यूक्रेन के 'ऑपरेशन स्पाइडर वेब' से भारत और दूसरे देश क्या सबक ले सकते हैं?

इमेज स्रोत, EPA-EFE/Shutterstock
- Author, प्रेरणा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
1 जून, 2025 को 100 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन्स ने रूस के भीतर स्थित वायु सेना के ठिकानों पर हमला किया, जिनका निशाना परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम लंबी दूरी के रूसी बमवर्षक थे.
यूक्रेन की सैन्य ख़ुफ़िया एजेंसी एसबीयू ने मीडिया को जो जानकारी लीक की है उसके आकलन के हिसाब से ड्रोन्स को लकड़ी के केबिन में छिपाकर ट्रकों की मदद से रूस पहुंचाया गया. ये केबिन रिमोट से ऑपरेट होने वाली छतों के नीचे छिपाए गए थे.
ये ट्रक हवाई अड्डों के पास ले जाए गए, जिनके ड्राइवरों को शायद ट्रक में रखे सामान की असलियत का कोई अंदाज़ा नहीं था. वहां पहुंचने के बाद ड्रोन लॉन्च किए गए और इन्हें लक्ष्यों की ओर भेजा गया.
इस ऑपरेशन की निगरानी कर रहे यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने रविवार रात को सोशल मीडिया पर बताया कि इस साहसिक हमले में 117 ड्रोन का इस्तेमाल हुआ, जिसकी तैयारी में "एक साल, छह महीने और नौ दिन" लगे.
(बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)
दरअसल, हाल के दिनों में ये दूसरा मौक़ा है जब युद्ध में ड्रोन के इस्तेमाल की चर्चा हो रही है. इससे पहले भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष के दौरान भी 'ड्रोन वॉर' की काफ़ी चर्चा हुई थी.
भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान कई विश्लेषकों ने दावा किया था कि 'ये संघर्ष के एक नए युग की शुरुआत है, जिसे 'ड्रोन युग' कहा जा सकता है. इस युग में मानव रहित हथियार यानी ड्रोन ही जंग के मैदान की दशा और दिशा तय करेंगे.'

इमेज स्रोत, Getty Images
बहरहाल, रूस के तेज़ होते हमलों के बीच यूक्रेन ने बीते 1 जून को रूस के ख़िलाफ़ 'ऑपरेशन स्पाइडर वेब' लॉन्च किया. इसे रूस पर यूक्रेन का अब तक का सबसे घातक हमला बताया जा रहा है.
दावा है कि इस ऑपरेशन की तैयारी यूक्रेन बीते 18 महीनों से कर रहा था.
एसबीयू की तरफ़ से ही लीक जानकारी से पता चलता है कि कई छोटे ड्रोन्स को ख़ुफ़िया तरीके से रूस में पहुंचाया गया.
फिर हज़ारों मील दूर अलग-अलग चार जगहों पर ले जाकर नज़दीकी सैन्य हवाई अड्डों पर रिमोटली लॉन्च किया गया.
'ऑपरेशन वेब ने दिखाया भविष्य में होने वाले जंग का स्वरूप'

इस हमले में हुए नुक़सान पर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं. यूक्रेन का कहना है कि उसने ड्रोन हमले में रूस के 40 से ज़्यादा बमवर्षक विमानों (वैसे विमान जो लंबी दूरी के हमले करने में सक्षम हो) को निशाना बनाया है.
रूस के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है हमले देश के पांच क्षेत्रों में हुए हैं, जिनमें दो जगहों पर विमानों को नुकसान हुआ. बाक़ी दूसरी जगहों पर किए गए सभी हमले विफल कर दिए गए.
बीबीसी स्वतंत्र तौर पर इन दावों की पुष्टि नहीं करता. लेकिन इस बात की पुष्टि सभी रक्षा विश्लेषक कर रहे हैं कि यूक्रेन की तरफ़ से किया गया ये हमला अभूतपूर्व है.
ख़ासकर जिस तरह से ड्रोन्स को रूस में पहुंचाया और फिर सैटेलाइट या इंटरनेट लिंक के ज़रिए रिमोट से संचालित किया गया, वो असाधारण था.
अंतरराष्ट्रीय और रणनीतिक मामलों की जानकार डॉ स्वास्ति राव का कहना है कि भारत और दूसरे वो अन्य देश जो अपना खुद का ड्रोन सिस्टम तैयार कर रहे हैं, वो इस ऑपरेशन से कई चीज़ें सीख सकते हैं. ऑपरेशन 'स्पाइडर वेब' दिखाता है कि भविष्य में लड़ी जाने वाली जंग का स्वरूप कैसा होगा.
मसलन, कैसे छोटे देश तकनीक और नए इनोवेशन की मदद से बड़े और ताक़तवर देशों का मज़बूती से सामना कर सकते हैं. ऐसे में भारत को इस दिशा में अपने कदम तेज़ करने होंगे.
'भारत को मज़बूत करना होगा अपना ड्रोन गेम'

