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पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर में तीन सियासी परिवारों पर साधा निशाना, क्या है वजह?
- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से बीबीसी हिंदी के लिए
जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए रिकॉर्ड वोटिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को श्रीनगर और जम्मू के कटरा में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अपनी सरकार के कामों को गिनाने के अलावा विपक्षी दलों पर निशाना साधा है.
श्रीनगर में प्रधानमंत्री मोदी ने शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में जनसभा को टूटी-फूटी कश्मीरी भाषा में पूछा, "मेरे कश्मीरी भाइयों और बहनों को मेरा अभिवादन, कैसे हैं आप?"
इसके बाद उनके भाषण का ज़्यादातर हिस्सा विपक्षी दलों यानी नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और पीडीपी को निशाना बनाने के इर्द-गिर्द था. प्रधानमंत्री ने कश्मीर में हालात बिगड़ने के लिए इन तीन सियासी जमातों को ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि ये तीनों राजनीतिक पार्टियां जम्मू-कश्मीर को अपनी सियासी जागीर समझती हैं.
जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी ने गांधी, अब्दुल्लाह और मुफ़्ती ख़ानदानों को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि इन्ही तीन दलों से चुनाव में बीजेपी को खतरा है.
पीएम मोदी के भाषण के मायने और जम्मू-कश्मीर के समीकरण
बीजेपी उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने कश्मीर में हिंसा के लंबे दौर को समाप्त करके कश्मीर में एक नई सुबह का आगाज़ किया है.
पीएम मोदी के भाषण के बाद नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि बीजेपी अपनी नाकामी को छिपाने के लिए तीन परिवारों को निशाना बना रही है.
उन्होंने कहा, "हम बीजेपी से और किसी चीज़ की उम्मीद नहीं कर सकते हैं. पार्टी ने बीते छह साल यहां ज़ाया किए हैं. जम्मू में चरमपंथ फिर से सिर उठा रहा है. लेकिन बीजेपी और केंद्र सरकार तीन परिवारों को निशाना बनाने में लगी है."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से तीन सियासी परिवारों पर हमलावर रुख़ अख़्तियार करने के कारणों को गिनाते हुए कश्मीर यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर नूर अहमद बाबा कहते हैं, "पीएम मोदी की स्पीच से ये ज़ाहिर होता है कि उन्हें ये तीन सियासी दल इस चुनाव में संभावित ख़तरे के तौर पर दिख रहे हैं. यही वजह है कि पीएम ने इनको अपने भाषण में निशाने पर लिया."
जम्मू के कटरा में भी प्रधानमंत्री मोदी ने एनसी, कांग्रेस और पीडीपी को निशाना बना कर जनता से आग्रह किया कि वो बीजेपी के हक़ में अपना वोट देंगे.
रैली में आए लोगों ने क्या कहा?
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग के रहने वाले बीजेपी समर्थक लतीफ़ खान का कहना था कि जो बातें पीएम मोदी ने कल श्रीनगर में अपने भाषण में कहीं, वो सब सच हैं.
उनका कहना था, "मोदी जी ने जो कुछ भी नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और पीडीपी के बारे में कहा, उन सब में सौ प्रतिशत सच्चाई है. इन राजनीतिक दलों ने आज तक यहां क्या किया है? बीजेपी ने कश्मीर में सबसे पहले शांति लाई. यहां खून-खराबा होता था, वो रुक गया. यहां हड़तालों के लिए कैलेंडर जारी किया जाता था, उस पर रोक लग गई. हर दिन कोई न कोई मरता था. अब किसी को गोली या पत्थर नहीं लगता है. बीते कई वर्षों से अब पत्थरबाज़ी नहीं होती है. इन तीन दलों के दौर में कभी ऐसा विकास नहीं हुआ, जितना पंचायत राज के दौरान हुआ है. जब नरेंद्र मोदी आ गए तो जिला विकास परिषद (डीडीसी) बनाए गए, ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल (बीडीसी) बनाए गए. ये सब क़दम बीजेपी ने उठाए. जिन राजनीतिक दलों का पीएम मोदी ने ज़िक्र किया, वो हमें कुछ दिखाते नहीं थे."
श्रीनगर के रहने वाले एक और बीजेपी समर्थक मुदासिर अहमद वानी कहते हैं कि मोदी जी ने जिस खानदानी राज का अपने श्रीनगर भाषण में ज़िक्र किया, उसमें सच्चाई है.
उनका कहना था, ''अब आप देखिए कि वर्ष 2014 में जब बीजेपी सरकार बनी, तो केंद्र की जितनी भी योजनाएं थीं, वो आम लोगों तक कश्मीर में पहुंचने लगीं, जबकि इससे पहले ये मुमकिन नहीं होता था.''
विश्लेषक हारुन रेशी पीएम मोदी के तीन परिवारों पर हमले के बारे में कहते हैं कि इस वक़्त चुनाव का मौसम चल रहा है और ज़ुबानी हमलों से कुछ नहीं होता है.
वो बताते हैं, "लोकतंत्र में सब कुछ जनता पर निर्भर करता है. लोग किसको वोट देंगे, उसी का पलड़ा भारी होता है. किसी भी खानदान के खिलाफ़ कोई कितना ही बोले, लेकिन लोकतंत्र का उसूल यह है कि जिसको वोट मिलेगा, वही जीत जाएगा. इस समय मोदी जी की सरकार है और यह उनकी ज़िम्मेदारी है कि वह साफ़ और निष्पक्ष चुनाव करवाएं. अगर वह ऐसा करने में कामयाब होते हैं, तो फिर अगर एनसी या कांग्रेस चुनाव जीत जाती है, तो मोदी जी को उसका सम्मान करना चाहिए. यही लोकतंत्र है. चुनाव में तो राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं. असली ताक़त जनता के पास होती है."
