पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी इमरान ख़ान की तुलना शेख़ मुजीब से क्यों कर रही है

    • Author, इमाद ख़ालिक़
    • पदनाम, बीबीसी बांग्ला सेवा के लिए

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक ट्वीट के बाद लोगों के निशाने पर हैं.

27 मई को इमरान खान के एक्स हैंडल से एक पोस्ट किया गया.

इसमें लिखा था, "हर पाकिस्तानी को 'हमदुर रहमान कमीशन' की रिपोर्ट पढ़नी चाहिए, ताकि उन्हें पता चले कि असल में असली गद्दार कौन थे? जनरल याह्या खान या शेख़ मुजीबुर्रहमान?"

इमरान ख़ान पिछले एक साल से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं. उन्हें कई मामलों में दोषी ठहराया गया है और उनके ख़िलाफ़ और भी मामले चल रहे हैं.

जेल में होने के कारण इमरान ख़ान खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर सकते. इस मामले में उनकी पार्टी पीटीआई ने बताया है कि संगठन की सोशल मीडिया टीम के सदस्य पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के सोशल मीडिया अकाउंट को मैनेज करते हैं.

विद्रोह के लिए उकसाने का आरोप 'बिल्कुल बकवास': इमरान

इस्लामाबाद में मौजूद बीबीसी उर्दू के संवाददाता शहज़ाद मलिक ने शुक्रवार को अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि रावलपिंडी की अदियाला जेल में क़ैद इमरान ख़ान ने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए पाकिस्तानी सेना को विद्रोह के लिए उकसाने के एफआईए के आरोप को 'बिल्कुल बकवास' करार देते हुए अपने वकील के बिना जांच में शामिल होने से इनकार कर दिया है.

एफआईए साइबर क्राइम ने आरोप लगाया था कि "इमरान ख़ान के एक्स ट्विटर अकाउंट से देश विरोधी कंटेंट पोस्ट किए गए हैं और सेना सहित राज्य संस्थानों के ख़िलाफ़ झूठी कहानियां और गलत सूचना फैलाई है, जाहिर तौर पर यह विद्रोह के लिए उकसाने के अंतर्गत आता है."

एफ़आईए साइबर क्राइम की एक टीम कल रात अदियाला जेल पहुंची, जेल अधिकारियों के मुताबिक़ पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने मिलने से इनकार कर दिया.

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अपने वकील के बिना एफआईए जांच में शामिल होने से इनकार करते हुए लिखा है कि उनके ख़िलाफ़ आरोप 'बिल्कुल बकवास' हैं.

जेल प्रशासन के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि इमरान खान ने एफआईए टीम के किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया.

जेल अधिकारी के मुताबिक़, इमरान ख़ान ने कहा कि वह किसी भी सवाल का जवाब वकीलों की मौजूदगी में ही देंगे, जिसके बाद एफ़आईए टीम ने पूर्व प्रधानमंत्री का पक्ष लिखित में लिया.

इमरान ख़ान की पार्टी पर आरोप

अब 'हमदुर रहमान कमीशन रिपोर्ट' को लेकर इमरान ख़ान और पीटीआई के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से किए गए ट्वीट को आलोचकों ने 'सेना को बदनाम करने वाला' और 'भड़काऊ' बताया है.

आलोचक इमरान ख़ान और तहरीक़-ए-इंसाफ़ पर आग में घी डालने का आरोप लगा रहे हैं.

इमरान ख़ान के अकाउंट से पोस्ट किए गए वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि "इमरान (ख़ान) नियाज़ी का बदसूरत चेहरा उजागर हो गया है. उन्होंने पाकिस्तानी सेना को बदनाम किया और मुजीबुर्रहमान को हीरो बताया है."

इमरान ख़ान के बयान पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने भी प्रतिक्रिया दी है.

पीपीपी की सीनेटर शेरी रहमान ने कहा कि इमरान ख़ान के सोशल मीडिया अकाउंट पर जिस तरह की 'बयानबाज़ी' की जा रही है, वह चिंताजनक है. उन्होंने कहा, "पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ पार्टी नफ़रत और तनाव फैलाने को शह दे रही है."

पीटीआई के चेयरमैन का स्पष्टीकरण

इस बढ़ती आलोचना के बीच पीटीआई के नए चेयरमैन बैरिस्टर गौहर ख़ान ने मंगलवार शाम अपनी सफ़ाई दी. उन्होंने कहा कि इमरान ख़ान "उनके नाम से किए जा रहे सोशल मीडिया पोस्ट का एक शब्द भी नहीं पढ़ते हैं."

उन्होंने यह भी कहा, "1971 यानी ढाका के पतन का ज़िक्र इमरान ख़ान ने एक राजनीतिक संदर्भ के बारे में बात करते हुए किया था."

बैरिस्टर गौहर ख़ान ने आगे बताया कि 1971 में भी किसी पार्टी का बहुमत स्वीकार नहीं किया गया था.

उन्होंने कहा, "देश में 1970 के दशक में जो हुआ, वही अब भी हो रहा है. हम यही कहना चाहते हैं. हम न तो अवामी लीग हैं और ना ही ख़ान साहब शेख़ मुजीब हैं."

