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गगनयान मिशन: कौन जाएगा, कितना ख़र्च होगा, क्या हासिल होगा, सारे सवालों के जवाब
भारत सरकार ने मंगलवार को गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्ष में भारत की पहली उड़ान के लिए चयनित एयरफोर्स के चार पायलटों के नाम बताए.
इस मिशन के तहत तीन अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की कक्षा में भेजा जाएगा जिसके तीन दिन बाद उन्हें वापस आना होगा.
भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो इस मिशन की तैयारी के लिए लगातार परीक्षण कर रही है.
पिछले साल अक्टूबर में हुए एक अहम परीक्षण में सामने आया कि रॉकेट में गड़बड़ी होने पर चालक दल सुरक्षित बाहर निकल सकता है.
कौन हैं चार पायलट?
इसरो के मुताबिक 2024 में एक टेस्ट फ़्लाइट रोबोट को अंतरिक्ष में ले जाएगी. इसके बाद 2025 में अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाया जाएगा.
इसरो के तिरुवनंतपुरम स्थित केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम में इन चार अंतरिक्ष यात्रियों को देश से मिलवाया गया.
भारतीय वायुसेना से चुने गए इन चार अधिकारियों के नाम हैं ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालाकृष्णन नायर, ग्रुप कैप्टन अजित कृष्णन, ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप और विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इसरो चीफ़ एस सोमनाथ ने उनकी वर्दी पर सुनहरे पंखों की डिज़ाइन वाला बैज़ लगाते हुए उन्हें 'भारत का सम्मान' बताया.
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “ये चार नाम या चार इंसान नहीं हैं. 140 करोड़ आकांक्षाओं को अंतरिक्ष में ले जाने वाली शक्तियां हैं. 40 साल के बाद कोई भारतीय अंतरिक्ष में जाने वाला है. इस बार टाइम भी हमारा है, काउंटडाउन भी हमारा है और रॉकेट भी हमारा है.”
कैसे चुने गए अंतरिक्ष यात्री
अधिकारियों ने बताया है कि इन अधिकारियों को मुश्किल शारीरिक और मानसिक परीक्षणों से गुज़रे एयर फोर्स पायलटों के एक बड़े समूह से चुना गया है.
इन अधिकारियों ने रूस में 13 महीने तक कठिन ट्रेनिंग की है और अब भारत में भी उसी ट्रेनिंग को जारी रख रहे हैं. इस कार्यक्रम के दौरान एक वीडियो जारी हुआ जिसमें ये अधिकारी जिम में मेहनत करने से लेकर स्विमिंग और योगा जैसे व्यायाम करते दिख रहे हैं.
इसरो ने मंगलवार को व्योम-मित्र की भी एक झलक दिखाई. व्योम-मित्र एक संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ अंतरिक्ष का दोस्त है. यह एक रोबोट है जिसे इस साल अंतरिक्ष में भेजा जाना है.
गगन यान मिशन अंतरिक्ष में भारत की पहली मानव उड़ान है जिसके लिए इसरो केंद्र पर काफ़ी तैयारी चल रही है.
कितना होगा ख़र्च
इस परियोजना पर होने वाला कुल ख़र्च नब्बे अरब रुपये है.
अगर भारत अपनी इस परियोजना में सफल होता है तो वह अंतरिक्ष में इंसान पहुंचाने वाला चौथा देश बन जाएगा. इससे पहले सोवियत संघ, अमेरिका और चीन ने अंतरिक्ष में इंसान पहुंचाने में सफलता हासिल की है.
पिछले साल भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नयी कामयाबी हासिल की. साल 2023 के अगस्त महीने में भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के नज़दीक उतरने वाला पहला देश बना.
इसके कुछ हफ़्तों बाद इसरो ने सूर्य की ओर भारत का पहला ऑब्ज़र्वेशन मिशन आदित्य-एल1 भेजा. ये इस समय कक्षा में मौजूद रहते हुए सूर्य पर नज़र रखा रहा .
भारत ने इन तमाम अभियानों के साथ ही अगले कुछ दशकों के लिए भी बहु-प्रतीक्षित एलान किए हैं.
भारत ने कहा है कि वह 2035 तक पहला स्पेस स्टेशन खोलेगा और 2040 तक चंद्रमा पर अपना अंतरिक्ष यात्री भेजेगा.
किस-किसने दी बधाई?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इस मौके पर एयरफोर्स पायलटों को बधाई दी है.
उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा है कि ‘हमारे पहले अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान के लिए चुने जाने पर चयनित वायुसेना पायलटों को बहुत बधाई.’
केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी इस मौके को भारत के लिए एक गर्व का क्षण बताया है.
उन्होंने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें पीएम मोदी इस अभियान के लिए चुने गए वायुसेना पायलटों से मिलते दिख रहे हैं.
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि ‘पीएम नरेंद्र मोदी के समर्थन और सहयोग की वजह से आज ये संभव हो पाया है कि भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है.’
गोवा के मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत ने इस मौके पर पीएम मोदी के भाषण की पंक्तियों को दोहराते हुए लिखा है - "इस बार टाइम भी हमारा है, काउंटडाउन भी हमारा है और रॉकेट भी हमारा है."
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