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पहलवानों के मुद्दे पर पीएम मोदी की 'चुप्पी' को लेकर साक्षी मलिक ने क्या कहा
दिव्या आर्य
बीबीसी संवदादाता, रोहतक से लौटकर
“दुख तो देता ही है, जिन्होंने मेडल आने पर इतना मान सम्मान दिया था, घर बुलाया था और वो इस बारे में बात ही नहीं कर रहे हैं.”
रोहतक में पहलवान साक्षी मलिक के अखाड़े के अहाते में जब मैं अपने सवालों के साथ पहुँची, तो वो बिना लाग लपेट अपनी बात कहने को तैयार दिखीं.
मैंने पूछा कि पाँच महीने से चल रहे उनके आंदोलन पर प्रधानमंत्री मोदी से क्या कहना चाहती हैं, तो बोलीं, “उन्होंने हमसे अभी इस टॉपिक पर कोई बात ही नहीं की जो कि एक बहुत सेन्सिटिव मुद्दा है, और हम सब तो उनसे पर्सनली मिले भी हैं, उनके साथ लंच किया है, बेटी बुलाते हैं वो हमें, तो यही कहना चाहूँगी कि हमारे मुद्दे को वो अपने संज्ञान में लें.”
“उनको ज़रूर इनवॉल्व होकर बोलना चाहिए कि ये जो पुलिस कार्रवाई है वो बिल्कुल निष्पक्ष हो, जाँच में कोई भी छेड़छाड़ ना की जाए, हम बस इतना चाहते हैं कि जो भी जांच हो वो निष्पक्ष हो.”
सरकार के अन्य क़दमों के बीच प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी क्या चोट देती है या इतनी ज़रूरी नहीं, ये पूछने पर साक्षी के चेहरे का तनाव हल्का सा पिघला और वो बोलीं, “चोट तो देता ही है, 40 दिन के लगभग हम रोड पर थे तब तक भी कुछ नहीं था. जब प्रोटेस्ट किया तब भी कुछ नहीं था जबकि उनको सब पता है कि हम किस चीज़ के बारे में प्रोटेस्ट कर रहे हैं.”
पहलवान विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया समेत साक्षी मलिक ने क़रीब पाँच महीने पहले कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहे बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोपों पर आवाज़ उठाई थी.
बृजभूषण शरण सिंह ने इन सभी आरोपों से कई बार इनकार किया है और कहा है कि वे कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार करेंगे.
सरकार ने अब तक क्या किया?
जनवरी में इनके दिल्ली में प्रदर्शन पर बैठने के बाद खेल मंत्रालय ने आरोपों की जाँच के लिए एक ‘ओवरसाइट कमेटी’ का गठन किया, जिसे संघ के रोज़मर्रा के काम करने का ज़िम्मा भी दिया गया.
‘ओवरसाइट कमेटी’ की जाँच ख़त्म होने के बाद सिफ़ारिशें सार्वजनिक नहीं की गईं लेकिन कुश्ती महासंघ के कार्यभार को दो सदस्यीय ‘ऐडहॉक कमेटी’ को दे दिया गया.
साक्षी समेत यौन उत्पीड़न की शिकायत करनेवाली सभी महिला पहलवानों ने ‘ओवरसाइट कमेटी’ के काम करने के तौर तरीके पर संदेह जताया.
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा और फिर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की.
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. हालाँकि गृह मंत्री और खेल मंत्री ने पहलवानों से मुलाक़ात की.
खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने पहलवानों के साथ बैठक के बाद मीडिया को बताया, “बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ जो आरोप लगाए गए हैं उनकी जाँच पूरी कर 15 जून तक चार्जशीट दायर होने, कुश्ती महासंघ का चुनाव 30 जून तक किए जाने, उनमें सिंह के परिवार के सदस्यों के ना शामिल होने और कुश्ती महासंघ में यौन उत्पीड़न रोकथाम के लिए इंटर्नल कमेटी बनाने पर बात हुई है.”
इस बैठक के बाद पहलवानों ने 15 जून तक अपने प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है.
साक्षी मलिक ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इसका मतलब ये नहीं है कि आंदोलन ख़त्म हो गया है, हालाँकि गिरफ्तारी की मांग पर उन्हें सरकार से कोई आश्वासन नहीं मिला है, “हमें खेल मंत्री ने कहा है कि चार्जशीट 15 तारीख़ तक हो जाएगी और वो जितनी मज़बूत होगी, बाक़ी कार्रवाई उसी के मुताबिक़ होगी.”
ये भी पढ़ें- बृज भूषण शरण सिंह कौन हैं जिन पर कुश्ती के कई दिग्गज खिलाड़ियों ने शोषण का आरोप लगाया है
अब तक क्या-क्या हुआ
- महिला पहलवानों ने पहली बार आवाज़ इसी साल 18 जनवरी को उठाई थी
- देश के प्रमुख पहलवान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर आवाज़ उठाई
- इन्होंने सलिंग फ़ेडरेशन के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर कई गंभीर लगाए
- विनेश फोगाट ने रोते हुए कहा था कि बृजभूषण सिंह और कोच, नेशनल कैंप में महिला रेसलर्स का यौन उत्पीड़न करते हैं
- बृजभूषण सिंह ने कहा था कि 'किसी भी एथलीट का यौन शोषण नहीं हुआ है और अगर यह सच साबित होता है तो वे फांसी पर लटकने को तैयार हैं
- केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने तब पहलवानों के साथ मुलाक़ात की और 23 जनवरी को आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय निरीक्षण समिति बनाई
- 21 अप्रैल- महिला पहलवानों ने दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ शिकायत की, लेकिन पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज नहीं की.
- 23 अप्रैल- दूसरी बार जंतर-मंतर पर धरना शुरू
- 24 अप्रैल- पालम 360 खाप के प्रधान चौधरी सुरेंद्र सोलंकी समर्थन करने जंतर मंतर पहुंचे और दूसरी खापों से समर्थन की अपील की.
- 25 अप्रैल- विनेश फोगाट समेत 6 अन्य महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ एफ़आईआर की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई.
- दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ दो एफ़आईआर दर्ज की, जिसमें से एक एफ़आईआर पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुई
- बाद में नाबालिग पहवान के पिता ने बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न पर दिए बयान बदल लिए थे
- तीनों पहलवानों की मुलाक़ात गृह मंत्री अमित शाह से हुई
- इसके बाद खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने तीनों पहलवानों से मुलाक़ात की
नाबालिग़ के बयान और गिरफ़्तारी की मांग
चार्जशीट के लिए 15 जून की तय तारीख़ से कुछ दिन पहले इस रविवार को सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने लोकसभा क्षेत्र कैसरगंज के गोंडा ज़िले में रैली निकाली.
बीजेपी सरकार के केंद्र में नौ साल पूरे होने पर किए गए इस आयोजन में उन्होंने यौन उत्पीड़न के आरोपों पर बात नहीं की पर अपने संबोधन में शायरी के ज़रिए अपना पक्ष रखा, “यह मिला मुझको मोहब्बत का सिला, बेवफ़ा कहके मेरा नाम लिया जाता है, इसको रुसवाई कहें कि शोहरत अपनी, दबे होठों से मेरा नाम लिया जाता है.”
इस बीच पुलिस में पॉक्सो क़ानून की ‘ऐग्रवेटिड सेक्शुअल असॉल्ट’ की धारा के तहत बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करवाने वाली पीड़िता पहलवान के नया बयान देने की ख़बरें आईं.
साक्षी मलिक ने कहा कि वो नाबालिग़ के संपर्क में नहीं हैं और उनके नया बयान देने के फ़ैसले को दबाव में उठाया क़दम मानती हैं.
साक्षी ने कहा, “अगर पॉक्सो का मामला हट भी जाता है तो इतनी शिकायतों को देखते हुए नैतिक आधार पर तहकीकात के लिए बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी की जा सकती है लेकिन मुझे लगता है कि क़ानून सबके लिए एक नहीं है.”
वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में यौन उत्पीड़न बना आवाज़ उठाने की वजह
पुलिस में दर्ज दो एफ़आईआर में दिए गए ब्यौरों में कुश्ती महासंघ के प्रशासन में 12 साल से अध्यक्ष होने की वजह से बृजभूषण शरण सिंह के प्रभुत्व और ताक़त का बार-बार उल्लेख है.
पहलवानों के मुताबिक़, यौन संबंध बनाने के प्रस्ताव को ठुकराने भर से उन्हें और प्रशासन के क़ायदों का ग़लत इस्तेमाल कर कई तरीक़े से परेशान किया गया.
पहलवानों के मुताबिक़, उत्पीड़न के फौरन बाद शिकायत ना कर पाने की वजह यही थी.
कई शिकायतकर्ताओं के मुताबिक़, उनके साथ ये घटनाएँ उनके करियर की शुरुआत में घटीं जिस वजह से वो अपनी बात कहने का साहस नहीं जुटा पाईं.
साक्षी मलिक के मुताबिक़ जनवरी में आख़िरकार आवाज़ उठाने की वजह पिछले साल वर्ल्ड जूनियर रेसलिंग चैंपियनशिप में सामने आई जानकारी बनी.
साक्षी ने बताया, “हमें साल 2022 में एक-दो महिला पहलवानों ने वर्ल्ड जूनियर रेसलिंग चैंपियनशिप के दौरान भी यौन उत्पीड़न की बात बताई, तब हम सब साथ बैठे और हमें लगा कुछ करना चाहिए.”
साक्षी के मुताबिक़ तब विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया ने गृह मंत्री से भी मुलाकात की, पर आगे कोई कार्रवाई ना होने की वजह से, जंतर-मंतर पर धरना देने का फ़ैसला किया.
उन्होंने कहा, “हमने सीधा धरना देने का फ़ैसला नहीं किया, पहले बातचीत के ज़रिए हल तक पहुँचने की कोशिश की पर आख़िरकार एफ़आईआर तक जाना पड़ा.”
इसके बाद से ये तीनों लगातार संपर्क में हैं और आगे की योजना साथ ही बनाने का इरादा है.
सरकार से हुई बातचीत में एक प्रमुख बिन्दु पहलवानों के खिलाफ़ 28 मई को प्रदर्शन से हिरासत में लिए जाने पर दर्ज किए गए पुलिस मुक़दमे वापस लेना शामिल है.
साक्षी के मुताबिक़ अब तक उनके ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर हटाए जाने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.
आगे की रणनीति के लिए अब इन्हें 15 जून का इंतज़ार है.
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