पीटीआई नेता अली मोहम्मद ख़ान ने बीबीसी को बताया कि इमरान ख़ान जेल में हैं और केवल पीटीआई अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर ख़ान ही पार्टी की नीति पर बयान दे सकते हैं.

'इमरान एक देशभक्त पाकिस्तानी'

पीटीआई नेता अली मोहम्मद ख़ान ने कहा, "बैरिस्टर गौहर ख़ान ने जो कहा है वह बिल्कुल सही है कि ये राजनीतिक संदर्भ में कही गई एक बात थी. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को समझाना था."

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "इस वीडियो में सशस्त्र बलों के बारे में बताई गई बाकी बातों को मैं अनुचित कहूंगा."

अली मोहम्मद ख़ान ने कहा कि शेख़ मुजीबुर्रहमान पाकिस्तान में एक 'अलोकप्रिय व्यक्ति' थे.

उन्होंने कहा, "इमरान ख़ान एक देशभक्त पाकिस्तानी हैं. और मुझे लगता है कि शेख़ मुजीब से उनकी तुलना करने का मतलब उनका अपमान करना है."

उन्होंने कहा, "इमरान ख़ान अभी जेल में हैं. जब तक वह व्यक्तिगत रूप से कुछ नहीं कहते या पार्टी अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर ख़ान खुद जाकर उनसे बात नहीं करते, तब तक उनकी सच्चाई पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए."

पीटीआई के राष्ट्रीय प्रवक्ता रऊफ़ हसन ने भी बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि हमदुर रहमान आयोग की रिपोर्ट में सेना के बारे में कुछ भी ग़लत नहीं लिखा गया है.

इमरान ख़ान का रुख़

हालांकि, पीटीआई की सोशल मीडिया टीम के सदस्य पार्टी नेतृत्व के बयान से असहमत थे.

सोशल मीडिया टीम के एक सक्रिय सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया, "इमरान ख़ान ने कहा कि हमदुर रहमान को पढ़ो और इतिहास आपको बताएगा कि असली गद्दार कौन था."

उन्होंने आगे कहा, "पार्टी नेताओं पर दबाव है क्योंकि वीडियो में नरसंहार का ज़िक्र है. लेकिन पूर्वी पाकिस्तान में नरसंहार हुआ था और इस बारे में ख़ान साहब का स्टैंड हमेशा स्पष्ट रहा है."

ध्यान रहे कि इमरान ख़ान के अकाउंट से ट्वीट किए गए वीडियो में पूर्वी पाकिस्तान में 'रक्तपात' के लिए तत्कालीन सेना प्रमुख और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल याह्या ख़ान को ज़िम्मेदार ठहराया गया था.

पीटीआई नेता अली मोहम्मद ख़ान ने कहा कि उनकी पार्टी का रुख़ यह है कि सशस्त्र बलों सहित सभी समूहों या संगठनों को संवैधानिक सीमाओं के भीतर काम करना चाहिए.

उनके मुताबिक़, "इमरान ख़ान ने खुद कहा है कि पाकिस्तान को उनसे (इमरान ख़ान) से ज़्यादा पाकिस्तानी सेना की ज़रूरत है."

हमदुर रहमान कमीशन की रिपोर्ट

पाकिस्तानी सेना के लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) नईम ख़ालिद लोधी ने कहा कि पीटीआई समर्थकोंकी सोच ऐसी है कि वो अपने नेता की बातों को सच मानते हैं.

उन्होंने कहा, "तो, ऐसा नहीं होगा कि वे सोशल मीडिया या मीडिया में चल रही आलोचना के कारण इमरान ख़ान या पीटीआई का साथ छोड़ देंगे."

लेकिन उनका मानना ​​है कि अन्य पार्टियां इस मुद्दे को पीटीआई के ख़िलाफ़ साज़िश के तौर पर भुना सकती है. उन्होंने कहा, "अतीत में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) के नेताओं ने भी इसी तरह की बातें कही हैं."

उन्होंने कहा, "सवाल ये है कि यह ट्वीट इमरान ख़ान की ओर से आया है या नहीं."

अली मोहम्मद ख़ान ने कहा, "न केवल पीटीआई के भीतर बल्कि पीटीआई के बाहर भी कई लोग हो सकते हैं जिन्होंने पीटीआई को नुक़सान पहुंचाने के लिए यह अभियान शुरू किया हो. गौहर ख़ान ने खुद संकेत दिया है कि इस ट्वीट से पार्टी के साथ राज्य मशीनरी के संबंध और ख़राब हो सकते हैं."

ग़ौरतलब है कि हमदुर रहमान कमीशन की रिपोर्ट मूल रूप से पाकिस्तान सरकार की एक रिपोर्ट है, जिसमें 1971 के युद्ध के दौरान तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान को हुए नुक़सान समेत कई अन्य बातों का दस्तावेज़ीकरण किया गया है.

ऐसा कहा जाता है कि पाकिस्तान के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश हमदुर रहमान के नेतृत्व में गठित इस आयोग की रिपोर्ट लंबे समय तक गोपनीय बनी रही. इस रिपोर्ट के कई हिस्से 2000 में लीक हुए थे.

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