वेनेज़ुएला में 'तेल के खेल' का क्या भारत को फ़ायदा होगा?

वेनेज़ुएला में तेल रिफाइनरी

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    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

एक अप्रत्याशित, अभूतपूर्व और नाटकीय घटनाक्रम में अमेरिकी सैन्यबल वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को राजधानी काराकास से पकड़कर अमेरिका ले गए.

इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका वेनेज़ुएला के तेल भंडारों का इस्तेमाल करेगा.

राष्ट्रपति ट्रंप यह भी कह चुके हैं कि 'अमेरिका तब तक वेनेज़ुएला को चलाएगा जब तक वहाँ सत्ता का सुरक्षित, सही और समझदारी भरा बदलाव नहीं हो जाता.'

हालांकि ये कैसे होगा ये अभी स्पष्ट नहीं है.

अब तक दुनिया में जितने भी तेल भंडारों की खोज हुई है उनमें सर्वाधिक दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला के पास ही हैं.

ऐसे में ये माना जा रहा है कि हाल के दिनों में वेनेज़ुएला में हुआ घटनाक्रम सत्ता परिवर्तन से अधिक तेल को लेकर है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेज़ुएला में अरबों डॉलर का निवेश करें और तेल संसाधनों को विकसित करें ताकि वेनेज़ुएला के तेल को और अधिक मात्रा में निकाला जा सके.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेज़ुएला के बुरी तरह बर्बाद हो चुके तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से खड़ा करेंगी और इससे भारी मुनाफ़ा कमाएंगी.

हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक वेनेज़ुएला के तेल को लेकर कोई नीति दस्तावेज़ जारी नहीं किया है.

राष्ट्रपति ट्रंप की इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर कई चुनौतियां भी हैं. वेनेज़ुएला को तेल भंडारों को विकसित करने और उत्पादन बढ़ाने में सिर्फ़ भारी निवेश ही नहीं लंबा समय भी लगेगा.

दुनिया में सर्वाधिक तेल भंडार

निकोलस मादुरो

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इमेज कैप्शन, अमेरिका ने मादुरो को वेनेज़ुएला से गिरफ़्तार कर न्यू यॉर्क की अदालत में पेश किया है
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वेनेज़ुएला के पास 303 अरब बैरल से अधिक तेल भंडार का अनुमान है और ये दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं.

इस ताज़ा घटनाक्रम के बाद ये माना जा रहा है कि भारत की वेनेज़ुएला में फंसी क़रीब एक अरब डॉलर की देनदारी के निकलने का भी रास्ता खुल सकता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने तेल जगत से जुड़े सूत्रों और विश्लेषकों से बातचीत के आधार पर ये दावा किया है.

दरअसल, वेनेज़ुएला के तेल कारोबार पर सख़्त अमेरिकी प्रतिबंध लगने से पहले तक भारत वेनेज़ुएला के कच्चे तेल का बड़ा आयातक था.

भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास वेनेज़ुएला के भारी कच्चे तेल को रिफ़ाइन करने की तकनीकी और क्षमता मौजूद है.

पीटीआई के मुताबिक एक समय, भारत वेनेज़ुएला से प्रतिदिन चार लाख बैरल तक कच्चे तेल का आयात करता था. हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों और क़ानूनों के पालन को लेकर बढ़ते ख़तरों के मद्देनज़र भारत ने साल 2020 में वेनेज़ुएला से तेल आयात तकरीबन रोक दिया था.

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने पिछले साल नवंबर 2025 तक कुल तेल इंपोर्ट का 0.3 फ़ीसदी हिस्सा ही वेनेज़ुएला से इंपोर्ट किया था.

भारत का वेनेज़ुएला में निवेश

वेनेज़ुएला के पास दुनिया में सबसे बड़े तेल भंडार हैं

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इमेज कैप्शन, वेनेज़ुएला के पास दुनिया में सबसे बड़े तेल भंडार होने का अनुमान है

भारत की विदेश में तेल कारोबार करने वाली कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) पूर्वी वेनेज़ुएला में सेन क्रिस्टोबाल ऑयलफ़ील्ड का साझा रूप से संचालन करती थी.

हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से तकनीक, उपकरणों और ज़रूरी सेवाओं तक पहुंच सीमित होने के बाद यहां तेल उत्पादन फ़ायदे का सौदा नहीं रहा था और ओवीएल को संचालन रोकना पड़ा था.

ओवीएल की इस ऑयलफ़ील्ड में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है और समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ 2014 तक वेनेज़ुएला पर ओवीएल की 53.6 करोड़ डॉलर की देनदारी थी जिसे वेनेज़ुएला चुका नहीं सका था.

