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प्रधानमंत्री कोई भी हो असली हूकुमत तो वर्दी वालों की है : पाकिस्तान में फ़ौजी दबदबे पर मोहम्मद हनीफ़ का ब्लॉग
- Author, मोहम्मद हनीफ़
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक
जंग के नुक़सान तो बड़े हैं पर एक छोटा सा फ़ायदा भी है.
नुक़सान तो हम सबको पता है कि फ़ौजी तो फ़ौज में भर्ती ही जंग लड़ने के लिए होते हैं पर जब जंग होती है उसमें सिविलियन भी मारे जाते हैं.
आटे दाल का भाव बढ़ जाता है. कई बेचारे बे घरबार हो जाते हैं.
लेकिन जंग के इस माहौल में जंग का विरोध करने वाला व्यक्ति अपने आप को गद्दार ही कहलवाता है. इसलिए हम भी कह देते हैं कि अगर जंग हुई तो हम अपनी ज़मीन के चप्पे-चप्पे की हिफ़ाज़त करेंगे.
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'कैसे कब्ज़ा ग्रुप के जाल में फंस गए'
पाकिस्तान में हूकुमत कोई भी हो, प्रधानमंत्री का नाम कुछ भी हो, रक्षा मंत्री का नाम कुछ भी हो…लेकिन असली सरकार जो है वो आजकल वर्दी वालों की है
पाकिस्तान की वर्दी वाली सरकार को जिस प्यार की आदत थी वो थोड़ा कम हुआ था. प्यार में ये कमी तब से आई जब से उन्होंने इमरान ख़ान को हूकुमत से निकाला और जेल में डाला है.
ख़ास तौर पर पाकिस्तान के पंजाब में , जहाँ फ़ौज को प्यार ही प्यार मिलता था. वो ऐसी जगह थी जहाँ लोग गाते थे - मेरया ढोल सिपाहिया तैनूं रब्ब दियां रखां… और जहाँ गाने बजते थे —मेरा माही छैल-छबीला…हाय नी करनैल नी, जरनैल नी
उसी पंजाब में लोग सेना के बारे में ये कहने लग पड़े थे कि ये कैसे कब्ज़ा ग्रुप के जाल में फंस गए हैं.
फ़ौज को दिल से प्यार करने वाले पंजाबी भी ये कहते फिरते थे कि मुझसे पहले सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग
लेकिन फिर हुआ पहलगाम…
पाकिस्तानी टीवी एंकरों ने अपने-अपने स्टूडियो में मोर्चे बांध लिए…कई पाकिस्तानियों को फ़ौज का प्यार दोबारा याद आया, जैसे कभी बिछड़े साजन की याद आती है
इसे धरती का प्यार कह लो या मजबूरी क्योंकि अगर भारत ने हमला किया तो जंग तो फ़ौज ही लड़ेगी.
'बड़ी जंग का फ़ायदा भी होता है'
बड़ी जंग का एक ये भी फ़ायदा होता है कि अब हमारी छोटी-छोटी लड़ाइयां छिप गई हैं.
हमारे सिंधी भाई दो हफ़्तों से सड़कें बंद करके बैठे थे और कह रहे थे कि पंजाब हमारा पानी चोरी कर रहा है.
अब हमें हूकुमत बता रही है भारत हम सभी का पानी चोरी करने लगा है, आओ उससे लड़ते हैं.
बलोच बोलते थे कि हमारे बच्चे ग़ायब किए हैं उन्हें वापस करो, उनको भी यही जवाब है कि आओ पहले हम इंडिया से निपट लें
ऊपर से इमरान ख़ान था जो दो साल से जेल में है, उसे अपनी बहनों से भी नहीं मिलने देते.
डेढ़ सौ केस उस पर पहले से ही हैं, और जब से जंग की बातें शुरू हुई हैं, ये लोग कह रहे हैं - कितना वतन-दुश्मन है, ये जेल की कोठरी से भारत को क्यों नहीं ललकार रहा.
जब इमरान ख़ान के हिमायती कहते हैं कि उन्हें बाहर निकालो तो कहते हैं कि ये तो है ही गद्दार…यहां जंग छिड़ने वाली है और इसे अपनी आज़ादी की पड़ी है
आख़िर जेल के अंदर से इमरान ख़ान बोल पड़ा. उनके चाहने वाले कहते हैं कि इमरान ख़ान ने मोदी को ललकारा है
लेकिन अब आप ही देख लो - जेल में बैठा क़ैदी और उसे क़ैद करने वाले…एक ही बोली बोलने लगें तो इस जंग के माहौल में हम क्यों ख़ुद गद्दार कहलवाएं?
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बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित