सऊदी अरब की महिलाओं पर आईएमएफ़ की रिपोर्ट कह रही अलग कहानी

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सऊदी अरब की चर्चा महिलाओं के लिहाज़ से एक रूढ़िवादी देश के रूप में होती है.

महिलाओं से जुड़ा कोई भी सुधार होता है तो दुनिया भर के मीडिया में तवज्जो मिलती है.

हाल के वर्षों में महिलाओं के लिबास, लैंगिक अलगाव और महिला ड्राइवरों से प्रतिबंध हटा तो इसे क्रांतिकारी सुधार के रूप में देखा गया.

महिलाओं के बिना किसी पुरुष के घर से बाहर निकलने के नियम को भी संशोधित किया गया.

अब सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी उन देशों से भी ज़्यादा हो गई है, जिन्हें लोकतांत्रिक और सेक्युलर होने के नाते महिलाओं को लिए ज़्यादा उदार समझा जाता है.

सऊदी अरब में महिलाएं अब उन क्षेत्रों में भी काम कर रही हैं, जहाँ पहले महिलाओं का होना अकल्पनीय माना जाता था. जैसे बॉर्डर एजेंट, टूर गाइड्स, होस्टपिटैलिटी और बाक़ी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में काम कर रही हैं.

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आईएमएफ़ की रिपोर्ट में क्या है?

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ ने बुधवार यानी छह सितंबर को सऊदी अरब को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें महिलाओं से जुड़े तथ्य काफ़ी अहम हैं.

आईएमएफ़ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सऊदी अरब के वर्क फ़ोर्स यानी वहाँ की श्रम शक्ति में महिलाएं 36 फ़ीसदी हो गई हैं.

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने अपने विज़न 2030 में वर्क फोर्स में महिलाओं की कुल भागीदारी 30 फ़ीसदी करने का लक्ष्य रखा था, जो 2022 में ही इस लक्ष्य से आगे निकल चुका है.

दशकों तक सऊदी अरब का शुमार दुनिया के उन देशों में था, जहाँ की श्रम शक्ति में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम थी.

2018 में सऊदी अरब के लेबर फोर्स में वहाँ की महिलाओं का हिस्सेदारी महज़ 19.7 प्रतिशत थी.

आईएमएफ़ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस विज़न 2030 के तहत अपने मुल्क को आधुनिक अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं, जो तेल के राजस्व पर कम से कम निर्भर हो. इसी के तहत कई तरह के सुधार किए गए और वहाँ के वर्क फोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है.

राजकुमारी रीमा बिंत बंदार

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इमेज कैप्शन, प्रिंसेज रीमा बिंत बंदार अल-सऊद- सऊदी की पहली महिला राजदूत

सऊदी लौटी महिला ने क्या फ़र्क़ महसूस किया?

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सऊदी अरब की फ़ातिमा अल्माथामी 14 साल ऑस्ट्रेलिया में रही हैं.

उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ क्वीन्सलैंड से बैचलर, मास्टर और पीएचडी की पढ़ाई की है. ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन यानी एबीसी न्यूज़ से बातचीत में फ़ातिमा ने कहा कि वह हर साल छुट्टियों में सऊदी अरब जाती हैं और महिलाओं को लेकर हो रही तब्दीली महसूस कर रही हैं.

एबीसी से अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''फ़ातिमा पिछले साल जुलाई में सऊदी अरब लौटी थीं. वह अभी रियाद में रह रही हैं. फ़ातिमा सऊदी अरब की यंग महिलाओं को आईटी में जाने की तैयारी करवाती हैं.''

फ़ातिमा कहती हैं कि सऊदी अरब की लड़कियां अब आईटी की भी बड़ी संख्या में पढ़ाई कर रही हैं.

फ़ातिमा ने एबीसी से कहा, ''सऊदी अरब में लैंगिक अलगाव का मतलब था कि महिलाएं वहीं काम कर सकती हैं, जहाँ पुरुषों की मौजूदगी नहीं है. मेडिसिन के क्षेत्र में महिलाओं को काफ़ी संघर्ष करना पड़ा है क्योंकि जहां पुरुष और महिलाएं दोनों काम करते थे, वहाँ महिलाओं के लिए काम करना अनैतिक माना जाता है.''

वो बोलीं, ''यह केवल महिलाओं को शामिल करना नहीं है बल्कि सभी क्षेत्रों में विविधता को बढ़ावा देना है. महिलाओं के आने से हमारे मुल्क में बहुत कुछ बदला है. राजनीति, टूरिज़म, खेल और बाक़ी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए बहुत कुछ बदला है.''

