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ईरान पर इसराइल-अमेरिका का हमला, अब तक क्या-क्या पता है?
इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चल रही कार्रवाई को "बड़ा सैन्य अभियान" बताया है और ईरानी सरकार की सेना से हथियार डालने की अपील की है.
इससे पहले इसराइल के रक्षा मंत्री ने कहा था कि इसराइल ने ईरान के खिलाफ "प्री-एम्प्टिव'' हमला किया है. देश के कई हिस्सों में विस्फ़ोटों की आवाज़ सुनी गई.
यह घटनाक्रम ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई हफ्तों से चल रही धमकियों और बातचीत के बाद सामने आया है.
ईरान में क्या हुआ?
तेहरान के स्थानीय समय के मुताबिक़ सुबह करीब साढ़े नौ बजे के थोड़ी देर बाद ईरानी मीडिया ने राजधानी में धमाकों की खबर दी. बीबीसी ने जो तस्वीरें देखी हैं उनमें जम्हूरी स्क्वायर और हसन आबाद स्क्वायर के ऊपर धुआं उठता दिखाई दे रहा है.
देश के कई अन्य शहरों, इस्फहान, क़ोम, करज और करमानशाह में भी विस्फ़ोटो की आवाज़ सुनाई देने की ख़बर है. फिलहाल किसी के हताहत या घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है.
तस्नीम समाचार एजेंसी के मुताबिक़ हमलों के बाद से ईरान का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभियान को "बड़ा और जारी" बताया है
इससे पहले इसराइल के रक्षा मंत्री ने ईरान पर मिसाइल हमला करने की जानकारी दी थी.
इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने बयान जारी कर पूरे इसराइल में 'विशेष और स्थायी आपातकाल स्थिति' की घोषणा कर दी है.
ईरान पर ताज़ा हमलों के बाद इसराइल और ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र को नागरिक विमानों के लिए बंद कर दिया है.
इसराइली सेना का कहना है कि उसकी वायुसेना पश्चिमी ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर "व्यापक हमला" कर रही है.
अमेरिका और इसराइल ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान पर हुए ताज़ा हमलों में अमेरिका भी शामिल है.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा है कि अमेरिका ने ईरान में "बड़ा युद्ध अभियान" शुरू किया है.
ट्रंप ने कहा, "हमने बार-बार डील करने की कोशिश की. हमने कोशिश की. हम उनकी मिसाइलों को नष्ट कर देंगे और उनकी मिसाइल उद्योग को मिट्टी में मिला देंगे. इसे पूरी तरह से ख़त्म कर दिया जाएगा."
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिका ने ईरान पर हमला करने या न करने के बारे में अभी कोई "आख़िरी फ़ैसला" नहीं किया है. लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वह परमाणु मुद्दे पर बातचीत के दौरान ईरान की बातचीत की स्थिति से "खुश नहीं" थे.
उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य अमेरिकी लोगों की रक्षा करना है और ईरानी शासन से उत्पन्न आसन्न खतरों को खत्म करना है."
उन्होंने कहा कि अमेरिका का मक़सद, ''यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके."
ट्रंप ने ईरानी लोगों से घरों में सुरक्षित रहने की अपील की.
उन्होंने कहा, "जब हम अपना काम पूरा कर लेंगे, तो आप अपनी सरकार खुद संभाल लें. यह आपका अधिकार होगा. शायद पीढ़ियों में यह आपका एकमात्र मौका हो"
ट्रंप ने दावा किया, ''ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से आगे बढ़ाने और लंबी दूरी की मिसाइलें बनाने की कोशिश की, जो यूरोप में हमारे बहुत अच्छे दोस्तों और साथियों, विदेशों में तैनात हमारे सैनिकों के लिए ख़तरा बन सकती हैं और अमेरिकी होमलैंड तक पहुंच सकती हैं."
उनका कहना है कि अमेरिका एक "बड़ा" ऑपरेशन कर रहा है ताकि "इस बहुत बुरी कट्टरपंथी तानाशाही को अमेरिका के लिए ख़तरा बनने से से रोका जा सके."
ट्रंप ने कहा कि ईरान "हमें वह देने को तैयार नहीं है जो हमारे पास होना चाहिए", उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ईरान के पास "परमाणु हथियार नहीं हो सकते."
इस हफ़्ते की शुरुआत में जिनेवा में दोनों देशों के बीच परोक्ष बातचीत हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने कहा कि डील पर पहुँचने की दिशा में प्रगति हुई है.
अमेरिका तेहरान पर अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर एक नई डील के लिए दबाव बढ़ा रहा है.
ट्रंप ने बार-बार कहा है कि अमेरिका "ज़रूरत पड़ने पर तेज़ी और कठोरता के साथ" कार्रवाई करने के लिए "तैयार, इच्छुक और सक्षम" है.
यह पूछे जाने पर कि क्या तनाव से मिडिल ईस्ट में लंबी लड़ाई हो सकती है, ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सामने रिपोर्टरों से कहा कि "हमेशा एक रिस्क रहता है."
उन्होंने आगे कहा, "जब युद्ध होता है, तो किसी भी चीज़ का रिस्क होता है. अच्छा और बुरा दोनों."
वहीं इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ट्रंप को धन्यवाद देते हुए उन्होंने दोहराया कि ईरान "परमाणु हथियारों से लैस नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे वह पूरी मानवता को धमका सकता है."
उन्होंने कहा, "हमारी संयुक्त कार्रवाई बहादुर ईरानी जनता को अपना भविष्य खुद तय करने का अवसर देगी."
नेतन्याहू ने इसराइली नागरिकों से भी अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने को कहा.
नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा, ''कुछ समय पहले इसराइल और अमेरिका ने ईरान के आतंकी शासन से पैदा हुए अस्तित्व के ख़तरे को खत्म करने के लिए एक अभियान शुरू किया है.''
''मैं हमारे शानदार मित्र, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उनके ऐतिहासिक नेतृत्व के लिए धन्यवाद करता हूं. 47 वर्षों से आयतुल्लाह शासन "इसराइल मुर्दाबाद" और "अमेरिका मुर्दाबाद" के नारे लगाता रहा है.
उन्होंने कहा, ''इसने हमारा ख़ून बहाया है, कई अमेरीकियों की हत्या की है और अपने ही लोगों का जनसंहार किया है. यह हत्यारा और आतंकी शासन परमाणु हथियारों से लैस नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे वह पूरी मानवता को धमका सकता है.''
हमारी संयुक्त कार्रवाई साहसी ईरानी जनता को अपना भविष्य खुद तय करने का अवसर देगी.
''अब समय आ गया है कि ईरान के सभी वर्ग- फ़ारसी, कुर्द, अज़ेरी, बलूच और अहवाज़ी अत्याचार की जंजीरों को तोड़ें और एक स्वतंत्र और शांतिपूर्ण ईरान की स्थापना करें.''
''मैं इसराइल के नागरिकों से अपील करता हूं कि वे होम फ्रंट कमान के निर्देशों का पालन करें. आने वाले दिनों में, 'ऑपरेशन द रोर ऑफ द लायन' के दौरान, हम सभी को धैर्य और साहस दिखाना होगा.''
''हम सब मिलकर खड़े होंगे, मिलकर लड़ेंगे और मिलकर इसराइल की स्थायित्व और सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे.''
ईरान ने क्या प्रतिक्रिया दी, इसराइली सेना ने बताया
इसराइल की सेना का कहना है कि उसने ईरान की ओर से इसराइल की दिशा में दागी गई मिसाइलों की पहचान की है और वह "जहां ज़रूरी हो, वहां उन्हें रोकने और जवाबी कार्रवाई करने'' पर काम कर रही है.
इसराइल के शहर हाइफ़ा समेत अन्य जगहों पर धमाकों की आवाज़ सुनी गई है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ये मिसाइलों के गिरने से हुए या उन्हें हवा में रोके जाने से.
क्षेत्र के अन्य हिस्सों में, बहरीन की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया कि बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के सेवा केंद्र पर "मिसाइल हमला" किया गया है.
यह उस समय हुआ जब बहरीन के गृह मंत्रालय ने आपात सायरन बजने की जानकारी दी और लोगों से शांत रहने और नजदीकी सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की.
इसराइल में लोगों को भीड़-भाड़ से बचने और आवश्यक न हो तो स्कूल और काम पर न जाने की चेतावनी दी गई है. अधिकारियों के मुताबिक़ यह निर्देश सोमवार रात आठ बजे तक लागू रहेगा.
इसराइली मीडिया के मुताबिक़ इसराइल का हवाई क्षेत्र भी नागरिक उड़ानों के लिए बंद कर दिया गया है.
इसराइली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ़) ने एक बयान जारी कर कहा है कि "कुछ समय पहले आईडीएफ़ ने ईरान से इसराइल के इलाक़े की ओर दाग़ी गई मिसाइलों की पहचान की है."
इस बयान में कहा गया है कि ईरान ने इसराइल पर जवाबी हमले किए हैं.
इसमें कहा गया है, "कुछ देर पहले, ईरान से इसराइल की तरफ दाग़ी गई मिसाइलों की पहचान होने के बाद देश भर के कई इलाक़ों में सायरन बजाए गए हैं. लोगों से अनुरोध है कि वे होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करें."
आईडीएफ़ का कहना है, "इस समय इसराइली एयर फ़ोर्स ख़तरे को रोकने और जहाँ ज़रूरी हो वहाँ हमला करने के लिए काम कर रही है ताकि ख़तरे को ख़त्म किया जा सके."
इसराइल के मुख्य विपक्षी नेता यायर लैपिड ने ईरान पर हुए हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह सरकार और सेना के साथ खड़े हैं.
ईरान के समाचार माध्यमों पर साइबर हमले की ख़बर
ईरान पर इसराइल और अमेरिका के हवाई हमलों के बाद साइबर हमलों की भी ख़बरें आ रही हैं
बीबीसी मॉनिटरिंग के सोरौश नेगाहद्री के मुताबिक़, कट्टरपंथी अख़बार 'हमशहरी' के टेलीग्राम चैनल ने बताया है कि ईरान पर अमेरिकी और इसराइली मिलिट्री हमलों के बाद ईरान की कई सरकारी न्यूज़ एजेंसियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साइबर हमले हुए हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि मिलिट्री कार्रवाई में बढ़ोतरी के साथ-साथ साइबर ऑपरेशन की एक "बड़ी लहर" शुरू हो गई है, जिसमें कई बड़े घरेलू मीडिया प्लेटफॉर्म पर रुकावट या ऑपरेशनल दिक्कतें आ रही हैं.
चैनल की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक़, सरकारी न्यूज़ एजेंसी आईआरएनए (IRNA) और सेमी ऑफिशियल आईएसएनए न्यूज़ एजेंसी की वेबसाइटें उन आउटलेट्स में शामिल थीं जिन्हें कथित तौर पर हैक कर लिया गया या उन्हें एक्सेस में दिक्कतें आ रही थीं.
इसमें यह भी कहा गया कि ईरान में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन एप्लिकेशन्स पर रुकावटों की ख़बरें थीं, हालांकि हमलों के नेचर या सोर्स के बारे में और जानकारी तुरंत उपलब्ध नहीं हो पाईं.
बीबीसी मॉनिटरिंग वेरिफ़िकेशन के आधार पर, पब्लिकेशन के समय सरकारी ब्रॉडकास्टर की आईआरआईबी न्यूज़, आईआरजीसी से जुड़ी तस्नीम और फ़ार्स न्यूज़ एजेंसियों, सेमी-ऑफिशियल मेहर और आईएसएनए एजेंसियों की वेबसाइटें, कम से कम विदेश से एक्सेस नहीं हो पा रही थीं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.