शेख़ हसीना के ख़िलाफ़ आंदोलन की जान रहे नाहिद इस्लाम ने क्यों छोड़ दी कैबिनेट?

नाहिद इस्लाम

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इमेज कैप्शन, नाहिद इस्लाम बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख़ हसीना सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सूचना सलाहकार और देश के छात्र आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक नाहिद इस्लाम ने कैबिनेट से इस्तीफ़ा दे दिया है.

कहा जा रहा है कि नाहिद बांग्लादेश में एक नई राजनीतिक पार्टी बना सकते हैं.

नाहिद इस्लाम ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस को भेजे अपने इस्तीफ़े के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''देश के मौजूदा हालात को देखते हुए एक नई पार्टी का उदय जरूरी हो गया है. मैंने जन विद्रोह को मजबूत करने के लिए सड़कों पर बने रहने का फैसला किया है. इसलिए कैबिनेट से इस्तीफ़ा दे दिया.''

नाहिद इस्लाम ने पिछले साल जुलाई में पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की अवामी लीग सरकार के ख़िलाफ़ 'भेदभाव विरोधी' छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था.

छात्रों के इस आंदोलन की वजह से उनकी सत्ता का पतन हो गया था. बांग्लादेश में आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा के बाद शेख़ हसीना भारत आ गई थीं.

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नाहिद इस्लाम ने कहा कि वो लोकतांत्रिक बदलाव की लोगों की आकांक्षा को पूरा करने के लिए काम करना चाहते हैं. इसलिए उन्होंने अंतरिम सरकार के सलाहकार के पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

नाहिद सूचना और प्रसारण के अलावा डाक और दूरसंचार विभाग के सलाहकार थे. ये मंत्री पद के ही समान थे.

नाहिद बांग्लादेश में जुलाई 2024 में शुरू हुए छात्र आंदोलन के शीर्ष नेताओं में से एक थे. इन प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी और 4 अगस्त तक इसमें 94 लोगों की मौत हो गई थी.

यूएन की फैक्ट फाइंडिंग की रिपोर्ट के मुताबिक़ शेख़ हसीना की सत्ता के पतन के बाद भी भड़की हिंसा में 1400 लोगों की मौत हो गई थी.

छात्रों के इस आंदोलन के दबाव की वजह से शेख़ हसीना को भारत आना पड़ा था.

5 अगस्त को उनकी सरकार के पतन के तीन दिन बाद ही बांग्लादेश में जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और बांग्लादेश ग्रामीण बैंक के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हो गया था.

छात्र आंदोलन के तीन प्रतिनिधियों में से नाहिद हुसैन को अंतरिम सरकार में जगह दी गई.

नाहिद इस्लाम क्यों आए सरकार से बाहर?

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के साथ नाहिद इस्लाम

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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के साथ नाहिद इस्लाम (फ़ाइल फ़ोटो)
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नाहिद जिस छात्र मंच का नेतृत्व कर रहे थे उससे भी इस्तीफा दे दिया है.

नाहिद के संगठन के सहयोगी छात्र संगठन 'जातीय नागरिक कमिटी' ने भी इस महीने की शुरुआत में कहा था कि वो लोग मिलकर इस शुक्रवार तक एक नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे.

माना जा रहा है कि नाहिद इस्लाम इस नई पार्टी का नेतृत्व कर सकते हैं.

अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने कहा था वो छात्रों के नेतृत्व वाली राजनीतिक पार्टी के पक्ष में हैं क्योंकि वो देश के लिए अपना ख़ून बहाने के लिए तैयार हैं.

पिछले दिनों ख़ालिदा ज़िया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी समेत कुछ संगठनों ने कहा था कि सरकार में रहते हुए पार्टी नहीं बनाई जा सकती. नाहिद का इस्तीफ़ा इसके बाद ही आया है.

नाहिद इस्लाम के इस्तीफ़े पर शेख़ हसीना की पार्टी अवामी लीग ने लगभग चुप्पी साध रखी है. पिछले साल जुलाई-अगस्त में छात्र आंदोलन के बाद से अवामी लीग सरकार में शामिल ज्यादातर मंत्री और नेता मानवता के ख़िलाफ़ अपराध समेत कुछ अन्य मामलोंं में जेल में बंद हैं.

छात्र आंदोलन में इस्लाम का साथ देने वाले महफूज़ आलम और आसिफ महमूद सरकार में बने रहेंगे.

इस्लाम ने कहा, ''सरकार के ये सलाहकार हमारे वादों को पूरा करने का काम करते रहेंगे. अंतरिम सरकार ने जिन सुधारों का वादा किया है वो इन्हें लागू करवाने में मदद करेंगे''

कौन हैं नाहिद इस्लाम?

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इमेज कैप्शन, नाहिद इस्लाम के छात्र संगठन ने शेख़ हसीना सरकार की रिजर्वेशन पॉलिसी के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू किया था.

नाहिद इस्लाम के इस्तीफ़े के बाद मोहम्मद यूनुस के प्रेस सलाहकार शफ़ीकुल आलम ने उनकी बेहद तारीफ़ की है.

उन्होंने कहा है कि वो एक दिन बांग्लादेश के प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं.

27 साल के नाहिद इस्लाम कुछ महीने पहले तक ढाका यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र के छात्र थे.

बांग्लादेश में शेख़ हसीना सरकार के ख़िलाफ़ छात्र आंदोलन में वो प्रमुख नेता के तौर पर उभरे.

एक तरह से वो शेख़ हसीना के ख़िलाफ़ आंदोलन का चेहरा बन गए थे.

इस्लाम ने शेख़ हसीना की सत्ता के पतन के बाद कहा था कि बांग्लादेश में कभी 'फासीवादी शासन' नहीं होगा. बांग्लादेश को एक ऐसा देश बनाया जाएगा जहां लोगों की जान महफूज़ होगी. लोगों को नए राजनीतिक माहौल में सामाजिक न्याय मिलेगा.

नाहिद जून 2024 में उस समय चर्चा में आए जब बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के सैनिकों और उनके बेटे-बेटियों को सरकारी नौकरियों में 30 फ़ीसदी आरक्षण के नियमों को दोबारा बहाल कर दिया.

इस्लाम और उनके संगठन का कहना था कि इसके ज़रिये शेख़ हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग के नेताओं को बेजा फ़ायदा दिया जा रहा है.

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इमेज कैप्शन, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक शेख़ हसीना सरकार के दौरान नाहिद इस्लाम को गिरफ़्तार कर यातनाएं दी गईं.

इस्लाम को शेख़ हसीना की सरकार के ख़िलाफ़ अपने रवैये की कीमत भी चुकानी पड़ी थी. सादी वर्दी में आए 25 लोगों ने 19 जुलाई 2024 में उन्हें उनके सबुजगढ़ से उठा लिया.

उन्हें हथकड़ी लगा कर आंखों में पट्टी बांध कर ले जाया गया. मीडिया ख़बरों के मुताबिक़ आंदोलन में शामिल होने के लिए उन्हें यातनाएं दी गईं. .

उस वक्त की मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि उन्हें ले जाने वाले हसीना सरकार की खुफिया विभाग के लोग थे हालांकि सरकार ने इससे इनकार किया था.

नाहिद इस्लाम ने बांग्लादेश में हिंसा और प्रदर्शनों के बाद अल्पसंख्यकों पर हमले के बाद देश में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों की रक्षा की अपील की थी.

उन्होंने कहा था कि देश के हिंदुओं और उनके पूजा स्थलों की सुरक्षा की जाए.

कितने ताक़तवर हैं नाहिद इस्लाम?

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इमेज कैप्शन, मोहम्मद यूनुस को अपना इस्तीफ़ा सौंपते नाहिद इस्लाम

फिलहाल बांग्लादेश में नाहिद इस्लाम काफी लोकप्रिय हैं. उन्हें छात्रों और युवाओं का काफी समर्थन हासिल है.

कई लोग उन्हें बांग्लादेश के भविष्य के प्रधानमंत्री के तौर पर भी देखते हैं.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के भी वो विश्वस्त सहयोगी हैं.

यूनुस के प्रेस सलाहकार ने फ़ेसबुक पोस्ट में नाहिद की तारीफ़ की है और कहा है कि वो भविष्य में देश प्रधानमंत्री बन सकते हैं. नाहिद का किसी पार्टी में शामिल होने का इरादा या नई पार्टी बनाने की कोशिश को उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा से जोड़ कर देखा जा रहा है.

भारत के बारे में क्या सोचते हैं नाहिद इस्लाम

वीडियो कैप्शन, बांग्लादेश सरकार में सलाहकार नाहिद इस्लाम भारत से रिश्तों पर ये बोले

बीबीसी संवाददाता जुगल पुरोहित के साथ एक इंटरव्यू में नाहिद इस्लाम ने कहा था कि बांग्लादेश के अल्पसंख्यक उनके देश के नागरिक हैं. उनको सुरक्षा देना बांग्लादेश की जिम्मेदारी है. भारत को इसमें कहने की कोई जरूरत नहीं है.

नाहिद इस्लाम ने कहा था कि कई देशों ने बांग्लादेश के लोगों के साथ खड़े रहने की बात की थी. लेकिन भारत ने हिंसा की निंदा नहीं की. उल्टे भारत ने यहां हिंसा की वजह बने लोगों को पनाह दी है.

उन्होंने कहा, ''हम चाहेंगे कि भारत बांग्लादेश के लोगों का साथ दे. वो शेख़ हसीना की अवामी लीग के बजाय यहां के लोगों का समर्थन करे. तभी यहां के लोग भारत पर भरोसा करेंगे.''

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