निकोलस मादुरो की पत्नी सिलिया फ़्लोरेस कौन हैं, जो रहीं वेनेज़ुएला की 'फ़र्स्ट वॉरियर'

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वेनेज़ुएला में सिलिया फ़्लोरेस सिर्फ़ 'फ़र्स्ट लेडी' नहीं रही हैं, बल्कि उनके समर्थक उन्हें अक्सर "फ़र्स्ट वॉरियर" कहते हैं.
राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की पत्नी सरकार में शामिल सबसे प्रमुख महिलाओं में से एक रही हैं.
1956 में जन्मी फ़्लोरेस ने अपने पति के समानांतर अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई और कई बार तो उनसे ऊंचे पदों पर भी रहीं. 2013 में मादुरो के राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने देश की राजनीतिक दिशा तय करने में सक्रिय भूमिका निभाई.
बीते शनिवार को वेनेज़ुएला में एक अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान उन्हें और उनके पति निकोलस मादुरो दोनों को हिरासत में ले लिया गया. अब दोनों पर न्यूयॉर्क की अदालत में ड्रग्स तस्करी और हथियारों से जुड़े केस चलाए जाएंगे.
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फ़्लोरेस और मादुरो दोनों ही एक और शख़्स की छाया में सत्ता तक पहुंचे, वेनेज़ुएला के दिवंगत नेता ह्यूगो चावेज़.
चावेज़ की मौत के बाद हुए 2013 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान, मादुरो ने ही फ़्लोरेंस को 'फ़र्स्ट वॉरियर' कहकर पुकारा था और 'फ़र्स्ट लेडी' को 'ऊंचे लोगों का विचार' बताकर ख़ारिज कर दिया था.
वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति के नज़दीकी लोगों को निशाने पर लेने के अभियान के तहत सितंबर 2018 में अमेरिकी वित्त विभाग ने फ़्लोरेस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे.
साधारण शुरुआत

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फ़्लोरेस का जन्म टिनाक्विलो नामक कस्बे में हुआ था, जो राजधानी काराकस से लगभग 200 किलोमीटर पश्चिम में है. मादुरो के अनुसार, वह "मिट्टी के फ़र्श वाले एक रैंच" में पैदा हुईं थीं. जब फ़्लोरेस चार साल की थीं, तो उनका परिवार उस कस्बे से काराकस आ गया.
छह भाई-बहनों में सबसे छोटी फ़्लोरेस काराकस में अपने परिवार के साथ शहर के पश्चिमी हिस्से के दो घनी आबादी वाले इलाकों, कैटिया और बोकेरोन में रहीं.
32 साल की उम्र में उन्होंने निजी यूनिवर्सिटी सांता मारिया से क़ानून की पढ़ाई पूरी की और बाद में आपराधिक और मज़दूरी क़ानून में विशेषज्ञता हासिल की.
फ़रवरी 1992 में उनकी ज़िंदगी ने नया मोड़ लिया, जब ह्यूगो चावेज़ की अगुवाई में तख़्तापलट की कोशिश नाकाम रही.
फ़्लोरेस वकीलों की उस टीम से जुड़ गईं जिसने तख़्तापलट करने वाले सैन्य अधिकारियों का बचाव किया. बाद में वह उनके राजनीतिक प्रोजेक्ट से भी जुड़ गईं.

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इसी दौर में फ़्लोरेस की मुलाक़ात मादुरो से हुई. उस समय की तस्वीरों में मादुरो अक्सर सार्वजनिक कार्यक्रमों में चावेज़ के साथ किसी सुरक्षा गार्ड की तरह नज़र आते हैं.
मादुरो ने याद करते हुए कहा था, "ज़िंदगी के सफ़र ने ही मेरी सिलिया से मुलाक़ात करवाई. वह कई कैद किए गए देशभक्त सैन्य अधिकारियों की वकील थीं. यही नहीं, वह कमांडर चावेज़ की भी वकील थीं और जेल में कमांडर चावेज़ की वकील होना… मुश्किल था."
"तो संघर्ष के सालों में हमारी मुलाक़ात हुई, और फिर… खैर, मेरी नज़र उन पर ठहर गई और उन्होंने भी मुझ पर ग़ौर करना शुरू कर दिया."
इसके बाद से दोनों की किस्मतें चावेज़ और उनके राजनीतिक आंदोलन, चाविज़्मो, से जुड़ गईं.
सांसद और अटॉर्नी
1990 के दशक में फ़्लोरेस ने चाविज़्मो से जुड़े कई संगठनों में काम किया. 1998 के राष्ट्रपति चुनावों में चावेज़ के सत्ता में आने के साथ ही वह कई अहम पदों पर पहुंचीं.
साल 2000 में फ़्लोरेस नेशनल असेंबली के लिए चुनी गईं. 2006 में दूसरी बार जीतने के बाद, वह संसद की अध्यक्षता संभालने वाली पहली महिला बनीं.
छह साल तक उन्होंने लगभग एक-दलीय संसद का नेतृत्व किया, क्योंकि मुख्य विपक्षी पार्टियों ने चुनावों में हिस्सा नहीं लिया था.

