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किराए पर कोख देने वाली महिलाएं दुविधा में क्यों फँस गई हैं?
- Author, एलेनोरा कुलेंबेकोवा
- पदनाम, अल्माटी कज़ाख़स्तान
- Author, डैनियल विट्टेनबर्ग
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
- Author, मारिया जेवस्टाफ़्जेवा
- पदनाम, बीबीसी रशियन
- Author, रिपोर्टिंग
- पदनाम, तिबिलिस, जॉर्जिया
एक ज़माने में यूरोप में कारोबारी सरोगेसी (किराए की कोख) का सबसे पसंदीदा ठिकाना यूक्रेन हुआ करता था.
लेकिन जबसे रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है, तब से यूक्रेन में सरोगेसी से पैदा होने वाले बच्चों की तादाद 90 प्रतिशत तक कम हो गई है.
इसीलिए अब, बच्चे पैदा कराने की ख़्वाहिश रखने वाले जोड़े यूक्रेन के बजाय जॉर्जिया का रुख़ कर रहे हैं. इस वजह से जॉर्जिया में सरोगेसी की जो क़ीमत प्रचारित की जा रही है, उसमें ज़बरदस्त उछाल देखा जा रहा है.
लेकिन इस वजह से महिलाओं पर दबाव डालने की आशंकाएं भी बढ़ रही हैं, क्योंकि सरोगेसी के लिए बहुत सी विदेशी महिलाओं को भी भर्ती किया जा रहा है.
37 साल की अलीना (बदला हुआ नाम) कहती हैं, "अगर पैसे का मामला न होता, तो मैं ये काम क़तई नहीं करती.’ अलीना ने एक जोड़े का बच्चा अपने पेट में पालने के लिए जॉर्जिया की एक सरोगेसी एजेंसी के साथ क़रार किया है."
इसके एवज़ में अलीना को प्रेगनेंसी के दौरान हर महीने 500 डॉलर मिलेंगे. वहीं, बच्चे की पैदाइश के बाद उन्हें 15 हज़ार डॉलर की रक़म दी जाएगी.
अलीना कहती हैं कि, ‘मैं उन परिवारों की मदद करना चाहती हूं, जो अपने बच्चे ख़ुद पैदा नहीं कर सकते. मैंने ऐसे बहुत से परिवारों को टूटते हुए देखा है, जो अपने बच्चे पैदा करने में सक्षम नहीं हैं.’
हालांकि, अलीना इसमें ये भी जोड़ती हैं, "लेकिन, सबसे बड़ी बात ये है कि मुझे पैसों की ज़रूरत है. मैं अपने परिवार के लिए अच्छे से अच्छा करना चाहती हूं. मुझे ख़ुद के साथ-साथ अपने बच्चों के लिए मज़बूत बनना पड़ेगा."
सरोगेसी की प्रक्रिया के दौरान, मां-बाप बनने के आकांक्षी जोड़ों के अंडाणु और शुक्राणुओं को लैब में मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है. इसे टेस्ट ट्यूब भी कहते हैं.
फिर इस भ्रूण को सरोगेट मां यानी बच्चे पैदा करने के लिए अपनी कोख किराए पर देने वाली महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित किया जाता है.
दुनिया भर में सरोगेसी यानी किराए की कोख का कारोबार करोड़ों डॉलर का है.
जॉर्जिया की सरोगेसी एजेंसी ने अलीना को उनके अपने देश कज़ाख़्स्तान से भर्ती किया था. जहां पर अलीना दो बच्चों की परवरिश अकेले ही करती हैं.
अलीना, कपड़ों की एक दुकान में काम करके जितने पैसे कमाती हैं, उससे तीन गुना ज़्यादा पैसे उन्हें अपनी कोख किराए पर देने या सरोगेसी की प्रक्रिया से मिलेंगे.
वो कहती हैं कि, ‘मुझे अपने बच्चों के सिवा किसी और की परवाह नहीं है.’ अभी वो एक जोड़े के भ्रूण को अपने गर्भ में प्रत्यारोपित कराने के लिए जॉर्जिया की राजधानी तिब्लिसी जाने का इंतज़ार कर रही हैं. अलीना कहती हैं कि, उन्हें अपने बच्चों की बहुत याद आती है.
अलीना का कहना है कि, ‘मैंने ख़ुद को इस काम के लिए तैयार किया है. लेकिन मुझे लगता है कि मैं अकेली हूं. मेरा कोई मददगार नहीं है.’
तेज़ी से बढ़ी मांग
यूरोप में किराए की कोख के कारोबार में अब जॉर्जिया ने यूक्रेन को बहुत पीछे छोड़ दिया है पर जॉर्जिया की आबादी यूक्रेन के दसवें हिस्से के बराबर ही है. ऐसे में यहां की सरोगेसी एजेंसियां अलीना जैसी महिलाओं को पूरे मध्य एशिया से भर्ती कर रहे हैं.
सरोगेसी के कारोबार में इतनी भारी रक़म होने की वजह से महिलाओं पर अपनी कोख किराए पर देने का दबाव बनने को लेकर आशंकाएं भी जताई जा रही हैं. इस उद्योग से जुड़े लोग भी इस दबाव को लेकर फ़िक्रमंद हैं.
