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ऑस्ट्रेलिया में पिंक बॉल भारतीय बल्लेबाज़ों को समझ क्यों नहीं आती?
- Author, जसविंदर सिद्धू
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
एडिलेड टेस्ट हारने के बाद भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने कहा है कि उनकी टीम अच्छा स्कोर बनाने में असफल रही. उन्होंने कहा कि टीम ने पहली पारी में 30-40 रन कम बनाए जो उन्हें भारी पड़े.
उन्होंने कहा, "हमने अच्छी बैटिंग नहीं की. हम ये स्वीकार करते हैं."
पहले ही दिन 11 विकेट गंवा देने वाली टीम के लिए टेस्ट मैच में जीत की संभावना कम हो जाती है, वह भी तब जब मैच पिंक बॉल के साथ दो तरह की रोशनी में खेली जा रही हो.
फ्लड लाइट के नीचे पिंक बॉल से खेलने के अनुभव की कमी एडिलेड टेस्ट मैच में साफ़ दिखी और टीम इंडिया यह मुक़ाबला 10 विकेट से हार गई.
हार के बाद कप्तान रोहित शर्मा ने पूर्व क्रिकेटर और अब कंमेंटेटर इशा गुहा से कहा, "यह पूरा हफ्ता हमारे लिए अच्छा नहीं रहा. हम अच्छा नहीं खेले. ऑस्ट्रेलियाई टीम हमसे कहीं बेहतर खेली."
"हमारे पास मैच में लौटने के कई मौके़ थे लेकिन हम उन्हें भुना पाने में नाकाम रहे. जिसके कारण हमें हार देखनी पड़ी. पर्थ में हमने बेशक बड़ी जीत हासिल की लेकिन हर मैच की अपनी अलग चुनौती होती है. अब हमारा पूरा ध्यान अगले मैच पर होगा."
इस हार के बाद न्यूज़ एजेंसी एएफ़पी के लिए क्रिकेट रिपोर्टिंग कर चुके कुलदीप लाल से सोशल प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा "न्यूज़ीलैंड के बाद आस्ट्रेलिया के सामने इस तरह बिना लड़े हार के बाद भारतीय चयनकर्ताओं का चिंतित होना लाज़िमी है. रोहित शर्मा की इस उम्दा टीम से इस तरह की हार की उम्मीद नहीं थी."
इस बॉल के सामने खेलने के लिए इसे समझना बेहद ज़रूरी है. इसकी काली सिलाई किस तरफ गिर रही है, उसे आख़िरी समय तक ग़ौर से देखना ज़रूरी होता है. जबकि भारतीय बल्लेबाज़ ऐसा कर पाने में नाकाम रहे.
आस्ट्रेलिया के पास इस गेंद से खेलने का अच्छा अनुभव रहा है. उसके गेंदबाज़ों ने बॉल का सही इस्तेमाल किया. उन्होंने बॉल को ऑफ़ स्टंप पर थोड़ा ऊपर डालकर भारतीय बल्लेबाज़ों को खेलने पर मजबूर किया. यही वजह है कि ज़्यादातर भारतीय बल्लेबाज़ विकेट के पीछे आउट हुए.
हालांकि आस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ मिचेल स्ट्रॉक ने मैच के बाद कहा कि "पिंक बॉल, सफेद और लाल गेंद जैसी ही है. हमने गेंदबाज़ी और बल्लेबाज़ी काफी सकारात्मक सोच के साथ की. हम पॉज़िटिव थे. इस पिच पर गेंदबाज़ी करना अच्छा रहा."
भारतीय गेंदबाज़ों का आकलन करें तो वो पिंक बॉल के लिए जरूरी ट्रिक को पकड़ पाने में नाकाम रहे.
मोहम्मद सिराज ने पहले दिन सिर्फ़ 15 और दूसरे दिन 24.7 प्रतिशत ही फुल लेंथ गेंदबाज़ी की. वहीं जसप्रीत बुमराह का प्रतिशत 7.5 और 21.3 रहा. जबकि हर्षित राणा ने 20 और 31 फ़ीसदी गेंद ही ऊपर डाली.