इसके अलावा ओवीएल की वेनेज़ुएला पर लगभग इतनी ही देनदारी और भी है. पीटीआई के मुताबिक़, वेनेज़ुएला ने इसके ऑडिट की अनुमति नहीं दी थी.

ताज़ा घटनाक्रम के भारत के लिए क्या मायने?

विश्लेषक मानते हैं कि ताज़ा घटनाक्रम के बाद वेनेज़ुएला के तेल संसाधनों पर अमेरिका का नियंत्रण हो जाएगा

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अब वेनेज़ुएला में हालात नाटकीय रूप से बदल गए हैं. ऐसे में, सवाल ये भी उठ रहा है कि वेनेज़ुएला में हुए घटनाक्रम के भारत के लिए क्या मायने हो सकते हैं और क्या इससे भारत को कोई फ़ायदा पहुंच सकता है.

इसे लेकर विश्लेषकों की राय बंटी हुई है. हालांकि ये बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका वेनेज़ुएला के तेल को लेकर क्या नीतियां बनाता है.

अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी इंटेलिजेंस कंपनी केप्लर के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निखिल दुबे कहते हैं कि ये इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका वेनेज़ुएला के तेल पर लगे प्रतिबंधों में ढील देता है या नहीं.

वहीं ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंस्टीट्यूट के संस्थापक अजय श्रीवास्तव कहते हैं कि वेनेज़ुएला के घटनाक्रम का भारत को कोई सीधा फ़ायदा मिलना मुश्किल है क्योंकि वहां के कच्चे तेल पर अमेरिका अपना ही नियंत्रण रखना चाहेगा.

वरिष्ठ पत्रकार और तेल मामलों के जानकार नरेंद्र तनेजा कहते हैं कि भारत के पास वेनेज़ुएला के भारी कच्चे तेल को रिफ़ाइन करने का इंफ्रास्ट्रक्चर है, ऐसे में दीर्घकाल में भारत को इसका फ़ायदा मिल सकता है.

वेनेज़ुएला का कच्चा तेल भारी होता है जिसे रिफ़ाइन करने की तकनीक भारत के पास है.

निखिल दुबे कहते हैं, “अगर अमेरिका वेनेज़ुएला पर लगे प्रतिबंधों में ढील देता है, तो इसका असर भारत पर धीरे-धीरे पड़ेगा, लेकिन रणनीतिक रूप से यह काफ़ी अहम होगा. वेनेज़ुएला का भारी और हाई-टैन कच्चा तेल पहले भी भारत की जटिल रिफ़ाइनरियों में प्रोसेस होता रहा है और दोबारा आपूर्ति शुरू होने की स्थिति में यह तेल रियायती दामों पर ही आएगा. ऐसे में ये स्थिति भारत के लिए फ़ायदेमंद हो सकती है.”

हालांकि, अजय श्रीवास्तव का मानना है कि अमेरिका ये संकेत दे रहा है कि वह वेनेज़ुएला के कच्चे तेल को ख़ुद ही रिफ़ाइन करेगा और फिर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में बेचेगा.

अजय श्रीवास्तव कहते हैं, “भले ही अमेरिका वेनेज़ुएला के तेल सेक्टर पर नियंत्रण कर ले, लेकिन अमेरिका को भी अपने इस्तेमाल के लिए कच्चे तेल की ज़रूरत है. वह तेल को प्रोसेस कर घरेलू खपत करेगा और प्रोसेस्ड उत्पाद दुनिया को बेचेगा. ऐसे में भारत के लिए इसमें न कोई ख़ास फायदा है और न नुक़सान-भारत के लिए यह स्थिति कुल मिलाकर न्यूट्रल ही रहेगी.”

नरेंद्र तनेजा का कोट

वेनेज़ुएला के तेल भंडार और इससे जुड़े अमेरिकी हितों पर ज़ोर देते हुए नरेंद्र तनेजा कहते हैं, अमेरिका ने अपनी कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं की चिंता ना करते हुए ये क़दम उठाया है इससे ज़ाहिर है कि अमेरिका की नज़र वेनेज़ुएला के तेल पर है.

तनेजा कहते हैं, “सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि अमेरिका वेनेज़ुएला में इतनी आक्रामकता के साथ क्यों गया है, जबकि उसे वैश्विक प्रतिक्रिया का अंदाज़ा है. इसकी वजह वेनेज़ुएला के विशाल ऊर्जा संसाधन हैं. वहां दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं- कुछ अनुमान इसे 300 अरब बैरल तक बताते हैं. इसके अलावा प्राकृतिक गैस, सोना और क्रिटिकल मिनरल्स के बड़े भंडार भी हैं.”

