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डोनाल्ड ट्रंप पर हमला कड़ी सुरक्षा के बावजूद कैसे हो गया?
- Author, बर्न्ड डेबसमैन जूनियर और नदीन यूसिफ़
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
इस बात को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा में लगे पुलिस अधिकारियों ने हमलावर को इतने क़रीब कैसे आने दिया.
पेंसिल्वेनिया के बटलर काउंटी के मैदान में ट्रंप की आउटडोर रैली चल रही थी. उस वक़्त संदिग्ध हमलावर थॉमस मैथ्यू क्रूक्स आयोजन स्थल के पास की एक इमारत तक पहुंचने में सफल रहा. वहीं से थॉमस ने 130 मीटर (430 फ़ुट) की दूरी से ट्रंप को निशाने पर लेते हुए गोली चलाई थी.
एबीसी न्यूज़ से बातचीत में सीक्रेट सर्विस डायरेक्टर किम्बर्ली चीटल का कहना है कि जिस इमारत से थॉमस मैथ्यू क्रूक्स ने निशाना साधा था, उस इमारत के अंदर और बाहर स्थानीय पुलिस तैनात थी.
बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएस न्यूज़ ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इमारत के अंदर जो स्थानीय पुलिस तैनात थी, उसमें तीन स्नाइपर्स शामिल थे. उन पर आरोप है कि उन्होंने थॉमस क्रुक्स को छत पर जाने की कोशिश करते देखा था.
ट्रंप पर हुए इस हमले में उनके कान पर चोट आई है. रैली में आए एक दर्शक की मौत हो गई और दो घायल हो गए
किसकी ज़िम्मेदारी?
सीक्रेट सर्विस के प्रवक्ता एंथनी गूग्लियल्मी का कहना है कि उनकी एजेंसी रैली परिसर के अंदर की सुरक्षा में तैनात थी जबकि स्थानीय पुलिस के पास इस जगह के बाहर की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी थी. इसमें हमलावर ने जिस इमारत का इस्तेमाल किया वो भी जगह शामिल थी.
बीबीसी ने अपने सवालों को स्टेट पुलिस के पास भेजा था. इसके जवाब में कहा गया कि जिस इलाक़े में ये इमारत है उसकी ज़िम्मेदारी उनके पास नहीं थी.
एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि विभाग की ओर से वो ''सारे संसाधन'' मुहैया कराए गए थे जो सीक्रेट सर्विस ने मांगे थे. रैली स्थल के परिसर में 30 से 40 जवान भी तैनात किए गए थे.
कई पर्यवेक्षकों का ये सवाल है कि आख़िर सुरक्षा योजनाएं कैसे नाकाम हो गईं और हमलावर बिना किसी रोक-टोक के ट्रंप तक पहुंच गया.
घटना के वक़्त मौजूद लोगों का कहना है कि उन्होंने गोलीबारी शुरू होने से कुछ मिनट पहले संदिग्ध को छत पर देखा था. बटलर काउंटी के शेरिफ माइकल स्लूप का भी कहना है कि एक स्थानीय सुरक्षा अधिकारी ने हमलावर को देखा था लेकिन उसे रोक नहीं सका.
शेरिफ ने ये भी माना कि सुरक्षा में ''नाकामी'' रही है लेकिन उनका मानना है कि इसके लिए किसी एक पक्ष को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है.
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पहले से ही असुरक्षित मानी जा रही थी इमारत
सिक्योर एनवायरनमेंट्स कंसल्टेंट्स के फाउंडर जेसन रसेल, साल 2002 से 2010 तक बतौर एजेंट काम कर चुके हैं.
इस दौरान उन्होंने चुनावी अभियानों में काम किया था. रसेल कहते हैं कि रैलियों की सुरक्षा के लिए सीक्रेट सर्विस का स्थानीय पुलिस पर निर्भर रहना एक आम बात है.
