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बारात में नोट उठाने पर सीआईएसएफ़ जवान ने बच्चे पर चलाई गोली, क्या कह रहा है मृतक का परिवार?
- Author, प्रेरणा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
''रात के नौ बजते ही ऐसा लगता है जैसे दरवाज़े पर साहिल खड़ा हो...कह रहा हो, 'अम्मी, गेट खोलो...मैं आ गया'. हम जानते हैं कि अब वो इस दुनिया में नहीं है, लेकिन अभी भी दिल को तसल्ली रहती है कि वो आएगा, उसके इंतज़ार में रात एक बजे तक नींद नहीं आती.'' ये शब्द दिल्ली के शाहदरा में रहने वाली 42 वर्षीय निशा अंसारी के हैं.
और यह पहली बार नहीं है जब निशा अपनी संतान को खोने की पीड़ा से गुज़र रही हैं.
गुज़रे पांच सालों में वह अपने दो बेटों को खो चुकी हैं.
साल 2020 में एक जानलेवा बीमारी ने जहां उनसे उनके अठारह साल के बेटे को छीन लिया था, वहीं बीते 29 नवंबर को सीआईएसएफ़ के हेड कॉन्स्टेबल मदन गोपाल तिवारी की पिस्तौल से निकली एक गोली ने उनके चौदह साल के बेटे साहिल की जान ले ली.
अभियुक्त के परिवार ने जानबूझकर गोली मारने के आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि 'गोली गलती से चल गई थी.'
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आरोप है कि मदन गोपाल तिवारी ने गोली केवल इसलिए चलाई क्योंकि साहिल उनके भाई की बारात में पैसे लूट रहे थे.
निशा अंसारी कहती हैं, ''बारात में पैसे किस लिए लुटाए जाते हैं, लूटने के लिए ही न. और वो पैसे तो थे भी नहीं असली. नकली पैसे के लिए मेरे बेटे पर गोली चला दी. ऐसे इंसान को जीने का हक़ नहीं है. सरकार इसलिए इन्हें बंदूक देती है क्या? गोली चलानी ही है तो बॉर्डर पर चलाते, आतंकवादी पर चलाते , मासूम बच्चे ने क्या बिगाड़ा था?''
साहिल की उम्र महज़ चौदह साल थी. छह महीने पहले पिता के शरीर का एक हिस्सा लकवाग्रस्त होने के बाद उन्होंने पास की ही किराने की एक दुकान पर काम करना शुरू किया था. बीते 29 नवंबर की रात काम ख़त्म कर वह घर के लिए तो निकले पर घर पहुँच नहीं पाए.
उनके पिता सिराजुद्दीन अंसारी बताते हैं, ''29 की रात क़रीब नौ बजे मेरा छोटा बेटा साजिम और उसके साथ दो और लड़के दौड़ते हुए घर आए और कहने लगे पापा साहिल को गोली मार दी. मैंने सोचा बच्चे मज़ाक़ कर रहे होंगे लेकिन वह रो रोकर कहने लगे...नहीं मार दिया उसे…मुझे तो शरीर में थोड़ी दिक्कत है तो मैं धीरे-धीरे चलता हूं इसलिए साहिल की मां तुरंत रवाना हुई. घर से बस थोड़ी ही दूरी पर कम्युनिटी हॉल के पास उन्हें साहिल ज़मीन पर गिरा हुआ मिला. वह मर चुका था. ''
परिवार बताता है कि साहिल उस रात घर की ओर लौट रहे थे कि तभी उनकी नज़र बारात में पैसे लुटा रहे मदन गोपाल तिवारी पर पड़ी. वह वहीं उनके सामने सड़क से पैसे चुनने लगे.
परिवार का आरोप है कि मदन गोपाल तिवारी को ये बात नागवार गुज़री, उन्होंने पहले साहिल को पीटा और फिर उन पर गोली चला दी.
'बेटे को देखकर बेहोश हो गई'
घटना से जुड़े एक वीडियो में साहिल सड़क पर गिरे हुए और उनका सिर खून से सना हुआ नज़र आता है.
उनकी मां कहती हैं, ''मैं तो उसे देखकर ही बेहोश हो गई. एक पड़ोसी ने मुझे वहां उठाया. मेरा बेटा वहीं गिरा हुआ था. लोगों की भीड़ थी लेकिन किसी ने भी उसे अस्पताल ले जाने की ज़हमत नहीं की. हम उसे बगल में हेडगेवार अस्पताल ले गए लेकिन वह पहले ही मर चुका था.''
मूलत: झारखंड के गोड्डा ज़िले का रहने वाला साहिल का परिवार वर्तमान में शाहदरा के एक चार बाई चार से भी छोटे कमरे में रहता है.
