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नीट पेपर लीक मामला: सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से मांगी रिपोर्ट
- Author, उमंग पोद्दार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मेडिकल कॉलेजों में दाख़िले के लिए हुई नीट-यूजी परीक्षा को कथित गड़बड़ियों की वजह से दोबारा आयोजित कराने की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पेपर लीक हुआ, ऐसा प्रतीत होता, लेकिन गड़बड़ी बड़ी पैमाने पर हुई, कुछ जगहों तक सीमित रही, ये तय करने के लिए कुछ तथ्यों की ज़रूरत है
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “ऐसे हालात में, जहां परीक्षा की शुचिता भंग होने से पूरी प्रक्रिया पर ही असर पड़ा है, और गड़बड़ी से लाभान्वित होने वालों को अन्य लोगों से अलग करना संभव नहीं है, तब दोबारा परीक्षा कराने का आदेश देना आवश्यक हो सकता है."
"लेकिन दूसरी तरफ़ जहां चूक कुछ ख़ास जगहों या केंद्रों तक सीमित हो और उससे फ़ायदा उठाने वालों की पहचान करना संभव हो, तो ऐसे में सभी छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का आदेश देना उचित नहीं होगा.’’
याचिकाकर्ता नीट यूजी की हाल में हुई परीक्षा को रद्द और इसे दोबारा करवाने के लिए अदालत में पहुँचे हैं.
सुनवाई के बाद सोमवार को अदालत ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) से कुछ अहम जानकारियां मांगीं.
सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से जिन पहलुओं पर रिपोर्ट मांगी है, वो इस प्रकार हैं-
1. प्रश्नपत्र लीक होने के बारे में पहली बार कब पता चला
2. लीक हुए पेपर को किस तरह बांटा गया.
3. पेपर लीक होने और परीक्षा होने के बीच कितना समय था
4. एनटीए ने उन सेंटर्स या शहरों की पहचान के लिए क्या कदम उठाए, जहां पेपर लीक हुए थे.
5. पेपर लीक होने से जिन्हें फ़ायदा हुआ, उनकी पहचान के लिए क्या तरीके अपनाए गए.
6. पेपर लीक होने से जिन छात्रों को फ़ायदा हुआ, उनमें से अभी तक कितने छात्रों की पहचान हो पाई.
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी जांच की स्टेटस रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई के जांच अधिकारी को, इस मामले में अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट फ़ाइल करने के लिए भी कहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से ये भी जानना चाहा कि क्या वो साइबर फॉरेंसिंक यूनिट या किसी अन्य एजेंसी के डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल करके, संदिग्ध मामलों का विश्लेषण कर पाए या नहीं.
पेपर लीक की ऐसी कोई घटना भविष्य में नहीं हो, इसके लिए अलग-अलग तरह के विशेषज्ञों की संभावित समिति के बारे में भी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जानकारी मांगी है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये तमाम जानकारी दस जुलाई को शाम पांच बजे तक दी जाए. इस मामले पर अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी.
एनटीए सवालों के घेरे में
इस मामले याचिकाकर्ता के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता धीरज कुमार सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात को माना कि पेपर लीक हुआ है. उन्होंने कहा है कि अगर पेपर लीक हुआ है तो यह देखना है उसका प्रभाव कहां तक हुआ है, कोर्ट जानना चाहता है कि अब तक इस मामले में क्या जांच हुई है, कब पेपर लीक हुआ है, वह कितने बड़े पैमाने पर फैला, यह सब जानने के बाद ही कोर्ट कोई फ़ैसला करेगा.’’
इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल के नेता मनोज कुमार झा ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “मेरा मानना है कि इस पूरे मामले की असल वजह एनटीए है, एनटीए को ख़त्म किया जाना चाहिए और निर्णय इस तरह लिए जाने चाहिए ताकि बच्चों का भविष्य बेहतर हो.”
सीबीआई कर रही है जांच
शिक्षा मंत्रालय ने 22 जून को नीट-यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच सीबीआई को सौंप दी और इस मामले में अब तक पांच राज्यों से 33 लोग गिरफ़्तार किए जा चुके हैं.
केंद्र सरकार ने नीट की परीक्षा का आयोजन करवाने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के निदेशक सुबोध कुमार सिंह को महानिदेशक के पद से भी हटा दिया है.
उनकी जगह प्रदीप सिंह खरौला को एनटीए के महानिदेशक पद का अतिरिक्त प्रभार दिया है.
नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ी का मामला सबसे पहले बिहार में सामने आया था, जिसके बाद कुछ अन्य राज्यों में इस मामले की कड़ियां जुड़ी और जांच का दायरा बढ़ता गया.
संसद में भी इस मामले की गूंज सुनाई दी जहां विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लिया.
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