बोलाशक (कज़ाख़ में इसका मतलब भविष्य है) नाम की सरोगेसी एजेंसी चलाने वाली दमीरा बेबर्गेनोवा कहती हैं कि, ‘देखिए, अपनी कोख से दूसरे का बच्चा पैदा करने के व्यवहारिक रूप से कोई फ़ायदा नहीं है. हमारी लड़कियों को लगता है कि उनसे ज़बरदस्ती की जा रही है.’
दमीरा कहती हैं कि ‘सरोगेट मदर बनने वाली कोई भी महिला अपनी भलमनसाहत में ये काम नहीं करती है. वो ये काम पैसे की मजबूरी में करती हैं. लगभग सारी की सारी लड़कियां दूसरों के बच्चे सिर्फ़ इसलिए पैदा कर रही हैं, ताकि वो अपना भविष्य महफ़ूज़ कर सकें.’
दमीरा की एजेंसी टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर विज्ञापनों के ज़रिए 20 से 34 बरस की महिलाओं को अपने साथ जोड़ती है. ख़ास तौर से ऐसी महिलाएं, जो अपना कम से कम एक बच्चा पैदा कर चुकी हैं.
सरोगेसी की मांग में उछाल की वजह से दमीरा को संभावित सरोगेट मदर्स से मिलने के लिए अक्सर कज़ाख़्स्तान की फ्लाइट पकड़नी पड़ती है, जहां उनके तीन ऑफ़िस हैं. कई बार तो ऐसी महिलाओं की तलाश में उन्हें चीन भी जाना पड़ता है.
वैसे तो कोख किराए पर लेने की क़ीमत काफ़ी बढ़ गई है. फिर भी, दमीरा कहती हैं कि कज़ाख़्स्तान में रहन-सहन का ख़र्च बढ़ गया है. कई महिलाएं तो दूसरी और तीसरी बार सरोगेट मदर बनने को तैयार हो जाती हैं, ताकि अपना उधार लौटा सकें.
दमीरा बताती हैं कि, ‘अफ़सोस की बात है कि आजकल टीचर और जूनियर डॉक्टर तक सरोगेसी के लिए हमसे जुड़ रही हैं. क्योंकि वो अपनी मेडिकल ट्रेनिंग का ख़र्च नहीं उठा सकती हैं, और ये मेरे लिए कोई गर्व करने वाली बात नहीं है.’
दमीरा का कहना है कि, ‘मुझे इन लड़कियों के लिए अफ़सोस होता है. मुझे नहीं लगता कि दूसरे के बच्चे की मां बनने की वजह से वो जो जज़्बाती बोझ उठाती हैं, उसकी भरपाई पैसे से हो सकती है. हम उनको मनोवैज्ञानिक मदद भी मुहैया कराते हैं. कई सरोगेसी एजेंसियां ऐसा नहीं भी करतीं. फिर भी, मां बनने का शरीर पर काफ़ी बोझ पड़ता है. कमाई का ये कोई आसान तरीक़ा नहीं है. ये बहुत मेहनत का काम है.’
सवाल ये है कि अगर ऐसा तो फिर दमीरा, सरोगेसी को क्यों बढ़ावा दे रही हैं? उससे मुनाफ़ा क्यों कमा रही हैं?
इसके जवाब में दमीरा का कहना है कि, ‘मैं इसलिए ये काम कर रही हूं, क्योंकि इसकी मांग बढ़ती जा रही है. इस धंधे को क़ानूनी बनाकर पारदर्शिता लानी चाहिए, ताकि इससे सबका फ़ायदा हो सके.’
दमीरा पहले क़ानून की लेक्चरर रह चुकी हैं. इसीलिए उनका कहना है कि इस कारोबार से जुड़े सभी लोगों को जहां तक मुमकिन हो क़ानूनी संरक्षण मिलना चाहिए.
दमीरा का दावा है कि ऐसी बहुत सी महिलाओं ने उनसे संपर्क किया है, जो बेहद ख़राब हालत से गुज़री हैं. जिन्हें पैसे नहीं दिए गए. या फिर उन्हें उन देशों में बच्चों की तस्करी में शामिल कर लिया गया, जहां सरोगेसी पर पाबंदी लगी है.
सामाजिक डर
हालांकि, हम जितनी महिलाओं से मिले उनमें से कोई ऐसी नहीं थी, जो ख़ुद को पीड़ित मानती हो. सरोगेट मां बनने वाली बहुत सी महिलाओं को इस बात पर गर्व था कि वो इस काम से अपनी और अपने बच्चों की ज़िंदगी बेहतर बना रही हैं. इन महिलाओं ने अपने देश में कोख किराए पर देने से जुड़े कलंक को लेकर खीझ भी जताई.
सबीना (ये वास्तविक नाम नहीं है) के पेट में पल रहा लड़का उनका पांचवां बच्चा है. उनका सातवां महीना चल रहा है. ये तीसरी बार है, जब वो किसी और के बच्चे को अपनी कोख में पाल रही हैं. उन्होंने जॉर्जिया की राजधानी तिब्लिसी में हमें अपने अपार्टमेंट में आने की दावत दी.
