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ट्रंप की धमकी के बाद ज़ोहरान ममदानी बोले- डर गए हैं अमेरिकी राष्ट्रपति
न्यूयॉर्क सिटी के मेयर चुनाव के लिए उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उनके चुनावी अभियान से डर गए हैं.
ट्रंप ने कहा था कि अगर ज़ोहरान ममदानी जीत जाते हैं तो न्यूयॉर्क को फंड देना उनके लिए मुश्किल होगा.
ममदानी ने चुनाव से एक शाम पहले सीएनएन को दिए इंटरव्यू में कहा, "आप साफ़ देख सकते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप हमारे कैंपेन से डर गए हैं. वह इसलिए डर गए हैं क्योंकि उनकी तरह ही हमने भी न्यूयॉर्क के कामकाजी वर्ग के जीवन में मौजूदा संकट यानी बढ़ती महंगाई की सही पहचान की है."
उन्होंने कहा, "लेकिन उनसे उलट हम वाकई इस समस्या का समाधान देने जा रहे हैं. और यही वह फ़र्क है जिसे वह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे. क्योंकि वह 30 करोड़ डॉलर व्हाइट हाउस के एक बॉलरूम की फिर से सजावट पर खर्च कर रहे हैं. ये उतनी ही रकम है, जितने में एक लाख न्यूयॉर्कवासियों को खाद्य सहायता मिल सकती है."
इससे पहले, ट्रंप ने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर चुनाव में एंड्रयू कुओमो का समर्थन किया और मतदाताओं से अपील की थी कि वे वामपंथी उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी को वोट न दें.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "चाहे आप व्यक्तिगत रूप से एंड्रयू कुओमो को पसंद करते हों या नहीं. आपके पास वास्तव में कोई विकल्प नहीं है. आपको उन्हें ही वोट देना चाहिए और उम्मीद करनी चाहिए कि वह शानदार काम करें. वह ऐसा करने में सक्षम हैं, ममदानी नहीं!"
न्यूयॉर्क के पूर्व गवर्नर कुओमो के लिए ट्रंप का यह समर्थन शहर के मेयर चुनाव से ठीक पहले आया है, जिसपर सबकी नज़रें टिकी हुई हैं. चार नवंबर को न्यूयॉर्क में मेयर चुनाव होने हैं.
इससे पहले रविवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अगर ममदानी न्यूयॉर्क के मेयर चुने गए, तो वह अपने होमटाउन न्यूयॉर्क को फ़ेडरल फंडिंग भेजने से कतराएंगे.
ट्रंप ने फंडिंग को लेकर क्या कहा
एक टेलीविज़न इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "राष्ट्रपति होने के नाते मेरे लिए न्यूयॉर्क को काफ़ी धन देना मुश्किल होगा क्योंकि अगर एक कम्युनिस्ट न्यूयॉर्क को चलाएगा, तो आप वहां पैसे भेजकर उसे सिर्फ़ बर्बाद ही करेंगे."
ओपिनियन पोल्स में ये संकेत मिल रहे हैं कि डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ज़ोहरान ममदानी कुओमो से आगे चल रहे हैं. ममदानी ने डेमोक्रेटिक प्राइमरी में कुओमो को हरा दिया था. अब कुओमो इंडिपेंडेंट चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं रिपब्लिकन उम्मीदवार कर्टिस स्लिवा उनसे पीछे हैं.
खुद रिपब्लिकन ट्रंप ने स्लिवा का समर्थन करने से इनकार कर दिया था. उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "कर्टिस स्लिवा को दिया गया वोट ममदानी को वोट देने के बराबर ही है."
फ़ेडरल फंडिंग के बारे में राष्ट्रपति ने कहा, "अगर ममदानी चुने जाते हैं, तो इसकी संभावना बहुत कम है कि मैं न्यूनतम क़ानूनी ज़रूरत से ज़्यादा कोई फ़ेडरल फंड दूं."
ट्रंप प्रशासन ने कई बार डेमोक्रेट्स के इलाकों में परियोजनाओं के लिए संघीय ग्रांट और फंडिंग में कटौती करने की कोशिश की है. न्यूयॉर्क सिटी को इस वित्तीय वर्ष में 7.4 अरब डॉलर (करीब 655 अरब रुपये) की फंडिंग मिली है.
रविवार को सीबीएस के कार्यक्रम '60 मिनट्स' में ट्रंप ने कहा कि ममदानी के मेयर बनने से न्यूयॉर्क सिटी के पूर्व वामपंथी मेयर बिल डि ब्लासियो भी 'बेहतरीन' लगने लगेंगे.
ट्रंप ने कहा, "मैंने डी ब्लासियो को देखा है कि वह कितने खराब मेयर थे और यह व्यक्ति (ममदानी) डी ब्लासियो से भी कहीं बदतर काम करेगा."
ट्रंप न्यूयॉर्क के क्वींस बरो में पले-बढ़े हैं और अब भी इस शहर में उनकी कई संपत्तियां हैं.
कुओमो ट्रंप की 'कठपुतली'!
सीबीएस के कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा, "मैं किसी भी तरह से कुओमो का प्रशंसक नहीं हूं, लेकिन अगर एक ख़राब डेमोक्रेट और एक कम्युनिस्ट के बीच चुनना हो तो ईमानदारी से कहूं, मैं हमेशा ख़राब डेमोक्रेट को ही चुनूंगा."
