बिहार में बढ़ी सियासी सरगर्मियां, निगाहें नीतीश कुमार पर

बिहार की सियासत में एक बार फिर से हलचल तेज़ दिख रही है. कई मीडिया रिपोर्टों में ये कहा गया है कि नीतीश कुमार महागठबंधन का साथ छोड़कर अपने पुराने साथी एनडीए के साथ जा सकते हैं.

जब से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की घोषणा की गई और इसपर नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव ने अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया दी, तभी से बिहार की राजनीति में अटकलों का दौर शुरू हो गया है.

इस पूरे मामले को और हवा तब मिली जब आरजेडी सुप्रीम लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने तीन ट्वीट किए. हालांकि, रोहिणी आचार्य ने ये ट्वीट डिलीट कर दिए लेकिन इस पर शुरू हुआ हंगामा अभी तक जारी है.

इसीबीच ख़बर आ रही है कि सम्राट चौधरी और बिहार बीजेपी प्रभारी विनोद तावड़े की अमित शाह के साथ आज रात अहम बैठक हो सकती है.

बताया जा रहा है कि इस बैठक में सुशील मोदी के अलावा बिहार के दो पूर्व उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी भी शामिल रहेंगे.

इस समय ये सब दिल्ली में मौजूद हैं.

जेडीयू के नेता और राज्य के वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी ने मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर कहा है कि बिहार सरकार में सबकुछ ठीक है.

आरजेडी के नेता शक्ति सिंह यादव ने भी यही दोहराते हुए कहा कि मौजूदा सरकार पूरे भरोसे पर काम कर रही है और आगे भी करती रहेगी.

बीजेपी नेता और सांसद गिरिराज सिंह ने ये कह दिया है कि नीतीश कुमार के लिए अब दरवाज़े बंद हैं लेकिन कई मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से ये कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार विधानसभा भंग कर सकते हैं.

इस बीच गुरुवार को नीतीश कुमार ने बिहार कैबिनेट की बैठक बुलाई लेकिन इसके बाद होने वाली प्रेस ब्रीफ़िंग को रद्द कर दिया गया.

फिर नीतीश कुमार के आवास पर जेडीयू के नेताओं के जुटने जैसे एक-एक कर कई घटनाक्रमों के मद्देनज़र ये अटकलें बढ़ीं कि क्या नीतीश कुमार सीएम पद से इस्तीफ़ा देने जा रहे हैं?

उधर आरजेडी के वरिष्ठ नेता और नीतीश कुमार के भी सहयोगी रह चुके शिवानंद तिवारी ने भरोसा जताया है कि बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन चुनाव लड़ेगा.

तिवारी ने बताया कि कल कर्पूरी ठाकुर के बहाने बिहार की राजनीति के तीनों खेमों ने अपनी अपनी ताक़त का प्रदर्शन किया.

उन्होंने कहा, "यह माना जाता है कि बिहार के तीन में दो ख़ेमें जिधर रहते हैं बहुमत उधर ही रहता है. कल के तीनों कार्यक्रम की ताक़त से स्पष्ट हो गया है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन लोकसभा के चुनाव भाजपा के अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को बिहार में ही पकड़ कर बांध देगा. इस प्रकार संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय विरोधी नरेंद्र मोदी का पुनः प्रधानमन्त्री बनने का सपने धूल धूसरित हो जायेगा. नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार के महागठबंधन की यह भूमिका इतिहास में दर्ज होगी."

रोहिणी आचार्य के किस ट्वीट पर बढ़ी मुश्किल?

आरजेडी और जेडीयू के बीच तनातनी की ख़बरें पिछले काफ़ी समय से चल रही हैं. हालांकि, दोनों पार्टियां इन अटकलों को खारिज भी करती आई हैं.

लेकिन कर्पूरी ठाकुर की जन्मशती यानी 24 जनवरी को नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम के दौरान परिवारवाद पर निशाना साधा.

इस दौरान नीतीश कुमार ने ये कहा कि "कर्पूरी ठाकुर ने कभी अपने परिवार को आगे नहीं बढ़ाया. आजकल लोग अपने परिवार को बढ़ाते हैं. कर्पूरी ठाकुर के नहीं रहने के बाद उनके बेटे रामनाथ ठाकुर को हमने बनाया. हमने भी कर्पूरीजी से सीखकर परिवार में किसी को नहीं बढ़ाया. हम हमेशा दूसरे को बढ़ाते हैं."