बीबीसी से बातचीत में वो कहते हैं, ''सीक्रेट सर्विस के पास इतने एजेंट नहीं होते कि वो उन्हें हर जगह तैनात कर सकें.''
रसेल का कहना है कि एजेंट आमतौर पर कई दिन पहले ही कैंपेन वाली जगह का निरीक्षण कर लेते हैं ताकि सुरक्षा योजना बनाई जा सके. इस योजना को स्थानीय पुलिस के साथ साझा किया जाता है.
वो कहते हैं कि किसी आयोजन के दौरान हर एजेंसी के साथ जानकारी एक साथ साझा की जाती है. हालांकि, वो ये भी कहते हैं कि साझे की जा रही जानकारी में ''10 सेकेंड'' की भी देरी, हमलावर के लिए कुछ गोलियां चलाने के लिए पर्याप्त समय हो सकता है.
एनबीसी न्यूज़ के मुताबिक़, सीक्रेट सर्विस ऑपरेशन को जानने वाले दो सूत्रों से ये जानकारी मिली है कि इसकी छत को पहले ही असुरक्षित माना जा रहा था.
रसेल का कहना है कि ऐसा मुमकिन है कि सीक्रेट सर्विस एजेंटों को लगा हो कि ये इमारत ख़तरनाक हो सकती है. साथ ही उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से ये अनुरोध किया हो कि वो उस इमारत तक पहुँच को रोकने के लिए जवानों को तैनात करें.
वो कहते हैं, ''कारण कुछ भी हो लेकिन ऐसा हो नहीं सका.''
21 साल अमेरिकी आर्मी में बतौर पैराट्रूपर और रेंजर काम कर चुके थॉमस ग्लीसन, इस घटना के चश्मदीद हैं. वो कहते हैं, ''लंबी दूरी के ख़तरे के लिए अधिक सुरक्षा होनी चाहिए थी.''
वो आगे कहते हैं, ''जितनी दूरी थी और सुविधा को देखते हुए, अगर कोई ट्रंप की हत्या करने की कोशिश कर रहा था, तो वो जगह उसके लिए सबसे उपयुक्त था.''
अब एफ़बीआई ने संभाली है, जांच की मुख्य ज़िम्मेदारी
इस घटना की मुख्य ज़िम्मेदारी अमेरिका की संघीय जांच एजेसीं- एफ़बीआई की है. एफ़बीआई ने ये ज़िम्मेदारी संभाल ली है. इसके अलावा भी कई जांच सदन और सीनेट दोनों की तरफ़ से होंगी.
अमेरिका के गृह सुरक्षा सचिव एलेजांद्रो मयोरकास का कहना है कि ये सुरक्षा की ''नाकामी'' है. उन्होंने सीएनएन से कहा, ''इस तरह की घटना दोबारा नहीं हो सकती.''
अमेरिका की सीक्रेट सर्विस निदेशक किम्बर्ली चीटल ने सोमवार को कहा कि उनकी एजेंसी संघीय और स्थानीय पुलिस से ये समझने की कोशिश कर रही है कि ''क्या हुआ है, कैसे हुआ है और कैसे हम आगे ऐसी किसी घटना को रोक सकते हैं.''
उन्होंने कहा कि वो इस घटना के संबंध में की जाने वाली किसी भी जांच में सहयोग करेंगी.
एबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में वो कहती है , ''इस घटना की ज़िम्मेदारी मुझ पर है.'' वो कहती हैं कि कुछ सांसद उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं लेकिन वो ऐसा नहीं करेंगी.
22 जुलाई को चीटल, ''ओवरसाइट एंड अकाउंटेबिलिटी'' कमिटी का सामना करेंगी.
समिति के रिपब्लिक नेताओं ने सीक्रेट सर्विस से सबूत पेश करने के लिए कहा है, जिसमें इंटरनल कम्युनिकेशन, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग, स्थानीय एंजेसियों को भेजे गए संदेश, मैप और घटना से पहले का आकलन शामिल है.
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