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इमेज कैप्शन, साल 2020 में अमल अल-मोआलिमी को नॉर्वे में सऊदी अरब की राजदूत नियुक्त किया गया था

नौकरीपेशा महिलाओं की संख्या बढ़ी

सऊदी जनरल अथॉरिटी फोर स्टैटिस्टिक्स ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले साल चौथी तिमाही में सऊदी अरब के नौकरीपेशा लोगों में महिलाओं का अनुपात बढ़कर 30.4 फ़ीसदी हो गया था.

इसी अवधि में यह 2021 में 27.6 फ़ीसदी था. ये आँकड़े बताते हैं कि सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी तेज़ी से बढ़ रही है.

होटेल और रेस्त्रां सेक्टर के वर्क फोर्स में महिलाओं की भागीदारी 40 प्रतिशत तक हो गई है.

2012 में सऊदी अरब में महिलाओं को घर से बाहर काम करने की अनुमति मिली थी. महिलाओं को तब कॉस्मेटिक्स शॉप और महिलाओं के अंडरगार्मेंट्स स्टोर पर काम करने की अनुमति मिली थी.

2016 में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने जब विज़न 2030 लॉन्च किया तो महिलाओं के लिए चीज़ें तेज़ी से बदलने लगीं.

सऊदी अरब में महिलाएं ज़्यादातर प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करती रही हैं और सार्वजनिक पदों पर पहुंचने की ये शुरुआत भर है.

इसी साल जुलाई में दो महिलाओं को सरकार में वरिष्ठ पदों पर नियुक्त किया गया था.

शिहाना अलाज़ाज़ को डिप्टी सेक्रेटरी जनरल और राजकुमारी हाइफा बिंत मोहम्मद अल सउद को डिप्टी टूरिज्म मंत्री बनाया गया था.

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इमेज कैप्शन, हाएफ़ा को यूरोपियन यूनियन और यूरोपियन एटमिक एनर्जी कम्युनिटी में सऊदी अरब के मिशन का ज़िम्मा दिया गया है.

सिलसिला जारी है...

शूरा काउंसिल में भी महिलाओं के लिए आरक्षण है. 150 सीटों की काउंसिल में 30 महिलाओं का होना ज़रूरी है.

जीसीसी में सऊदी अरब के निदेशक इसाम अबोउसलेइमन ने वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट में कहा है, ''सुधार का ही नतीजा है कि पहली बार 2013 में सऊदी शुरा काउंसिल में 30 महिलाओं को नियुक्त किया गया.''

2015 में 17 महिलाओं को नगर निगम की सीटों पर नियुक्त किया गया.

आप देख सकते हैं कि बड़ी संख्या में महिलाएं उन सेक्टरों में मैनेजर की पोस्ट पर हैं, जहाँ पुरुषों का दबदबा हुआ करता था.

इसी साल सऊदी अरब के किंग सलमान ने 11 देशों में नए राजदूतों को नियुक्त किया, जिनमें से दो महिलाएं थीं.

साल 2019 में सऊदी ने पहली बार किसी महिला को राजदूत नियुक्त किया था.

तब से ये सिलसिला जारी है और अब तक पाँच महिलाओं को ये ज़िम्मा दिया जा चुका है.

जनवरी 2023 में सऊदी रेलवे ने वीडियो जारी कर बताया था कि महिलाएं अब सऊदी अरब में बुलेट ट्रेन चलाएंगी. बताया गया था कि इस बाबत 32 महिलाओं ने ट्रेनिंग शुरू भी कर दी थी.

कब-कब सऊदी ने दी महिलाओं को ज़िम्मेदारी?

  • साल 2019 में राजकुमारी रीमा बिंत बंदार सऊदी अरब की पहली महिला राजदूत बनी थीं. उस समय क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने उन्हें अमेरिका का राजदूत नियुक्त किया था.
  • साल 2020 में अमल अल-मोआलिमी को नॉर्वे में सऊदी अरब की राजदूत नियुक्त किया गया था. अल-मोआलिमी सऊदी अरब के मानवाधिकार आयोग के साथ जुड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनी में जनरल मैनेजर रह चुकी हैं.
  • अप्रैल 2021 में इनास अल-शाहवन ने स्वीडन और आइसलैंड में सऊदी अरब की राजदूत के तौर पर शपथ ली थी. वो सऊदी का प्रतिनिधित्व करने वाली तीसरी महिला राजदूत बनीं.
  • जनवरी 2023 में जिन नए राजदूतों की नियुक्ति हुई, उनमें से एक हाएफ़ा जेदीया भी थीं. हाएफ़ा को यूरोपियन यूनियन और यूरोपियन एटमिक एनर्जी कम्युनिटी में सऊदी अरब के मिशन का ज़िम्मा दिया गया.
  • जनवरी 2023 में फ़िनलैंड में सऊदी अरब की राजदूत नियुक्त होने वाली निसरीन बिंत हमाद अल-शिबेल ने किंग सलमान बिन अब्दुलाज़िज़ के सामने शपथ ली थी.

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