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कभी दूसरों पर निर्भर तुर्की कैसे बना हथियारों के बाज़ार का बड़ा खिलाड़ी
रक्षा साज़ो-सामान बनाने वाली तुर्की की पांच कंपनियां दुनिया में हथियार बनाने और सैन्य सेवाएं देने वाली 100 बेहतरीन कंपनियों की लिस्ट में शामिल हैं.
स्टॉकहोम पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) ने 2024 में रक्षा उपकरणों और सैन्य सेवाओं की शीर्ष 100 कंपनियों की यह रैंकिंग जारी की है.
आय के आधार पर की गई इस रैंकिंग में तुर्की की कंपनी एसल्सन 52वें स्थान पर है, बायकर 66वें और एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ 75वें स्थान पर हैं.
द मशीनरी एंड केमिकल इंडस्ट्री कॉरपोरेशन इस सूची में 93वें नंबर पर है.
सिपरी की ताज़ा रैंकिंग में तुर्की की कंपनियों का शामिल होना यह दिखाता है कि तुर्की का रक्षा उद्योग फैल रहा है और वैश्विक हथियार व्यापार में उसका प्रभाव बढ़ रहा है.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को अपने पक्ष में जनमत तैयार करने की कोशिश में इस्तेमाल कर रहे हैं.
सरकारी मीडिया का कहना है कि रक्षा क्षेत्र में प्रगति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुर्की के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है.
ज़्यादातर कंपनियां सरकारी संरक्षण में करती हैं काम
सिपरी की इस रैंकिंग में शामिल बायकर को छोड़कर सभी कंपनियां सरकार के संरक्षण में काम करती हैं. बायकर कंपनी के प्रमुख ख़ुद तुर्की के राष्ट्रपति के दामाद सेल्चुक बायरकतार हैं.
एसल्सन कंपनी रक्षा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने में विशेषज्ञता रखती है. इनमें कम्यूनिकेशन रडार, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वारफ़ेयर सिस्टम शामिल हैं.
सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार 2024 में इस कंपनी की आमदनी 25 फ़ीसदी बढ़ी थी और इसने 3 अरब 40 करोड़ डॉलर कमाए.
एसल्सन की स्थापना 1975 में उस समय हुई थी जब तुर्की पर हथियार ख़रीदने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. यह देश की शुरुआती कंपनियों में से एक है.
2024 में सात और देशों ने एसल्सन के साथ नए रक्षा समझौते किए हैं, जबकि कुल मिलाकर दुनिया के 92 देश एसल्सन टेक्नोलॉजी के ख़रीदार हैं.
कई देशों के साथ कारोबार
तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ (टीएआई) एयरोस्पेस और एविएशन के सेक्टर में काम करती है. यह कंपनी हेलीकॉप्टर, एयरक्राफ़्ट और ऑटोमैटिक लड़ाकू गाड़ियां बनाती है.
सिपरी का कहना है कि 2024 में इसकी आय में 11 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ और कंपनी की कुल आय 2 अरब दस करोड़ डॉलर रही.
टीएआई के विशाल रक्षा उत्पादन में डिफ़ेंस टूल्स, कई तरह के लड़ाकू ड्रोन, हेलीकॉप्टर और दूसरे सामान शामिल हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक़ फ़िलीपींस, ट्यूनीशिया, किर्गिस्तान, नाइजीरिया और अज़रबैजान इस कंपनी से रक्षा उपकरण ख़रीदते हैं.
तुर्की की कंपनी बायकर के बायरकतार टीबी ड्रोन्स पूरी दुनिया में मशहूर हैं.
इनका इस्तेमाल लीबिया, सीरिया और यूक्रेन में हुआ है.
2024 में इस कंपनी की आय में थोड़ी कमी आई और इसकी कुल कमाई एक अरब नब्बे करोड़ डॉलर रही.
बायकर कंपनी के सशस्त्र ड्रोन TB2 और TB3 दुनिया के 30 से ज़्यादा देश ख़रीद चुके हैं.
इसी कंपनी ने हाल ही में तुर्की का पहला यूवीए (मानवरहित लड़ाकू ड्रोन विमान) 'बायरकतार किज़िलेल्मा' बनाया है, जिसे रक्षा उद्योग की ऐतिहासिक सफलता माना जा रहा है.
करोड़ों डॉलर की कमाई
रोकेत्सान कंपनी रॉकेट, बैलिस्टिक मिसाइल, हथियार, गोला-बारूद और दूसरे रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम बनाती है.