बीबीसी से बात करते हुए स्वास्ति राव ने कहा, "अगर भारत डिफ़ेंस के क्षेत्र में हो रहे नए तकनीकी इनोवेशन्स के बीच क़दम से क़दम मिलाकर चलना चाहता है तो हम साल दर साल सैन्य प्रोजेक्ट्स में होने वाली देरी को अनदेखा नहीं कर सकते."
कुछ दिनों पहले ही भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ़ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने रक्षा ख़रीद परियोजनाओं में हो रही देरी पर गहरी नाराज़गी जताई थी.
उन्होंने कहा था कि उनकी जानकारी में अब तक एक भी प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हुए.
स्वास्ति राव इन्हीं बातों को रेखांकित करते हुए कहती हैं कि भारत का ड्रोन मिशन पहले से बेहतर ज़रूर हुआ है, पर दुनिया में जो उच्च मानक तय हैं उसके लिहाज़ से देखें तो हम प्रतिस्पर्द्धा में नहीं हैं.
उन्होंने कहा, "हाल में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष में हमने चीन और तुर्की के ड्रोन्स को सफलतापूर्वक नष्ट तो किया पर वो बेसिक स्तर के ड्रोन्स थे. ऐसे में मान लिया जाए कि जैसी तकनीक दुनिया में विकसित हो रही है, उस उच्च तकनीक का ड्रोन हमला हम पर होता है तो भारी नुकसान की संभावना बन सकती है."
स्वास्ति राव कहती हैं, "यूक्रेन के इस ऑपरेशन की इतनी चर्चा हो रही है क्योंकि यूक्रेन के पास न तो ढंग की वायुसेना है, न ही थलसेना. वो जंग में हैं और जंग में बने रहते हुए उन्होंने ऐसी ड्रोन प्रणाली विकसित की, जिसने दुनिया के दूसरे सबसे मज़बूत सैन्य शक्ति वाले देश को उनके सीमा के भीतर नुकसान पहुंचाया है."

इमेज स्रोत, ASISGUARD.COM
'स्पाइडर वेब ऑपरेशन' के रणनीतिक सबक

सेंटर फ़ॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ एक जाना माना थिंक टैंक है जो सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े विषयों पर शोध करता है.
यहां के वाधवानी सेंटर फॉर एआई एंड एडवांस्ड टेक्नॉलाजी में फ़ेलो केटेरीना बोंडार ने अपने लेख में उन रणनीतिक सबकों को रेखांकित किया है, जो यूक्रेन के 'स्पाइडर वेब' ऑपरेशन से सीखी जा सकती हैं.
बोंडार लिखती हैं, "इस ऑपरेशन ने साबित किया है कि कम लागत वाली, ओपन सोर्स ड्रोन प्रणालियां अरबों-ख़रबों की लागत से तैयार किए गए रक्षा उपकरणों को भी प्रभावी ढंग से नष्ट करने की क्षमता रखती हैं."
बोंडार लिखती हैं, "यूक्रेन ने अपने लक्ष्यों को साधने के लिए एआई प्रणाली का इस्तेमाल किया जिससे ड्रोन चाहे जिस भी क्वालिटी के हों, उनसे सटीक हमले करने में मदद मिली. वहीं यूक्रेन ने इस बात को सुनिश्चित किया कि रूस हमले में इस्तेमाल हुए उपकरण जैसे ड्रोन या लॉन्च सिस्टम्स की स्टडी न कर पाए."
'खुद को तैयार करे भारत'