पर्थ टेस्ट मैच में टीम की जीत का सबसे बड़ा कारण था उसके गेंदबाज़ों की सही लाइन और लेंथ. इस मैच में वह नदारद थी. इसका असर मैच के परिणाम पर पड़ा.
टीम इंडिया के बॉलिंग कोच मोरने मोरकल के मुताबिक़, "मेरा मानना है कि इस टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों ने पहले दिन से ही उम्दा गेंदबाज़ी की और हमें रन बनाने से रोके रखा. "
" यह बॉल सॉफ्ट होने के बाद रन देती है और बाद में रात के सेशन में बल्लेबाज़ों के लिए इस गेंद को संभालने की चिंता बढ़ जाती है. मेरा मानना है कि टीम अब भी इस गेंद को खेलने के सही ढंग को सीख रही है क्योंकि उसके पास इसके साथ खेलने का अनुभव नहीं."
ट्रेविस हेड विश्व कप फ़ाइनल के बाद से भारतीय टीम के लिए सिरदर्द बने हुए हैं. एडिलेड में परेशान कर देने वाले हालात में भी वो 141 गेंदों पर 140 रन की आक्रमक पारी खेल गए.
इसमें उनके 14 चौके और चार छक्के शामिल थे. उनकी इस तरह हावी होकर खेली गई पारी से नज़र आता है कि भारतीय गेंदबाज़ों के पास उनके लिए कोई प्लान नहीं था. वो अपनी इस पारी से भारतीय टीम को जीत की संभावना से दूर ले जाने में कामयाब रहे.
अभी तक के आंकड़ों से पता लगता है कि पिंक बॉल से शाम के सत्र में विकेट गिरते हैं. आस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ फ्लड लाइट के नीचे पांच विकेट निकालने में सफल रहे.
रोहित शर्मा की फ़ॉर्म ने इस मैच में बड़ा असर डाला है. ऐसा लग रहा था कि दिन का खेल ख़त्म होने तक वो नॉट आउट लौटेंगे.
लेकिन पैट कमिंस की ऑफ़ स्टंप पर गिरी दिन की सबसे बेहतरीन बॉल, रोहित शर्मा की विकेट को बिखेर गई.
साल 2024-25 में रोहित शर्मा की बैटिंग औसत महज़ 11.83 है. बतौर कप्तान पहले छह बल्लेबाज़ों में खेलने के दौरान यह उनका सबसे कमज़ोर औसत है.
उनके आउट होने के तरीके से लग रहा है कि ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों के पता है उनके सामने किस लेंथ पर गेंदबाज़ी करनी है. ऑफ़ स्टंप के आसपास हल्की मूवमेंट के सामने वह फंस रहे हैं.
इस सीज़न में अपनी पिछली 12 पारियों में वह आठ में दस रन से ऊपर नहीं पहुंच पाए हैं.
विराट कोहली लगातार इनसाइड एज, स्लिप पर या विकेट के पीछे पकड़े जा रहे हैं. ऐसे बड़े टेस्ट मैच में अगर विराट कोहली जैसे बल्लेबाज़ के बल्ले से रन नहीं बनते हैं तो यह टीम के ख़िलाफ़ जाता है और टीम जीत की उम्मीद नहीं कर सकती.
साफ़ दिख रहा है कि मिचेल स्टार्क, पैट कंमिस, स्कॉट बोलैंड ने उनके ख़िलाफ़ जबर्दस्त होम वर्क किया है. विराट को इस तरह से आउट होना अगले मुक़ाबलों में टीम के लिए चिंता हो सकती है.
यक़ीनी तौर पर इस हार के बाद रोहित और विराट को लेकर सवाल जरूर खड़ा होगा कि आख़िर और कितने समय के लिए वो इस टीम में बने रहते हैं.
मौजूदा सिरीज़ 1-1 पर बराबर होने के साथ ही रोचक हो गई है. ऐसे में अगले टेस्ट मैच में कड़े मुक़ाबले की उम्मीद की जा सकती है.
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