इससे पहले नीतीश कुमार ने कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने पर एक ट्वीट किया, जिसमें पीएम मोदी का आभार जताया.

हालांकि, उनका ये ट्वीट चर्चा में आ गया. वजह थी, उन्होंने पहले जो ट्वीट किया उसमें पीएम मोदी को आभार नहीं व्यक्त किया था लेकिन उस ट्वीट को डिलीट कर के नीतीश ने नया ट्वीट किया और फिर पीएम को शुक्रिया कहा.

नीतीश कुमार के परिवारवाद वाले बयान को लालू यादव पर निशाना बताया गया.

इसके बाद लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सिलसिलेवार ट्वीट किए.

उन्होंने कहा कि समाजवादी पुरोधा होने का करता वही दावा, हवाओं की तरह बदलती जिनकी विचारधारा. दूसरे पोस्ट में रोहिणी ने लिखा था, "खीज जताए क्या होगा, जब हुआ न कोई अपना योग्य, विधि का विधान कौन टाले, जब खुद की नीयत में ही हो खोट."

तीसरे पोस्ट में रोहिणी ने लिखा, "अक्सर कुछ लोग नहीं देख पाते हैं अपनी कमियां, लेकिन किसी दूसरे पे कीचड़ उछालने को करते रहते हैं बदतमीजियां."

हालांकि, रोहिणी आचार्य ने ये सभी पोस्ट बाद में डिलीट कर दिए.

बाद में नीतीश की पार्टी के नेता केसी त्यागी ने रोहिणी के पोस्ट के बारे में कहा कि बच्चों को बड़ों की बातों में नहीं बोलना चाहिए.

नीतीश कुमार का रुख़ क्या होगा?

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बिहार के ताज़ा सियासी घटनाक्रम पर कहा है कि नीतीश कुमार बार-बार अपने सहयोगी को डराते रहते हैं.

उन्होंने कहा, "मैं एक कार्यकर्ता के नाते आपको कह सकता हूँ कि नीतीश जी के लिए दरवाज़े बंद हैं. वह एक अविश्वनीय राजनेता हैं. मैं तो यही कहूँगा कि उनके लिए एकदम दरवाज़ा बंद है."

गिरिराज सिंह काफ़ी समय से ये कहते आ रहे हैं कि लालू यादव अपने बेटे और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं.

लेकिन इस बीच बिहार के बीजेपी अध्यक्ष सम्राट चौधरी का दिल्ली आना और उधर पटना में सीएम आवास पर ललन सिंह, उमेश कुशवाहा, विजय चौधरी और संजय झा जैसे बड़े नेताओं के जुटान ने ये संकेत दिया कि बिहार में सियासी गतिविधियां काफ़ी तेज़ हो गई हैं.

बीबीसी हिंदी ने इस बारे में कुछ वरिष्ठ पत्रकारों से भी सवाल किया था, कि क्या अब नीतीश कुमार का एनडीए के साथ जाना संभव है?

इस पर बिहार की राजनीति को करीब से देखने वाले सुरूर अहमद ने बीबीसी से कहा था, "नीतीश एनडीए में कहां जाएंगे अब? एनडीए का कोई स्कोप तो नहीं है, तो जाकर क्या करेंगे? बिहार में तो बीजेपी से आर-पार की लड़ाई है, ऐसे में बीजेपी के साथ वापस जाना तो पैर में हथौड़ा मारने जैसा होगा. वो कहीं के नहीं रह जाएंगे. हां, चुनाव बाद अगर कुछ हो जाए तो उसकी बात अलग है लेकिन चुनाव से पहले तो नीतीश का एनडीए में जाना संभव नहीं लग रहा है."

लेकिन अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की राजनीतिक संपादक निस्तुला हेब्बर का कहना था कि अगर इनको लगा कि कोई राजनीतिक मंशा पूरी होती है एनडीए में जाकर, तो वह कर भी सकते हैं. ऐसा भी माना जाता है की नीतीश कुमार कभी-कभी ऐसे संकेत इसलिए भी देते हैं ताकि उनके वर्तमान सहयोगी दल थोड़ा असुरक्षित महसूस करें.

बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से फिलहाल 79 आरजेडी, 78 बीजेपी, 45 जेडीयू, 19 कांग्रेस, 12 सीपीआई (एमएल) के पास हैं. इसके अलावा अन्य सीटों पर बाकी छोटी पार्टियां हैं.

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