2024 में रोकेत्सान की आमदनी एक अरब 39 करोड़ डॉलर रही.
सिपरी की इस लिस्ट में आख़िरी तुर्की कंपनी एमकेई है जो छोटे हथियार, आर्टिलरी और गोला-बारूद बनाती है.
इस कंपनी की आमदनी में भी इज़ाफ़ा हुआ है और 2024 में इसकी आय एक अरब बीस करोड़ डॉलर रही है.
रक्षा उपकरण के ख़रीदार से निर्यातक बनने तक का सफ़र
एक समय था जब तुर्की दुनिया में हथियारों के ख़रीदार देश के रूप में गिना जाता था लेकिन अब तुर्की के रक्षा उपकरण उद्योग की तरक़्क़ी के बाद वह हथियार बेचने वाले एक प्रमुख देश के रूप में उभर रहा है.
हाल के कुछ वर्षों के दौरान कई हथियारबंद संघर्षों में तुर्की के बनाए गए रक्षा उपकरणों ने 'गेम चेंजर' की भूमिका निभाई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफ़ी ध्यान खींचा है.
तुर्की में बने लड़ाकू ड्रोनों ने यूक्रेन, सीरिया, लीबिया और अन्य देशों में जारी संघर्षों के दौरान अहम भूमिका निभाई है.
तुर्की के अधिकारियों का कहना है कि वह अपनी 80 फ़ीसदी रक्षा ज़रूरतों को स्थानीय स्तर पर पूरा करते हैं. यही वजह है कि तुर्की अब दुनिया के अन्य देशों से कम हथियार ख़रीदता है.
सिपरी के अनुसार वैश्विक स्तर पर हथियारों की ख़रीद में तुर्की की हिस्सेदारी लगभग तीन प्रतिशत थी, जो 2024 में घटकर लगभग डेढ़ फ़ीसदी हो गई है.
तुर्की ने 1974 में साइप्रस विवाद, 90 के दशक में कुर्द मिलिशिया के ख़िलाफ़ लड़ाई और सीरिया की जंग के दौरान ख़ुद पर लगे प्रतिबंधों का जवाब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करके दिया है.
आत्मनिर्भरता की नींव रखने के बाद, जब अमेरिका ने तुर्की पर हथियार ख़रीदने का प्रतिबंध हटाया, तो तुर्की ने अमेरिका से एफ़-35 विमान और रूस से एस-400 एयर डिफ़ेंस सिस्टम ख़रीदा.
तुर्की के रक्षा निर्यात में स्थानीय रूप से तैयार हल्के लड़ाकू विमान, युद्धक हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद गाड़ियां, गोला-बारूद और मिसाइल सिस्टम भी शामिल हैं.
जैसे-जैसे दुनिया में तुर्की के मिलिट्री हार्डवेयर में दिलचस्पी बढ़ रही है, तुर्की के रक्षा निर्यात से होने वाली आय में भी बढ़ोतरी हुई है. 2014 में रक्षा उत्पादन क्षेत्र की आय एक अरब 64 करोड़ डॉलर थी जो अब 2024 में बढ़कर सात अरब डॉलर से ज़्यादा हो गई है.
सिपरी के अनुसार 2028 तक तुर्की को रक्षा उत्पादन से 11 अरब डॉलर की आय होने का अनुमान है.
तुर्की में अधिकारी और सरकारी मीडिया तेज़ी से रक्षा क्षेत्र में बढ़ती 'आत्मनिर्भरता' पर ज़ोर दे रहे हैं और यह राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के राजनीतिक नैरेटिव का केंद्र भी है.
तुर्की की डिफ़ेंस इंडस्ट्री प्रेसिडेंसी की वेबसाइट के मुताबिक़ इस समय देश में 1,100 से ज़्यादा प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहा है और इसके लिए 100 अरब डॉलर से ज़्यादा का बजट आवंटित किया गया है.
देश का रक्षा उत्पादन उद्योग हज़ारों लोगों को रोज़गार दे रहा है और 2025 तक इस उद्योग में नौकरियों की संख्या एक लाख 10 हज़ार तक हो जाएगी.
तुर्की के अधिकारी भी रक्षा उत्पादन क्षेत्र को दुनिया के साथ संबंध मज़बूत करने की पहल के तौर पर देखते हैं और वह टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को तुर्की के नेतृत्व वाले प्रोजेक्ट्स में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं.
(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)