ईवीएम पर मस्क की टिप्पणी से छिड़ी बहस, पूर्व आईटी मंत्री ने दी ट्यूटोरियल लेने की सलाह और राहुल गांधी भी बोले

टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क ने शनिवार को एक ट्वीट किया जिसने भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम को लेकर बहस छेड़ दी है.

शनिवार को मस्क ने ट्वीट किया कि ईवीएम का इस्तेमाल ख़त्म कर देना चाहिए. हालांकि, बीजेपी सरकार में आईटी मंत्री रह चुके राजीव चंद्रशेखर ने मस्क के दावे को ग़लत कहा.

मस्क तकनीक के क्षेत्र में काम करते हैं और राजीव चंद्रशेखर भी चिप डिज़ाइनिंग के क्षेत्र में काम कर चुके हैं. दोनों के बीच ट्विटर पर ईवीएम को लेकर बहस छिड़ गई.

इस बहस में बाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत दूसरे राजनेता और आम लोग भी कूद पड़े.

इस दौरान मतगणना के दिन मुंबई के एक मतगणना केंद्र में ईवीएम के साथ उम्मीदवार के रिश्तेदार का फ़ोन जुड़े होने की ख़बरें सोशल मीडिया पर शेयर की जाने लगीं. राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने इस ख़बर को शेयर किया चुनाव आयोग से सवाल किए.

शाम होते-होते मुंबई नॉर्थ वेस्ट लोकसभा क्षेत्र की रिटर्निंग अफ़सर ने मीडिया में आई इस ख़बर को खारिज किया और कहा कि ईवीएम एक स्टैंडअलोन डिवाइस है, जिसमें तार या बेतार कनेक्शन की कोई सुविधा नहीं है. ऐसे में इसके साथ छेड़छाड़ की ख़बरें आधारहीन है.

मस्क ने क्या कहा?

शनिवार को एलन मस्क ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में बतौर स्वतंत्र उम्मीदवार उतर रहे रॉबर्ट एफ़ केनेडी जूनियर का एक ट्वीट रीट्वीट किया.

इसके साथ उन्होंने लिखा,"हमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को ख़त्म कर देना चाहिए. इंसान या आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के ज़रिए इनके हैक होने का भले ही कम, लेकिन बड़ा जोखिम है."

रॉबर्ट ने लिखा था, "समाचार एजेंसी एपी के अनुसार प्यूर्टो रिको में जो प्राइमरी चुनाव हुए उनमें वोटिंग में सैकड़ों अनियमितताएं पाई गईं जो ईवीएम से जुड़ी थीं. ये अच्छी बात है कि पेपर ट्रेल भी था. इस कारण समस्या का पता चल सका और वोट टैली में सुधार किया जा सका."

"क्या होगा अगर कोई पेपर ट्रेल ही न हो? अमेरिकी नागरिकों को पता होना चाहिए कि उनका हर वोट गिना जाता है और चुनावों को हैक नहीं किया जा सकता. हमें पेपर बैलट की तरफ लौटना चाहिए और चुनावों में इलेक्ट्रोनिक हस्तक्षेप से बचना चाहिए."

सोशल मीडिया पर मस्क के इस ट्वीट पर 22 हज़ार लोगों ने टिप्पणी की है, वहीं 64 हज़ार लोगों ने इसे रीट्वीट किया है.

कई लोगों ने इसके उत्तर में अख़बारों में छपी चुनावों के हैक होने की ख़बरें पोस्ट की हैं.

यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास ने भी इसका जवाब दिया है.

उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, "झूठ बोलना बंद करें एलन मस्क. मोदी के हिसाब से ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. आपको तकनीक और एआई (आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस) के बारे में उतना नहीं पता जितना हमारे रडार तकनीक के विशेषज्ञों को पता है."

इस पर प्रतिक्रिया देने वालों में एक सैम पित्रोदा भी हैं जिन्हें भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए जाना जाता है.

उन्होंने लिखा, "गोल्डन नियम ये है कि जिसके पास सोना है नियम वो ही बनाता है. जिस व्यक्ति के पास इस मुद्दे पर सबसे अधिक ज्ञान है, उसने ईवीएम पर अपनी राय रख दी है कि पेपर बैलट को अपनाना चाहिए. मुझे उम्मीद है कि हम ये बात सुनें, सीखें और कदम उठाएं."

राजीव चंद्रशेखर ने दिया मस्क को जवाब

पिछली सरकार में आईटी मंत्री रहे राजीव चंद्रशेखर ने एलन मस्क के बात का जवाब दिया और लिखा, "ये चीजों का सामान्यीकरण करने वाला बयान है, जिसका मतलब है कि कोई भी सुरक्षित डिजिटल हार्डवेयर नहीं बना सकता. ये ग़लत है."

