बांग्लादेश में भड़की हिंसा की आग, बीबीसी संवाददाताओं की आँखों देखी

आरक्षण-विरोधी आंदोलन की वजह से बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हिंसा की कई घटनाएं हुईं.

ढाका के बाड्डा, नतून बाजार, रामपुरा, गुलशन, मोहम्मदपुर, उत्तरा, मीरपुर, जात्रा बाड़ी और शनि के अखाड़े जैसे इलाकों में आंदोलनकारियों ने 19 जुलाई की सुबह से ही बेहद आक्रामक रवैया अपना लिया था.

बाड्डा-नतून बाजार-रामपुरा सड़क और जात्राबाड़ी इलाके में हिंसा का असर सबसे ज़्यादा है. इन इलाकों में ही आंदोलनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सबसे ज़्यादा टकराव हुए हैं.

शुक्रवार सुबह साढ़े दस से करीब साढ़े बारह बजे यानी दो घंटे तक पुलिस के साथ भीषण टकराव हुआ. उस दौरान रह-रह कर हथगोलों, आंसू गैस, कॉकटेल और गोलियों की आवाजें सुनाई देती रहीं.

इस परिस्थिति के बीच कानून मंत्री अनीसुल हक ने बीबीसी बांग्ला से कहा, "यह काफ़ी दुखद है. मैं अब भी मानता हूं कि यह हिंसा आरक्षण-विरोधी आंदोलनकारियों की ओर से नहीं की गई थी.''

ढाका में कैसे हैं हालात

हालात पर काबू पाने के लिए नतून बाज़ार इलाके में पुलिस फायरिंग करती दिखी. ये मंज़र बीबीसी संवाददाताओं ने भी देखा.

हिंसक झड़प की भयावहता इतनी ज़्यादा थी कि एक मौके पर तो पुलिस को भी पीछे हटना पड़ा. मौके पर मौजूद पुलिस वालों को परिस्थिति पर काबू पाने के लिए उच्चाधिकारियों से मौके पर और बल भेजने का अनुरोध करते भी देखा गया.

इस इलाके में हुई हिंसा में मरने या घायल होने वालों की ख़बर की पुष्टि नहीं की जा सकी है. लेकिन दोपहर करीब साढ़े बारह बजे गोली से घायल एक युवक को गुलशन स्थित सिकदार मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लाया गया था. उस समय बीबीसी संवाददाता वहीं मौजूद थे.

घायल युवक को जब वहां लाया गया तब अस्पताल का मुख्य द्वार बंद था और उस युवक को भीतर नहीं घुसने दिया जा रहा था.

इस पर घायल के साथ आने वाले करीब 10-12 लोगों के अलावा आसपास के लोगों ने भी इसका विरोध किया. विवाद बढ़ने के बाद आंदोलनकारी अस्पताल के गेट पर धक्का मारने लगे. उसके बाद प्रबंधन ने घायल को इलाज़ के लिए भीतर लाने की अनुमति दी.

बाड्डा-नतून बाज़ार सड़क के पास ही राजनयिक इलाका है. वहां अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, फ्रांस, तुर्की और कनाडा समेत विभिन्न देशों के दूतावास हैं. हिंसा के दौरान राजनयिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस ने पूरे इलाके की सख्त घेराबंदी की.

बनश्री इलाके के एक व्यक्ति ने बताया कि वहां आवासीय इलाकों में सुबह से कई जुलूस निकाले गए. उनमें शामिल लोग आरक्षण रद्द करने की मांग में नारे लगा रहे थे.

ढाका के जात्राबाड़ी इलाके में भी बड़े पैमाने पर हिंसा देखने को मिली. वहां बीते कई दिनों की तरह ही 19 जुलाई को भी आंदोलनकारियों और पुलिस वालों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ.

जात्राबाड़ी इलाके के एक पत्रकार ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि पुलिस ने परिस्थिति पर काबू पाने के लिए साउंड ग्रेनेड, रबर बुलेट और आंसू गैस के गोले छोड़े. उनके मुताबिक, हिंसा में पुलिस और आंदोलनकारी दोनों पक्षों के लोग घायल हुए हैं.

पत्रकारों का कहना है कि जात्रा बाड़ी इलाके में पुलिस की गोली से कई लोग घायल हुए हैं. लेकिन हताहतों की तादाद की पुष्टि नहीं हो सकी है.

ढाका का मोहम्मदपुर बस स्टैंड और टाउन हॉल इलाका गोलियों, आंसू गैस के गोले, साउंड ग्रेनेड, कॉकटेल विस्फोटों की आवाज से दहल उठा था. आंदोलनकारियों ने सड़क पर कई जगह आगजनी भी की.

मोहम्मदपुर बस स्टैंड इलाके के एक व्यक्ति ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि आंदोलनकारियों में मदरसों के छात्र भी शामिल थे. बाद में कुछ परिवहन मजदूर भी प्रदर्शनकारियों की भीड़ में शामिल हो गए.

गुलशन एवेन्यू में सुबह करीब साढ़े दस बजे आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच जबरदस्त टकराव हुआ. आंदोलनकारियों ने गुलशन एक नंबर मोड़ पर कई इमारतों में लगे शीशे भी तोड़ दिए. उस समय पुलिस ने साउंड ग्रेनड औऱ आंसू गैस के गोलों की मदद से भीड़ को तितर-बितर कर दिया. लेकिन उसके बाद वह लोग गुलशन शूटिंग क्लब औऱ गुलशन-बाड्डा लिंक रोड पर जमा हो गए.

