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एक हाथ में राइफ़ल, दूसरे में बाइबल: ब्राज़ील के नार्को गैंग जो ख़ुद को 'ईश्वर का सिपाही' बताते हैं
- Author, लेबो डिसेको, ग्लोबल रिलिजन कॉरेस्पोंडेंट और जूलिया कारनीरो
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
ब्राज़ील के रियो डि जेनेरो में जब पुलिस कोकीन और चरस की भारी मात्रा पकड़ती है तो अक्सर ऐसा होता है कि उसे पैकेट्स पर धार्मिक निशान 'स्टार ऑफ़ डेविड' छपा मिलता है.
यहूदियों के पवित्र इस निशान का आस्था से कोई संबंध नहीं है. यह कुछ ऐसे पेंटेकोस्टल ईसाई लोगों की आस्था का प्रतिनिधित्व करता है जिनके अनुसार इसराइल में यहूदियों की वापसी पर ईसा मसीह दूसरी बार प्रकट होंगे.
रियो में ड्रग्स का धंधा करने वाले ताक़तवर गैंग का नाम है 'प्योर थर्ड कमांड' है.
इस गैंग के बारे में मशहूर है कि यह अपने विरोधियों को 'ग़ायब' करवा देता है. गैंग की धार्मिक आस्था एवेंजिकल ईसाई मत के हिसाब से बहुत कट्टर समझी जाती है.
'एवेंजिकल ड्रग डीलर्स' नाम की किताब लिखने वाली धर्मशास्त्री विवियन कोस्टा के अनुसार इस गिरोह के प्रमुख ने 'ईश्वर की ओर से मिलने वाले ज्ञान' के बाद शहर के उत्तर में पांच इलाक़ों पर कब्ज़ा कर लिया था.
इस गैंग के लीडर ने अपने ठिकाने को नाम दिया था 'इसराइल कॉम्प्लेक्स'
विवियन कोस्टा कहती हैं कि इस गैंग के लोग ख़ुद को 'अपराध के सैनिक' मानते हैं और ईसा मसीह को उन इलाक़ों का 'मालिक' जिन पर वह क़ब्ज़ा किए हुए हैं.
कुछ लोग उन्हें 'नार्को पेंटेकोस्टल' भी कहते हैं.
राइफ़ल और बाइबल
पास्टर डिएगो नासिमेंटों के पास अपराध और चर्च दोनों का अनुभव है. वे बताते हैं कि उन्होंने ईसाई धर्म एक बंदूकधारी गैंगस्टर के कहने पर स्वीकार किया था.
नासिमेंटों को देखकर यह विश्वास करना मुश्किल होता है कि किसी लड़के की तरह दिखने वाला और हमेशा मुस्कुराने वाला 42 वर्षीय शख़्स कभी आपराधिक गैंग 'रेड कमांड' का हिस्सा था.
आपराधिक गतिविधियों के कारण नासिमेंटों ने चार साल जेल में बिताए थे. इसके बावजूद वे अपराध की दुनिया में जमे रहे. मगर जब कोकीन के नशे के कारण उन्हें गैंग से निकाला गया तब उन्होंने भी जुर्म की दुनिया को छोड़ने का फ़ैसला किया.
वह कहते हैं, "मैंने अपने परिवार को खो दिया और लगभग एक साल तक सड़क पर ही रहने को मजबूर रहा. मैंने कोकीन ख़रीदने के लिए अपने घर का सामान तक बेच दिया."
उस समय शहर के विला केनेडी इलाक़े में ड्रग्स के एक बड़े डीलर ने उनसे संपर्क किया.
नासिमेंटों ने बताया, "उसने मुझे धर्म की शिक्षा देनी शुरू कर दी और कहा कि इस सबसे बाहर निकलने का रास्ता है. उसने मुझसे कहा कि मेरे लिए एक हल अब भी मौजूद है और मैं ईसा को स्वीकार कर लूं."
पास्टर नासीमेंटो अब भी अपराधियों के साथ समय बिताते हैं, लेकिन यह समय वह जेलों में गुज़ारते हैं जहां वह उन्हें सही राह पर लाने की कोशिश करते हैं.
उनका जीवन भी एक अपराधी ने बदला था, लेकिन नासिमेंटों 'धार्मिक अपराधी' को सही शब्दावली नहीं मानते.
वह कहते हैं, "मैं उन्हें बस आम लोगों की तरह ही देखता हूं जो ग़लत राह पर जा रहे हैं, लेकिन उन्हें ईश्वर का डर भी है और वह जानते हैं कि ईश्वर ही उनके जीवन की रक्षा करता है."
"एवेंजिकल और अपराधी की पहचान को आप मिला नहीं सकते. अगर कोई व्यक्ति ईसा को स्वीकार कर लेता है और पवित्र आदेशों को मानता है तो वह कभी भी ड्रग का धंधा नहीं कर सकता."
'डर के साए में जीवन'
पेंटेकोस्टल ईसाई समुदाय इस दशक के अंत तक ब्राज़ील में कैथोलिक समुदाय को पीछे छोड़कर आबादी के हिसाब से सबसे बड़ा धर्म समूह बन जाएगा.
अलग-अलग गैंग के प्रभाव वाले इलाकों में लोग इसमें अधिक रुचि ले रहे हैं. इनमें से कुछ गैंग ताक़त हासिल करने के लिए भी अपनी आस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं.
अपराधियों पर आरोप है कि वह अफ़्रीकी मूल के ब्राज़ीली समुदाय के साथ हिंसा कर रहे हैं.
रियो में समाजशास्त्र की प्रोफ़ेसर क्रिस्टीना विटाल का कहना है कि शहर का ग़रीब समुदाय लंबे समय से अपराधियों की घेराबंदी में जीवन बिता रहा है और अब उनकी धार्मिक स्वतंत्रता भी प्रभावित हो रही है.
उनका कहना है, "इसराइल कॉम्प्लेक्स' में दूसरी धार्मिक आस्थाओं को मानने वाले लोग सार्वजनिक तौर पर इसके बारे में नहीं बता सकते."
विटाल ने कहा कि आसपास के इलाक़ों में भी अफ़्रीकी मूल के ब्राज़ीली समुदायों के धर्मस्थल बंद कर दिए गए हैं. कुछ आपराधिक तत्व अक्सर उनकी दीवारों पर 'ईसा इस जगह के ईश्वर हैं' लिख देते हैं.
डॉक्टर रीटा सलीम रियो की पुलिस में नस्ल और असहिष्णुता से संबंधित अपराधों के विभाग की प्रमुख हैं. उनका कहना है कि ड्रग्स के गैंग्स की धमकियों और हमलों के दूरगामी परिणाम होते हैं.
"यह मामले अधिक गंभीर हैं क्योंकि उनके पीछे एक आपराधिक गिरोह या उसका प्रमुख होता है. पूरे इलाक़े में उसका ख़ौफ़ होता है."
वह कहती हैं कि 'इसराइल कॉम्प्लेक्स' में कथित गैंग लीडर का गिरफ़्तारी वारंट जारी किया गया था. उस लीडर पर आरोप है कि उसके आदेश पर हथियारबंद लोगों ने अफ़्रीकी मूल के ब्राज़ील के लोगों के धर्मस्थलों पर हमला किया.
"नियो क्रूसेड"
धार्मिक विविधता के विशेषज्ञ मार्सियो डी जगून के अनुसार रियो में धार्मिक कट्टरता के आरोप सन 2000 के दशक की शुरुआत में सामने आए थे और हाल के वर्षों में यह समस्या कई गुना बढ़ गई है.
जगून कंडोम्बल धर्म के धर्म गुरु हैं. वह कहते हैं कि यह एक राष्ट्रीय स्तर की समस्या बन चुकी है और ब्राज़ील के दूसरे शहरों में भी ऐसे हमले देखे गए हैं.
वह इसे 'नियो क्रूसेड' का नाम देते हैं. उनके अनुसार, "इन हमलों से धार्मिक और नस्ली शोषण होता है. अपराधी अफ़्रीकी धर्मों को अनैतिक बताते हैं और दावा करते हैं कि वह ईश्वर के नाम पर बुराई के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं."
धार्मिक मामलों की विशेषज्ञ विवियन कोस्टा कहती हैं कि ब्राज़ील में धर्म और अपराध का मेल कोई नई बात नहीं. अतीत में अपराधी अफ़्रीकी मूल के ब्राज़ीली देवताओं और कैथोलिक संतों से सुरक्षा मांगते थे.
वह कहते हैं, "अगर हम रेड कमांड या थर्ड कमांड की शुरुआत पर नज़र दौड़ाएं तो एफ़्रो और कैथोलिक धर्म शुरू से ही यहां मौजूद हैं. इसीलिए इसे नार्को पेंटेकोस्टल कहते हैं यानी अपराध और धर्म का पारंपरिक संबंध. "
धर्म और अपराध के मेल को चाहे कोई भी नाम दिया जाए लेकिन सच्चाई यह है कि इससे ब्राज़ील के संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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