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के. आर्मस्ट्रांग: बॉक्सिंग के शौकीन कैसे तमिलनाडु में बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने?
- Author, मुरलीधरन काशी विश्वनाथन
- पदनाम, बीबीसी तमिल संवाददाता
बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की प्रमुख मायावती तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के. आर्मस्ट्रांग को अंतिम विदाई देने रविवार को चेन्नई पहुंचीं.
उन्होंने के. आर्मस्ट्रांग की हत्या के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की और प्रदेश सरकार से अपील की कि हत्यारों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए.
पांच जुलाई को के. आर्मस्ट्रांग की पेरम्बूर के सेम्बियान में उनके घर के नज़दीक अनजान हमलावरों ने हत्या कर दी थी.
के. आर्मस्ट्रांग अनुसूचित जाति की राजनीति में ग्राउंड लेवल से उठे और बीएसपी के तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपनी पहचान बनाई.
चेन्नई के पेरम्बूर इलाके़ में कृष्णन का परिवार रहता है. आर्मस्ट्रांग उनके बेटे थे.
आर्मस्ट्रांग की रुचि बचपन से ही मुक्केबाज़ी और व्यायाम में थी. स्कूल के दिनों से ही राजनीति में भी उनकी रुचि होने लगी.
आर्मस्ट्रांग शुरू में पूर्व विधायक पी. रंगनाथन के क़रीबी थे. साल 2000 तक, वह पुवई मूर्ति की अध्यक्षता वाली प्राची भारतम पार्टी में शामिल हो गए थे. इस बीच उन्होंने तिरुपति में मौजूद श्री वेंगेश्वर लॉ कॉलेज से क़ानून की पढ़ाई भी पूरी की.
हाथी चिन्ह पर मिली जीत
2002 में पुवई मूर्ति की मौत के बाद आर्मस्ट्रांग ने प्राची भारतम पार्टी छोड़ दी और 'आंबेडकर दलित फाउंडेशन' नाम से एक अलग संगठन शुरू किया.
2006 में चेन्नई नगर निगम चुनाव में उन्होंने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में वार्ड 99 से हाथी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव जीता.
उस दौर में इदुम्बन नाम के एक नेता बीएसपी में सक्रिय थे. वो चेन्नई में एक शिपिंग कॉर्पोरेशन में काम करते थे.
हाथी के चुनाव चिन्ह के साथ बतौर स्वतंत्र उम्मीदवार आर्मस्ट्रांग की जीत की जानकारी मिलने के बाद इदुम्बन और कुछ अन्य लोगों ने आर्मस्ट्रांग से मुलाक़ात की. उन्होंने उनसे बीएसपी में शामिल होने की गुज़ारिश की.
सुरेश माने, जो उस समय बीएसपी के समन्वयक हुआ करते थे, उन्होंने आर्मस्ट्रांग को पार्टी में शामिल होने के लिए कहा.
बीएसपी में आए, प्रदेश अध्यक्ष बने
आर्मस्ट्रांग के बीएसपी में शामिल होने के बाद साल 2007 में उन्हें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया.
साल 2012 जब सेल्वापेरुंतगई ने पार्टी छोड़ी, सुरेश माने पार्टी के जनरल सेक्रेटरी और समन्वयक हुआ करते थे. उन्होंने आर्मस्ट्रांग को पार्टी का नया अध्यक्ष बनाया. सेल्वापेरुंतगई बीएसपी छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए.
नवंबर 2008 में चेन्नई के डॉ. आंबेडकर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में छात्रों के बीच हुए दंगों के सिलसिले में आर्मस्ट्रांग के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया.
छात्रों के दो गुटों के बीच हुई हिंसा के इस मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. उन पर हिंसा भड़काने की योजना बनाने का आरोप था.
उन्हें बाद में इस मामले में ज़मानत पर रिहा कर दिया गया. इस मामले में उनके साथ एक और व्यक्ति एस रजनीकांत पर पुलिस ने आरोप लगाया था. रजनीकांत पेशे से वकील थे.
इस मामले में अदालत ने 2016 में अपना फै़सला सुनाया और आर्मस्ट्रांग को बरी कर दिया.
आर्मस्ट्रांग को क़रीब से जानने वाले रजनीकांत कहते हैं, "आर्मस्ट्रांग ने पेरम्बूर और आसपास के इलाक़ों के वंचितों की मदद के लिए बहुत कुछ किया है. अगर डॉ. आंबेडकर लॉ कॉलेज के वंचित छात्रों के लिए कोई समस्या होती, तो वह उसे हल करते. उन्होंने कई ग़रीब छात्रों की फ़ीस भरने जैसे काम भी किए हैं."
वो कहते हैं, "आर्मस्ट्रांग ने आंबेडकर के लगभग सभी लेख पढ़े थे. अगर कोई उनसे मिलने जाता, तो वह आंबेडकर के लेखन पर उसके साथ बात करते और टिप्पणियां करते."
पार्षद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, आर्मस्ट्रांग ने सफ़ाई कर्मचारियों के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शनों का भी नेतृत्व किया है.
बीएसपी का प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद आर्मस्ट्रांग ने चेन्नई में एक विशाल सम्मेलन आयोजन किया और पार्टी प्रमुख मायावती को वहां लेकर आए.
फरवरी 2015 में बीएसपी के उत्तरी चेन्नई ज़िले के सचिव और आर्मस्ट्रांग के क़रीबी दोस्त थन्नारासु की तमरिपक्कम कूट्रोड के पास हत्या कर दी गई थी.
आर्मस्ट्रांग की हत्या के लिए थन्नारासु की हत्या के बाद की घटनाओं को ज़िम्मेदार माना जा रहा है. आर्मस्ट्रांग शादीशुदा हैं और उनका एक बच्चा है.
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