तनेजा कहते हैं, “यही असली आकर्षण है. अमेरिका ऊर्जा आत्मनिर्भरता चाहता है, मध्य-पूर्व पर निर्भरता कम करना चाहता है और वेनेज़ुएला उसका पड़ोसी देश है, ऐसे में ये साफ़ है कि अमेरिका वेनेज़ुएला के तेल भंडारों पर नियंत्रण के लिए ये सब कर रहा है.”

विश्लेषक मान रहे हैं कि अगर सिर्फ़ तेल ज़रूरतों और आर्थिक नज़रिए से देखा जाए तो वेनेज़ुएला का घटनाक्रम भारत के लिए अच्छी ख़बर है.

नरेंद्र तनेजा कहते हैं, “भारत के नज़रिए से देखें तो ऊर्जा के लिहाज़ से वेनेज़ुएला के पास बड़े तेल भंडार हैं, लेकिन फिलहाल उत्पादन करीब 8 लाख बैरल प्रतिदिन ही है, क्योंकि प्रतिबंधों के चलते निवेश नहीं हो पाया. ओएनजीसी विदेश के वहां एसेट्स हैं, लेकिन वे विकसित नहीं हो सके. अगर अमेरिकी कंपनियां वहां जाती हैं, जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है, तो उत्पादन डेढ़ साल में 25 लाख बैरल प्रतिदिन और दो साल में 30 लाख बैरल तक पहुंच सकता है. ये पहले से विकसित फील्ड्स हैं. इससे वैश्विक आपूर्ति बढ़ेगी, तेल की क़ीमतों पर दबाव आएगा और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा आयातक होने के नाते भारत के लिए यह अच्छी ख़बर होगी.”

क्या भारत को मिलेगा वेनेज़ुएला का कच्चा तेल

ट्रंप ने रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यदि भारत रूस से कच्चा तेल लेना बंद नहीं करेगा तो अमेरिका और अधिक टैरिफ़ लगा सकता है

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भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और अपनी ज़रूरत के 88 फ़ीसदी तेल के लिए आयात पर निर्भर है. भारत ने हाल के सालों में रूस के कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ाई है हालांकि इसे लेकर अमेरिका का ऐतराज है और भारत ने अमेरिका से कहा है कि वह रूस से कच्चा तेल ख़रीदना कम कर रहा है.

अमेरिका ने रूस से कच्चे तेल की ख़रीदारी की वजह से भारत पर अतिरिक्त टैरिफ़ लगाया है. रविवार को ही राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भारत को चेतावनी दी है कि यदि रूस से कच्चे तेल की ख़रीद कम नहीं की तो अमेरिका और अधिक टैरिफ़ लगा सकता है.

एनलिस्ट निखिल दुबे कहते हैं, “भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं के बीच भारत अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाने पर लगातार काम कर रहा है. आपूर्ति के अत्यधिक संकेंद्रण के जोख़िम को कम करने पर ज़ोर है, जो रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने की अमेरिका-नेतृत्व वाली व्यापक सोच के अनुरूप है.”

ऐसे में, विश्लेषक ये भी मान रहे हैं कि वेनेज़ुएला का तेल भारत के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है.

निखिल दुबे कहते हैं, “इस पृष्ठभूमि में वेनेज़ुएला का कच्चा तेल उन गिने-चुने रियायती भारी विकल्पों में से एक बनकर उभरता है, जिन्हें भारत की सबसे जटिल रिफ़ाइनरियाँ प्रोसेस कर सकती हैं. इन बैरल्स तक पहुँच से रिलायंस की जामनगर एसईज़ेड और एमआरपीएल को प्रतिस्पर्धी दरों पर उत्पादन करने, यूरोप को नियमों के अनुरूप निर्यात करने और मार्जिन सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी.”

दुबे ये भी मानते हैं कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी और अन्य भारी कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं के साथ सौदेबाज़ी की ताक़त भी बढ़ेगी.

हालांकि, अजय श्रीवास्तव का मानना है कि ऐसे कोई ठोस संकेत नहीं है कि भारत को वेनेज़ुएला का कच्चा तेल सीधे मिलेगा.

श्रीवास्तव कहते हैं, “इसका कोई ठोस आधार नहीं है. मेरा कहना साफ़ है कि भारत को सीधे वेनेज़ुएला का कच्चा तेल नहीं मिलेगा. तेल अमेरिका जाएगा, वहीं रिफाइन होगा और अमेरिका अपने ट्रेड डील्स के तहत रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद दुनिया को बेच रहा है. यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ हुए समझौतों में अमेरिका ने रिफाइंड उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता ली है, कच्चा तेल देने की नहीं.”

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