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रफ़ाह पर इसराइली हमले में 45 की मौत: यूएन की एजेंसी ने ग़ज़ा को बताया 'धरती पर नरक', क्या बोले चश्मदीद?
रविवार देर शाम, इसराइली सेना ने ग़ज़ा पट्टी के दक्षिणी शहर रफ़ाह में विस्थापित फ़लस्तीनियों के कैंप पर हवाई हमला किया.
हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इस हमले में 45 फ़लस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं.
घटनास्थल से जो वीडियो सामने आए हैं उसमें दिख रहा है कि रविवार की रात ताल अल-सुल्तान के इलाके में भयंकर विस्फ़ोट हुआ और बड़े पैमाने पर आग लग गई.
इसराइली डिफ़ेंस फ़ोर्सेस (आईडीएफ़) ने कहा कि उसने हमास के दो वरिष्ठ अधिकारियों को मारा है और इस हमले में नागरिकों के हताहत होने की रिपोर्टों की समीक्षा कर रहा है.
इस हवाई हमले पर स्थानीय लोगों ने कहा कि ‘ये पागलपन है.’
एक महिला ने कहा, "तीन बच्चे घायल हैं, यह कौन सा ज़मीर और कौन सा धर्म है? यह कौन सी मानवता है? दुनिया कहाँ है? देश कहाँ है?"
उन्होंने कहा, "उन्होंने लोगों को जला दिया, उन्होंने ताल अल-सुल्तान में एक पूरे पड़ोस को जला दिया. लोग अभी भी जल रहे हैं. हमारे लिए खुदा ही है, वही इसका हिसाब करेगा. अचानक एक मिसाइल हमारे ऊपर गिरी, एक पास के इलाक़े पर. सारे लोग जल गए, जाकर देखो उनके साथ क्या हुआ.''
इस महिला ने कहा कि जब हमला हुआ तब वह शिविर में थी.
उनके अनुसार, "हम बैठे थे और हमने दिन के अंत की नमाज़ अल मगरिब पढ़ी. बच्चे सो रहे थे. वहां कुछ भी नहीं था, हमने अचानक तेज़ आवाज़ सुनी और हमारे चारों ओर आग भड़क उठी. बच्चे चिल्ला रहे थे. सभी कमरे चारों ओर से आग की चपेट में थे. डरावनी आवाज़ें आ रहीं थी, ऐसा लग रहा था मानो छर्रे कमरों में घुस रहे हों.''
जब मिसाइल धमाका हुआ तब फादी दुखान पास में ही थे, उन्होंने बताया.
उन्होंने कहा, “हम घर के दरवाज़े पर सुरक्षित बैठे थे. अचानक हमें एक मिसाइल की आवाज़ सुनाई दी. हम भागे.. सड़क धुएं से भरी हुई थी. हमें कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था. हम एक घर में गए और कोई नहीं था. जब हमने दूसरी जगह जाँच की तो हमें एक लड़की और एक युवक मिले जो मारे जा चुके थे. और उनके शव क्षतिग्रस्त थे.”
इसराइली सेना ने क्या कहा?
इसराइली सेना का कहना है कि उसने हवाई हमले में हमास के एक परिसर को निशाना बनाया जहां हमास के वरिष्ठ नेता इकट्ठे हुए थे.
लेकिन इसराइली सेना ने साथ में ही ये भी कहा कि उन्हें हमले के बाद आग लगने की जानकारी है, जिसमें वहां रह रहे लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है.
इसराइल के शीर्ष सैन्य अभियोजक यिफ़त तोमर येरुशलमी ने इस घटना को बहुत गंभीर बताया और कहा कि हमले की समीक्षा की जा रही है.
उन्होंने कहा, "स्वाभाविक रूप से इस तरह की तीव्रता वाले युद्ध में कुछ ऐसी घटनाएं भी होती हैं, जिन्हें नहीं होना चाहिए. जैसे रफ़ाह में कल रात की घटना. कल की घटना का ब्योरे की जांच की जा रही है और इसे हम आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. आईडीएफ़ युद्ध के दौरान गैर-लड़ाकों को हुए किसी भी नुकसान का खेद जताता है.”
इसराइली सरकार के प्रवक्ता एवी हाइमन ने बीबीसी से कहा कि हवाई हमले में हमास परिसर को निशाना बनाया गया और हमास के दो वरिष्ठ कमांडर मारे गए.
एवी हाइमन ने कहा, "हम हमास के दो बड़े ठिकानों के पीछे थे और आरंभिक रिपोर्टों से ऐसा लगता है कि किसी तरह आग लग गई और उसने दुखद रूप से दूसरों की जान ले ली."
"मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि इसकी जांच चल रही है और आईडीएफ़ हर मामले की जांच कर रहा है. ये जानने के लिए दुर्घटना वास्तव में कैसे घटी, हमास तो मीडिया में कहानी सुनाने के लिए दौड़ता है, ताकि उनका प्रोपेगेंडा बढ़े.”
फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनआरडब्ल्यूए ने हमले के बाद आ रही रिपोर्टों को दिल दहलाने वाला बताया है और कहा कि रफ़ाह में ज़मीन पर मौजूद अपनी टीम से उसका सम्पर्क नहीं हो पा रहा है.
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एजेंसी ने लिखा है, "ग़ज़ा धरती पर नरक है. पिछली रात की जो तस्वीरें आ रही हैं वो इसका एक और सबूत है."
हमास ने क्या कहा?
ग़ज़ा में हमास के मीडिया कार्यालय के महानिदेशक इस्माइल अल-थावब्ता ने इसराइल पर दोहरे मानदंड़ों आरोप लगाया है.
उन्होंने कहा, "इसराइली सेना ने इन क्षेत्रों को सुरक्षित क्षेत्र के रूप में घोषित किया था और नागरिकों और विस्थापित लोगों से इन सुरक्षित क्षेत्रों में जाने को कहा था. जब शरणार्थी इन इलाकों में भाग कर आ गए तो इसराइली सेना ने वहां जनसंहार और हत्याएं कीं."
रफ़ाह के रहने वाले अबेद मोहम्मद अल-अत्तार का भाई और परिवार मारा गया, उन्होंने कहा कि ग़ज़ा में कोई भी सुरक्षित नहीं है.
उन्होंने कहा, "सेना झूठी है, ग़ज़ा में कोई सुरक्षित नहीं है, ना बच्चे, ना बुजुर्ग और ना ही कोई महिला. मेरा भाई और उसकी पत्नी मारे गए. उन्होंने उन्होंने ऐसा क्या किया था कि बच्चे अनाथ हो गए.''
दक्षिणी और मध्य ग़ज़ा में 100 से ज्यादा डॉक्टरों और नर्सों वाली मेडिकल चैरिटी मेडग्लोबल के अध्यक्ष डॉ. ज़हेर सहलौल ने बीबीसी से कहा, "यह एक दुखद हमला है. ऐसा लगता है कि लड़ाकू विमानों ने ब्रिक्सैट (एसपी) नामक क्षेत्र में कई मिसाइलें दागीं. यह ग़ज़ा के दूसरे इलाकों से विस्थापित लोगों के तंबुओं से भरा हुआ है.”
उन्होंने बताया कि, “लोग वहां डेरा डाले हुए थे क्योंकि उन्हें लगा कि वे ख़तरे से बाहर हैं. मेरे नज़रिए से मारे गए निर्दोष नागरिकों की संख्या बहुत अधिक है और हम बहुत सारे बच्चों को मारे जाते हुए देख रहे हैं. कोई भी बच्चों को मारने और ज़िंदा जलाने को सही नहीं ठहरा सकता."
क़तर ने जताई चिंता
इससे पहले रविवार को ही हमास ने रफ़ाह से तेल अवीव की ओर आठ रॉकेट दागे थे. पिछले चार महीनों में यह पहला बड़ा हमला था, जो इतनी दूर से किया गया.
बताया जा रहा है कि कुछ मिसाइलों को नष्ट कर दिया गया. इसके बाद मध्य इज़राइल के शहरों में रॉकेट सायरन बजने लगे.
उधर, लेबनान से दागे गए रॉकेटों के हमले की चपेट में उत्तरी इसराइल भी आ गया है. इसराइली सेना का कहना है कि कुछ को मार गिराया गया है और सेना ने जवाबी कार्रवाई की है.
क़तर का कहना है कि रफ़ाह पर ताज़ा इसराइली हवाई हमले से ग़ज़ा में युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के लिए समझौते पर पहुंचने के लिए मध्यस्थता प्रयासों में रुकावट आ सकती है.
अभी दो दिन पहले ही इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) ने इसराइल को रफ़ाह में सैन्य हमला रोकने का आदेश दिया था. माना जाता है कि यहां उत्तर से जान बचाकर लाखों लोग शरण लिये हुए हैं.
लेकिन इसराइल ने रफ़ाह पर सैन्य हमला करने के अपने मंसूबे से पीछे हटने से इनकार कर दिया है.
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