राजधानी ढाका के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की खबरें मिली हैं.

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सरकार प्रदर्शकारियों से बातचीत के लिए तैयार

कानून मंत्री अनीसुल हक ने बीबीसी बांग्ला से कहा कि सरकार आरक्षण विरोधियों के साथ बातचीत का इंतज़ार कर रही है. उनका कहना था, "मुझे यकीन है कि वे इस मुद्दे पर भी चर्चा कर रहे हैं कि वे बातचीत के लिए आगे नहीं आएंगे. वह लोग जब भी बातचीत पर सहमत हों, हम उसी समय इसके लिए तैयार हैं."

क्या सरकार की ओर से आंदोलनकारियों के साथ सीधे संपर्क किया गया है?

इस सवाल पर कानून मंत्री ने कहा, "सीधे संपर्क करने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता. हमने मीडिया के जरिए उन तक संदेश पहुंचाया है. हमने तो सार्वजनिक रूप से यह बात कह दी है."

इस बीच, आंदोलनकारियों ने सरकार की बातचीत की अपील खारिज कर दी है. इसके साथ ही टकराव भी जारी है.

हिंसा में 35 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है.

ऐसी परिस्थिति क्यों पैदा हुई?

कानून मंत्री का दावा था, "पुलिस ने 18 जुलाई को जरा भी बल प्रयोग नहीं किया था. विध्वंसक गतिविधियां होने की स्थिति में उसे रोकना सुरक्षा बलों का कर्तव्य है."

अगर पुलिस ने बल प्रयोग नहीं किया था तो इतने लोगों की मौत कैसे हो गई?

इस सवाल पर उनका कहना था, "मैं मृतकों के इस आंकड़े से सहमत नहीं हो पा रहा हूं. पुलिस ने गोली नहीं चलाई थी. उसकी गोली से किसी की भी मौत नहीं हुई है."

आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार एक ओर तो बातचीत की अपील कर रही हैं और दूसरी ओर पुलिस छात्रों और युवाओं पर हमले कर रही है. उन लोगों का कहना है कि इतने लोगों की मौत के बाद वो बातचीत के लिए आगे नहीं आ सकते.

आरक्षण विरोधियों के मुकाबले के लिए सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता भी विभिन्न इलाकों में सड़कों पर उतरे हैं. वह लोग सड़कों पर सक्रिय क्यों हैं?

कानून मंत्री कहते हैं, "एक समूह आरक्षण का विरोध कर रहा है. दूसरा समूह आरक्षण का समर्थन तो कर ही सकता है. क्या ऐसा नहीं हो सकता. यह लोकतांत्रिक देश है. वह लोग आरक्षण के समर्थन में सक्रिय हुए हैं."

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के भाषण में किए गए वादे के मुताबिक न्यायिक जांच समिति का गठन किया गया है. इसके अलावा अदालत से इस मामले की सुनवाई तय तारीख से पहले करने का अनुरोध किया गया है.

इंटरनेट बंद होने से दिक्कत

सरकार ने हिंसक प्रदर्शन पर काबू पाने के लिए कई कदम उठाए हैं. इसके तहत बुधवार रात साढ़े आठ बजे से पूरे देश में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है.

इससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इंटरनेट आधारित विभिन्न सेवाओं पर इसका बेहद प्रतिकूल असर पड़ रहा है. ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन लगभग बंद हो रहा है. खासकर मोबाइल फोन के जरिए होने वाले लेन-देन पर इसका बेहद प्रतिकूल असर पड़ा है.

एक अधिकारी ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि इंटरनेट बंद होने के कारण उनको लेन-देन में भारी दिक्कत हो रही है.

जिन लोगों के परिजन देश से बाहर रहते हैं, उनसे संपर्क कट गया है. ज्यादातर प्रवासी बांग्लादेशी बांग्लादेश में रहने वाले अपने परिजनों के साथ संपर्क कायम करने के लिए रोजाना मैसेंजर, व्हाट्सएप, ईमेल और इंटरनेट आधारित दूसरे एप का इस्तेमाल करते हैं.

इसके अलावा मीडिया संस्थानों को भी कामकाज में भारी दिक्कत हो रही है.

ढाका में सभाओं और रैलियों पर पाबंदी

ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस ने शुक्रवार सुबह से विभिन्न इलाकों में होने वाली हिंसा को ध्यान में रखते हुए शहर में हर तरह की सभा और रैली पर पाबंदी लगा दी है.

लेकिन उसके बावजूद सत्तारूढ़ अवामी लीग ने ढाका के बंगबंधु एवेन्यू में आतंकवाद विरोधी रैली आयोजित करने का एलान किया है. पार्टी के महासचिव और सड़क परिवहन मंत्री ओबैदुल क़ादर ने पत्रकारों को इसकी जानकारी दी है.

देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बीएनपी ने भी कहा था कि वह शुक्रवार को ढाका में रैली आयोजित करेगी. लेकिन पुलिस की पाबंदी के बाद पार्टी ने फिलहाल इस बारे में कोई फैसला नहीं किया.

पुलिस ने 19 जुलाई की सुबह बीएपी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रुहुल कबीर रिज़वी को गिरफ्तार कर लिया.

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