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फ़्लोरेस ने खुद को चावेज़ की लड़ाकू सहयोगी साबित किया. नेशनल असेंबली की अध्यक्ष रहते हुए उनका कार्यकाल विवादों से मुक्त नहीं रहा - उन्होंने तो संसद कक्ष में प्रेस की एंट्री तक पर रोक लगा दी थी.
यह पाबंदी जनवरी 2016 तक बनी रही, जब तक नए चुनावों के बाद वेनेज़ुएला की विपक्षी पार्टियों ने नेशनल असेंबली पर नियंत्रण हासिल नहीं कर लिया.
फ़्लोरेस पर भाई-भतीजावाद (नेपोटिज़्म) के आरोप भी लगे. यूनियनों ने कहा कि उन्होंने लगभग 40 लोगों की नियुक्ति में दख़ल दिया, जिनमें उनके परिवार के कई सदस्य शामिल थे.
इस बारे में उन्होंने स्थानीय मीडिया से कहा, "मेरा परिवार यहां आया और मुझे गर्व है कि वे मेरा परिवार हैं. मैं इस नेशनल असेंबली में मज़दूरों के रूप में उनका बचाव करूंगी और खुली भर्ती प्रक्रिया का भी बचाव करूंगी."
2012 की शुरुआत में चावेज़ ने उन्हें देश की अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया. यह पद उन्होंने मार्च 2013 तक संभाला, राष्ट्रपति चावेज़ के निधन तक.

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मादुरो के राष्ट्रपति चुने जाने के तीन महीने बाद, उसी साल जुलाई फ़्लोरेस औपचारिक रूप से 'फ़र्स्ट लेडी' बन गईं क्योंकि दोनों ने शादी कर ली थी.
इससे उनके लंबे समय से चले आ रहे रिश्ते को औपचारिक रूप मिला. इस दौरान उन्होंने अपनी पिछली शादियों से हुए बच्चों को साथ मिलकर पाला - फ़्लोरेस के तीन और मादुरो का एक.
2015 के चुनावों में फ़्लोरेस दोबारा नेशनल असेंबली के लिए चुनी गईं. लेकिन इस बार 15 साल में पहली बार चाविज़्मो अल्पमत में आया था. दो साल बाद, अगस्त 2017 में, उन्होंने संसद से इस्तीफ़ा दे दिया और इस बार नई चुनी गई और विवादास्पद, नेशनल कॉन्स्टिट्यूएंट असेंबली की सदस्य बन गईं.
परिवार
मई 2015 में फ़्लोरेस ने सार्वजनिक नेटवर्क पर 'विद सिलिया, ऐज़ अ फ़ैमिली' नाम का टीवी कार्यक्रम शुरू किया और एक साल बाद सरकारी रेडियो पर 'डिसीज़न्स' नाम का कार्यक्रम प्रसारित करना शुरू किया.
लेकिन पिछले कुछ सालों में मीडिया की नज़र दरअसल उन पर नहीं, बल्कि उनके परिवार पर रही.

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नवंबर 2015 में, न्यूयॉर्क के एक प्रोसिक्यूटर ने उनके दो भतीजों पर ड्रग्स तस्करी का मुक़दमा दर्ज किया. इन दोनों को हैती में गिरफ़्तार कर अमेरिकी ड्रग एन्फ़ोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (डीईए) को सौंपा गया था.
फ़्लोरेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी अधिकारियों पर अपने भतीजों को "किडनैप" करने का आरोप लगाया. लेकिन दिसंबर 2017 में एक जज ने उन दोनों युवकों को ड्रग्स तस्करी के लिए 18 साल की सज़ा सुना दी.
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि वे काराकस के माइक्वेटिया एयरपोर्ट के राष्ट्रपति हैंगर का इस्तेमाल करने की साज़िश कर रहे थे. कथित तौर पर वहां से 800 किलो कोकीन होंडुरास भेजी जानी थी और फिर वह अमेरिका पहुंचाई जाती.
अक्तूबर 2022 में दोनों को एक सौदे के तहत रिहा कर दिया गया. तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने उन्हें माफ़ी दी और बदले में वेनेज़ुएला में कैद सात अमेरिकी नागरिकों की वापसी हुई.
लेकिन ट्रंप के व्हाइट हाउस में लौटने के साथ ही इन दोनों भतीजों और अन्य परिवारजनों पर फिर से प्रतिबंध लगा दिए गए.
हालांकि इस बार समस्या का सामना मादुरो और फ़्लोरेस को करना पड़ रहा है.
(बीबीसी न्यूज़ मुंडो और बीबीसी ग्लोबल जर्नलिज़्म की रिपोर्टिंग के साथ)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.