इमेज स्रोत, Nasir Kachroo/NurPhoto via Getty Images
रक्षा विशेषज्ञ राहुल बेदी के मुताबिक़ यूक्रेन ने हमले के लिए जिन ड्रोन्स का इस्तेमाल किया है, उन्हें क्वॉड कॉप्टर कहते हैं और ये हेलिकॉप्टर की तरह नज़र आते हैं.
यूक्रेन ने इन्हें महज़ दो चार सौ डॉलर में तैयार किया, जिससे ज़ाहिर होता है कि सस्ते और प्रभावी तरीक़े से भी आप दुश्मन पर हमला कर सकते हैं.
उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "आज के दौर में दुश्मन को नुक़सान पहुंचाने के लिए उसकी सीमा में घुसने या उससे सीधे भिड़ने की ज़रूरत नहीं है. आप तीन-चार हज़ार किलोमीटर दूर बैठकर भी सटीक हमले कर सकते हैं और यूक्रेन ने अपने इस ऑपरेशन के ज़रिए यही साबित किया है."
भारत इस ऑपरेशन से क्या सीख ले सकता है, इस सवाल पर वो कहते हैं कि भारत की ड्रोन काबिलियत भी काफ़ी बेहतर है.
राहुल बेदी कहते हैं, "ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए भी हमने ये साबित किया है कि हम तरह-तरह के ड्रोन ऑपरेशनलाइज़ कर सकते हैं और उन्हें डिप्लॉय कर सकते हैं. लेकिन यूक्रेन ने अपने इस ऑपरेशन के ज़रिए बड़े और छोटे मुल्क के बीच सैन्य फ़ासले को धुंधला कर दिया है. तो भारत इस ऑपरेशन से यही सीख सकता है कि वो जंग के तेज़ी से बदलते स्वरूप के मुताबिक़ खुद को तैयार रखे."
'ऑपरेशन की सफलता को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहा पश्चिमी मीडिया'

हालांकि रक्षा विशेषज्ञ और सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज़ के सीनियर फेलो दिनेश पांडेय का मानना है कि यूक्रेन खुद और पश्चिमी मीडिया ऑपरेशन की सफलता को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहा है.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के वक़्त पाकिस्तान के जिन नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही थी, उनसे जुड़ी तस्वीरें और सैटेलाइट इमेज भी पेश किए गए थे लेकिन यूक्रेन रूस के जिन चालीस बॉम्बर्स को नुकसान पहुंचाने की बात कर रहा है, उससे जुड़ी सभी तस्वीरें क्यों नहीं सामने रखी गईं."
हालांकि उन्होंने एफ़पीवी यानी फ़र्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन के ज़रिए किए गए यूक्रेनी हमलों को असरदार माना और इसे रूस की एक बड़ी सुरक्षा चूक बताया. उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने इन ड्रोन्स को फ़ाइबर ऑप्टिक्स केबल के ज़रिए लॉन्च किए थे और इन्हें अपने टारगेट्स के बहुत पास रखा था.
उनके मुताबिक़, 'जब आप टारगेट्स के बहुत नज़दीक हों, तो रिएक्शन टाइम बहुत कम होता है. इस स्थिति में आपको ऐसे काउंटर ड्रोन सिस्टम बनाने होंगे जो कि तुरंत रिएक्ट करें.'

इमेज स्रोत, Getty Images
भारत ने शामिल किए पांच एफ़पीवी ड्रोन
गोला-बारूद और विस्फोटक विशेषज्ञ कर्नल (रिटायर्ड) देवेश सिंह ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा है कि भारत एफ़पीवी यानी फॉर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन, काउंटर ड्रोन और एयर डिफ़ेंस इनोवेशन्स के साथ भविष्य के संघर्षों की तैयारी कर रहा है.
भारत ने इसी साल मार्च महीने में अपने सैन्य बेड़े में 5 एफ़पीवी ड्रोन शामिल किए हैं और आने वाले सालों में कुल 100 एफ़पीवी शामिल की जाएंगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