उन्होंने लिखा, "मस्क जो कह रहे हैं वो अमेरिका या दूसरी जगहों के लिए लागू हो सकता है. जहां नियमित तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले कंप्यूटर प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल कर इंटरनेट कनेक्टेड वोटिंग मशीनें बनाई जाती हैं."

"लेकिन भारतीय ईवीएम मशीनें अलग हैं, ये कस्टम डिज़ाइन्ड होती हैं. ये सुरक्षित हैं और किसी नेटवर्क या मीडिया से कनेक्टेड नहीं होतीं.

"कोई कनेक्टिविटी नहीं, कोई ब्लूटूथ नहीं, वाई-फ़ाई नहीं, इंटरनेट नहीं.. इसलिए इन्हें हैक करने का कोई रास्ता नहीं है. इनमें फैक्टरी-प्रोग्राम्ड कंट्रोलर्स होते हैं जिन्हें फिर से प्रोग्राम नहीं किया जा सकता."

"इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को सही तरीके से डिज़ाइन किया जा सकता है और बनाया जा सकता है, जैसा कि भारत ने किया है. एलन, हमें खुशी होगी अगर हम आपको इस बारे में एक ट्यूटोरियल दे सकें."

राजीव चंद्रशेखर की विस्तार से दी गई इस जानकारी का उत्तर मस्क ने सिर्फ चार शब्दों में दिया.

उन्होंने लिखा, "कोई भी चीज़ हैक की जा सकती है."

राजीव चंद्रशेखर ने मस्क के इस छोटे से उत्तर का भी जवाब दिया और कहा, "तकनीकी तौर पर देखा जाए तो आप सही कह रहे हैं."

उन्होंने उदाहरण दिया, "कुछ भी संभव है. जैसे क्वांटम कंम्प्यूटिंग. अगर सही संसाधन हों, लैब और उम्दा स्तर की तकनीक हो तो मैं कोई भी एन्क्रिप्शन तोड़ सकता हूं, मैं लड़ाकू विमान के कॉकपिट का फ्लाइट कंट्रोलर समेत कोई भी डिजिटल हार्डवेयर हैक कर सकता हूं, वगैराह-वगैराह."

"लेकिन वो चर्चा इस चर्चा से अलग है जो ईवीएम पर केंद्रित है, जो पेपर वोटिंग के मुक़ाबले सुरक्षित और भरोसेमंद हैं. और फिर हम इस पर एकमत हो सकते हैं कि हमारी राय अलग-अलग हैं."

विवाद में विपक्षी नेता भी कूदे

इस विवाद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भी एंट्री हो गई. रविवार को उन्होंने ईवीएम को वो "ब्लैक बॉक्स" बताया है जिसकी जांच की किसी को इजाज़त नहीं है.

राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया है, "भारत में ईवीएम मशीनें ब्लैक बॉक्स हैं और किसी को इनकी जांच की इजाज़त नहीं है. लेकिन भारतीय चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं."

राहुल गांधी ने एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट को टैग करते हुए लिखा, "जब संस्थाओं में जवाबदेही का अभाव होता है तो लोकतंत्र दिखावा बन जाता है और धोखाधड़ी की ओर झुक जाता है."

वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि तकनीक समस्याओं को दूर करने के लिए होती है, अगर वही मुश्किलों की वजह बन जाए, तो उसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए.

अखिलेश ने आगामी सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराने की अपनी मांग एक बार फिर दोहराई.

जिस वक्त एक तरफ सोशल मीडिया पर ये विवाद जारी है उस वक्त कांग्रेस पार्टी ने एक मीडिया रिपोर्ट को शेयर करते हुए चुनाव आयोग पर सवाल उठाए. राहुल गांधी ने भी यही मीडिया रिपोर्ट शेयर की थी.

पार्टी ने पूछा कहा कि "ईवीएम से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है. मुंबई में एनडीए के कैंडिडेट रवींद्र वायकर के रिश्तेदार का मोबाइल फ़ोन ईवीएम से जुड़ा था. एनडीए के इस कैंडिडेट की जीत सिर्फ़ 48 वोट से हुई है."

कांग्रेस ने सवाल किया, "आख़िर एनडीए के कैंडिडेट के रिश्तेदार का मोबाइल ईवीएम से क्यों जुड़ा था? जहां वोटों की गिनती हो रही थी, वहां मोबाइल फ़ोन कैसे पहुंचा? चुनाव आयोग को स्पष्टीकरण देना चाहिए."

शिव सेना उद्धव ठाकरे गुट की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस विवाद में कूदते हुए चुनाव आयोग पर आंख मूंदने का आरोप लगाया.

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर जिस मीडिया रिपोर्ट को शेयर किया है, प्रियंका ने उसी रिपोर्ट को शेयर करते हुए चुनाव आयोग को टैग किया और लिखा, "उंचे स्तर की धोखाधड़ी चल रही है और चुनाव आयोग सोया हुआ है. ‘धोखे' से जीते उम्मीदवार के रिश्तेदार मतदान केंद्र के भीतर मोबाइल फ़ोन लिए खड़े थे, ये मोबाइल फ़ोन ईवीएम को अनलॉक कर सकता था."

"अगर चुनाव आयोग इसमें हस्तक्षेप नहीं करता तो चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में हुई धांधली के बाद ये चुनाव नतीजों में हुई सबसे बड़ी धांधली होगी और हमें ये मामला कोर्ट के दरवाज़े तक पहुंचता दिखेगा. दोषियों को सज़ा दी जानी चाहिए."

उद्धव ठाकरे गुट के ही आदित्य ठाकरे ने भी इस पर तंज़ कसा है.

उन्होंने लिखा, "कौन शर्त लगाने को तैयार है कि एलन मस्क के एक्स अकाउंट को सरकार या चुनाव आयोग की तरफ से नोटिस भेजा जाएगा?"

चुनाव आयोग का जवाब

मुंबई में मतगणना केंद्र के ईवीएम के साथ उम्मीदवार के रिश्तेदार का फ़ोन जुड़े होने को लेकर मीडिया में आई ख़बरों को चुनाव अधिकारी के खारिज किया है.

मुंबई नॉर्थ वेस्ट लोकसभा क्षेत्र की रिटर्निंग अफ़सर वंदना सूर्यवंशी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "ईवीएम एक स्टैंडअलोन डिवाइस है, इसमें तार या बेतार कनेक्शन की कोई सुविधा नहीं होता है. जो ख़बर शेयर की जा रही है वो ग़लत है, आधारहीन है."

"सच ये है कि इसी अख़बार के एक रिपोर्टर को मैंने कल बताया था कि मोबाइल फ़ोन से कुछ नहीं होता है. मतगणना सेक्शन में रिज़ल्ट बटन दबाने के बाद ही नतीजा डिस्प्ले होता है. मतदान के बाद जिस दिन ईवीएम सील होता है उस दिन पोलिंग एजेंट साथ होते हैं और जिस दिन मतगणना होती है उस दिन काउंटिंग एजेंट होते हैं."

उन्होंने कहा कि इस मामले में अख़बार को नोटिस जारी किया गया है.

उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग के सभी नियमों के तहत ही मतगणना का काम संपन्न हुआ है. ग़लत ख़बर के लिए हमने उस अख़बार को सेक्शन 499 और 505 के तहत नोटिस जारी किया है."

भारत में ईवीएम

ईवीएम साधारण बैटरी पर चलने वाली एक मशीन होता है जो मतदान के दौरान डाले गए वोटों को दर्ज करती है और वोटों की गिनती भी करती है.

भारत में ये मशीन तीन हिस्सों में होती है. पहला, कंट्रोल यूनिट (सीयू); दूसरा, बैलेटिंग यूनिट (बीयू). दोनों मशीनें पांच मीटर लंबी एक तार से जुड़ी होती हैं. तीसरा हिस्सा होता है- वीवीपैट.

वीवीपैट स्लिप पर पार्टी का चुनाव चिह्न और उम्मीदवार का नाम छापने के लिए सिंबल लोडिंग यूनिट का इस्तेमाल होता है.

ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को आयात नहीं किया जाता. इन्हें भारत में ही डिज़ाइन किया गया है और यहीं इनका निर्माण होता है.

भारत के चुनाव आयोग के मुताबिक़, ईवीएम बहुत ही उपयोगी है और यह पेपर बैलट यानी मतपत्रों की तुलना में सटीक भी होती है, क्योंकि इसमें ग़लत या अस्पष्ट वोट डालने की संभावना ख़त्म हो जाती है.

हालांकि इसे लेकर बीतों सालों में सवाल उठाए जाते रहे हैं. इस तरह के मामले अदातों में भी पहुंचे हैं.

इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट से जुड़े कुछ याचिकाओं की सुनवाई की और बैलेट पेपर से चुनाव करवाने और वीवीपैट के साथ 100 फ़ीसदी मिलान करने की याचिका को ख़ारिज किया था.

फ़ैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "लोकतंत्र सामंजस्य बनाए रखने के लिए होता है और आंख मूंदकर चुनाव की प्रक्रिया पर भरोसा ना करने से बिना कारण शक पैदा हो सकता है."

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