ममदानी खुद को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट बताते हैं. हालांकि, उन्होंने कम्युनिस्ट होने से इनकार किया है. एक टीवी इंटरव्यू में मज़ाकिया अंदाज़ में उन्होंने कहा कि 'वह स्कैंडिनेवियाई राजनेता जैसे हैं, बस रंग में थोड़े सांवले हैं.'
ममदानी ने डेमोक्रेटिक प्राइमरी जीती जबकि कुओमो दूसरे स्थान पर रहे. 34 साल के ममदानी कुओमो को ट्रंप की 'कठपुतली' और 'तोता' कह चुके हैं.
ममदानी ने सोमवार को कहा, "डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने का जवाब यह नहीं है कि हम इस शहर में उनके जैसा कैंडिडेट ला दें. बल्कि इसका जवाब एक ऐसा विकल्प तैयार करना है, जो न्यूयॉर्कवासियों की उस उम्मीद को आवाज़ दे सके, जिसे वे अपने शहर में देखने के लिए बेसब्र हैं. जिसे वे अपने भीतर और अपने पड़ोसियों में रोज़ महसूस करते हैं. एक ऐसा शहर, जो इस जगह को अपना घर कहने वाले हर व्यक्ति की गरिमा पर विश्वास करता हो."
वहीं कुओमो इस हमले का जवाब खुद को अकेले ऐसे उम्मीदवार के तौर पर पेश कर के दे रहे हैं, जो ट्रंप प्रशासन से निपटने में सक्षम हैं.
जब कोविड-19 के दौरान कई राज्यों का ट्रंप प्रशासन से टकराव हुआ था, तब कुओमो न्यूयॉर्क के गवर्नर थे. हालांकि, जब सरकारी जांचकर्ताओं ने ये पाया कि महामारी के दौरान नर्सिंग होम में होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम करके दिखाया गया, तो कुओमो ख़ुद भी जांच के दायरे में आ गए.
उन्होंने कहा, "मैंने डोनाल्ड ट्रंप से लड़ाई लड़ी है. और जब मैं न्यूयॉर्क के लिए लड़ रहा हूं, तो मैं रुकने वाला नहीं हूं."
एंड्रयू कुओमो ने साल 2021 में यौन शोषण के आरोपों की वजह से न्यूयॉर्क के गवर्नर पद से इस्तीफ़ा दिया था. हालांकि, उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था.
ममदानी का सफ़र
यूगांडा के कंपाला में जन्में ममदानी सात साल की उम्र में अपने परिवार के साथ न्यूयॉर्क आए थे. उन्होंने ब्रॉन्क्स हाई स्कूल ऑफ़ साइंस से पढ़ाई की.
ममदानी मशहूर भारतीय-अमेरिकी फ़िल्म निर्देशक मीरा नायर और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के जाने-माने प्रोफे़सर महमूद ममदानी के बेटे हैं.
साल 2014 में उन्होंने बोडन कॉलेज से 'बैचलर इन अफ़्रीकन स्टडीज़' में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.
कुछ साल बाद 2018 में, ममदानी एक अमेरिकी नागरिक बन गए.
ज़ोहरान ममदानी ने सक्रिय राजनीति में क़दम रखने से पहले एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम किया.
साल 2020 में उन्होंने पहला चुनाव लड़ा. उन्होंने न्यूयॉर्क असेंबली के 36वें डिस्ट्रिक्ट (एस्टोरिया, क्वींस) से डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा.
ज़ोहरान ममदानी पहली बार में ही जीत गए और न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली में पहले दक्षिण एशियाई और पहले सोशलिस्ट प्रतिनिधि बने.
पीएम मोदी के आलोचक
ज़ोहरान ममदानी इसराइल से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक की खुलकर आलोचना कर चुके हैं.
मई, 2025 में एक कार्यक्रम में उनसे एक सवाल पूछा गया कि अगर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मैडिसन स्क्वायर गार्डन में रैली करते हैं और फिर न्यूयॉर्क के मेयर के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करना चाहते हैं, तो क्या वह उसमें शामिल होंगे?
ममदानी ने 'नहीं' में जवाब देते हुए कहा, "मेरे पिता और उनका परिवार गुजरात से है. नरेंद्र मोदी ने गुजरात में मुसलमानों के बड़े पैमाने पर क़त्लेआम को अंजाम देने में मदद की, इतनी बड़ी हिंसा हुई कि अब तो ऐसा लगता है जैसे गुजराती मुसलमान हैं ही नहीं. हमें मोदी को उसी नज़र से देखना चाहिए जैसे हम बिन्यामिन नेतन्याहू को देखते हैं. वह एक युद्ध अपराधी हैं."
इस बयान के बाद न्यूयॉर्क के कुछ इंडो-अमेरिकन और हिंदू, सिख समुदायों ने इसे विभाजनकारी और घृणास्पद बताया था. साथ ही इन लोगों ने ममदानी से माफ़ी की मांग की थी.
यहां ये बताना ज़रूरी है कि गुजरात दंगों के सभी आरोपों से सुप्रीम कोर्ट ने जून 2022 में नरेंद्र मोदी को मुक्त कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश से गठित विशेष जाँच दल की उस रिपोर्ट को शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया था जिसमें उन्हें दोषमुक्त बताया गया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.