों से मुलाक़ात की है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित