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बांग्लादेश: ख़ालिदा ज़िया आधी रात क़तर के भेजे प्लेन से गईं लंदन, कई तरह के उठ रहे सवाल
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष ख़ालिदा ज़िया मंगलवार को आधी रात 11:47 बजे ढाका के हज़रत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लंदन के लिए रवाना हुई थीं.
एयरपोर्ट के वीआईपी लाउन्ज में बीएनपी स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य अपनी नेता की सुरक्षित यात्रा के लिए दुआओं के साथ जुटे थे.
ख़ालिदा ज़िया के लंदन जाने के लिए क़तर के अमीर ने प्लेन भेजा था. बीएनपी के महासचिव मिर्ज़ा फ़खरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि ख़ालिदा झूठे मुक़दमों में छह सालों से जेल में थीं.
आलमगीर ने कहा, "क़ैद के दौरान वह गंभीर रूप से बीमार थीं. उन्हें इलाज की ज़रूरत थी और हम शेख़ हसीना की सरकार से विदेश में इलाज के लिए आग्रह करते रहे, लेकिन अनुमति नहीं मिली थी.''
79 साल की ख़ालिदा ज़िया अपने घर से रात 8:12 बजे निकल गई थीं और क़तर से प्लेन 10 बजे पहुँचा था. ख़ालिदा ज़िया को विदा करने बड़ी संख्या में बीएनपी के समर्थक एयरपोर्ट के क़रीब जुटे थे.
बुधवार दोपहर बाद 2:55 बजे लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर ख़ालिदा ज़िया का विमान उतरा और वहां अगवानी में उनके बेटे तारिक़ रहमान मौजूद थे.
तारिक़ रहमान की अपनी माँ से लगभग सात सालों बाद मुलाक़ात हुई. तारिक़ रहमान के साथ उनकी पत्नी ज़ुबैदा रहमान भी एयरपोर्ट पर मौजूद थीं.
तारिक़ रहमान बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं. रहमान पिछले कई सालों से लंदन में रह रहे हैं और वहीं से पार्टी चलाते हैं.
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ख़ालिदा ज़िया को लेकर अटकलें तेज़
ख़ालिदा ज़िया देश में होने के बावजूद लंबे समय से सक्रिय राजनीति से बाहर रहने पर मजबूर थीं. लेकिन वह लंदन तब गईं, जब उनकी पार्टी देश में चुनाव की मांग कर रही है.
बांग्लादेश में कई लोग ये आरोप लगा रहे हैं कि अंतरिम सरकार जानबूझकर चुनाव में देरी कर रही है.
बांग्लादेश के एक पत्रकार सलाहुद्दीन शोएब चौधरी ने एक्स पर लिखा है कि पहले मोहम्मद यूनुस और उनके छात्र समर्थकों ने शेख़ हसीना को सत्ता से बाहर किया और अब चुनाव नहीं करा कर ये बीएनपी को भी रास्ते से हटाना चाहते हैं.
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस जल्दी चुनाव कराने के मूड में नहीं दिख रहे हैं. हालांकि मोहम्मद युनूस ने जल्द ही चुनाव कराने का वादा किया था. अब अंतरिम सरकार का कहना है कि चुनाव सुधारों के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे.
इससे पहले, ख़ालिदा ज़िया 2017 में 15 जुलाई को आँख का इलाज कराने लंदन गई थीं. अतीत के अनुभवों और राजनीतिक संदर्भों को देखते हुए सवाल उ रहा है कि अब ख़ालिदा ज़िया वापस आएंगी या नहीं?
बीएनपी की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य डॉ मुशर्रफ़ हुसैन ने बीबीसी बांग्ला से कहा, ''हम उम्मीद करते हैं कि ख़ालिदा ज़िया इलाज से ठीक होने के बाद देश का नेतृत्व करने आएंगी.''
बीएनपी एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य सैयद हुसैन अलाल ने कहा, ''बांग्लादेश के लोग शायद निराश होंगे क्योंकि अतीत के अनुभव बहुत ख़राब रहे हैं. लेकिन हमें डरने की ज़रूरत नहीं है. फिर भी हम सतर्क हैं.''
ढाका यूनिवर्सिटी में लेक्चरर ज़ुबैदा नसरीन कहती हैं, ''ख़ालिदा ज़िया की पार्टी में तनाव का मुख्य कारण है कि लंदन ट्रिप को राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है. पार्टी नेताओं के बीच इस सवाल पर सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है कि क्या ख़ालिदा ज़िया इलाज के बाद सामान्य तरीक़े से वापस आ पाएंगी या वापसी में दिक़्क़त होगी.''
इससे पहले, 2007 में सेना समर्थित केयरटेकर सरकार ने अवामी लीग की अध्यक्ष शेख़ हसीना को वापस लौटने से रोक दिया था. तब शेख़ हसीना के सामने शर्त रखी गई थी कि वह आने के बाद सक्रिय राजनीति से दूर रहेंगी.
क्या दोनों पार्टियां राजनीति से बाहर हो गईं?
मोहम्मद यूनुस से उनके समर्थक राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए कह रहे थे, लेकिन वह अभी तक इसके लिए तैयार नहीं हैं. पाँच अगस्त 2024 को शेख़ हसीना बांग्लादेश छोड़ भारत आ गई थीं और तब से अंतरिम सरकार की कमान मोहम्मद यूनुस के पास है.
मोहम्मद यूनुस को सेना का भी समर्थन हासिल है. बांग्लादेश की दो प्रमुख नेता देश से बाहर हैं. पिछले साल पाँच अगस्त से शेख हसीना भारत में हैं और ख़ालिदा ज़िया भी अब लंदन चली गई हैं.
ख़ालिदा ज़िया ने इलाज के लिए बांग्लादेश तब छोड़ा है, जब अंतरिम सरकार के क़रीबियों ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. वहीं सरकार का एक समूह कह रहा है कि पहले चुनाव सुधार होगा, तभी चुनाव की घोषणा होगी.
अंतरिम सरकार की इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि सरकार में रहते हुए नई राजनीति पार्टी कैसे बनाई जा सकती है. लेकिन इसके जवाब में लोग कह रहे हैं कि ज़िया-उर रहमान जब सत्ता में थे, तभी उन्होंने नई पार्टी बनाई थी.
अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक़ रहमान कब वापस लौटेंगे. अब ख़ालिदा ज़िया भी लंदन चली गईं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पार्टी का क्या होगा?
क्या लौट पाएंगी ख़ालिदा ज़िया?
हाल ही में बांग्लादेश के सेना प्रमुख वक़ार-उज़-ज़मां और ख़ालिदा ज़िया की मुलाक़ात हुई थी. इस मुलाक़ात को लेकर भी अटकलों का बाज़ार गर्म था. बीएनपी के सहयोगी इस मुलाक़ात में कुछ भी नकारात्मक नहीं देखते हैं.
हालांकि ख़ालिदा ज़िया के विदेश जाने को लेकर पिछले कुछ महीनों से चर्चा गर्म थी. इस यात्रा में देरी के कई कारण थे. ख़ालिदा ज़िया देखना चाह रही थीं कि देश की राजनीति किस करवट जाती है.
बीएनपी के सीनियर नेताओं का कहना है कि ख़ालिदा ज़िया इलाज के लिए गई हैं और इसे सियासी चश्मे से नहीं देखना चाहिए. ख़ालिदा ज़िया के बेटे, बहू और उनके बच्चे भी लंदन में ही रहते हैं और इनकी मुलाक़ात भी वर्षों से नहीं हुई थी.
ज़ुबैदा नसरीन कहती हैं, ''बांग्लादेश में अभी राजनीतिक पार्टियों की नहीं चल रही है. ऐसे में ख़ालिदा ज़िया के लंदन जाने पर कई तरह की बातों को हवा मिली है. अवामी लीग पूरे सियासी परिप्रेक्ष्य से ग़ायब है. ऐसे में बीएनपी सबसे बड़ी पार्टी है. ऐसी स्थिति में ख़ालिदा ज़िया कहीं जाएंगी तो लोग बातें तो करेंगे ही. बीएनपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के जेहन में अतीत के अनुभव अब भी ज़िंदा होंगे. बीएनपी एक तरफ़ जल्द चुनाव की मांग कर रही थी और दूसरी तरफ़ ख़ालिदा ज़िया लंदन चली गईं. यहाँ तो उम्मीद की जा रही थी कि तारिक़ रहमान वापस आएंगे. ऐसे में सवाल उठना बहुत स्वाभाविक है.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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