घाटी में बीजेपी के कितने उम्मीदवार
कश्मीर घाटी में बीजेपी 47 सीटों में से कुल 19 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.
कश्मीर की अपनी चुनावी सभा से छह दिन पहले प्रधानमंत्री ने जम्मू क्षेत्र के डोडा में भी एक जनसभा से संबोधित किया था. भारतीय जनता पार्टी का असली गढ़ जम्मू क्षेत्र है.
लोकसभा चुनाव 2024 में पार्टी ने जम्मू क्षेत्र की दोनों सीटें जीती थीं.
विधानसभा चुनाव 2014 में बीजेपी ने जम्मू क्षेत्र की 43 में से 25 सीटें जीती थीं. जबकि कांग्रेस को उस चुनाव में कुल 12 सीटें हासिल हुई थीं.
लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी ने कश्मीर घाटी में किसी भी उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारा था.
उम्मीदवारों को मैदान में न उतारने को लेकर बीजेपी ने बताया था कि वो कश्मीर घाटी में "समान विचारधारा" वाली पार्टियों का समर्थन करेगी.
हालांकि, आमतौर पर कश्मीर घाटी में अल्ताफ़ बुख़ारी की जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी और सज्जाद लोन की पीपुल्स कॉन्फ्रेंस पर बीजेपी की बी टीम होने का आरोप लगता रहा है. दोनों ही दलों ने खुद भी लोकसभा चुनाव 2024 में एक भी सीट नहीं जीती थी.
विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और एनसी ने चुनाव पूर्व गठबंधन किया है. एनसी 51 और कांग्रेस 32 सीटों पर चुनाव लड़ रही है . जबकि पांच सीटों पर दोनों पार्टियों के बीच "फ्रेंडली फ़ाइट " है. वहीं पीडीपी और बीजेपी अकेले ही विधानसभा का ये चुनाव लड़ रही है.
अनुच्छेद 370 ख़त्म होने के बाद बीजेपी की परीक्षा
बीजेपी के लिए जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के ये चुनाव दो पहलुओं से बहुत अहम हैं. पहला तो यही है कि जिस नैरेटिव को बीजेपी 2019 से बता रही है कि जम्मू -कश्मीर अब बदल चुका है और ज़मीन पर एक बड़ी तब्दीली देखने को मिल रही है, उसे सही साबित करने के लिए ज़रूरी है कि विधानसभा के इस चुनाव में उन्हें कामयाबी मिले.
अगर पार्टी को कामयाबी नहीं मिलती है तो बीजेपी के इस नैरेटिव पर सवाल उठ सकते हैं. साल 2019 के बाद मोदी सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि कश्मीर में खुशहाली का एक नया दौर शुरू हो चुका है.
पाँच अगस्त 2019 को बीजेपी सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म कर इसे लद्दाख और जम्मू -कश्मीर के तौर पर दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया था.
विशेष दर्जा ख़त्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर ख़ासकर कश्मीर घाटी एक लंबे समय तक बंद रही और कई महीनों तक प्रतिबंध लगा दिए गए थे.
अनुच्छे 370 को निरस्त करने के पीछे मोदी सरकार का सबसे बड़ा तर्क यही था कि कश्मीर में चरमपंथ की जड़ों को खत्म करने में ये अनुच्छेद बहुत बड़ी रुकावट है और इससे विकास के रास्ते भी बंद हैं.
गृहमंत्री अमित शाह ने इसी साल दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद 'आतंकवाद' से जुड़े मामलों में 70 प्रतिशत की कमी आई है.
ये बात सच है कि कश्मीर घाटी में 2019 के बाद पत्थरबाज़ी की घटनाएं लगभग बंद हो चुकी हैं और हड़तालों का सिलसिला भी थम गया है. लेकिन 2019 के बाद भी चरमपंथीं हिंसा की घटनाएं होती रही हैं.
कांग्रेस, एनसी के साथ ही पीडीपी भी अपने चुनावी प्रचार में लगातार बीजेपी सरकार की नीतियों की आलोचना कर रही हैं.
पिछले दिनों लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी कश्मीर के डूरु इलाके में एक चुनावी रैली से संबधित करके बीजेपी पर हमला बोला था. अपने भाषण में राहुल गांधी ने दावा किया कि वो जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाएंगे.
जम्मू में कांग्रेस का भी असल मुक़ाबला बीजेपी से हैं. बीजेपी का भी असल मुक़ाबला जम्मू में कांग्रेस के साथ ही है. जबकि कश्मीर घाटी में एनसी और पीडीपी का असल मुक़ाबला है.
हालाँकि, पहले चरण के चुनाव से ठीक पहले आवामी इत्तिहाद पार्टी और प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी ने भी चुनावी गठबंधन किया है.
प्रतिबंध के कारण जमात-ए-इस्लामी सीधे तौर पर चुनाव नहीं लड़ सकती थी, इसलिए जमात कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन कर रही है.
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के लिए तीन चरणों में एक दशक के बाद चुनाव हो रहे हैं.
18 सितंबर को पहले चरण के लिए सात ज़िलों में चुनाव हो चुका है. 25 सितंबर और एक अक्टूबर को दूसरे और तीसरे चरण के लिए वोट डाले जायेंगे और आठ अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित