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नागोर्नो-काराबाख़ः आर्मीनिया ने कहा- सभी लोग वहां से भाग आए
- Author, जॉर्ज राइट
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
आर्मीनिया का कहना है कि एक लाख से अधिक लोग नागोर्नो काराबाख़ इलाक़े को छोड़कर जा चुके हैं.
अज़रबैजान ने पिछले सप्ताह इस क्षेत्र को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था. इसका मतलब ये है कि अब आर्मीनिया नस्ल के लगभग सभी लोग ये इलाक़ा छोड़ चुके हैं.
अज़रबैजान का कहना है कि वो इस इलाक़े को फिर से अपने साथ शामिल करना चाहता है और वो सभी नागरिकों के साथ बराबरी का सलूक करेगा. लेकिन आर्मीनिया के प्रवक्ता का कहना है कि ये सिर्फ़ 'एक झूठ है.'
नागार्नो काराबाख़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अज़रबैजान के हिस्से के रूप में मान्यता प्राप्त है लेकिन बीते तीन दशकों से यहां का प्रशासन आर्मीनियाई लोगों के हाथ में था.
दक्षिण कॉकस क्षेत्र के इस पर्वतीय इलाक़े को आर्मीनिया और उसका सहयोगी रूस समर्थन देते रहे थे.
अज़रबैजान की सेना के इन इलाक़ों को फिर से शामिल करने के अभियान के दौरान कम से कम दो सौ आर्मीनियाई और दर्जनों अज़रबैजानी सैनिक मारे गए.
एक लाख लोगों का पलायन
संघर्ष विराम समझौते के तहत अलगाववादी अपने हथियार डालने के लिए तैयार हो गए हैं.
स्वघोषित रिपब्लिक ऑफ़ नागोर्नो काराबाख़ के नेता का कहना है कि नए साल में इसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा.
आर्मीनिया के प्रधानमंत्री के प्रवक्ता नाज़ेली बाग़दासारयान का कहना है कि पिछले एक सप्ताह के भीतर 100417 शरणार्थी आर्मीनिया पहुंचे हैं. नागार्नो काराबाख़ की कुल अनुमानित आबादी एक लाख 20 हज़ार है.
संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी संस्था यूएनएचसीआर ने भी बताया है कि क़रीब एक लाख लोग यहां से पलायन कर चुके हैं. यूएनएचसीआर का कहना है कि इलाक़ा छोड़ कर भाग रहे अधिकतर लोग भूखे और परेशान हैं और उन्हें तुरंत मदद की ज़रूरत है.
आर्मीनिया के पूर्व अलगाववादी अधिकारी अर्ताक बेगलारयान का कहना है कि नागार्नो काराबाख़ में रहने वाले लोगों के अंतिम समूह अब आर्मीनिया की तरफ़ बढ़ रहे हैं.
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि अब बस चुनिंदा लोग ही इलाक़े में रह गए हैं. इनमें अधिकारी, आपात सेवाओं के कर्मचारी, स्वयंसेवक और विशेष ज़रूरतों वाले कुछ लोग ही हैं.
अज़रबैजान की सेना के अभियान में मारे गए लोगों के अलावा बीते सोमवार को एक तेल डिपो में हुए भीषण धमाके में भी कम से कम 170 लोग मारे गए.
'संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी देखें क्या बीत रही है'
अभी ये स्पष्ट नहीं है कि खानकेंदी शहर में हुए इस धमाके की वजह क्या है. आर्मीनिया के लोग इस शहर को स्टेपनाकर्ट के नाम से पुकारते हैं.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि हालात का जायज़ा लेने के लिए इस सप्ताह वो एक मिशन को नागोर्नो काराबाख़ भेज रहा है. अज़रबैजान ने कहा है कि वो मिशन को यहा आने की अनुमति देगा.
यूएन में आर्मीनिया के एंबेसडर एट लार्ज, एडमंड मारुकयान, ने इस मिशन की यात्रा के समय की आलोचना की है लेकिन ये भी कहा है कि ये अहम है कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी स्वयं देखें की आर्मीनिया लोगों पर क्या बीत रही है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, “ये अच्छी बात है कि वो वहां जाएंगे और ख़ुद इस बात के गवाह बनेंगे कि लोगों का उनके पूर्वजों की ज़मीन से नस्लीय सफ़ाया किया गया है, उन्हें उन घरों से निकाला गया है जहां उनके अभिभावक, दादा-दादी रह रहे थे. इन लोगों का उनके इलाक़े से पूरी तरह सफ़ाया कर दिया गया है.”
हालांकि उन्होंने अज़रबैजान के सभी लोगों के साथ बराबरी से सलूक करने के वादे को कोरा झूठ करार दिया.
उन्होंने कहा, “ये सिर्फ़ प्रोपागेंडा है, अज़रबैजान का एक और फ़र्ज़ी प्रोपागैंडा. कोई भी नगार्नो काराबाख़ में नहीं रहेगा.”
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