ये अपार्टमेंट उन्हें उनकी सरोगेसी एजेंसी ने मुहैया कराया है. इस अपार्टमेंट का लिविंग रूम, किचेन और बाथरूम वो अपने जैसी पांच और गर्भवती महिलाओं से साझा करती हैं. सरोगेसी की शर्तों के मुताबिक़ इन सबको अपनी प्रेगनेंसी के आख़िरी तीन महीने, या इससे भी ज़्यादा वक़्त जॉर्जिया में बिताने होते हैं.
सबीना का फ्लैट खुला और रौशनी से भरपूर है. उसकी छत ऊंची है और एक बालकनी से कॉकेशस के पहाड़ दिखाई देते हैं.
सबीना, कज़ाख़्स्तान की बलख़श झील के किनारे बसे एक छोटे से क़स्बे की रहने वाली हैं. उनकी शादी महज़ 15 साल की उम्र में हो गई थी.
वो कहती हैं कि जॉर्जिया में रहने की वजह से उन्हें उस आलोचनाओं से निजात मिल गई है, जिसका सामना उन्हें अपने देश में रहने पर करना पड़ता. सबीना का कहना है कि उनके अपने समुदाय के बीच कोख किराए पर देने की तुलना अक्सर सेक्स का धंधा करने से की जाती है.
सबीना कहती हैं कि, ‘लोगों की मानसिकता ऐसी है कि वो सरोगेसी को बढ़ावा नहीं देतीं. लोग मेरे ऊपर उंगली उठाते और बच्चा बेचने का इल्ज़ाम लगाते. मैंने तय किया है कि मैं अपने क़स्बे के लोगों को कुछ नहीं बताऊंगी, वरना घर लौटने पर मुझे बिरादरी से बाहर कर दिया जाएगा.’
सबीना का कहना है कि, ‘एक मुसलमान होने के नाते मैंने ख़ुद से सवाल किया कि कहीं मैं कोई गुनाह तो नहीं कर रही. मैंने सरोगेसी के बारे में काफ़ी कुछ पढ़ा और इंटरनेट पर भी इसके बारे में रिसर्च किया था. मुझे लगता है कि बच्चा पैदा करना सवाब का काम है. क्योंकि मैं किसी को जीवन दे रही हूं और उन लोगों का भला कर रही हूं, जो ख़ुद से बच्चा पैदा नहीं कर सकते.’
सबीना ने कहा कि, ‘मैं ये काम मुफ़्त में तो क़तई नहीं करती. मेरे बच्चे पढ़ रहे हैं. मुझे उनका पेट भरना है. मेरा सबसे बड़ा बेटा अगले कुछ सालों में कॉलेज जाने लगेगा. सरोगेसी से मुझे जितने पैसे मिलेंगे, कज़ाख़्स्तान में मुझे इतनी रक़म कमाने में इससे दोगुना वक़्त लगेगा.’
क़ानूनी पाबंदी
सरोगेसी को लेकर जो विवाद है, उसकी वजह से जॉर्जिया के दोनों सियासी तबक़े इसकी आलोचना करते रहे हैं.
जॉर्जिया के उदारवादी राजनेता और महिलावादी संगठन, महिलाओं को शोषण से बचाने के लिए इसके मेडिकल नियम सख़्त बनाने और महिलाओं की सुरक्षा के ठोस क़दम उठाने की मांग करते रहे हैं.
वहीं, जुलाई 2023 में उस वक़्त जॉर्जिया के प्रधानमंत्री रहे और देश की रुढ़िवादी ड्रीम पार्टी के नेता इराकली गैरिबाशविली ने एलान किया कि वो विदेशी नागरिकों के लिए अपने देश में सरोगेसी पर प्रतिबंध लगाएंगे. गैरिबाशविली ने कहा कि ये विदेशी नागरिक, ‘इस पूरे मामले को कारोबार में तब्दील कर रहे हैं’ और ‘बहुत ज़्यादा विज्ञापन’ दिए जा रहे हैं.
जॉर्जिया की सरकार ने बार-बार ऐसी नीतियां बनाई हैं और ऐसे बयान दिए हैं, जिन्हें एलजीबीटी विरोधी कहा जाता है.
वहां की सरकार ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि समलैंगिक शादियां करने वाले जॉर्जिया में पैदा हुए बच्चों को ले जाएंगे.
हालांकि, सरोगेसी कराने वाली एजेंसियों की पुरज़ोर वकालत के बाद, इस पर पाबंदी का क़ानून संसद में अटक गया है और अब जॉर्जिया में चुनाव होने वाले हैं.
अलीना जैसी बहुत सी अकेली मांओं को उम्मीद है कि अपनी कोख किराए पर देने के बदले में उनके लिए पैसे कमाने का रास्ता खुला रहेगा.
अलीना कहती हैं कि, ‘मैं बहुत जल्द ये कार्यक्रम शुरू करना चाहती हूं, जिससे ये जल्दी से जल्दी ख़त्म भी हो जाए.’
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