पिता सिराजदुद्दीन अंसारी दिहाड़ी मज़दूर हैं, लेकिन छह महीने पहले हुई शारीरिक समस्या के बाद वह थोड़ा बहुत ही काम कर पाते हैं. इसलिए घर की बड़ी ज़िम्मेदारी साहिल ने ही अपने छोटे कंधों पर उठाई थी.
अपने बेटे के बारे में बताते हुए निशा अंसारी कहती हैं, ''मेरा बेटा एक चींटी नहीं मार सकता. आप यहां आस-पास पड़ोसियों से पूछिए - किसी से न लड़ना, न झगड़ना, गाली तक नहीं देने आती थी उसे. हमेशा चुप रहता था, लोग समझते थे गूंगा है. उसका ध्यान केवल इसमें रहता था कि कैसे दो पैसा कमाऊं तो पापा की दवा आ जाए, घर का खर्चा ठीक से निकल जाए.''
वह मामले में अभियुक्त सीआईएसएफ़ के हेड कॉन्स्टेबल मदन गोपाल तिवारी को फांसी या फिर उम्रक़ैद दिए जाने की मांग करती हैं.
पुलिस का क्या कहना है?
मदन गोपाल तिवारी फ़िलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. शाहदरा के डेप्युटी कमिश्नर प्रशांत गौतम का कहना है, ''घटना के बाद अभियुक्त मौके से फ़रार हो गया था. मामले की जांच के लिए सीमापुरी के एसीपी और मानसरोवर थाना के एसएचओ की निगरानी में टीम गठित की गई. स्थानीय स्तर पर पूछताछ और विवाह स्थल पर लगे सीसीटीवी फुटेज की मदद से अगले ही दिन यानी 30 नवंबर को उत्तर प्रदेश के इटावा से अभियुक्त को गिरफ़्तार कर लिया गया.''
डीसीपी के मुताबिक़ अभियुक्त ने पूछताछ के दौरान गोली चलाने की बात स्वीकार कर ली है.
पुलिस के मुताबिक उन्होंने माना, ''कि बारात के दौरान जब उनके उड़ाए नोटों को वहां मौजूद बच्चे उठाने लगे तो उन्हें गुस्सा आ गया और उन्होंने एक बच्चे पर गोली चला दी.''
गोली चलाने के लिए अभियुक्त ने जिस पिस्तौल का इस्तेमाल किया...वह लाइसेंसी .32 बोर पिस्तौल थी.
लगाए जा रहे हैं झूठे आरोप
हालांकि इटावा में रहने वाले अभियुक्त के भाई सोनू का कहना है कि उनके भाई पर ग़लत आरोप लगाए जा रहे हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा, ''मेरे भाई ने गोली जान-बूझ कर नहीं चलाई, सभी लोग ग़लत दिखा रहे हैं. बारात में भीड़ थी और उनकी पिस्टल लोडेड थी. बस गलती से चल गई और बच्चे को लग गई. कई लोग कह रहे हैं कि वो नशे में थे लेकिन आप उनका पूरा रिकॉर्ड निकाल कर देख लो, उन्होंने तो कभी शराब को हाथ भी नहीं लगाया. हम वक़ील करेंगे और क़ानूनी लड़ाई लड़ेंगे.''
मदन गोपाल तिवारी का परिवार इटावा में रहता है. परिवार में उनके अलावा उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं. उनकी पोस्टिंग फ़िलहाल कानपुर में थी. ऐसे में हमने इस मामले में सीआईएसएफ का भी पक्ष जानना चाहा लेकिन सीआईएसएफ़ के जनसंपर्क विभाग का कहना है कि ऐसे मामलों में वो कोई टिप्पणी नहीं कर सकते.
सीआईएसएफ़ ने कोई कार्रवाई की?
विभाग ने कहा, "अवकाश में रहते हुए अगर कोई जवान ऐसी किसी घटना में संलिप्त होता है तो हमारी तरफ़ से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया जाता."
हालांकि सीआईएसएफ़ का रूल बुक कहता है कि अगर कोई जवान किसी आपराधिक मामले में 48 घंटे से ज़्यादा समय तक हिरासत में रहता है तो उसे सस्पेंड कर दिया जाता है.
फिलहाल मामला कोर्ट और पुलिस जांच के दायरे में है. पीड़ित परिवार का कहना है कि वे सिर्फ़ इतना चाहते हैं कि दोषी को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए.
साहिल की मां कहती हैं, ''हम ग़रीब लोग हैं, हमें किसी भी तरह इंसाफ़ चाहिए. कोई चींटी या जानवर को तो मारा नहीं है, हमें अपने बच्चे के लिए न्याय चाहिए बस.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.