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अनएकेडमी: पढ़े-लिखे नेता को वोट देने की बात पर गई नौकरी, सोशल मीडिया पर छिड़ी ये बहस
एडटेक कंपनी अनएकेडमी ने उस टीचर को बर्खास्त कर दिया है, जिसने अपने स्टूडेंट्स को चुनाव में उन उम्मीदवारों को वोट देने कहा था जो पढ़े-लिखे हों.
करण सांगवान नाम के इस टीचर को बर्खास्त करने की सूचना देते हुए अनएकेडमी के को-फाउंडर रोमन सैनी ने ट्वीट कर लिखा कि सांगवान ने कंपनी की आचार संहिता को तोड़ा है इसलिए इसे उन्हें हटाना पड़ा.
अपने वीडियो में पढ़े-लिखे नेताओं को वोट देने की अपील के बाद करण सांगवान ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर ट्रेंड करने लगे.
सांगवान के इस ट्वीट के वायरल होने के बाद ‘एक्स’ पर यूजर इस बात को लेकर भिड़ गए कि पढ़े-लिखे नेताओं को वोट देने की अपील करना कितना सही है.
सांगवान के इस वीडियो के बाद कुछ लोगों ने उनके पक्ष में ट्वीट किया.
यूट्यूबर और पत्रकार अजित अंजुम ने लिखा, ''करण सांगवान को बॉयकॉट गैंग के दबाव में अनएकेडमी से निकाल दिया गया?' पढ़े लिखे नेता को ही वोट देना 'ये कहने की सजा मिली लॉ के टीचर करण सांगवान को?''
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ''जो लोग दबाव में झुक जाते हैं और धमकाए जाते हैं, वे कभी भी वैसे नागरिक बनाने में मदद नहीं कर सकते जो दुनिया में सभी बाधाओं के सामने खड़े रहते हैं."
"ये देखना दुखद है कि ऐसे रीढ़विहीन और डरपोक लोग एजुकेशन प्लेटफॉर्म चला रहे हैं.''
सांगवान के इस वीडियो पर कुछ लोगों ने उनकी आलोचना भी की.
प्रोफेसर दिलीप मंडल ने लिखा, "करण सांगवान बता रहे हैं कि जिसके पास सबसे ज़्यादा डिग्री हो उसे इलेक्शन में चुन लो. फिर चुनाव ही क्यों करना?"
"ये लॉ के कैसे टीचर हैं, जिसे पता नहीं कि भारतीय संविधान में चुनने और चुने जाने के लिए शिक्षा, भूमि स्वामित्व और संपत्ति की कोई शर्त नहीं है? ये आज़ादी से पहले के चुनावों में होता था. संविधान ने इस गड़बड़ी को ठीक किया.’’
मनिका नाम के यूजर ने लिखा, ''इनके पढ़े लिखे होने का क्या फायदा? एक शिक्षक होने के नाते यह उनका कर्तव्य है कि वे अपने छात्रों के लिए अपडेट रहें. ये हमारे प्रधानमंत्री का अपमान है.''
विजय पटेल नाम के एक यूजर ने लिखा, "सब कुछ स्क्रिप्ट के मुताबिक़ चल रहा है. इस स्क्रिप्ट का अगला मूव ये होगा कि कोई राजनीतिक नेता करण सांगवान से अपने मीडिया और पीआर टीम के साथ दो-तीन दिन के अंदर मिलेगा.
अरविंद केजरीवाल भी विवाद में कूदे
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इस विवाद में कूद पड़े. उन्होंने लिखा, ''क्या पढ़े-लिखे लोगों को वोट देने की अपील करना अपराध है? यदि कोई अनपढ़ है, व्यक्तिगत तौर पर मैं उसका सम्मान करता हूं. लेकिन जनप्रतिनिधि अनपढ़ नहीं हो सकते."
उन्होंने कहा, "ये साइंस और टेक्नोलॉजी का ज़माना है. 21वीं सदी के आधुनिक भारत का निर्माण अनपढ़ जनप्रतिनिधि कभी नहीं कर सकते.''
क्या है पूरा मामला
पिछले दिनों अनएकेडमी प्लेटफॉर्म पर कानून पढ़ाने वाले लीगल पाठशाला के करण सांगवान का वीडियो सोशल मीडिया वायरल हुआ.
‘एक्स’ पर दिख रहे इस वायरल वीडियो में करण मोदी सरकार की ओर से हाल ही में पुराने आईपीसी, सीआरपीसी और भारतीय गवाही कानून में बदलाव करने के लिए लाए गए बिल पर बात कर रहे हैं.
इस वीडियो में वो कहते दिख रहे हैं कि क्रिमिनल लॉ के जो नोट्स उन्होंने बनाए थे वे बेकार हो गए हैं.
वो कह रहे हैं, ''मुझे पता नहीं कि मैं हंसू या रोऊं क्योंकि मेरे पास कई बेयर एक्ट, केसलोड्स और ऐसे नोट्स हैं, जो मैंने तैयार किए थे. ये किसी के लिए बड़ा कठिन काम है. आपको नौकरी भी करनी है.’’
इस वीडियो में वो आगे कहते दिख रहे हैं, ''लेकिन एक बाद ध्यान में रखिए. अगली बार उसे वोट दें जो अच्छा पढ़ा-लिखा हो ताकि आपको दोबारा इस तरह की परेशानी से न गुजरना पड़े."
वो कह रहे हैं, ''ऐसे शख्स को चुनें जो पढ़ा-लिखा हो, जो चीजों को समझता हो. उस शख्स को न चुनें जो सिर्फ नाम बदलना जानता है. अपना फैसला ठीक तरह से लें.''
कितना बड़ा है अनएकेडमी का कारोबार?
अनएकेडमी की शुरुआत 2010 में हुई थी. इसे गौरव मुंजाल ने एक यूट्यूब चैनल के तौर पर शुरू किया था. इसके बाद दिसंबर 2015 में रोमन सैनी और हिमेश सिंह इसमें शामिल हुए.
तीनों ने मिलकर अनएकेडमी कंपनी बनाई. ये एक ऐसा प्लेटफार्म है जिस पर ऑनलाइन पढ़ाने वाले शिक्षक जुड़ सकते हैं. ये एक ऐप के जरिये काम करता है.
फिलहाल इसका रेवेन्यू बढ़ कर 130 करोड़ रुपये हो गया है.
अगस्त 2021 में इसे टेमासेक, जनरल अटलांटिक, टाइगर ग्लोबल और सॉफ्टबैंक विजन फंड ने 44 करोड़ डॉलर की फंडिंग की थी.
हालांकि अनएकेडमी के लिए 2023 अच्छा नहीं रहा है. फंडिंग की कमी की वजह से इस साल की शुरुआत से अब तक ये 3,500 कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है.
कॉपी- दीपक मंडल
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