You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
भारत समेत कई देश क्यों ख़रीद रहे हैं सोना?
दुनिया भर के कई देशों के सेंट्रल बैंक बड़ी मात्रा में सोना ख़रीद रहे हैं. इनमें भारतीय रिज़र्व बैंक भी शामिल है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताज़ा रिपोर्ट कहती है कि सिर्फ़ जुलाई महीने में ही केंद्रीय बैंकों की ख़रीदारी 37 टन है.
सोना खरीदने वाले देशों में पोलैंड, तुर्की, उज़्बेकिस्तान और चेक रिपब्लिक जैसे देश शामिल हैं.
हालाँकि सोने की इस ताबड़तोड़ ख़रीद के बीच कुछ देश ऐसे भी हैं जिनके केंद्रीय बैंक सोना बेच रहे हैं.
ये ऐसे समय में हो रहा है जब रूस-यूक्रेन युद्ध, ग़ज़ा-इसराइल जंग और पर्यावरण संकट से दुनिया भर में चुनौतियां बढ़ी हैं.
किन देशों ने बेचा सोना
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, इस साल की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल-जून के दौरान भारत सोना खरीदने में दूसरे नंबर पर रहा.
पोलैंड का सेंट्रल बैंक सबसे अधिक 18.68 टन गोल्ड खरीद के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस दौरान (अप्रैल-जून तिमाही) 18.67 टन सोना ख़रीदा. वहीं, तुर्की ने इस दौरान 14. 63 टन, उज़्बेकिस्तान ने 7.46 टन और चेक रिपब्लिक ने 5.91 टन सोना ख़रीदा है.
इस साल की दूसरी तिमाही में दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों ने 183 टन सोना खरीदा जबकि 2023 में इसी अवधि के दौरान 173.6 टन सोना खरीदा गया था.
इस साल की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल-जून में कज़ाख़स्तान ने 11.83 टन सोना बेचा है. वहीं सिंगापुर ने 7.7 टन जबकि जर्मनी ने 780 किलोग्राम सोना बेचा.
वर्षों से सोना देशों के एसेट रिज़र्व का अहम हिस्सा रहा है और ये अब भी जारी है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में केंद्रीय बैंकों ने 1,037 टन सोना अपने भंडार में जमा किये. 2022 में केंद्रीय बैंकों ने 1,082 सोना जमा किया. ये आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं कि केंद्रीय बैंक गोल्ड को अब भी रिज़र्व एसेट के रूप में काफ़ी तवज्जो देते हैं.
सोना सेंट्रल बैंकों के लिए स्थिर एसेट की तरह काम करता है. वित्तीय संकट के दौरान ये अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने में मदद करने के साथ ही रिज़र्व को एक तरह से विविधता भी देता है. अमेरिकी डॉलर को 'रिजर्व करेंसी' का दर्जा प्राप्त है और दुनिया भर के कई बैंकों का लक्ष्य इस पर निर्भरता कम करना है और इसमें सोना महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है.
ख़रीद के पीछे की ये है वजह
एचडीएफ़सी सिक्योरिटीज़ के प्रोडक्ट हेड (कमॉडिटीज़ एंड करेंसीज़) अनुज गुप्ता कहते हैं, "जिस तरह से डॉलर में गिरावट देखने को मिल रही है, उसकी वजह से केंद्रीय बैंक अपने पोर्टफ़ोलियो में गोल्ड जमा कर रहे हैं, सबका ये मानना है कि अमेरिका आगे ब्याज दरों में कटौती कर सकता है तो डॉलर की वैल्यू नीचे गिरेगी इसलिए वो अपने पोर्टफ़ोलियो को गोल्ड की तरफ़ ले जा रहे हैं."
"जिस तरह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था कर्ज़ में चल रही है तो ऐसी आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं कि डॉलर आने वाले समय में कमजोर हो सकता है."
अनुज कहते हैं, "भारत भी अपने पोर्टफ़ोलियो को ज़्यादा विविधता देने के लिए ऐसा कर रहा है. भारत को अपना फॉरेन रिज़र्व बढ़ाना है. भारत अगर डॉलर के मुक़ाबले गोल्ड की भी ख़रीद करता है तो वो ज़्यादा नोट छाप सकता है. ये भी एक वजह हो सकती है."
इसके अलावा दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनैतिक तनाव भी बढ़ रहे हैं. अगर आगे कुछ भी उथल-पुथल होती है तो करेंसी की वैल्यू गिरेगी और सोने की कीमतें बढ़ेंगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)